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Ghoshnapatra: Narendra Modi full interview

नई दिल्ली: एबीपी न्यूज़ के लोकप्रिय कार्यक्रम घोषणापत्र में बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी आज हमारे मेहमान हैं. 

एबीपी न्यूज़ के लोकप्रिय कार्यक्रम घोषणापत्र में बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस चुनाव का लहजा chemistry में है, Arithmatic का नहीं.

 

मोदी के मुताबिक Arithmatic में 1+1 होता है, जबकि chemistry में एक के बगल में एक 11 हो जाता है.

 

आगे चलिए.. अब हम आपका उन सवालों के सीरीज़ से रू:ब:रू कराते हैं जिससे मोदी तिलमिला उठे.

 

शाज़ी ज़मां: नरेंद्र मोदी जी आपका बहुत स्वागत है.

 

नरेंद्र मोदी: मेरे दर्शकों को मेरा नमस्कार

 

शाज़ी ज़मां: इस समय हमारे दर्शक एबीपी आनंदो, एबीपी माझा, एबीपी न्यूज़ पर ये इंटरव्यू देख रहे हैं. घोषणापत्र की ये परंपरा है कि बहुत स्पष्ट सवाल होते हैं और कोशिश होती है कि जवाब भी उतने ही सपष्ट हों. सवाल जवाब के लिए मेरे साथ सुमन डे, राजीव खांडेकर और मैं शाज़ी ज़मां.

 

शाज़ी ज़मां: घोषणापत्र की परंपरा के मुताबिक सबसे पहले आप बताएंगे कि देश आपको वोट क्यों दे?

 

नरेंद्र मोदी: 2014 का चुनाव एक आशा लेकर के आया है, एक hope का चुनाव है और पूरी तरह अविश्वास, भरोसे का संकट, stagnancy,  बेशुमार भ्रष्टाचार, जितनी नकारात्मक बातें किसी एक सरकार के साथ कभी नहीं जुड़ी होंगी वो इस सरकार के साथ जुड़ी हुई हैं और उसके कारण एक तरफ भयंकर निराशा का माहौल है और दूसरी तरफ लोगों को लगता है ये घिसी पिटी राजनीति से बाहर  क्या कोई जगह नहीं है? क्या देश ऐसे ही तू-तू मैं-मैं ही चलेगा? भारतीय जनता पार्टी ने अपने track record के आधार पर एक भरोसा पैदा किया है. दो मुख्य बातों के आधार पर किया है. एक good governance और दूसरा development. सामान्य से सामान्य मानव को भी लगता है कि हमारी समस्याओं का समाधान कोई हमारी मदद करे उससे नहीं, कोई व्यक्तिगत रूप से मेरा भला कर दे उससे नहीं, कुल मिलाकर यह कि देश में बदलाव आना चाहिए, ये हिंदुस्तान का गरीब भी मानने लगा है, रोजगार खोज रहा नौजवान भी मांग रहा है, उसको लगता है कोई मेरी उंगली पकड़ कर चला दे ठीक है मैं तो चला जाउंगा औरों का क्या होगा, ये सोच व्यापक बन गई है. दूसरा मैं देख रहा हूं ये चुनाव arithmatic का नहीं है. ये चुनाव 125 करोड़ लोगों के मन की chemistry का चुनाव है. Arithmatic में 1+1 होता है, chemistry में एक के बगल में एक 11 हो जाता है… ये चुनाव उस प्रकार का है, और देश ने मान लिया है… जिन 232 सीटों पर मतदान पूरे हुए हैं, उसमें ही सरकार का जाना पक्का हो गया है और मैं इसलिए भी कहता हूं.. 232 का जो polling हुआ उसके बाद कांग्रेस की जो body language है, कांग्रेस की जो भाषा है, कांग्रेस की जो कोशिश है इससे साफ झलकता है कि उन्होंने… उनको बचने का भी रास्ता नहीं मिल रहा… ये स्थिति है… मैं मानता हूं कि good governance and development की ये बातें ऐसी हैं कि जिसके कारण देश भारतीय जनता पार्टी को, एनडीए को विजयी बनाएगा.

 

शाज़ी ज़मां: धन्यवाद… सवाल का सिलसिला शुरू करते हैं. जो सवाल सबके मन में है. क्या NDA को बहुमत मिलेगा?

 

शाज़ी ज़मां: क्या आपको लगता है ऐसी स्थिति आ सकती है  कि आपकी वजह से सीटें आएं लेकिन आपकी वजह से ही कुछ दल समर्थन करने से परहेज करे तो आंकड़ा जो है वो कम रह जाए…

 

नरेंद्र मोदी: पहली बात है… ये arithmatic के हिसाब के लिए ठीक है. चुनाव arithmatic वाला नहीं है, चुनाव chemistry वाला है. इसलिए पंडितों के पुराने जो मानदंड रहे हैं उन मानकों के आधार पर चुनाव नतीजे का हिसाब किताब गलत निकलेगा. मैं विश्वास से कहता हूं, प्रत्यक्ष चुनाव के कारोबार में लगा हूं, देश का भ्रमण कर रहा हूं और मैं political science का student भी रहा हूं और इसलिए मैं साफ मानता हूं कि भारतीय जनता पार्टी इस बार एकदम clear cut mandate के साथ शासन में आएगी. NDA के साथियों के कारण ताकत और बढ़ेगी और दूसरी बात है हमारे देश में perception के आधार पर बहुत चीजें चलाई जाती हैं. हिंदुस्तान के चुनावी इतिहास की ये सबसे बड़ी घटना है कि pre poll alliance 25 दलों के साथ हुए हों, ऐसा हिंदुस्तान के चुनावी इतिहास में कभी नहीं हुआ, its the first time in the history कि pre poll alliance BJP प्लस 25 पार्टी का… इसलिए दूसरा जो आपका सवाल है वो सवाल itself irrelevant है.

 

राजीव खांडेकर: लेकिन मोदी जी जब आपने प्रचार की शुरूआत की उस वक्त शायद BJP को ये confidence नहीं था कि इस तरह का माहौल हो जाएगा बाद में इसलिए एक desperate move में इतनी पार्टियां जोड़ी गईं, अब उसके बाद जिस तरह का response मिल रहा है खासकर कि आपकी सभाओं में उसके कारण पिछले कुछ दिनों में हम देख रहे हैं जिनका आपके साथ व्यक्तिगत अच्छे संबंध हैं ऐसे लोगों के ऊपर भी अब आप निशाना साध रहे हैं जैसे कि जयललिता हों, ममता बनर्जी हों, शरद पवार हों, क्या ये confidence शुरूआत में नहीं था क्योंकि महाराष्ट्र में ये चर्चा भी थी कि  शरद पवार और आप दोनों एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त हैं और आप चुनाव में एक दूसरे के साथ आने का भी विचार कर रहे थे?

