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जस्टिस गांगुली ने मेरी बांह को चूमा था: लॉ इंटर्न

AK_Ganguly

 

रिटायर जस्टिस और वर्तमान में पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन ए. के. गांगुली पर यौन शोषण का आरोप लगाने वालीं लॉ इटर्न ने सुप्रीम कोर्ट की कमिटी को बताया है कि होटेल के कमरे में जस्टिस गांगुली ने उसे बांहों में लिया, बांह को चूमा और बेडरूम शेयर करने की पेशकश की। अडिशनल सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह के हवाले से अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने लॉ इंटर्न द्वारा सुप्रीम कोर्ट की कमिटी के सामने दिए गए हलफनामे को छापा है। पीड़ित इंटर्न को अपनी बेटी जैसी बताने वाले गांगुली के खिलाफ हलफनामे में युवती ने बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं।पढ़िए, इस हलफनामे में युवती ने क्या-क्या कहा है…

 

जज ने मुझे होटल में रुकने को कहाः जब मैं होटेल के कमरे में पहुंची तो वहां जज के अलावा दो और लोग मौजूद थे। जज ने मुझे बताया कि वे ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) से जुड़े हुए हैं। इसमें एक महिला स्टनॉग्रफ़र थीं। जज ने मुझे बताया कि AIFF की रिपोर्ट सुबह तक जमा की जानी है। उन्होंने मुझे इसके लिए होटेल में ही रुकने और रातभर काम करने की बात कही। मैंने इनकार करते हुए कहा कि मैं काम जल्दी से निपटा लूंगी और फिर अपने पीजी के लिए लौट जाऊंगी। उन्होंने मेरी बात काट दी और वहां मौजूद AIFF के शख्स से पता करने को कहा कि क्या उसी होटेल में मेरे लिए कमरा बुक हो सकता है। AIFF के शख्स ने कहा कि यह संभव नहीं है, लेकिन जज के दबाव पर वह अपने सीनियर से बात करने को राजी हो गया। इसके बाद वे दोनों कमरे से चले गए।

वह बेडरूम शेयर करना चाहते थेः मैंने जज से कहा कि इंटरनेट काम नहीं कर रहा है और इसलिए मैं वेब से रिसर्च नहीं कर पाऊंगी। इसके बाद जज मेरी क्रिसमस की शाम यूं ही बर्बाद होने के लिए माफी मांगने लगे और क्रिसमस के रिवाज के बहाने वाइन ऑफर की। उन्होंने मुझसे कहा कि तुम दिनभर थक गई होगी, इसलिए मेरे बेडरूम में जाकर आराम कर सकती हो। मैं बेहद असहज महसूस कर रही थी। मैंने उनसे कहा कि मैं अपना काम जल्द खत्म करके वापस अपने पीजी में लौटना चाहती हूं।
मुझे गिलास थमा दियाः वह रेड वाइन की बोतल लेकर आए और मुझे गिलास थमा दिया। मैंने हिचकिचाहट के साथ वह ले लिया। मैंने रिसर्च असिस्टेंड के तौर पर काम करते हुए कोलकाता में पिछले छह महीने में उनका ऐसा व्यवहार कभी नहीं देखा था। इस दौरान मैं बेहद असहज महसूस कर रही थी और जल्दी से जल्दी वहां से निकलता चाहती थी। जज मुझे बात करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मैं टाइपिंग पर ध्यान लगाने की कोशिश करने लगी। मैंने उनसे पीजी में लौटने के लिए ट्रांसपोर्ट के इंतजाम करने को कहा।

जज के व्यवहार से मैं हैरान थीः मेरे इतना कहने पर भी जज उसी होटेल में कमरा बुक करने के लिए फोन कॉल कर रहे थे। इस दौरान मैं उनसे लगातार होटेल में न रुकने और पीजी में लौटने की बात कह रही थी। वह मेरे लिए जो इंतजाम कर रहे थे, उनको देखकर मैं भौंचक्की थी, क्योंकि मुझे बुलाने से पहले यह सब नहीं बताया गया था। अब मैं तनाव में आ गई थी। मेरी बात को नजरंदाज करते हुए जज ने कहा कि होटेल में कोई दूसरा कमरा नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने मुझसे रिपोर्ट को जल्द खत्म करने के लिए उसी कमरे में रुकने को कहा। मैं उनकी बात से हैरान थी। मैंने उन्हें साफतौर पर बताया कि यह सही नहीं है।

