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वाह सीमा! नर्क बन चुकी जिंदगी को यूं बना दि‍या खुशनुमा

Dark Age Turns Happy Life

 

लखनऊ. एक वक्त था कि घरेलू हिंसा की शिकार सीमा जीने तक की उम्मीद खो चुकी थी। आज वह केक पर लोगों की जिंदगी के हसीन पल उकेर रही हैं। उनकी कारीगरी खुशनुमा अवसरों का गवाह बनने लगी है। वह खुद सफलता का पर्याय बन चुकी हैं। यह जानना गुदगुदाने जैसा है। इस मुकाम को पाने के पीछे संघर्ष की लंबी दास्‍तां है, जिसकीअंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर चर्चा करना जरूरी है।

 

हम बात कर रहे हैं यूपी के मुजफ्फरनगर में जन्मी सीमा त्यागी की, जो इस वक्‍त गुड़गांव में रहती हैं। वहां अपना होमबेस्ड केक बिजनेस चला रही हैं। वह सफलता की सीढ़ि‍यां लगातार चढ़ रही हैं। उनके पास दिल्ली, गुड़गांव सहि‍त कई शहरों के क्लाइंट हैं जो खास अवसरों पर उनसे डिजाइनर केक बनवाते हैं। उनका इरादा देश के टॉप 5 केक आर्टिस्ट में शामि‍ल होने का है। इसके लि‍ए वे दि‍न-रात मेहनत कर रही हैं।
बुलंद इरादों की इस मल्‍लि‍का के जीवन में भी काली घटाएं आईं। लेकि‍न दृढ़ इच्‍छाशक्‍ति‍ से वह बदलि‍यां दूर हो गईं और सीमा एक सफल व्‍यवसायी बन गई। हुआ यूं था कि‍ सीमा की शादी 1990 में मुंबई के एक व्‍यवसायी से हुई थी। उनके पति कारपेट का बिजनेस करते थे। धीरे-धीरे पति के काम में वह हाथ बंटाने लगी। दोनों की मेहनत रंग लाई। बिजनेस चल नि‍कला। हर कोई सीमा की तारीफ करने लगा। यहीं से शुरू हुई सीमा के जीवन के काले अध्याय की शुरुआत।
पति को बाहरी लोगों के मुंह से सीमा की तारीफ बर्दाश्त नहीं हुई। उसने सीमा के ऊपर बंदिशें लगानी शुरू कर दी। सीमा ने जब विरोध किया तो उसे शारीरिक यातनाएं दी जाने लगीं। इस बीच शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो चुकी सीमा को एक झटका और लगा। वह मां बनने के सुख से वंचित हो गई। इसी बीच मुजफ्फरनगर से सीमा की मां के निधन की खबर आई। 

 

उसके पति ने सीमा को मुंबई से मुजफ्फरनगर आने की इजाजत नहीं दी। मुंबई में रिश्तेदारों को यह बात मालूम पड़ी तो उन्होंने बीच-बचाव कर सीमा को मुजफ्फरनगर भिजवाया। सीमा को वहां पहुंचने में देर हो चुकी थी। वह अपनी मां के अंतिम दर्शन तक नहीं कर सकी।
इसके बाद सीमा मुंबई तो लौटी लेकि‍न इस कैद से आजाद होने के लिए। 1998 में सीमा किसी तरह आजाद होकर दिल्ली पहुंची। वहां उसने गुड़गांव के एक टेलिकॉम कंपनी में बतौर फ्रंट ऑफिस एग्जीक्यूटिव ज्वाइन किया। कंपनी ने उसकी काबिलियत देखकर उसे मार्केटिंग डिपार्टमेंट में भेज दिया। कुछ दिनों बाद सीमा को कंपनी ने दुबई ट्रांसफर कर दिया। वहां सीमा ने 44 वर्ष की आयु में एमबीए किया।

 

इधर सीमा के पिता की तबियत खराब रहने लगी। वह गुड़गांव वापस लौट गई और एक ट्रेवल कंपनी में बतौर जनरल मैनेजर ज्वाइन किया। साथ ही मुजफ्फरनगर से अपने पिता को बुलाकर उनके साथ रहने लगी। नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस पिता के लिए वे दुबई छोड़कर आई, वह चल बसे।

 

दो साल तक ट्रेवल कंपनी में काम करने के बाद सीमा ने निर्णय कि‍या कि उन्हें कुछ क्रिएटिव करना है। एक दिन सीमा ने टीवी में केक पर आधारित फैबुलस केक प्रोग्राम देखा। उसे लगा कि यही वह काम है जिसकी उसे तलाश थी। सीमा ने बेसिक केक मेकिंग का कोर्स किया और शुरू हो गई अपनी हॉबी को प्रोफेशनल टच देने में। वे दिन-रात मेहनत कर रही हैं। उनकी मेहनत का रंग उनके केक में भी झलकता भी है। वह न केवल खुद अंधेरे से बाहर आ चुकी हैं बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं।

 

News Source : bhaskar.com

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भारत -एक हिन्दू राष्ट्र

अंकिता सिंह

Web Title : Dark Age Turns Happy Life

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Posted by on Mar 9 2014. Filed under अहा! ज़िंदगी, आधी आबादी. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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