 

नरेंद्र मोदी: दो विषय आपकी बात में से निकलते हैं, एक शुरू में confidence था कि नहीं था, अगर हम शुरू में आज जो भाषा बोलते हैं वो बोलते तो वो arrogancy के रूप में उसको ब्रांड किया जाता और वो हमें बहुत बड़ा नुकसान कर देता इसलिए रणनीति और समझदारी दोनों ये कहती हैं कि नम्रतापूर्वक, विवेकपूर्वक, बहुत बड़ा… पहली नजर में लोगों के गले उतरे… ऐसे  धीरे धीरे करके जाएं तो ये हमारा progressive unfoldment है.. आने वाले 10 दिन में और भी खुलेगा… तो ये हमारी रणनीति का हिस्सा है…

 

राजीव खांडेकर: येड़ा बनकर पेड़ा खाओ…

 

नरेंद्र मोदी: दूसरा जब मैं महाराष्ट्र जाउंगा.. तभी तो शरद पवार की बात करुंगा, तमिलनाडु में जाउंगा तभी तो जयललिता जी की बात करुंगा, बंगाल में जाउंगा तभी तो ममता जी की बात करुंगा, उड़ीसा में जाउंगा तभी तो नवीन बाबू की बात करुंगा, तो आप अगर देखोगे मेरा time table तो मैं जब उस राज्य में गया हूं पहली बार, पहले ही दिन मैंने मेरी सोच प्रकट की है. ऐसा नहीं है कि कोई स्थितियां बदलीं, बदलने के बाद हमने अपनी रणनीति बदली, ऐसा नहीं है… चुनाव के मैदान में भारतीय जनता पार्टी को अपनी बात स्पष्ट रूप से लोगों को बतानी चाहिए. अगर हम confusion पैदा करेंगे तो नीचे confusion और बढ़ेगा और वो कभी नहीं होना चाहिए और दूसरा लोकतंत्र में ये दोगलापन क्यों? सीधी सीधी बात होनी चाहिए भई चुनाव में हम और जयललिता जी सामने सामने हैं… चुनाव में बात होनी चाहिए हम और नवीन बाबू आमने सामने हैं. उसमें देश को गुमराह क्यों करना चाहिए?

 

राजीव खांडेकर: क्या इसमें सच्चाई है कि शरद पवार और आप एक दूसरे के साथ politically जाने की बात हो रही थी

 

नरेंद्र मोदी: नहीं, नहीं, नहीं… ऐसी कोई बात नहीं है.. ऐसी कोई बात नहीं है.. ऐसी कोई बात नहीं है.. जहां तक दोस्ती का सवाल है आपको हैरानी होगी मेरी लालू जी से भी दोस्ती रहती है जी. हम सार्वजनिक जीवन में हैं, राजनीतिक विचारधारा के कारण हम अपने अपने stand लेते हैं लेकिन ये एक विशाल परिवार है जी… इसमें कोई दुश्मनी थोड़े होती है..

 

 

सुमन दे: मोदी जी, यही मेरा सवाल रहेगा कि आपके दिमाग में भी चुनावी arithmatic रहता है या पहली दफा जब बंगाल गए तो आपके हाथों में लड्डू था, दूसरी दफा गए तो आपके हाथ में छड़ी… एक strict मास्टर जी बनना चाहे तो तब तक आपको यकीन और पार्टी को यकीन हो गया होगा…

 

नरेंद्र मोदी: ये जब मैंने लड्डू की बात कही ना तो लोगों ने मुझे कहा आपको रसगुल्ला बोलना चाहिए था.

 

सुमन दे: लेकिन तब आपके दिमाग में रहा होगा कि ममता जी NDA में आ सकती हैं, जब आप sure हो गए कि वो नहीं आ रही हैं तब आप हाथ में छड़ी.. strict मास्टर जी बन गए…

 

नरेंद्र मोदी: नहीं नहीं नहीं.. ममता जी नहीं आएंगी वो पक्का था, उसमें कोई दुविधा हमारे मन में नहीं थी, कोई दुविधा नहीं थी और उसमें हमारे मन में कोई आशंका नहीं है… लेकिन मैं जरूर मानता हूं कि लेफ्ट ने जो हालत करके रखा हुआ है उसको बाहर निकालने में अभी ममता जी को काफी समय मिला है लेकिन वो symptoms नजर नहीं आते तो गुस्से से ज्यादा मेरी निराशा है ममता जी के संबंध में, गुस्सा कम है, निराशा ज्यादा है.

 

शाज़ी ज़मां: आप ने कहा कि आप ने जब चुनाव प्रचार शुरू किया तो आपकी एक प्रकार की वाणी थी उस वाणी में परिवर्तन हुआ, इस दौरान क्या एक परिवर्तन और हुआ कि जब आपने शुरू किया था तो ये प्रचार निजी आरोप तक नहीं आया था वहां तक ये आ गया.

 

नरेंद्र मोदी: देखिए निजी आरोप का किसी का इरादा नहीं होता है और जरूरत भी नहीं होती है लेकिन चुनावी गर्मी में कुछ ना कुछ बातें निकलती हैं… अब इसको आप निजी कहें कि सार्वजनिक कहें. अगर हम कहें कि भई Wall Street Journal में ये छपा है अब मुझे कोई बताए कि ये निजी है क्या? अगर हम कहें 2G में scam हुआ, राजा का ये-ये रोल रहा, प्रधानमंत्री का ये रोल रहा.. ये निजी है क्या? और इसलिए हमारे देश में एक दुर्भाग्य हुआ है कि कुछ news traders… वो उनके अनुकूल जब बात नहीं होती है तो एक ऐसी चीज को divert करने की कोशिश करते हैं मिल बैठ करके ताकि… जैसे मुझे याद है जब मुंबई में आतंकवादियों ने हमला किया. बड़ी गंभीर घटना थी. इन news traders ने to help the congress party issue बना दिया कि ये देश पर हमला है इस समय आतंकवाद की टीका नहीं होनी चाहिए. मैं हैरान हूं अगर आतंकवादी हमले के समय आतंकवाद का चर्चा करना या टीका करना ये जैसे कोई गुनाह है news traders ने खड़ा कर दिया. ये ऐसा ही हो रहा है कि भई first family है कुछ नहीं बोल सकते. अब किसकी क्या मजबूरी है मैं नहीं जानता, हमारी तो कोई मजबूरी नहीं है… हां उनके लिए हल्के शब्द प्रयोग हम करते हों और main team… छोटे मोटे कार्यकर्ताओं से होता होगा.. नहीं होना चाहिए… नहीं होना चाहिए… तब तो मैं मानता हूं बराबर है.. दूसरा problem क्या हुआ है जी मैं कोई आप लोगों की आलोचना नहीं करता हूं लेकिन सार्वजनिक जीवन में से व्यंग्य और विनोद खत्म हो गया, हम एक कहावत भी नहीं बोल पा रहे, ऐसे उसका आधा वाक्य उठाकर… news traders ऐसे उठाते हैं… अगर सार्वजनिक जीवन में व्यंग्य और विनोद नहीं होगा तो क्या हालत हो जाएगी… ये तीखे बाण का आनंद होना चाहिए… एक दिन पार्लियामेंट में debate था शरद पवार का भाषण हुआ, बाद में सुषमा जी का भाषण हुआ तो सुषमा जी ने बोला कि समझ नहीं आ रहा है कि शरद पवार हैं कि ललिता पवार है? पूरे पार्लियामेंट ने उसको इतना enjoy किया था.. इतना enjoy किया था…शरद पवार ने भी enjoy किया था… यही बात आज होती पता नहीं ये news trader कहां से कहां आग लगा देते और इसलिए ये भी जरा अतिरिक्त हो रहा है.. अगर सार्वजनिक में हंसी, खुशी, व्यंग्य, विनोद ये नहीं होगा तो होगा क्या?

