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क्या यौन अपराधों को बढ़ावा देता है युवाओं का प्यार?

पिछले कई दिनों से महिलाओं की सुरक्षा के लिए तैयार किया गया एंटी रेप बिल चर्चा का विषय बना हुआ है। बिल का पक्ष लेने वाले तो कम ही लोग दिखे लेकिन इस बिल के अनुसार महिलाओं को घूरने और उनके पीछा करने जैसे क्रियाकलापों को अपराध की श्रेणी में डाल दिया गया। हालांकि कुछ सांसदों ने इसका विरोध किया. गौरतलब है कि शरद यादव ने यह बयान दिया कि अगर लड़के लड़कियों का पीछा नहीं करेंगे तो प्यार कैसे होगा, उनमें प्रेम के बीज कैसे पनपेंगे। भले ही एंटी रेप बिल के इन प्रावधानों पर चुटकी लेते हुए शरद यादव ने यह बयान दिया हो लेकिन उनके वक्तव्यों पर एक नई बहस चल पड़ी है। कहा जा रहा है कि अगर महिला को घूरना, उसका पीछा करना अपराध है तो प्रेम संबंध का हवाला देकर शरद यादव ने इस अपराध को एक तरह से जायज ठहराने की कोशिश की है। अब जबकि यह बयान एक विवादास्पद मसला बनकर सामने आया है तो यह चर्चा तेज हो गई है कि अगर प्रेम ही सब परेशानियों की जड़ है तो क्यों ना इसी पर प्रतिबंध लगा दिया जाए?

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वे लोग जो प्रेम को युवाओं के लिए सबसे अधिक घातक करार देकर इसका विरोध करते हैं उनका कहना है कि प्रेम संबंध स्थापित करने का सबसे बड़ा दुष्परिणाम है अपने कॅरियर के साथ खिलवाड़। प्रेम भावनाओं से वशीभूत होकर युवा अपने भविष्य के लिए सही निर्णय नहीं ले पाते। वह अपने कॅरियर से मुंह मोड़ लेते हैं और आगे जाकर यही उनके पतन का कारण बनता है। प्रेम का दूसरा दुष्परिणाम यह है कि आप जिससे प्रेम करते हैं उस पर बहुत ज्यादा विश्वास करने लगते हैं। जाहिर है जहां विश्वास होता है वहीं विश्वासघात भी होता है और धोखा खाने के बाद आप खुद को संभाल नहीं पाते। आगे बढ़ने की उम्र में आप अपनी जिंदगी तबाह कर लेते हैं। जब किसी के साथ भावनात्मक तौर पर ज्यादा जुड़ाव महसूस कर लिया जाता है तो आपकी सोचने-समझने की शक्ति समाप्त हो जाती है, आप वास्तविकता से बहुत दूर चले जाते हैं। इतना ही नहीं लड़का और लड़की के संदर्भ में हालात समान रूप से नकारात्मक होते हैं क्योंकि आप यह नहीं कह सकते कि कौन आपको धोखा दे देगा। धोखा मिलेगा यह तो निश्चित है लेकिन कौन किस तरह आपके साथ छल करेगा यह नहीं कहा जा सकता। इसीलिए अगर अपराध रोकने हैं तो प्रेम पर प्रतिबंध होना ही चाहिए।

 

प्रेम का पक्ष लेने वाले लोगों का कहना है कि यह व्यक्तिगत आजादी का प्रश्न है और किसी भी रूप में निजी स्वतंत्रता पर प्रतिबंध मानवीय संप्रभुता पर आघात होता है। प्रेम का सबसे पहला और महत्वपूर्ण फायदा है कि यह निजी आकांक्षाओं को उड़ान देता है और साथ ही पसंदगी के स्वाभाविक सिद्धांत को भी परिपुष्ट करता है। दूसरी ओर निर्णय लेने की क्षमता और प्रेम की राह में आने वाले विभिन्न उतार चढ़ाव से गुजरने के बाद विवेक सम्मत निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है। परिणामों की चिंता करके प्रेम पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध एक ऐसा कदम होगा जैसे किसी को जीवन के अनुभवों से विमुख कर दिया जाए। व्यक्ति को सही और गलत की पहचान अनुभव लेने के बाद ही होती है। प्रेम संबंधों और प्रेम भावनाओं का अनुभव लेने के बाद ही उसे समझ में आता है कि उसके लिए क्या सही है, क्या नहीं और जाहिर है यह अनुभव भी व्यक्ति दर व्यक्ति विभिन्न प्रकार के होते हैं इसीलिए सार्वभौमिक तौर पर किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता और ना ही नतीजों को समान रूप से सभी पर लागू किया जा सकता है।

 

युवा लड़के-लड़कियों के प्रेम से जुड़े दोनों पक्षों, उसके प्रभावों के बारे में चर्चा करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने आते हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना हमारे लिए नितांत आवश्यक है, जैसे:

 

1. क्या महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों का एक कारण प्रेम भी है?

2. क्या प्रेम के कारण युवाओं की विवेकशक्ति और निर्णय क्षमता नकारात्मक रूप से प्रभावित होती है?

3. प्रेम का संबंध भावनाओं से है। इसके व्यवहारिक पक्ष को प्रमुखता देना कितना सही है?

4. क्या व्यक्तिगत आजादी के नाम पर प्रेम में पड़े युवा स्वयं ही विनाश को आमंत्रण दे रहे होते हैं?

 

धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार

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Posted by on Apr 4 2013. Filed under मेरी बात. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

1 Comment for “क्या यौन अपराधों को बढ़ावा देता है युवाओं का प्यार?”

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