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‘युगांडा में मोदी से मिलते ही उनके बारे में मेरे विचार बदल गए’

Exclusive Interview Of Subha Rajan Of CII 1

 

‘मैंने नरेंद्र मोदी के बारे में सिर्फ सुना ही था। कभी उनसे मुलाकात नहीं हुई थी। मोदी को पहचानने का मौका मुझे युगांडा में मिला। मैं इस समय कॉन्फ्रिडेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) का प्रतिनिधित्व कर रही थी। इससे पहले मैं उनसे थोड़ा घबराती थी। लेकिन जब मैं उनसे मिली तो मुझे पता चला कि मैं गलत थी। उनसे मिलते ही मेरे विचार बदल गए। वह सचमुच में एक बेस्ट लीडर हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री होने के चलते वे गुजरात में लोकप्रिय हो सकते हैं, यह बात समझी जा सकती है। लेकिन यह बात मुझे हैरत में डाल देने वाली लगी कि केन्या और युगांडा में भी लोग उनके दीवाने हैं। मोदी वहां जहां भी जाते थे, लोगों की भीड़ उनके पीछे नजर आती थी। मैंने देखा कि उनकी तस्वीर लेने और उनसे हाथ मिलाने के लिए लोगों में होड़ मची हुई थी।’ ये शब्द हैं.. सीआईआई की एक्सटर्नल अफेयर्स हेड सुधा राजन के।

 

सुधा हाल ही में एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गांधीनगर आई हुई थीं। इसी मौके पर दिव्यभास्करडॉटकॉम के संवाददाता ने उनसे बात की। इस बातचीत में उन्होंने अपने दर्दनाक सफर, लाइबेरिया के गृहयुद्ध की स्थिति, मोदी के व्यक्तित्व और अपने युगांडा प्रवास की कई बातें शेयर कीं।

 

सुधा राजन 1989 में लाइबेरिया में छिड़े गृहयुद्ध में पति के साथ फंस गई थीं। एक साल तक बंधक रहीं सुधा ने अनगिनत यातनाएं सहीं, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी।

 

मेरा जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। मेरा जन्म केरल में हुआ और वहीं पर मैं ग्रेजुएट भी हुई। मेरे पति को लाइबेरिया की एक बैंक में जॉब मिल गई थी। इसलिए हम लाइबेरिया शिफ्ट हो गए। 1989 में लाइबेरिया में गृहयुद्ध छिड़ गया। एक साल बाद तक बंधक रहने के बाद मैं तो किसी तरह बच निकली, लेकिन मेरे पति बंधकों के चंगुल में रहे। यह बहुत भयानक स्थिति थी।

 

हम जहां रुके हुए थे। उस इमारत के चारों तरफ लाशों के ढेर थे। लोगों को शवों को कुत्ते खा रहे थे और भूखे लोग जान बचाने के लिए इन कुत्तों को मारकर खा रहे थे। एक साल तक यातनाएं सहने के बाद मैं किसी तरह जान बचाकर भारत आ पहुंची, लेकिन मेरे पति बंधकों के चंगुल से आजाद नहीं हो सके। उन्होंने इतनी यातनाएं सहीं कि उनका एक हाथ खराब हो गया था। भारत आने के लगभग एक साल बाद मैं उन्हें वापस लाने में कामयाब हो सकी।

 

रेलवे स्टेशनों पर अनेकों रातें जागते हुए गुजारीं…

 

सुधा बताती हैं, लाइबेरिया से भारतीय शरणार्थियों को वापस ला रही आखिरी फ्लाइट से मैं दिल्ली आई थी। लेकिन यहां आने के बाद भी मेरा बुरा समय खत्म नहीं हुआ था। दिल्ली में मुझे पता चला कि एक जवाब स्त्री जब अकेली हो तो किस-किस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। लोगों की नजरें उसे कैसे देखती हैं। मदद करने का नाटक कर लोग शोषण के मौके की तलाश में ही रहते हैं, शायद यह बताने की जरूरत नहीं।

 

दिल्ली में रहने के लिए कोई ठिकाना नहीं था। मुझे अपनी जान के साथ अपनी इज्जत भी बचानी थी। मैंने कई रातें दिल्ली के रेलवे स्टेशन पर ही गुजारीं। जब भी भूख लगती तो मैं गुरुद्वारे में पहुंच जाया करती थी। मुझे याद है कि इस समय मेरे जीवन में वह भी दौर आया, जब मैंने एक टी बैग से लगभग एक हफ्ते तक डिप कर चाय बनाई थी। हां, एक डिप से सात दिनों तक की चाय तो नहीं बनती, लेकिन दिल को समझाने के लिए कुछ तो करना ही थी।