 

शाज़ी ज़मां: तो आपने जो जीजाजी कहा रॉबर्ट वाड्रा को ये उसी विनोद का और व्यंग का हिस्सा है ?

 

नरेंद्र मोदी: नहीं नहीं देखिए पहचान तो करनी पड़ेगी न, पहचान कैसे करोगे बताइए. जो घटना घटी है… घटना घटी है तो एक परिवार का संबंध है संबंध इसी शब्दों में है मुझे और शब्दों का तो मालूम नहीं है कोई और होता तो मैं और बोलता तो relation के लिए यही शब्द प्रयोग होता है. यही होता है ना जी.

 

शाज़ी ज़मां : लेकिन अगर आप की जिंदगी में… आपकी निजी जिंदगी में अगर कोई झांकता है आप भी तो सार्वजनिक जीवन में हैं, आपका जीवन भी उसी तरह से  पारदर्शी है तो आप पर आरोप लगते हैं तो क्या वो सही हैं ?

 

नरेंद्र मोदी: मैंने ये कहां कहा कि भई मेरे पर आरोप लगे वो गलत हैं और सही हैं या मैं आरोप लगाता हूं वो गलत हैं और सही हैं उसके लिए तो देश है, देखता है.. देश देखेगा उसमें क्या है.

 

राजीव खांडेकर: लेकिन आपके भी मन में किस हद तक ये आरोप होते रहेंगे इसके लिए… कुछ तो आपका आंकलन होगा

 

नरेंद्र मोदी : मैं जब तक हारुंगा नहीं, मैं जब तक पराजित नहीं होता हूं तब तक आरोप चलते रहने वाले हैं. जिंदगी के हर प्रकार से मैं एक असफल व्यक्ति बन जाऊंगा तभी आरोप बंद होने वाले हैं क्योंकि आरोप लगाने वालों की मन की स्थिति ये है कि हम 12 साल से एक आदमी के पीछे इतनी मेहनत कर रहे हैं उसको खरोंच भी नहीं आती है ये क्या है ? तो उनके ego का प्रॉब्लम है . अब होगा धीरे धीरे ठीक…

 

राजीव खांडेकर: मेरा ये कहना था कि आपने आपके मन में किस हद तक आरोप हो सकते हैं इसका कुछ तो आपके मन में आंकलन होगा लेकिन आपने जब चुनाव में जब आपका affidavit दिया और उसके बाद आपके marital status के बारे में जिस  तरह से आरोप और चर्चा हो गई क्या आपने ये expect किया था कि ये भी हो जाएगी इसकी चर्चा ?

 

नरेंद्र मोदी: मुझे किसी चीज का आश्चर्य नहीं होता है मेरी जिंदगी में कुछ नहीं है ऐसी भी बातें चलती हैं अब उनके पास कोई है नहीं तो क्या करें.. करते रहेंगे .

 

सुमन दे : बंगाल में हर चुनावी क्षेत्र में खुद ममता बनर्जी मुख्यमंत्री जाकर आपकी निजी जिंदगी का वो affidavit वाला हिस्सा बता रहे हैं कैसा लग रहा है?

 

शाज़ी ज़मां: आपकी जो समस्या है एक तो जो आपको करीब से देख रहे हैं आपकी राजनीति को करीब से देख  रहे हैं वो मानते हैं कि एनडीए के अंदर एक समस्या हो सकती है, एनडीए के बाहर समस्या हो सकती है, एक समस्या पार्टी के अंदर भी है हाल की रैली में आपने जोशी जी को अपना आसन दिया और वो उस पर बैठे लोगों ने देखा लेकिन समस्या उस आसन की नहीं है, समस्या एक बड़े आसन की है जिसके लिए पार्टी ने आपको चुना है, प्रधानमंत्री के आसन की क्या आपको लगता है कि आप की दावेदारी से बहुत से लोगों को लगता है कि उनके दरवाजे बंद हो गए वहां तक पहुंचने के लिए .

 

नरेंद्र मोदी: नम्बर 1… मोदी ने जिंदगी में कभी किसी चीज की  दावेदारी की नहीं है और न ही मैं किसी पद को पाने के लिए पैदा हुआ हूं . मेरी जिंदगी के निर्णय भारतीय जनता पार्टी करती है, मैं भारतीय जनता पार्टी का एक समर्थक सिपाही हूं और आज तक जहां भी पहुंचा हूं वो मांग करके नहीं पहुंचा हूं, छीन करके नहीं पहुंचा हूं, योजना से नहीं पहुंचा  हूं . जब जो काम मिलता है कठोर परिश्रम करता हूं, त्याग, तपस्या परिपूर्ण प्रयास रहता है मेरा और मैं कल के विषय में ज्यादा नहीं सोचता हूं . वो मेरी प्रकृति में नहीं है.

 

नरेंद्र मोदी: मुझे कुछ नहीं लगता है उनकी मर्जी उनके पास जो शस्त्र हैं वो उपयोग करें, इसके लिए मन में क्या कटुता, आलोचना क्यों करनी चाहिए, लोगों को जज करने दीजिए न.

 

राजीव खांडेकर : इसीलिए ऐसा कहा जाता है कि ये जो इलेक्शन है ये आरएसएस लड़वा रहा  है, तो ये इलेक्शन बीजेपी लड़ रही है, आरएसएस लड़ रहा है, मोदी लड़ रहा है आप इसको किस तरह से देखते हैं

 

नरेंद्र मोदी : मैं मानता हूं कि ये चुनाव ऐसा है देश में 2014 का जो कोई राजनीतिक दल नहीं लड़ रहा है, कोई उम्मीदवार  नहीं लड़ रहा है देशवासी चुनाव लड़ रहे हैं पूरा देश चुनाव लड़ रहा है ये .

