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लड़कियों का खतना: मानव क्रूरता की एक घृणित मिसाल

Circumcision of girls: a disgusting example of human cruelty

Circumcision of girls: a disgusting example of human cruelty

 

लंदन: ये बेहद ढंके-छिपे तौर पर होता है. इसे पूरी तरह से दुनिया से दूर रखा जाता है. इसके बारे में कोई बात-कोई बहस नहीं होती. इस प्रक्रिया को देखना वर्जित है. इसके बारे में बस वो ही जानता है जो इस प्रक्रिया को करता है, या फिर वो लड़की जो इस प्रक्रिया की पूरी यातना से गुजरती है. इसकी जानकारी केवल लड़की की मां को और उस व्यक्ति को होती है, जो उस लड़की से शादी करता है. हम बात कर रहे हैं लड़कियों का खतना करने की उस तकलीफदेह प्रक्रिया की जिसकी शुरुआत एक परंपरा की शक्ल में अफ्रीका से हुई और अब इसके निशान ब्रिटेन और फ्रांस जैसे यूरोपियन देशों में भी दिखाई देने लगे हैं.

 

अफ्रीकी महिलाओं में एक कहावत मशहूर है कि लड़की को जिंदगी में तीन मौकों पर भीषण तकलीफ से गुजरना पड़ता है. पहला, जब वो लड़की छोटी होती है और उसका खतना किया जाता है, दूसरा, शादी के बाद सुहागरात और तीसरा मौका जब वो संतान को जन्म देती है. यहां ध्यान रखें कि हम उन महिलाओं की बात कर रहे हैं, खतना के बाद जिनकी योनि का प्रवेशद्वार सिलकर बंद कर दिया जाता है. बस एक छोटा सा रास्ता खुला रखा जाता है, जिससे मूत्रत्याग और मासिक धर्म का स्त्राव रिस कर बाहर आ सके.

 

लड़कियों का खतना करने के पीछे एक संकीर्ण पुरुषवादी मानसिकता जिम्मेदार है कि वो लड़की युवा होने पर अपने प्रेमी के साथ यौन संबंध न बना सके. पहला बच्चा होने के बाद पति अपनी पत्नी को अपनी योनि फिर से सिलवाकर बंद करने के लिए बाध्य करता है, ताकि उसकी पत्नी किसी अन्य पुरुष के साथ संसर्ग न कर सके.

 

अफ्रीका में युवा लड़कियों की शादी तभी होती है, अगर उन्होंने बचपन में खतना करवाया होता है. और अफ्रीका में छोटी लड़कियों का खतना एक निजी नहीं, सार्वजनिक समारोह जैसा होता है, जिसमें दर्द से छटपटाती और चीखती लड़की को भीड़ चारों ओर से घेरे रहती है और खतना करने वाली महिला या मर्द किसी टूटे शीशे के टुकड़े, चाकू या फिर रेजर के इस्तेमाल हो चुके ब्लेड से लड़की की योनिद्वार को कवर करने वाले अंगों क्लिटोरिस को काटकर अलग कर देता है और इसके बाद खून के रिसाव के बीच योनिद्वार के दोनों हिस्सों को आपस में सिल देता है.

 

लड़कियों का खतना करना मानव क्रूरता की एक घृणित मिसाल है. खतना के बाद लड़की का जीवन मुश्किलों से भर जाता है. मूत्र की तरह मासिल धर्म का स्त्राव भी खुलकर बाहर नहीं आ पाता, जिससे संक्रमण का खतरा हमेशा बना रहता है. इसके बाद बड़ी होने पर जब लड़की की शादी होती है तो मिलन की पहली रात लड़की के लिए कयामत की रात बन जाती है. पहले बच्चे के जन्म के वक्त तो मां-बच्चे की जान हमेशा दांव पर रहती है, क्योंकि योनिद्वार की सिलाई काटे बगैर बच्चे का जन्म असंभव हो जाता है.

 

मशहूर नॉवलिस्ट रुथ रैंडल ने डेली मेल में लिखा है कि ब्रिटेन में महिलाओं का खतना पहले नहीं होता था, लेकिन प्यूरिटी के नाम पर अब ये होने लगा है. जब मैं हाउस आफ लॉर्ड्स में आई तो मैंने 1985 में बनाए गए उस कानून के बारे में सुना जिसमें लड़कियों का खतना करना जुर्म करार दिया गया है. हम इस कानून को और आगे ले गए, हमने एक नया कानून पास करवाया, जिसमें ब्रिटेन से बाहर ले जाकर लड़कियों या महिलाओं का खतना करवाना भी जुर्म करार दिया गया है.

 

1970 में जब अफ्रीका से गर्भवती महिलाएं ब्रिटेन में प्रवासी बनकर आने लगीं, तब उनका परीक्षण करने वाले डॉक्टर्स और नर्सों का विचार था कि ये महिलाएं किसी किस्म की योनि विकृति से पीड़ित थीं. लेकिन जब भारी तादाद में अफ्रीकी महिलाओं में ऐसा ही पाया गया, तब कहीं जाकर हमें खतना की परंपरा के बारे में पता चला.

 

ब्रिटेन में रहने वाली लड़कियों की मांओं पर उनके परिवार से दबाव आता है कि वो अपनी लड़कियों को ब्रिटेन से बाहर ले जाकर उनका खतना करवाएं. कई मामलों में ब्रिटिश लड़कियों के मंगेतर उनपर दबाव बनाते हैं कि वो शादी से पहले अपना खतना करवा लें.

 

इस बारे में आंकड़े चौंकानेवाली कहानी कहते हैं, कुछ का कहना है कि कि ब्रिटेन में रहने वाली 66,000 महिलाओं का खतना हो चुका है, जबकि कुछ अन्य का कहना है कि ब्रिटेन में 66,000 महिलाओँ पर खतने का खतरा मंडरा रहा है. एक अन्य आंकड़े के मुताबिक अन्य 6000 लड़कियां खतना करवाए जाने के रिस्क पर हैं.

 

इसबीच ब्रिटेन के अस्पतालों में मिडवाइफ्स ऐसी महिलाओं का सुरक्षित प्रसव करवा रहीं हैं. इन महिलाओं की अनुमति से प्रसव से पहले या प्रसव के दौरान उनके योनिद्वार की सिलाई काट दी जाती है.

 

नॉवलिस्ट रुथ रैंडल ने लिखा है कि उन्होंने लंदन, बरमिंघम और ब्रैडफोर्ड में रहने वाली उन कई महिलाओं से बात की है, जिनका बचपन में ही खतना करवाया जा चुका है. इन महिलाओं का कहना है कि इस क्रूर परंपरा के निशान जिंदगीभर न केवल उनके शरीर पर रहते हैं बल्कि इसका दर्द उनके मस्तिष्क और उनके स्मृति में भी हमेशा ताजा रहता है.

Source : Abp News

 

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अंकिता सिंह

Web Title : Circumcision of girls: a disgusting example of human cruelty

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Posted by on Jan 20 2014. Filed under 18 +, आधी आबादी. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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