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Frankly Speaking with Narendra Modi – Full Interview

किसी के लिए BJP के दरवाजे बंद नहीं: मोदी

 

 

16वीं लोकसभा के लिए हो रहे चुनाव अब अपने अंतिम दौर में हैं। राजनीति से जुड़े सवाल, मुद्दे और बयानबाजियां इस वक्त चरम पर हैं। इस बार टकराव सिर्फ मुद्दों और विचारों के नहीं हुए, बल्कि चुनाव आयोग तक से टकराव की नौबत आ गई और उसके कामकाज तक पर कॉमेंट किए गए। ऐसे तमाम सवालों पर बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी की टाइम्स नाउ के अरनब गोस्वामी से बेबाक बातचीत हुई। चुनावी रैलियों में विरोधियों पर जम कर हमला करनेवाले और यहां तक कि कांग्रेसमुक्त भारत का नारा देनेवाले मोदी ने इंटरव्यू में कहा कि बीजेपी ही नहीं, सारी पार्टियां देश के लिए काम करना चाहती हैं और सरकार में आने पर वह सभी का सहयोग लेंगे। यहां पेश हैं, इस इंटरव्यू के खास अंश:-

अरनब : क्या चुनाव अभियान इतना तीखा, नकारात्मक और टकराव से भरा होना चाहिए था? आयोग को भी नहीं बख्शा गया। बनारस का उदाहरण सामने है।

मोदी : आपने दो मुद्दे उठाए हैं। मुझे 13 सितंबर को बीजेपी की तरफ से पीएम कैंडिडेट घोषित किया गया था, 15 सितंबर को मैंने हरियाणा के रेवाड़ी में पहली रैली में पूर्व सैन्यकर्मियों को संबोधित किया। उसके बाद हुई लगातार रैलियों में मैंने महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्या, सुरक्षा आदि उन्हीं मुद्दों को उठाया, जिनकी अहमियत है और जो वास्तविक हैं। मैं इन मुद्दों पर भारत सरकार के जवाबों का इंतजार कर रहा था। इतने बड़े चुनावों में क्या सत्ताधारी पार्टी के किसी मेंबर को महंगाई पर नहीं बोलना चाहिए था?

मुझसे गुजरात के बारे में सवाल पूछे जा रहे हैं, जबकि इसका जवाब मैं पहले भी दे चुका हूं। जहां तक बनारस की बात है, मैं यह देखकर हैरान हूं कि वे लोग रैली के मैदान की सुरक्षा की बात कर रहे थे। 7 दिन पहले गृह मंत्री ने कहा था कि मोदी की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं हैं। चिदंबरम ने कहा था कि सुरक्षा के इंतजाम ऐसे हैं कि मोदी 400 रैलियां सुरक्षा की चिंता किए बगैर कर सकते हैं। उनके बयानों में और हकीकत में कितना विरोधाभास है।

अरनब : लेकिन चुनाव आयोग को लेकर आप क्यों नाराज हैं? आयोग तो वही करता है जो जिला प्रशासन चाहता और कहता है, लेकिन इस बार तो आप सीधे तौर पर आयोग से नाराज हैं?

मोदी : अभी तक मैंने आयोग को लेकर एक शब्द भी नहीं कहा है। ऐसे में उसे लेकर नाराजगी का सवाल कहां से उठा है?

अरनब : लेकिन आपकी पार्टी तो ऐसा ही कहती रही है।

मोदी : मेरी पार्टी ने इस बारे में आयोग को पत्र लिखे हैं, विस्तार से सब कुछ लिखित में दिया है। फिलहाल बनारस में जो कुछ घट रहा है, उसके मद्देनजर मैं कुछ नहीं कह सकता।


नीच राजनीति का मामला

अरनब : इधर प्रियंका गांधी वाड्रा ने जब अपने पिता राजीव गांधी पर आपके बयान को निम्न स्तरीय कहा तो आपने उसे जाति से जोड़ते हुए जातीय मुद्दा बना दिया। आपने ऐसा क्यों किया? क्या ऐसा करते हुए आपको यह अहसास नहीं था कि इससे चुनाव में जाति का मसला फ्रंट पर आ जाएगा।