 

सुमन दे :  मोदी जी  थोड़ी देर पहले आप जीतने और हारने की बात कहा तो क्या अगर प्रधानमंत्री बन पाए तो आपके हिसाब से वो जीतना है .

 

नरेंद्र मोदी : समझा नहीं मैं

 

सुमन दे : अभी अभी आपने कहा कि आप जीतना और हारना के बारे में कहा तो आपके हिसाब से जीतना क्या है अगर आप प्रधानमंत्री बन पाए इस भारत वर्ष का तो क्या आपके हिसाब से वो जीतना है जिंदगी में .

 

नरेंद्र मोदी : पहली बात ये है हमारे लोगों का मकसद क्या है… हमारा मकसद क्या है… हमारा मकसद है इस देश को इस सरकार से मुक्ति दिलाना, हमारा मकसद है भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाना वो मकसद पूरा हुआ मतलब विजय हुआ, मकसद पूरा नहीं हुआ तो विजय रह गया .

 

शाज़ी ज़मां: अभी राजीव ने सवाल पूछा आरएसएस के बारे में आपका बचपन से जुड़ाव है आरएसएस के साथ, जाहिर है आपकी सोच पर, आपके जो क्रियाकलाप हैं उसपर आरएसएस की छाप होगी. अगर आप प्रधानमंत्री बनते हैं तो प्रधानमंत्री की हैसियत से आप जो करेंगे जो सोचेंगे, उस पर भी संघ की छाप होगी क्या?

 

नरेंद्र मोदी : पहली बात है मुझे सरकार चलानी है , सरकार चलती है संविधान के तहत और मैं मानता हूं सरकार का एक ही रिलीजन होता है, इंडिया फर्स्ट. सरकार की एक ही होली बुक होती है our constitution , सरकार की एक ही भक्ति होती है, भारत भक्ति, सरकार की एक ही कार्यशैली होती है, सबका साथ सबका विकास.

 

राजीव खांडेकर: मोदी जी आप और मोहन भागवत दोनों 1950 के born हैं, आप दोनों का प्रचारक बन के मतलब साथ साथ आपका करियर जो है वो हो गया. उनका आप जहां तक आए हैं उसमें पर्सनल कुछ जो आपके संबंध हैं उसका कुछ फायदा हुआ आपको यहां आने में.

 

नरेंद्र मोदी: उनकी बजाय उनके पिताजी का मुझे बहुत फायदा मिला उनके पिताजी गुजरात में संघ के प्रचारक थे और मेरे प्रारंभिक जीवन में बहुत छोटा बच्चा था तो उनके पिताजी का मुझे बहुत प्यार मिला था . एक प्रकार से मैं कह सकता हूं कि मुझे उंगली पकड़ कर चलाते थे तो ये तो मैं परमात्मा की कृपा मानता हूं कि ऐसे जीवन के साथ मुझे बचपन में जुड़ने का अवसर मिला था.

 

क्या मुसलमान आप से डरते हैं?

 

शाज़ी ज़मां : एक और बहुत ही अहम सवाल इस समय पूछा जा रहा है वो है …क्या मुसलमान आप से डरते हैं?

 

शाज़ी ज़मां : देश में बहुत से लोग आपका समर्थन करते हैं ऐसे भी हैं जो समर्थन नहीं करते . आप प्रधानमंत्री बनेंगे तो जाहिर है आप से उम्मीद होगी कि दोनों तरह के लोगों को आप एक ही नजर से देखे. ऐसे में अगर आपकी पार्टी से एक आवाज उठती है जो नरेंद्र मोदी के साथ नहीं है वो पाकिस्तान जाएं. ये आवाज आपको विचलित करती है ?

 

नरेंद्र मोदी : मेरा 2002 का आपके पास लाइब्रेरी में पड़ा होगा , चुनाव जीतने के बाद , 2002 चुनाव जीतने के बाद मणिनगर में मैं शाम को ही मेरे मतदाताओं का धन्यवाद करने गया था उस दिन का मेरा भाषण है, मेरा भाषण ये है कि ये सरकार उनकी है जिन्होंने वोट दिया है , ये सरकार उनकी भी है जिन्होंने वोट विरोध में दिया  है और ये सरकार उनकी भी है जो वोट देने गए नहीं हैं और मेरी सरकार का मंत्र है अभयं,अभयं, अभयं तीन बार बोला हूं. 2002 का है आप देख सकते हैं .

 

शाज़ी ज़मां : यानी गिरिराज सिंह के बयान से आप सहमत नहीं हैं

 

नरेंद्र मोदी : कोई सहमत नहीं हो सकता है.

 

शाज़ी ज़मां : एक और बहुत ही अहम सवाल इस समय पूछा जा रहा है वो है …क्या मुसलमान आप से डरते हैं?

 

शाज़ी ज़मां : देश में बहुत से लोग आपका समर्थन करते हैं ऐसे भी हैं जो समर्थन नहीं करते . आप प्रधानमंत्री बनेंगे तो जाहिर है आप से उम्मीद होगी कि दोनों तरह के लोगों को आप एक ही नजर से देखे. ऐसे में अगर आपकी पार्टी से एक आवाज उठती है जो नरेंद्र मोदी के साथ नहीं है वो पाकिस्तान जाएं. ये आवाज आपको विचलित करती है ?

 

नरेंद्र मोदी : मेरा 2002 का आपके पास लाइब्रेरी में पड़ा होगा , चुनाव जीतने के बाद , 2002 चुनाव जीतने के बाद मणिनगर में मैं शाम को ही मेरे मतदाताओं का धन्यवाद करने गया था उस दिन का मेरा भाषण है, मेरा भाषण ये है कि ये सरकार उनकी है जिन्होंने वोट दिया है , ये सरकार उनकी भी है जिन्होंने वोट विरोध में दिया  है और ये सरकार उनकी भी है जो वोट देने गए नहीं हैं और मेरी सरकार का मंत्र है अभयं,अभयं, अभयं तीन बार बोला हूं. 2002 का है आप देख सकते हैं .

 

शाज़ी ज़मां : यानी गिरिराज सिंह के बयान से आप सहमत नहीं हैं.

 

नरेंद्र मोदी : कोई सहमत नहीं हो सकता है.

 

राजीव  खांडेकर : मोदी जी अभी आपने आरएसएस के बारे में जब हम बात कर रहे थे . तो एक उसमें इस तरह का ये आता है कि bunch of thoughts में भी है कि जो minorities है. वो अगर majority का जो culture है उसको accept कर लें तो बहुत सारी समस्या हल हो सकती है क्या आपको लगता है कि इस विषय की जब हम बात कर रहे हैं …

 

नरेंद्र मोदी : अच्छा होगा कि bunch of thoughts किताब के review का एक कार्यक्रम रखा जाए और जो इसके एक्सपर्ट लोग हैं उनको बुलाकर के बात हो तो शायद एबीपी न्यूज के दर्शकों को ज्यादा फायदा होगा.  तो  अच्छा होगा कि हम लोग एक अच्छा चुनाव के बाद बहुत बढ़िया कार्यक्रम बनाना चाहिए और इसके एक्सपर्ट कई लोग है जिन्होंने इस पर किताबें लिखी हैं , टिप्पणियां लिखी हैं , पक्ष और विपक्ष में लिखी हैं तो i think देश को भला होगा लाभ होगा.