मुझे शराब पिलाने को आतुर थे जजः मेरे बार-बार विरोध के बाद जज ने कहा कि वह ट्रांसपोर्ट का इंतजाम कर देंगे। इस दौरान जज ने न सिर्फ कुछ गिलास वाइन पी, बल्कि रम की बोतल निकालकर उसमें से भी कुछ ड्रिंक्स लीं। मैंने मुश्किल से कुछ घूंट ही लिए थे और जज मुझे बार-बार गिलास खत्म कर उसे भरने को आतुर थे। इस दौरान जज मुझसे कमरे में रुकने को कहते रहे।

जज ने मेरी कमर में हाथ रखाः रात करीब 10 बजे डिनर मंगाया गया। मैंने राउंड टेबल, जहां मैं काम कर रही थी से लॉन्ग सोफा में जाकर बैठ गई। जैसे ही मैं वहां बैठी जज मेरे बगल में आकर बैठ गए। हम दोनों खाना खाने लगे। डिनर के दौरान जज ने मेरी कमर में हाथ रख दिया और मदद के लिए शुक्रिया कहने लगे। मैं वहां से खिसक गई और यह जताने की कोशिश की कि यह मुझे अच्छा नहीं लगा है।

जज ने मेरी बांह चूमीः जज ने मेरी कमर से हाथ नहीं हटाया और फिर वह मुझे अपनी बांहों में लेने के लिए बढ़े। मैं अनसेफ महसूस कर रही थी। मैं उनसे बचने के लिए बाईं ओर के सिंगल सोफा पर बैठ गई। खाना खत्म करने के बाद में राउंड टेबल पर बैठकर काम करने लगी। मैं इस दौरान पीजी लौटने के लिए कार का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। अब मैं बुरी तरह डरी हुई थी। जज फिर मेरे करीब आए और मेरे सिर पर हाथ रख दिया। उन्होंने कहा, ‘तुम बहुत खूबसूरत हो।’ मैं तुरंत अपने सीट से उठ गई और इससे पहले कि मैं जवाब दे पाती, जज ने मेरी बांह पकड़ ली और कहा, ‘तुम्हें पता है मैं तुम्हारी तरफ आकर्षित हूं। क्या तुम नहीं हो? तुम सोच रही होगी कि यह बूढ़ा नशे में ऐसी बातें कर रहा है, लेकिन मैं तुम्हें पसंद करता हूं। आई लव यू। मैंने वहां से हटने की कोशिश की तो उसने मेरी बांह को चूमा और फिर मुझे प्यार करने की बात दोहराई।’

मैंने कमरा छोड़ दियाः मैंने उन्हें यह कहते हुए धक्का दिया कि मुझे तुरंत जाना है। मैं अपना बैग और लैपटॉप उठाकर लिफ्ट की तरफ बढ़ गई। जज मेरे पीछे-पीछे आने लगे। वह कह रह थे प्लीज मत जाओ, क्या मैने तुम्हें तकलीफ पहुंचाई है। प्लीज, मुझे छोड़कर मत जाओ। मुझे अभी तुम्हारी मदद की जरूरत है ताकि AIFF रिपोर्ट को जल्दी से जल्दी पूरा किया जा सके, लेकिन मैंने जज के किसी बात का जवाब नहीं दिया। जज मेरे पीछे रिसेप्शन तक आए, वहां पर कोई कार मौजूद नहीं थी, ऐसे में जज ने किसी को फोन करके कार मंगवाई। जब हम रिसेप्शन में अकेले खड़े थे, उस वक्त भी वह लगातार यही कहे जा रहे थे कि अभी मत जाओ, काम पूरा होना है।

SMS से मांगी माफीः मैं करीब 10.30 बजे होटल से निकली और अपने पीजी पहुंची। पीजी में पहुंचने के बाद जज ने फोन करके पूछा कि क्या मैं पहुंच गई हूं। मैंने हां में जवाब दिया और फोन काट दिया। अगली सुबह जज ने मुझे एसएमएस भेजकर माफी मांगी। मैंने जज को एसएमएस भेजकर बताया कि मैं उनके साथ काम नहीं कर सकती। एसएमएस 25 दिसंबर को सुबह 9 बजे भेजा। इसके बाद जज ने मुझे कई फोन किए, लेकिन मैंने किसी का भी जवाब नहीं दिया।

Posted by on Dec 16 2013. Filed under आधी आबादी, खबर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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