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भयभीत आजादी

भयभीत आजादी
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हमें तोते की तरह रटा दिया गया है कि भारत आजाद हो गया है .





**लेकिन क्या कारण है कि कश्मीर के तो तिरंगा फहराने के लिए सेना और पुलिस को बुलाना पड़ता है .
मुस्लिम जिहादी खुले आम पुलिस मुख्यालय और अदालत के सामने पाकिस्तानी झंडा फहरा सकते है .

**क्या कारण है कि हमें अपने देश में किसी भी राष्ट्रिय या धार्मिक कार्यक्रम को मनाने के लिए पुलिस बंदोबस्त की जरुरत क्यों पड़ती है .

**क्या कारण है कि सुप्रीम कोर्ट से अपराधी सिद्ध होने के बाद भी इस्लामी आतंकवादियों को जेलों में मेहमान कि तरह सुविधा क्यों दी जाती है और निर्दोष होने पर भी हिन्दूओं को जेलों में बरसों तक क्यों सडायाजाता है .

पकिस्तान में सताए गए हिन्दू जब अपने हजारों साल पहले की अपनी मातृभूमि में शरण मागते हैं तो उनको विदेशी कहा जाता है . लेकिन बंगला देसी भारत विरोधी मुसलमानों को यहाँ की नागरिकता दे दी जाती है .क्या हिन्दू अपने धर्म बंधुओं को देश में नहीं रख सकते .?

यह बात नेहरू गाँधी के कुत्ते क्या जानें .की देश और धर्म का प्रेम क्या होता है . क्योंकि इनकी हिन्दू विरोधी राक्षसी माता सोनिया न तो कोई अपने देश से लगाव है न भारत से आज देश इसी .हराम की औलाद खानदान का गुलाम है .जो इस्लामी आतंकवादियों से मिले हुए .है
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असली आजादी तो तभी मिलेगी जब इस वंश का नाश हो जायेगा .जोभी व्यक्ति खुद को इस देश का वास्तविक वारिस और पाने पूर्वजों के त्याग और बलिदान पर गर्व करता हो , वह इन विचारों को हर प्रकार से लोगो तक पंहुचाने का प्रयास करें . नहीं तो अगर इस कांगरेसी सरकार और सोनिया पुत्र राहुल की कृपा बनी रही तो हरेक भारतीय की रक्षा के लिए दस दस पुलिस वालों की जरुरत ,पड़ेगी .

सदा भयभीत रह कर मिलने वाली आजादी से क्या फायदा .

यह कैसी आजादी कि अमरनाथ जाओ तो डर किसी तीर्थ में जाओ तो डर . बाजार में डर , रात को डर .

यहाँ तक घर में रहने पर भी डर .

हमारे सभी डर जभी मिट जायेंगे जब हम इस कटु सत्य को स्वीकार कर लेंगे कि इन सभी डरों कारण मुसलमान , इस्लाम और कांगरस की मुस्लिम परस्त नीति है .

याद रखिये अगर निर्भय होना है तो ऐसे काम करो जिस से शत्रु हमेशा डरते
रहें .

आजादी कभी भीख में नहीं मिलती छीनी जाती है
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इस समय केवल ये कविता हिन्दुस्तान के पूर्व प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने लिखी है जो याद आती है …………..
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१५ अगस्त का दिन कहता,आजादी अभी अधूरी है,
सपने सच होने बाकी हैं,रावी की शपथ ना पूरी है,

जिनकी लाशों पे पग धरकर,आजादी भारत में आई,
वे अब तक हैं खानाबदोश,गम की काली बादल छाई,

कलकत्ते के तूफ़ान पर जो आंधी पानी सहते हैं,
उनसे पूछो १५ अगस्त के बारे में क्या कहते हैं,

हिंदू के नाते यदि उनका दुःख सुनते तुम्हे लाज आती,
तो सीमा के उस पार चलो सभ्यता जहाँ कुचली जाती,

इंसान जहाँ बेचा जाता,ईमान खरीदा जाता है,
इंसान सिसकियाँ भरता है डॉलर मन मुस्काता है,

भूखों को गोली नंगों को हथियार पहनाए जाते हैं,
सूखे काटों से जेहादी नारे लगवाए जाते हैं,

लाहौर,कराची,ढाका पर मातम की है काली साया,
पखतुनों पर गिल्गितों पर है गमगीन गुलामी की साया,

बस इसीलिए तो कहता हूँ,आजादी अभी अधूरी है,
कैसे उल्लास मानों मैं?थोड़े दिन की मज़बूरी है,

दिन दूर नही खंडित भारत को पुनः अखंड बनायेंगे,
गिलगित से गारो पर्वत तक आजादी पर्व मनाएंगे,

उस स्वर्ण दिवस के लिए आज से कमर कसें बलिदान करें,
जो पाया उसमे खो ना जाएँ जो खोया उसका ध्यान करें….
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अधूरी स्वतंत्रता मिलने पे सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएं.

जय माँ भारती….वन्देमातरम.
जय हिंद.

………………जय महाकाल.!!!

Short URL: http://jayhind.co.in/?p=1367

Posted by on Aug 15 2012. Filed under मेरी बात, सच. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

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