 

शाज़ी ज़मां : आपने ये दावा किया अक्सर कि आप विकास के मुद्दे पर ये चुनाव लड़ रहे हैं. लेकिन कुछ ऐसे मुद्दे भी आते हैं आप के भाषण में जिससे लगता है कि ये मामला सांप्रदायिकता की तरफ जा रहा है जैसे पिंक रिवेल्यूशन क्या वो सही है ?

 

नरेंद्र मोदी : मुझे बहुत बड़ा दुख होता है कि मेरे देश के इतने बुद्धिमान पत्रकार मेरे सामने बैठे हैं इतने पढ़े लिखे. कोई मुझे समझाए कि पिंक रिवेल्यूशन शब्द में सांप्रदायिकता कहां आई. कोई मुझे समझाए . आप मेरे पास एक नौजवान आया बड़ा highly qualified लड़का है वो एक सर्वे लेकर आया कि जैसे गांव के किसान की अगर जमीन जाए और वो बर्बाद होता है वैसे ही पशु जाना उसकी पूरी को economy खत्म कर रहा है . कष्टों में भी वो पशु को पालेगा… खैर अच्छी स्थिति नहीं होगी तो चार लीटर दूध नहीं देगा तो डेढ़ लीटर दूध देगा लेकिन घर चल पाएगा . आज  हिंदुस्तान के कई राज्यों के गांव के गांव किसान मर रहा है पशु उसके जा रहे हैं . जा रहे क्यों? तो तत्कालीन लोभ में आकर के वो दे देता है . ये पूरी तरह मुद्दा आर्थिक विषय है जैसे किसान की जमीन लेना वो पाप है वो बिन सांप्रदायिकता, सांप्रदायिकता का मुद्दा नहीं है वैसे ही पशु ये उसकी बड़ी संपत्ति है . और भारत ने seriously सोचना पड़ेगा और आवश्यकता है कि देश में मैं तो कहने वाला हूं भई कुछ लोग स्टडी करिए अगर इस प्रकार से पशुविहीन हमारी अवस्था बन जाएगी तो आगे वाले.. अच्छा आज भारत को मिल्क प्रोडक्टिविटी बढ़ाने की चिंता करने की जरूरत है . हमारे यहां कैटल की संख्या की तुलना में मिल्क प्रोडक्टिविटी बहुत कम है उसके साइंटेफिक तौर तरीकों पर सोचने की जरूरत है अब जैसे गुजरात में मैं कैटल कैंप लगाता हूं और कोशिश करता हूं एक पशु को तीन किलोमीटर से ज्यादा दूर जाना न पड़े ताकि उसकी treat मैं करता हूं . और मैं इस विषय में इतना सेंसिटिव हूं, हिंदुस्तान में मनुष्य के कैटेरैक्ट के ऑपरेशन आज भी कई जगह में दिक्कत है, कोई एनजीओ कैंप लगाए तो होते हैं . गरीब आदमी को कैटेरैक्ट का ऑपरेशन भी मुश्किल है मेरे राज्य में पशु का भी मैं कैटेरैक्ट ऑपरेशन करता हूं जी, मेरे यहां पशु की डेंटल ट्रीटमेंट होती है इतना ही नहीं मैंने अभी मेरे यहां से veterinary डॉक्टरों की ट्रिप अमेरिका भेजी,इसलिए भेजी कि आजकल बड़े घर के लोग इनको खून निकल न जाए इसलिए लेजर टेक्निक से ऑपरेशन होता है मैंने कहा ये मेरे पशुओं को लाभ मिल सकता है क्या? मेरे गुजरात के veterinary डॉक्टर अमेरिका जाकर के पढ़ कर के आए और आज मैंने कई सेंटर्स में पशु के ऑपरेशन लेजर स्टैटिक से कर रहा हूं . मैं मानता हूं कि ये देश की बहुत बड़ी संपत्ति है, गांव की इकोनॉमी का एक बहुत बड़ा आधार है इसको हम निगलेक्ट न करें इस पर हम बल दें . इसको अगर कोई सांप्रदायिक के रंग से रंग देगा तो मेरे देश का इतना बड़ा दुर्भाग्य होगा , भगवान ऐसे न्यूज ट्रेडर्स से बचाए .

 

शाज़ी ज़मां : आप ने जो बात कही उसके जवाब में आप कत्ल खानों की बात करते हैं तो एक समुदाय विशेष की रोजी रोटी भी उससे जुड़ी है दूसरी बात ये कि एनडीए के कार्यकाल में भी मीट एक्सपोर्ट बड़े पैमाने पर हुआ तो उस समय आप की सरकार ने क्यों नहीं किया कुछ ?

 

नरेंद्र मोदी : मैं देखूंगा उस समय उनके क्या प्रॉब्लम थे. मैं देखूंगा, लेकिन इन दिनों स्थिति गंभीर होती गई उस समय हो सकता है शुरू में मेरे पास डिटेल नहीं है..उस समय  हो सकता है कि हमारे पास दूध न देने वाले पशुओं की संख्या एक्सेस हुई हो उसमें से एक विचार बना हो लेकिन ये आपकी जानकारी सही नहीं है कि कोई एक कम्युनिटी इस बिजनेस में है. ऐसा नहीं है जी मेरे कई जैन मित्र हैं जो इस व्यापार में हैं, इसको किसी कम्युनिटी से मत जोड़िए. मुद्दा उस… अब जैसे enviornment का प्रॉब्लम होता है तो किसी का कारखाना बंद हो जाता है तो उसकी जाति देखते हैं क्या . enviornment के कारण किसी ने अगर हो हल्ला किया और किसी का कारखाना बंद हो गया तो कारखाना बंद होने की जाति देखते हैं क्या ? जैसे कि enviornment की चिंता करते हैं  उसी प्रकार से रूरल इकोनॉमी को देखेंगे कि हम कारखाना किसका बंद हुआ उस रंग से रंगेंगे. तो ये देश का प्रॉब्लम मोदी नहीं है ये घिसी पिटी perverted सोच का परिणाम है. कि उसको हर चीज उसी एक कॉर्नर में ले जाने की कोशिश होती है.

 

सुमन डे : लेकिन मोदी जी आपकी जो भाषा है भाषणों में..दिल्ली सल्तनत, शहजादा उसे भी बोला जाता है कि एक विशेष समुदाय को टार्गेट करके बोलते हैं आप ?