मोदी : मैं यह देखकर हैरान हूं कि मीडिया एक खास परिवार को बचाने का जतन क्यों कर रहा है? क्या यह टीवी चैनलों की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वे राजीव गांधी पर दिए गए मेरे बयान को पूरी दुनिया को दिखाएं? अगर उसमें एक भी शब्द कड़वाहट भरा होगा, तो मैं सभी से माफी मांगने के लिए तैयार हो जाऊंगा। मैंने सिर्फ तथ्यात्मक जानकारियां दी थीं और ये जानकारियां सभी जगह उपलब्ध हैं। क्या आप उन तथ्यों से इनकार कर सकते हैं? अगर मैंने राजीव गांधी पर एक भी खराब शब्द इस्तेमाल किया हो, तो उनकी बेटी प्रियंका को इसका हक है कि वह और नाराज हो जाएं। मुझे तब कोई ऐतराज नहीं होगा।


अरनब : पर क्या आपको लगता है कि प्रियंका ने आपकी जाति को लेकर कोई कॉमेंट किया होगा?

मोदी : मैं गुजराती ज्यादा जानता हूं। गुजराती में, (नीचता शब्द के संदर्भ में) उसका वही मतलब निकलता है जो समझकर मैंने अपनी प्रतिक्रिया दी। दूसरी बात, जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि जब नीच कर्म और नीच जाति की बात होती है, तो क्या कॉमनवेल्थ खेल घोटाला नीच राजनीति का उदाहरण नहीं है? और जब सुप्रीम कोर्ट आपसे कहता है कि आप वंचित बच्चों तक अनाज पहुंचाए और आप उस अनाज को या तो सड़ने के लिए छोड़ देते हैं या फिर उसे 80 पैसे के भाव पर उन लोगों को बेच देते हैं, जो उससे शराब बनाते हैं, तो क्या यह नीच राजनीति का उदाहरण नहीं है। क्या यह नीच कर्म नहीं है।

खौफनाक निर्भया कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा के वास्ते निर्भया फंड के लिए 1000 करोड़ रुपयों का आवंटन हुआ, लेकिन साल-डेढ़ साल में इसमें से एक पैसा तक खर्च नहीं हुआ। क्या यह नीच राजनीति और नीच कर्म नहीं है?

सांप्रदायिक बयानबाजी

अरनब : मिस्टर मोदी, आप खुद कई बार ऐसी बातें कह चुके हैं, जिससे लगता है कि आप एक खास धर्म का पक्ष ले रहे हैं। मैं यह नहीं कह रहा कि आप किसी दूसरे धर्म का विरोध करते हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में भी, आपने कुछ ऐसा ही कहा। वहां आपका एक बयान था कि जो लोग दुर्गा अष्टमी मनाते हैं और जो बंगाली बोलते हैं, वे भारत माता के बेटे हैं। क्या यह ऐसा ही मामला नहीं है?

मोदी : हाल में मैंने इस बारे में जो कुछ कहा है, उससे आप बेहतर समझ सकते हैं। मुझे लगता है कि आपको इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी देखना चाहिए। मैंने सिर्फ वही कहा, जो सुप्रीम कोर्ट कह चुका है। मैंने वही बात कही, जो ममता बनर्जी 4 अगस्त 2005 को संसद में कह चुकी हैं। मैंने वही कहा, जो गृह मंत्री के तौर पर इंद्रजीत गुप्त 1996 में कह चुके हैं। मैं सिर्फ वह दोहराता रहा हूं जो पी.एम. सईद 1995 और 1996 में कह चुके हैं।

आप मुझे कोई ऐसा मुल्क बताइए, जहां भारतीय मूल के लोग रहते हैं और उन्हें ऐसे बयान से कोई विरोध हो। अगर देवी दुर्गा के बारे में बात करने पर आपको कोई खराबी नजर आती है, तो मुझे माफ करें, पर उनकी सोचें जो देश से बाहर गए हैं और स्वदेश लौटना चाहते हैं। लेकिन उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता और उन्हें अपने रहमोकरम पर छोड़ दिया जाता है। सिर्फ इसलिए कि हम ऐसे मामलों में कोई राजनीतिक फैसला नहीं कर पाते हैं और उन लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया जाता है।

अरनब : मोदी जी, जनवरी में जब मैंने राहुल गांधी का इंटरव्यू लिया था तो मैंने उनसे एक सवाल 1984 के दंगों के बारे में पूछा था। मैंने पूछा था कि क्या उन्हें नहीं लगता कि 84 के दंगों में कांग्रेसियों की कोई भूमिका थी? अब मेरा सवाल आपसे है। क्या आपको नहीं लगता कि 2002 के दंगों में संघ परिवार, विश्व हिंदू परिषद या बीजेपी के किसी सदस्य की संलिप्तता थी?

