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बटला हाउस एनकाउंटरः कब-कब क्या हुआ?

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बटला हाउस एनकाउंटरः कब-कब क्या हुआ

13 सितंबर 2008: दिल्ली में पाँच सिलसिलेवार बम धमाके हुए जिनमें कम से कम 30 लोग मारे गए और सौ से अधिक घायल हुए.

19 सितंबर 2008: दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम और जामिया नगर के बटला हाउस के एल-18 मकान में छिपे इंडियन मुजाहिदीन के कथित चरमपंथियों में मुठभेड़ हुई. पुलिस ने दावा किया कि मुठभेड़ में दो कथित चरमपंथी मारे गए, दो गिरफ़्तार किए गए और एक फ़रार हो गया. इन्हें दिल्ली धमाकों के लिए ज़िम्मेदार बताया गया.

19 सितंबर 2008: मुठभेड़ में घायल इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा को नजदीकी होली फैमिली अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ आठ घंटे इलाज के बाद उनकी मौत हो गई. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक़ उन्हें पेट, जाँघ और दाहिने हाथ में गोली लगी थी. उनकी मौत अधिक ख़ून बहने के कारण हुई.पुलिस ने मोहन चंद्र शर्मा की मौत के लिए शहज़ाद अहमद को ज़िम्मेदार ठहराया.

21 सितंबर 2008: पुलिस ने कहा कि उसने इंडियन मुजाहिदीन के तीन कथित चरमपंथियों और बटला हाउस के एल-18 मकान की देखभाल करने वाले व्यक्ति को गिरफ़्तार किया. दिल्ली में हुए विस्फोटों के आरोप में पुलिस ने कुल 14 लोग गिरफ़्तार किए. ये गिरफ़्तारियाँ दिल्ली और उत्तर प्रदेश से की गईं.

मानवाधिकार संगठनों ने बटला हाउस एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मामले की न्यायिक जाँच की माँग की.

21 मई 2009: दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से पुलिस के दावों की जाँच कर दो महीने में रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा.

22 जुलाई 2009: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश की. रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस को क्लीन चिट दी गई.

26 अगस्त 2009: दिल्ली हाईकोर्ट ने एनएचआरसी की रिपोर्ट स्वीकार करते हुए न्यायिक जाँच से इनकार किया.

30 अक्टूबर 2009: हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी न्यायिक जाँच से इंकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “मामले की जाँच से पुलिस का मनोबल प्रभावित होगा”.

19 सितंबर 2010: बटला हाउस एनकाउंटर के दो साल पूरे होने पर दिल्ली की जामा मस्जिद के पास मोटर साइकिल सवारों ने विदेशी पर्यटकों पर गोलीबारी की. इसमें दो ताइवानी नागरिक घायल हुए.

6 फ़रवरी 2010: पुलिस इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा की मौत के सिलसिले में पुलिस ने शहज़ाद अहमद को गिरफ़्तार किया.

20 जुलाई 2013: अदालत ने शहज़ाद अहमद के मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद फ़ैसला सुरक्षित किया.

25 जुलाई 2013: अदालत ने शहज़ाद अहमद को दोषी क़रार दिया.

बीबीसी हिन्दी

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Posted by on Jul 25 2013. Filed under इतिहास, सच. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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