 

नरेंद्र मोदी : कमाल हो भइया . ये शहजादा शब्द हमारे यहां इतिहास में हम पढ़ते थे जी, शहजादा शब्द पढ़ते थे. अभी एक दिन कांग्रेस के लोगों ने

 

सुमन डे : लोग बोल रहे हैं  आप राजकुमार नहीं बोल…

 

नरेंद्र मोदी : कांग्रेस ने चार पांच साल पहले की बात है सोनिया जी को राजमाता करके बोला था जी. काफी देर तक राजमाता कहते थे . अब मैं कोई कांग्रेस वालों को कहने जाऊं क्या.. कि भई अब ये राजा रजवाड़े चले गए राजमाता क्यों बोला? ठीक है बोल दिया उन्होंने .

 

क्या आपने राजधर्म निभाया?

 

शाज़ी ज़मां : आपसे बहुत दफा दंगों के बारे में बहुत सारे सवाल हो  चुके, जिम्मेदारी के सवाल हो चुके, कोर्ट केस पर हो चुके, कुत्ते के पिल्ले के बारे में भी हो चुके. एक सवाल मेरा थोड़ा सा अलग कि किसी भी राज्य में किसी भी नागरिक की जान जाती है तो अंतत: जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की होती है , नैतिक जिम्मेदारी होती है वो जिम्मेदीरी आप लेते हैं ?

 

नरेंद्र मोदी : day 1 से ली है . मेरे विधानसभा भाषण हैं, मेरे सब इंटरव्यू में है, available है. बस मेरी प्रार्थना है रिसर्च कर लीजिए. सब कुछ available है आप जो चाहते हैं वो जवाब उसी शब्दों में है.

 

शाज़ी ज़मां : ऐसा लगता है कि एक ऐसा समय आया जब आपने मुस्लिम समुदाय से संपर्क बढ़ाने की कोशिश की .

 

नरेंद्र मोदी : पहली बात है मेरी जिम्मेवारी है गुजरात के मुख्यमंत्री के नाते 6 करोड़ नागरिकों से जितना जुड़ सकूं उतना जुड़ना चाहिए.  और इन दिनों मुझे देश की जिम्मेवारी मिली है तो एड़ी चोटी का जोर लगा करके सवा सौ करोड़ तक पहुंचने की कोशिश करता हूं. ये मेरी part of my responsibility है, and i must do it. हो सकता है 100 कदम चलना हो 3 चल पाऊं, 5 चल पाऊं, 7 चल पाऊं वो अलग विषय है लेकिन ये मेरी जिम्मेवारी है कि मेरे देश के हर किसी व्यक्ति तक, मेरे राज्य के हर व्यक्ति तक पहुंचने का मुझे प्रामाणिक प्रयास करना चाहिए .

 

शाज़ी ज़मां: उसमें मुस्लिम समुदाय भी शामिल है ?

 

नरेंद्र मोदी : मैं ये आपकी टर्मिनोलॉजी है. मैं इस टर्मिनोलॉजी में कभी जाने वाला नहीं हूं. आप रस्सी बांध करके मुझे ले जाओगे तो भी नहीं ले जा पाओगे. मैं मेरे देशवासियों को मिलूंगा.  मैं एक ही भाषा समझता हूं ये मेरे भारतवासी हैं, ये मेरे भाई हैं ये आप जिस कलर से देखना है आप की मर्जी मोदी उस कलर में जाने वाला नहीं है ये काम…  कल मुझे चुनाव हार जाऊं तो हार जाऊं मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है लेकिन देश को तबाह कर दिया इस भाषा ने, बर्बाद कर दिया है आप लोगों की सोच ने उस सोच को मैं कभी भी own नहीं करूंगा और आप मेहरबानी करके मेरी स्वतंत्रता पर इस प्रकार के हमले करना बंद कर दीजिए .

 

राजीव खांडेकर: मोदी जी जब 2002 के दंगों की बात आती है और हमेशा आप से ये अपेक्षा होती है और आप इसका कई बार सैकड़ों बार जवाब दे चुके हैं कि मैं उसके बारे में उस वक्त बोल चुका हूं जो मुझे बोलना है 2002 में …

 

मोदी : सब कुछ बोलता हूं… ऐसा नहीं है झूठ बोल रहे हैं आप मेहरबानी कीजिए..ये भाषा ठीक नहीं है आपकी . मैं 2007 तक हर व्यक्ति को हर सवाल का हर समय जवाब दिया है,  प्रिंट मीडिया में पड़ा है… इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पड़ा है, आप लोग इसको रिसर्च कीजिए आप को बुरा लगे भला लगे और आप चाहो कि मैं आपसे दब जाऊं तो होने वाला नहीं है

 

राजीव खांडेकर: नहीं मैं ये कह रहा…

 

नरेंद्र मोदी : आप चाहो मुझे नोच लो नहीं कर पाओगे, नहीं कर पाओगे हां 2009 में जब दोबारा यूपीए बना और उन्होंने षड्यंत्र करके कोर्ट, कचहरियों में सुप्रीम कोर्ट तक मुझे घसीट के फिर मुझे लगा कि अब मुझे कुछ नहीं बोलना चाहिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट को इनफ्लुएंस नहीं होना चाहिए, सुप्रीमकोर्ट को स्वतंत्र करना चाहिए . आज तक हिंदुस्तान के किसी मुख्यमंत्री को नौ घंटे किसी पुलिस वाले ने ग्रिल किया है? ये मुख्यमंत्री है जिसको नौ घंटे तक पुलिस अफसरों ने ग्रिल किया था , सुप्रीमकोर्ट के कहने पर किया था और सुप्रीमकोर्ट ने उसको वीडियो रिकॉर्डिंग करके देखा था… ये सब कसौटियों से निकला हूं और आगे भी..आगे भी हर कसौटी के लिए तैयार हूं . लेकिन झूठ और राजनीतिक इरादों को सरेंडर कोई करे तो मोदी होने वाला नहीं है .

 

राजीव खांडेकर: नहीं मैं ये पूछ रहा था कि आपको क्या लगता है कि आपसे जो मांग की जाती है वो सिर्फ पॉलिटिकली मोटीवेटेड है?

 

नरेंद्र मोदी : वो आप पूछने वाले तय करो आप किसका एजेंडा लेकर आए हो .

 

अच्छे दिन कैसे आएंगे ?

 

शाज़ी ज़मां : मैंने मेनिफेस्टो पढ़ा आपकी पार्टी का. बहुत सारे दावे हैं वादे हैं जो नहीं है वो ये है कि ये कब होगा और कैसे होगा ?

 

नरेंद्र मोदी : अरे मेहरबान हर जगह पे एक्सपायरी डेट लिखी होती है क्या? पांच साल के लिए मेनिफेस्टो होता है, पांच साल के लिए सरकार बनती हैं , पांच साल के अंदर उसको काम को करना होता है कुछ काम होते हैं आरंभ कर देने होते हैं, कुछ काम होते हैं पांच साल में पूरे भी कर देने होते हैं, बड़ा साफ होता है जी मेनीफेस्टो 21वीं सदी की पूर्णाहूति के लिए नहीं होता है जी एक सरकार के कार्यकाल के लिए होता है.