मोदी : मुझे लगता है कि गुजरात दंगों के मामले में जुडिशरी बिल्कुल स्पष्ट है और उसकी इसमें सक्रियता दिख रही है। मीडिया, एनजीओ और इंटरनैशनल एजेंसियां भी काफी सक्रिय रहे हैं। मेरा मत है कि इस संबंध में इन सभी को अपने नतीजे पर पहुंचने देना चाहिए। इन्हें मोदी की तरफ से किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। इस मामले में सिर्फ संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा करना चाहिए। अतीत में भी उन्होंने ऐसे मामलों में स्पष्टता दिखाई है, उम्मीद है कि भविष्य में भी वे अच्छा काम करेंगी।

दरवाजे खुले रखना रणनीति का हिस्सा

अरनब : अमेठी में आपने विकास के दावों पर कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो मुलायम यहां काम कराएंगे। इसके दो मतलब हैं। एक देश को चलाने के लिए मिलकर काम करना। दूसरा अर्थ है राजनीति की गणित बिठाना। सीधा सवाल है यह कि क्या बहुमत तक पहुंचने के लिए आप मायावती से मदद लेंगे? बीएसपी-बीजेपी पहले भी साथ रह चुके हैं। क्या आप ममता बनर्जी की मदद लेंगे? क्या सरकार बनाने में जरूरत पड़ी तो आप जयललिता की मदद लेंगे?

मोदी : पहले मुझे दो मुद्दे स्पष्ट करने दीजिए। आप चाहेंगे तो मैं पूरा इंटरव्यू इसी सवाल पर दे सकता हूं। मैं जो कुछ कहा वह राहुल गांधी को दिया गया जवाब था। राहुल गांधी ने अमेठी में कहा कि यहां राज्य सरकार ने विकास में अड़ंगा लगाया। अगर ऐसा है, तो राहुल को इसके सबूत देने चाहिए थे।

मैंने तो सिर्फ यही सवाल उठाया कि अगर आप अपने क्षेत्र में सड़क बनाना चाहेंगे, तो मुलायम सिंह को क्या आपत्ति होगी। मैंने केवल इतना कहा कि राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद अगर मैं विकास कार्यों के लिए मुलायम के पास जाऊं तो वह जरूर स्वीकार करेंगे। आपके दूसरे सवाल प्रासंगिक ही नहीं हैं, क्योंकि पूरे देश के लोग सरकार बनाने के लिए बीजेपी को समर्थन दे रहे हैं। इतने व्यापक समर्थन का हमें घमंड नहीं है।

मेरा मानना है कि कोई भी एक सांसद पूरे 125 करोड़ का प्रतिनिधि होता है। देश को चलाने के लिए भले ही नंबर गेम की जरूरत हो, लेकिन दूसरा मतलब सभी को साथ लाना भी है। मेरा मानना है कि बीजेपी ही नहीं, बल्कि सभी पार्टियां देश के लिए काम करना चाहती हैं।

दीदी पर कैसे बदली स्ट्रैटिजी

अरनब : मैं ममता बनर्जी का उदाहरण देता हूं। ममता बनर्जी, मायावती और आपके बीच लगातार एक-दूसरे पर हमले किए जा रहे हैं। लेकिन, ममता बनर्जी के संबंध में आपकी स्ट्रैटिजी में बार-बार बदलाव क्यों दिख रहा है? शुरुआती दौर में 9 अप्रैल को दिए भाषण में आपने विकास के लिए ममता बनर्जी की तारीफ की। लेकिन, जैसे-जैसे कैंपेन आगे बढ़ा आपने ममता पर तेजी से हमला शुरू कर दिया। मेरा सवाल है कि आपने ‘लाइन ऑफ अटैक’ क्यों बदला?

