Donation (non-profit website maintenance)

Live Indian Tv Channels

वोट न दिया तो फिर जबान मत खोलना

PAGE-CASI-ELECTIONS

मेरे एक वोट से क्या फर्क पड़ेगा ?

चुनाव में हर एक वोट खासी एहमियत रखता है। जैसे बूंद बूंद से घड़ा भरता है, वैसे ही एक एक वोट से यह तय होता है कि जनता का प्रतिनिधित्व करने का मौका किसे मिलेगा। अगर आप चाहते हैं कि आपका प्रतिनिधि ऐसा हो, जो आपकी उम्मीदों पर खरा उतर सके, तो यह तभी संभव होगा जब आप वोट डालेंगे। आपका एक वोट बदलाव की शुरुआत कर सकता है। आप वोट डाल सकें, इसके लिए चुनाव आयोग भी लाखों करोड़ों रुपये खर्च करके तमाम इंतजाम करता है। अकेले दिल्ली के चुनाव पर इस बार करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। चुनाव कंडक्ट कराने में खर्च होने वाला यह पैसा भी तो वही होता है, जो आप टैक्स के रूप में सरकार के पास जमा कराते हैं। ऐसे में आपका वोट डालना और भी जरूरी हो जाता है।

 

मैं वोट क्यूँ डालूं ?

हमारे देश की गिनती दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में की जाती है। ऐसे लोकतंत्र के रूप में, जहां जनता को सीधे अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार है। बेहद सोच समझकर ही देश के संविधान ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लोगों को वोटिंग का अधिकार दिया है। अगर आप वोट डालने नहीं जाते हैं और आपके इलाके से चुना गया जनप्रतिनिधि बाद में आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता है, तो फिर आपको यह शिकायत भी नहीं करनी चाहिए कि उसने 5 साल तक आपके एरिया के विकास के लिए कुछ नहीं किया। बदलाव तभी आएगा जब आप बदलेंगे और वोटिंग के अधिकार का इस्तेमाल करेंगे।

 

मैं कैंडिडेट्स को नहीं जानता। गलत वोट डालने से अच्छा है मैं वोट ना डालूं।

चुनाव सुधारों की प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग ने पिछले कुछ सालों में जो नए कदम उठाए हैं, उनकी बदौलत अब कोई कैंडिडेट कैसा है, यह पता लगाना कोई मुश्किल काम नहीं रहा। चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के चौबीस घंटे के अंदर प्रत्येक कैंडिडेट का नॉमिनेशन फॉर्म और उसके द्वारा दिया गया हलफनामा चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाता है। उसके जरिये आप यह पता लगा सकते हैं कि आपके इलाके के कैंडिडेट कितना पढ़ा लिखा है, उसके पास कितनी संपत्ति है, उसके ऊपर कोई आपराधिक मामला तो दर्ज नहीं है, वह सोशल नेटवर्किंग साइट्स और इंटरनेट पर कितना एक्टिव है। ऐसी तमाम जानकारियां आप एक क्लिक पर हासिल कर सकते हैं। चुनाव सुधारों के लिए काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने तो अब एसएमएस के जरिये कैंडिडेट के बारे में जानकारी देने की सुविधा भी शुरू कर दी है। उम्मीदवारों के बारे में जानकारी हासिल करके आप यह तय कर सकते हैं कि उनमें से कौन सा उम्मीदवार ऐसा है, जिसे आप वोट दे सकते हैं। अगर आप किसी को वोट नहीं देना चाहते हैं, तो अब ‘नन ऑफ द एबवÂ’ (नोटा) का ऑप्शन भी आपके पास है। ईवीएम में नोटा का बटन दबाकर भी आप यह पैगाम उन कैंडिडेट़्स तक पहुंचा सकते हैं कि उनमें से कोई भी आपको पसंद नहीं है। ऐसे में वोट ना डालने की अब कोई वजह बाकी नहीं रह जाती।

 

कोई भी जीते, सरकार किसी भी बने, मेरी जिंदगी वैसी ही चलती रहेगी। फिर मैं क्यों वोट डालूं?

जनता को सरकार भी वैसी ही मिलती है, जैसी जनता खुद होती है। यह सोचना भी गलत है कि सरकार किसी भी बने, आपकी जिंदगी वैसी ही चलती रहेगी। सरकार और उनके द्वारा किए जाने वाले काम, उनकी योजनाएं आम आदमी की जिंदगी पर सबसे ज्यादा असर डालती है। सरकार का एक काम आपकी जिंदगी बदल सकता है। ऐसे में सही सरकार चुनने की जिम्मेदारी आपकी बनती है और यह जिम्मेदारी तभी पूरी होगी, जब आप वोट डालने जाएंगे। सवाल कैंडिडेट की जीत हार का नहीं, बल्कि आप की और आपके सपनों और उम्मीदों की जीत हार का है। आपका भविष्य कैसा होगा, यह आपके एक वोट से ही तय होता है।

 

वोट डालने के लिए क्या करना पड़ेगा?