 

भारत वापसी के बाद शुरुआती एक-दो वर्ष बहुत संघर्षपूर्ण रहे। सीआईआई में एक सामान्य कर्मचारी के रूप में नौकरी कर मैंने जीवन की दूसरी पारी शुरू की। सीआईआई में मुझे धीरे-धीरे प्रमोशन मिलते गए। अंतत: मुझे एक्सटर्नल अफेयर्स की जिम्मेदारी मिली। इस दौरान मुझे असंख्य विदेशी हस्तियों से मिलने का मौका मिला। इन सभी लोगों में मेरी सबसे करीबी रहीं पाकिस्तान की भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. बेनजीर भुट्टो। उनके साथ मेरी बहुत अच्छी दोस्ती थी।

 

बेनजीर के बारे में एक चौंकाने वाली बात बताते हुए सुधा कहती हैं..एक दिन अचानक बेनजीर ने मुझे अपने जन्म की तारीख और समय बताया। उन्होंने मुझसे कहा कि किसी अच्छे ज्योतिष से मेरी कुंडली पूछो। सुधा कहती हैं कि मैंने ऐसा ही किया, लेकिन मैंने पंडित को यह नहीं बताया था कि यह कुंडली पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की है। हालांकि पंडित कुंडली के ग्रह-नक्षत्र देखते यह जरूर समझ गया था कि यह किसी बड़ी हस्ती की है।
पंडित ने मुझे बताया कि इस व्यक्ति से कह दो कि आगामी कुछ महीनों तक उसकी जान पर खतरा है। मैं यह बात सुनकर चौंक उठी। मैंने हिचकते हुए बेनजीर को यह बात बताई। लेकिन पंडित की बताई हुई बात सही निकली। इसके कुछ महीनों बाद ही बेनजीर पर हमला हो गया था, जिसमें उनकी मौत हो गई थी।

 

अफ्रीका में भी मोदी लोकप्रिय :

 

गुजरात के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी से पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के बारे में सुधा कहती हैं.. साल 2008 में वायब्रंट गुजरात ग्लोबल बिजनेस समिट के प्रमोशन के लिए मोदी केन्या और युगांडा गए थे। उनकी इस यात्रा में दिल्ली की संस्था सीआईआई (कॉन्फिडिरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री) आर्गेनाइजिंग पार्टनर थी। मैं सीआईआई के एक्सटर्नल अफेयर्स की हेड थी। इसलिए मुझे भी मोदी के साथ वहां जाने का मौका मिला।

 

केन्या और युगांडा में मोदी के साथ 5 दिनों तक रहीं सुधा बताती हैं कि मोदी प्रकृति प्रेमी व्यक्ति हैं। वाइल्ड लाइफ प्रिजर्वेशन में काफी रुचि रखते हैं। हम सुबह 4 बजे मसाईमारा के जंगलों में वाइल्ड लाइफ की सफारी करने जाने वाले थे। मुझे मोदी की सबसे अच्छी बात यह लगी कि वे बिल्कुल टाइम पर तैयार भी हो चुके थे। इसके अलावा उनकी एक बात जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद है वह है इक्वालिटी। वे छोटे-बड़े सभी के साथ बहुत प्रेम से मिलते हैं। ‘ही इज इक्वली नाइस टू ऑल प्यूपिल’। वे एक बहुत अच्छे लीडर हैं।

 

जब तक मैं उनसे मिली नहीं थी, तब तक उनके बारे में मेरी राय अलग थी। लेकिन जब मैं उनसे मिली तो मुझे पता चला कि मैं गलत थी। उनसे मिलते ही मेरे विचार बदल गए। मोदी सचमुच में एक आत्मविश्वास से भरे हुए पुरुष हैं और वे सच्चे अर्थ में एक बेस्ट लीडर हैं, क्योंकि लोगों को मोटीवेट करने का उनका तरीका बहुत आकषर्क है।

 

गुजरात के मुख्यमंत्री होने के चलते मोदी गुजरात में लोकप्रिय हो सकते हैं, यह बात समझी जा सकती है। लेकिन यह बात मुझे हैरत में डाल देने वाली लगी कि केन्या और युगांडा में भी लोग मोदी के दीवाने हैं। मोदी वहां जहां-जहां गए, लोगों की भीड़ उनके पीछे नजर आई। मैंने देखा कि उनकी तस्वीर लेने और उनसे हाथ मिलाने के लिए लोगों में होड़ मची हुई थी।’

 

Source : bhaskar.com

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अंकिता सिंह

Web Title : Exclusive interview of Subha Rajan of CII

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Posted by on Mar 22 2014. Filed under खबर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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