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विकास को लेकर लचीलापन और व्यावहारिकता दिखाई है

BJP manifesto 2014

BJP manifesto 2014

 

यदि अब तक जारी विभिन्न दलों के घोषणा-पत्रों को देखें तो मुझे भाजपा का घोषणा-पत्र सबसे अधिक लोकलुभावन नजर आता है। भारत की जनता इस समय जिन समस्याओं से ग्रस्त हैं और जिनसे मुक्ति के लिए समाधान चाहती है, उन सब का जिक्र इस 54 पृष्ठ के घोषणा-पत्र में है।

जिन मुद्दों को लेकर भाजपा पर अनवरत आक्रमण होता है और जिनके कारण उसे संकीर्ण राष्ट्रवादी पार्टी कहा जाता है उन मुद्दों पर भाजपा ने काफी लचीलापन दिखाया है। इन मुद्दों पर उसने यही कहा है कि संविधान के दायरे में रहकर जो भी किया जा सकता हो, वह किया जाएगा। इसी तरह जमू-कश्मीर को अलग दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और समान नागरिक संहिता के बारे में भी उसने संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श की बात कही है। तात्पर्य यह है कि भाजपा ने इस घोषणा-पत्र के जरिये अपने विरोधियों की नोंक को भोथरा कर दिया है।

जहां तक रचनात्मक पहलुओं का प्रश्न है उसने रोजगार, कालाधन, कर प्रणाली, उच्च शिक्षा, विदेशी पूंजी निवेश आदि के बारे में ऐसी बातें कही हैं जो लचीली होने के साथ व्यावहारिक भी है। उसने देश के पुनर्निर्माण में आधुनिक तकनीक के भरपूर उपयोग का आश्वासन दिया है। जमाखोरों और कालाबाजारियों को दंडित करने के लिए विशेष न्यायालय की व्यवस्था आकर्षक है। सबसे बड़ी बात यह है कि नई सरकार एक प्रकार से साझा सरकार होगी, जिसमें प्रधानमंत्री के अलावा मुख्यमंत्रियों को भी समान महत्व मिलेगा। यह प्रावधान इस आशंका व आरोप का निराकरण करता है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी तानाशाह बन जाएंगे।

मदरसों का आधुनिकीकरण और अल्पसंख्यकों को रोजगार में भेदभाव न होने देने का वादा प्रशंसनीय है। विदेश नीति के मोर्चे पर देश को दुनिया के नक्शे पर एक दृढ़ राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की मंशा दिखाई गई है। प्रभावी लोकपाल स्थापित करना और घिसे-पिटे औपनिवेशिक कानूनों की सफाई करना भी स्वागतयोग्य घोषणा है। अनुसूचित वर्ग और ग्रामीण तबके के लिए वित्तीय सहायता के प्रावधान भी आकर्षित करते हैं। हालांकि गरीबी और भ्रष्ट्राचार दूर करने के बारे में इस घोषणा-पत्र में कुछ ठोस उपायों की चर्चा होनी जरूरी थी।
आश्चर्य की बात है कि शिक्षा में अंग्रेजी के वर्चस्व व एकाधिकार को  चुनौती देेने की हिम्मत भाजपा जैसी राष्ट्रवादी पार्टी भी नहीं जुटा पाई। यदि शिक्षा में मुकम्मल सुधार नहीं हुए तो सारे प्रयास धरे रह जाएंगे। लगता है किर घोषणा-पत्र में भारत की दशा सुधारने के कई लोकलुभावन वादे हैं, जो सभी पार्टियां करती हैं, लेकिन उसका मूलमंत्र अभी भी उनके पास नहीं है। भाजपा इसका अपवाद नहीं है। जब तक स्वभाषाओं के जरिये देश के करोड़ों बच्चों को चरित्रवान नहीं बनाया जाएगा तब तक बड़े से बड़ा प्रधानमंत्री और मजबूत से मजबूत सरकार भ्रष्टाचार, अत्याचार और दुष्कर्म को दूर नहीं कर सकती। इस घोषणा-पत्र में किए वादों में से यदि नरेंद्र मोदी अगले पांच वर्षों आधे भी कर दिखाएं तो अगले चुनाव में उनकी सरकार का सत्ता में लौटना निश्चित है।
डॉ. वेदप्रताप वैदिक : लेखक भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष हैं।

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भारत -एक हिन्दू राष्ट्र

अंकिता सिंह

Web Title : BJP manifesto 2014

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Posted by on Apr 8 2014. Filed under खबर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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