वोट डालने के लिए बस आपको घर से निकलकर पोलिंग बूथ तक जाना है? हालांकि आप वोट तभी डाल सकते हैं, जब मतदाता सूची में आपका नाम दर्ज हो। ऐसे में पहले आपको यह देखना होगा कि उस सूची में आपका नाम है कि नहीं। अगर सूची में नाम नहीं है, तो आप वोट नहीं डाल सकेंग। अगर नाम है, तो फिर वोटर आईडी नहीं होने के बाद भी आप वोट डाल सकेंगे। इसके लिए बस आपको अपना एक पहचान पत्र जैसे पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, फोटो लगा राशन कार्ड आदि लेकर पोलिंग बूथ पर जाना होगा। जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं, चुनाव आयोग उन सभी के घर पर फोटो लगी मतदाता पर्ची भिजवा रहा है। अगर आपको यह स्लिप नहीं मिली है, तो आप पोलिंग बूथ के बाहर लगने वाले मतदाता सहायता केंद्र से भी यह स्लिप कलेक्ट कर सकते हैं। मतदाता सूची में आपका नाम है कि नहीं, यह आप दिल्ली के मुख्य निर्वाचन कार्यालय की वेबसाइट ceodelhi.gov.in पर जाकर देख सकते हैं।

वोटर कार्ड कैसे बनता है ? इसके लिए कौन से दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है ?

वोटर कार्ड बनाने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। हालांकि चुनाव से पहले एक तय समस सीमा के बाद मतदाता सूची में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया पर रोक लग जाती है, लेकिन वोटर आईडी बनवाने के लिए आवेदन आप तब भी कर सकते हैं। एनरोलमेंट के लिए आपको फॉर्म 6 भरकर स्थानीय चुनाव कार्यालय में जमा करवाना होगा। इसके साथ आपको अपना एड्रेस प्रूफ और फोटो भी देना होगा। अगर एड्रेस प्रूफ के रूप में आपके पास कुछ नहीं है, तो आप एक पोस्ट कार्ड पर अपना ही पता लिखकर उसे पोस्ट कर दीजिए, जब वह पोस्टकार्ड आपके घर डिलिवर हो जाए, तो उसी को आप एड्रेस प्रूफ के रूप में इस फॉर्म के साथ लगा सकता हैं। आप चाहें तो दिल्ली के मुख्य निर्वाचन कार्यालय की वेबसाइट ceodelhi.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं। आवेदन करने के बाद आपका वोटर आईडी बना कि नहीं, इसका स्टेटस भी इस वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं। जब कार्ड बन जाएगा, तो उसे आपके घर बाई हैंड डिलिवर कर दिया जाएगा।

मेरा पोलिंग बूथ कौन सा है ?

मतदान से पहले आपको जो फोटो लगी मतदाता पर्ची दी जाएगी, उस पर आपके पोलिंग बूथ का नंबर और एड्रेस भी लिखा होगा। आप सीईओ ऑफिस की वेबसाइट पर जाकर भी इस बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसके लिए आपको home page पर दी गई लिंक check your name in voters list पर क्लिक करना होगा। जो लिंक खुलेगी, उसके लेफ्ट हैंड पर list of designated locations पर क्लिक करें। अपने विधानसभा क्षेत्र का नाम सिलेक्ट करें और फिर जो लिस्ट खुलेगी, उसमें से अपने एड्रेस की लोकेशन के आधार पर यह देख लें कि आपका पोलिंग बूथ कौन सा है।

 

मतदान दिवस से पहले मुझे क्या सुनिश्चित करना है और कैसे ?

मतदान दिवस से पहले आपको सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में आपका नाम दर्ज है कि नहीं। ध्यान रहे कि आपके पास में वोटर आईडी होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि मतदाता सूची में भी आपका नाम दर्ज होगा। कई बार लोग अपना घर तो शिफ्ट कर लेते हैं, लेकिन वोटर आईडी में एड्रेस चेंज नहीं करवाते हैं। ऐसे में चुनाव से पहले होने वाली वेरिफिकेशन की प्रक्रिया में उनका नाम वोटर लिस्ट से कट जाता है। ऐसे में आपको यह देखना होगा कि वोटर लिस्ट में आपका नाम है कि नहीं, तभी आप वोट डाल सकेंगे। सीईओ ऑफिस की वेबसाइट पर जाकर आप यह पता लगा सकते हैं कि मतदाता सूची में आपका नाम दर्ज है कि नहीं।

 

किसको वोट करूं ?

यह सवाल जितना आसान है उतना ही मुश्किल भी। वोट किसे करें, यह तय करने के लिए सबसे अच्छा तरीका यही है कि आप अपने इलाके से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के बारे में जानकारी हासिल करके यह जानें कि उनमें से कौन उम्मीदवार ऐसा है, जिसे वोट दिया जा सकता है। अच्छे और बुरे के बीच में से किसी एक को चुनना आसान है, लेकिन दो अच्छे में से सबसे अच्छा या दो बुरे में से कम बुरा चुनना मुश्किल काम है। ऐसे में उम्मीदवार द्वारा हलफनामे में दी गई जानकारी को देखकर या भविष्य की योजनाओं और उसके विजन को जानकार आपका काम थोड़ा आसान हो सकता है।

Source : navbharattimes

Posted by on Dec 3 2013. Filed under खबर, मेरी बात. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

Leave a Reply

*

Recent Posts