 

शाज़ी ज़मां  : इससे जुड़ा हुआ सवाल आपकी पार्टी काले धन पे बहुत बात करती है. लेकिन जो स्वर आते हैं जैसे बाबा रामदेव ने कहा कि अगर कालाधन आ गया तो टैक्स नहीं देना पड़ेगा , राम जेठमलानी हालांकि आपकी पार्टी में नहीं है लेकिन उन्होंने कहा कि अगर काला धन आ गया तो हर हिंदुस्तानी को एक  मारुति कार मिल जाएगी. क्या वाकई कालाधन है, क्या वाकई उसको विदेश से लाया जा सकता है या ऐसा तो नहीं है कि आप ऐसी उम्मीद जगा रहे हैं जो पूरी न हो ?

 

नरेंद्र मोदी  : एक बात तो सारे देश में चर्चा है कि भई विदेशी बैंकों में हिंदुस्तान का पैसा है  और by and large उसमें कोई dispute नहीं है . अब ये जानकारियां सरकार के पास हैं, हम सरकार में नहीं है, जो सरकार में हैं वो इसका जवाब देते नहीं हैं. तो हमारा स्टैंड ये है कि जब हम सरकार में आएगें तो हमारी ये priority रहेगी कि दूध का दूध पानी का पानी करेंगे . अगर मानो नहीं है  तो भी ये हवाबाजी बंद हो जाएगी और अगर है तो हम लाएंगे . किसी का अनुमान है कि इतने लाख करोड़ है किसी का अनुमान है इतने हजार करोड़ है तो ये अलग अलग लोगों के अलग अलग information चैनल है . अधिकृत जब हम सरकार में बैठेंगे तो अधिकृत जानकारियां मिलेंगी दूसरा ये विषय तो है इसको कोई इनकार नहीं कर सकता, छोटा है, बड़ा है मतभेद हो सकता है लेकिन एक बार देश हित में ये क्लियर होना जरूरी है. अब इसके लिए लीगल टीम की जरूरत पड़े, इंटरनेशनल रिलेशन को जानकार की टीम पड़े, इंटरनेशनल लॉ को जानने…ऐसे लोग बैठेंगे, फ्रेमवर्क तय करना पड़ेगा हो सके तो विदेशो से संधि करनी पड़ेगी ताकि वो अपनी बातें हमारे सामने disclose करें तो इसके जितने पहलू और ये आशा क्यों जगी है कि दुनिया के कई देशों ने अपने कानून बदले हैं और इसका लाभ हिंदुस्तान ने लेना चाहिए उसमें जो आया काले धन की तीव्रता पहले नहीं थी ये आई इसलिए कि कई देशों ने अपने चीजों को निकलवाया उसके कदम उठाए तो भारत ने भी आज जब अंतरराष्ट्रीय माहौल बदला है तो फायदा लेना चाहिए .

 

सुमन डे : मोदी जी हमारे हर सर्वे में देखा गया है कि इस देश के लोगों को सबसे बड़ा मुद्दा है मंहगाई का घटाना तो आपकी सरकार अगर आए तो महंगाई आप कैसे घटाएंगे इसके लिए आपको सरकारी खर्च कितना कम करने..किस सेक्टर को आप priorty देंगे नहीं नहीं मंहगाई घटाने के बारे में ?

 

नरेंद्र मोदी : देखिए, आज छोटी छोटी बातें हैं..कैसा कैसा प्रॉब्लम है. हमारे देश में एग्रीकल्चर प्रोडक्ट का रियल टाइम डाटा ही नहीं है बताइए. अगर आपके पास रियल टाइम डाटा नहीं है तो प्रॉब्लम क्या होता है कि हम पहले कम दाम से पल्सेस एक्सपोर्ट करते हैं क्यों… कि भई दाम टूट जाएंगे, बाद में ध्यान में आता है कि यार देश के पास तो पल्सेस है ही नहीं तो चार गुना दाम से मंगवा लेते हैं. पहले हम चीनी एक्सपोर्ट करते हैं फिर दो महीने के बाद पता चलता है कि यार चीनी तो है नहीं, चीनी मंगवा लो . आठ रुपए में भेजते हैं अस्सी रुपए में लाते हैं . ये जो है मेस हो गया है . अगर रियल टाइम डाटा हो तो आप तय कर सकते हो कि भई गेहूं इतना है, इतनी रिक्वायरमेंट है और lull period में आप तय कर सकते हो कि भई अब साउथ में गेहूं खाना शुरू किया है चलिए हम गेहूं को ट्रांसफर करें और वहां पर स्टोर कर दें .

 

सुमन डे : लेकिन मोदी जी ये तो long term है .

 

नरेंद्र मोदी : ये लांग टर्म नहीं है ये तो तुरंत कहने वाले काम हैं जी, तुरंत करने वाले काम हैं . दूसरा फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया miserably फेल गया है. मैं मानता हूं कि इसको तीन हिस्सों में बांट देना चाहिए , उसकी तीन जिम्मेवारियां पक्की करनी चाहिए. एक हिस्सा वो हो जिसका काम सिर्फ procurement का रहे. किसानों की जैसे ही फसल आए वो एक्टिवली और उसको उसी का जवाब देना चाहिए  दूसरी पार्ट ये हो जो सिर्फ स्टोरेज का काम देखे, वेयरहाउसेज बनाए, रखे, संभाले, ये भीग रहा है, चूहे खा रहे हैं वो सब बंद हो जाए .और तीसरा डिस्ट्रीब्यूशन वाला डिपार्टमेंट अलग हो. अगर हम इस वैज्ञानिक तरीके से चीजों को करेंगे.. आज कोई धान की कमी नहीं है जी. दूसरा हमारे देश का एक दुर्भाग्य है कि एक रेलवे स्टेशन पर टमाटर आए  हैं और यहां से मानो मुंबई टमाटर ले जाने हैं लेकिन एक दिन पहले मार्बल आया है  और मार्बल भी मुंबई ले जाना है, रेलवे कहता है जो पहले आया वो गया तो मार्बल पहले जाता है टमाटर पड़ा रहता है खराब हो जाता है तो हम रेलवे में एग्रीकल्चर सेक्टर को priority को क्यों न दें ताकि हमारा किसान जो पैदा करता है वो समय से पहले पहुंचे छोटी-छोटी चीजें हैं जी थोड़ा कोई mind apply करें हम समस्याओं का समाधान कर सकते हैं .

