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कांग्रेस घास

यह दुनिया की सबसे अधिक विनाशकारी और अवांछित खर-पतवार है, जो 1950 के आसपास अमेरिका से मँगाये गये पीएल-480 गेंहूँ के साथ भारत में आयी थी। इसका वैज्ञानिक नाम पार्थेनियम हिस्टीरोफोरस है। इसे कांग्रेस घास कई कारणों से कहा जाता है-


1. इसका ‘आयात’ कांग्रेस की केन्द्र सरकार के समय किया गया था।
2. यह ठीक उसी प्रकार तेजी से फैलती है, जिस प्रकार कांग्रेस के शासन में भ्रष्टाचार फैलता है।
3. यह समूह में फैलती है और एक पौधे से लगभग 25-30 हजार नये पौधे उत्पन्न हो जाते हैं। समूह को अंग्रेजी में कांग्रेस कहा जाता है।
वैसे इसे ‘गाजर घास’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसका पौधा देखने में गाजर के पौधे जैसा लगता है, परन्तु इसका ‘कांग्रेस घास’ नाम अधिक लोकप्रिय है।
इस पौधे के फूलों से ऐसे कण वातावरण में फैल जाते हैं, जो मनुष्य और पशुओं के सम्पर्क में आकर उनमें चर्म और श्वाँस सम्बंधी तमाम गम्भीर बीमारियाँ पैदा करते हैं, जैसे- एलर्जी, खाज, एक्जीमा, साइनस, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा (दमा) आदि। पर्यावरण में वायु को प्रदूषित करने में इसका सबसे अधिक हाथ होता है, जिसके कारण हम चैन की साँस भी नहीं ले सकते। इसको नष्ट करने के तमाम प्रयास अब तक असफल रहे हैं। यह मानसून के दिनों में सबसे अधिक फैलती है। इसके द्वारा उत्पन्न होने वाली बीमारियों के इलाज पर अब तक लाखों करोड़ रुपयों की राशि व्यय की जा चुकी है, परन्तु इससे छुटकारे के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
कांग्रेस घास से शारीरिक ही नहीं तमाम मानसिक और सामाजिक बीमारियाँ भी फैलती हैं। इसमें चर्म और श्वाँस रोगों के साथ ही साम्प्रदायिकता, देशद्रोहिता, चापलूसी, भ्रष्टाचार और आतंकवाद के कीटाणु भी पलते और फैलते हैं। कई बार यह देखा जा चुका है कि जब भी यह सर्वनाशी कांग्रेस (घास) प्रबल होती है, तभी ये समस्याएँ अपने प्रबलतम रूप में सामने आती हैं।
मूर्खात्मा गाँधी ने कहा था कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कांग्रेस को खत्म कर दिया जाना चाहिए। गाँधी का नाम जपने वालों और स्वयं को गाँधीवादी कहने वालों ने गाँधी की इस बात को कोई महत्व नहीं दिया। इसी का परिणाम है कि यह महाविनाशकारी घास आज भी पूरे देश को पीडि़त कर रही है।
कांग्रेस (घास) से छुटकारा पाने के लिए यह आवश्यक है कि सारा देश एक साथ इसके खिलाफ उठ खड़ा हो और इसे नष्ट करने के लिए कमर कस ले। 2014 के आगामी लोकसभा चुनावों में देश के सामने एक अच्छा अवसर आने वाला है, जब इस समस्या से जड़-मूल से छुटकारा पाया जा सकता है। इससे मूर्खात्मा गाँधी की अन्तिम इच्छा भी पूरी हो जाएगी।

अनेक रोगों को बढ़ावा दे रही कांग्रेस घास (ओर कांग्रेस भी) 

 

लेखक : विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’

Short URL: http://jayhind.co.in/?p=1350

Posted by on Aug 8 2012. Filed under मेरी बात, सच. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

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