मोदी : मेरा मानना है कि लेफ्ट ने अपने 35 सालों के शासन में बंगाल को बर्बाद किया। जब ममता बनर्जी सत्ता में आईं, तो मुझे लगा कि वह बंगाल का विकास कर सकती हैं। इसलिए उस समय मैंने अपने भाषणों में उनकी तारीफ की। उस समय जब मैं बंगाल गया था, तब मैंने ज्यादा रिसर्च नहीं की थी। लेकिन बाद में मुझे कई सारे ईमेल और जानकारियां मिलीं, जिससे मुझे बंगाल की हकीकत पता चली। अगर दीदी (ममता) पूरा समय केवल लेफ्ट से बदला चुकाने में लगा रही हैं, तो यह मुझे स्वीकार नहीं। इसीलिए मुझे लगा कि चुनाव के दौरान मुझे इस सच का खुलासा करना चाहिए।

अरनब : क्या तीन हफ्तों में ही आपके विचार इतना बदल गए? कहीं यह पॉलिटिकल स्ट्रैटिजी तो नहीं। क्या आपको नहीं लगता है कि आपको ममता बनर्जी और मायावती के लिए अपने दरवाजे खुले रखने चाहिए?

मोदी : हो सकता है कि यह भी दरवाजे खुले रखने की स्ट्रैटिजी हो। मैं इस मसले पर 12 मई के बाद कुछ बोलूंगा। अभी नहीं।

अरनब : और जयललिता के बारे में क्या? जयललिता आपको लगातार निशाना बना रही हैं, लेकिन आपने एक रैली को छोड़कर जयललिता की कोई खास आलोचना नहीं की। ऐसा माना जा रहा है कि जयललिता आपकी स्वभाविक सहयोगी हैं?

मोदी : मैंने पहले ही आपके इन सवालों का जवाब दे दिया है। आप हमारे सहयोगी मत देखिए। मैं कह चुका हूं कि राजीव गांधी के बाद बीजेपी सबसे सशक्त और स्थायी सरकार बनाने जा रही है।

जासूसी पर टाला जवाब

अरनब : स्नूपगेट विवाद (लड़की की जासूसी) भी आपसे जुड़ा रहा है। मेरा सवाल यह कि क्या जो टेप सामने आए उसमें आपको लगता है कि आवाज अमित शाह की है? क्या आपको लगता है कि अमित शाह ने ऐसा किया होगा?

मोदी : सुप्रीम कोर्ट केस की मॉनिटरिंग कर रहा है।

अरनब : आपके विचार क्या हैं? क्या आपको लगता है कि चुनावी रणनीति के तहत इस मामले को उठाया जा रहा है? आप इस केस की केंद्रीय जांच का विरोध क्यों कर रहे हैं?

मोदी : मैं पहले ही कह चुका हूं कि मामला सुप्रीम कोर्ट में हैं। जो कुछ आप पूछ रहे हैं, वह सबकुछ मेरे विरोधी ही कह रहे हैं। मुझे कुछ नहीं कहना है। इसे सुप्रीम कोर्ट को ही देखने दें। आप मुझे इस तरह से ट्रैप नहीं कर सकते। यह आपका काम नहीं है।

वाड्रा पर निजी हमला नहीं

अरनब : अभी बीजेपी ने रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्हें ‘दामाद श्री’ का नाम दिया। क्या यह सबकुछ इस बात का संकेत नहीं है कि बीजेपी और आप गांधी परिवार के खिलाफ निजी झगड़ा साध रहे हैं?

मोदी : आप मेरा 13 साल का ट्रैक रेकॉर्ड देख लीजिए। मुझपर कोई निजी शत्रुता साधने का आरोप नहीं लगा सकता है। मैंने इस मामले में काफी कहा। भ्रष्टाचार इस चुनाव का मुख्य मुद्दा है। मेरे खिलाफ कई सारे गलत और घटिया आरोप लगाए, लेकिन आप उनकी बात नहीं करेंगे। अगर बीजेपी भ्रष्टाचार उजागर कर रही है, तो इसमें निजी रंजिश की बात कहां से आ गई।

Posted by on May 9 2014. Filed under वीडियो. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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