 

शाज़ी ज़मां : अगर मैंने सही सुना तो आपने शायद हमें न्यूज ट्रेडर कहा

 

नरेंद्र मोदी : आपको नहीं कहा

 

शाज़ी ज़मां: अच्छा

 

नरेंद्र मोदी : आपको नहीं कहा

 

शाज़ी ज़मां : अच्छा शुक्रिया

 

नरेंद्र मोदी : हां लेकिन आप ये तय कीजिए कि आप न्यूज ट्रेडर में आते हैं या मीडिया में आते हैं वो आप तय कीजिए मैं आप पर आरोप क्यों लगाउंगा .

 

शाज़ी ज़मां : जब भी कोई व्यक्ति सत्ता की दावेदारी करता है तो मीडिया के मन में कुछ प्रश्न उठते हैं कि क्या इनके आने से हमारे अधिकार पर कोई आंच आ सकती है तो क्या मीडिया को आप से डरना चाहिए ?

 

नरेंद्र मोदी : पहली बात है कि अगर उनको किसी से डर लगता है तो ये क्षेत्र छोड़ देना चाहिए . लोकतंत्र में मीडिया अगर ताकतवर नहीं होगा तो लोकतंत्र चलेगा नहीं और ऐसा डरपोक मीडिया देश को नहीं चाहिए, भाग जाने वाला नहीं चाहिए मीडिया, मजबूत मीडिया चाहिए, डटकर के खड़ा रहे कितना भी बड़ा तीसमारखां राजनेता आया हो तो भी खड़ा रहे ऐसा मीडिया चाहिए भागने वाली बात मत करो भाई और भागते हो तो मुझे कह देना मदद करूंगा, बचाउंगा.

 

राजीव खांडेकर : नहीं लेकिन मीडिया तो डरेगा अगर मीडिया को न्यूज ट्रेडर का ठप्पा मारके अगर देश का एक बड़ा नेता उसको अगर बाजू करदे .

 

नरेंद्र मोदी : अगेन, अगेन, अगेन verify. मैं सिर्फ न्यूज ट्रेडर की बात करता हूं, मैं मीडिया की बात नहीं करता हूं मैं मीडिया का सम्मान करता हूं, आपका काम है न्यूज ट्रेडर कौन है उसको खोज लीजिए .  आप ये  आप गले क्यों पड़ते हो आप राजनेता को भ्रष्टाचारी कहते हो तो मैं क्यों टोपी पहनूं भई, जो भ्रष्टाचारी है, मोदी क्यों पहन ले कि मैं पॉलिटिकल हूं तो मैं भ्रष्टाचारी हूं, आप भी क्यों पहन लेते हो, आप हिम्मत रखो, आप डेमोक्रेसी की बहुत बड़ी ताकत हो, विश्वास रखो ऐसे घबरा क्यों जाते हो .

 

शाज़ी ज़मां : जैसा कि आपने कहा कि हम डटे रहें, हिम्मत रखे तो उसी भावना के साथ अगला सवाल

 

मोदी : आने दो.

 

क्या आपकी सरकार अंबानी और अदाणी की सरकार होगी?

 

मोदी : ये आपका प्रश्न नहीं है.  राजनीतिक विरोधियों ने चलाई हुई कथा को आप लेकर घूम रहे हो और मीडिया से ये अपेक्षा नहीं है. आप से अपेक्षा ये है  14 साल गुजरात में मोदी ने कैसे राज चलाया है मोदी कि पहचान ये है कि पहले यहां सरकार चलती थी तो कॉरीडोर में दलाल घूमते थे 14 साल हो गए आज लोग कहते हैं कि यार एक सरकार ऐसी आई है कि कोई दलाल जा नहीं पाता है .  आज भी हिंदुस्तान के कह सकते हैं लोग कि एक सरकार ऐसी है कि जिसको दबाया नहीं जा सकता है, खरीदा नहीं जा सकता, चलाया नहीं जा सकता . 14 साल का मेरा ट्रैक रिकॉर्ड बोलेगा ये राजनीतिक आरोपों को कम से कम आप जैसे मीडिया के लोगों ने own नहीं करना चाहिए…here i am using word media.

 

शाज़ी  ज़मां : राहुल गांधी जी ने कहा कि आपने टॉफी की कीमत पे जमीन दी अदाणी को आपने उसका जवाब इस तरह से दिया कि बच्चे का मन गुब्बारे से भर गया तो बच्चा अब टॉफी पर आ गया ये एक विनोदव्यंग्य का तरीका है लेकिन जो आरोप उधर से लगा उसका जवाब नहीं दिया आपने ?

 

मोदी  : जी, मेरे पास डिटेल फिगर अभी नहीं है लेकिन मैं चाहूंगा कि आपकी चैनल इस पर एक 15-20 मिनट का समय और निकाले आपके रिपोर्टर को मैं डिटेल दे दूंगा लेकिन मोटी-मोटी डिटेल मैं बता दूं क्यों कि आज कल क्या होता है मैं चार बोलूं और साढ़े चार हो तो तीन दिन तक साढ़े चार की चार पर मोदी क्यों बोले इस पर विवाद होता है इसलिए एक्जैक्ट आंकड़ो. लेकिन गुजरात में 85-95 में कांग्रेस की सरकार थी उसने जमीन किस दाम से दी किसको दी इसके आंकड़े अवेलेबल हैं. 97 में शंकर सिंह वाघेला की सरकार थी कांग्रेस के समर्थन से चल रही थी उन्होंने 25 पैसे में जमीन दी है कुछ जमीन तो 5 पैसे में दी है ये एकाकी सरकार भाजपा की ऐसी है कि जिसने पैरामीटर तय किए हैं, norms तय किए हैं और आपको देश को ये बताना चाहिए रिसर्च करके बताना चाहिए मैं कहता हूं इसलिए नहीं भारत की सुप्रीमकोर्ट ने कहा है कि जमीन के विषय में गुजरात की नीति और राज्यों ने फॉलो करनी चाहिए ये सुप्रीम…और अभी अभी का है तीन साल पहले का अगर आपको राहुल की बात अच्छी लगती है आपको मुबारक, सुप्रीम कोर्ट की अच्छी लगती है तो आप देश की जनता को बताइए और मैं आज रिक्वेस्ट करता हूं आपको ये सारी चीजें आपके रिपोर्टर को मिल जाएगी मेरी सरकार में से देश के सामने जरा रखिए तो सही और ये सिद्ध कीजिए कि नेता झूठ बोल रहे हैं .

 

सुमन डे : मोदी जी हम जरूर रखेंगे और आपका डेटा लोगों तक पहुंचा देंगे.

 

नरेंद्र मोदी: हमारा नहीं, verify जो हो वो करना चाहिए.

 

सुमन डे: राहुल गांधी आपके राजनीतिक विरोधी ये बता रहे हैं कि आप कि अगर सरकार बने तो वो अमीरों की सरकार कहलाएगी, आप इस पर क्या कहेगें?

 

मोदी: देखिए इसको भी मेरे ट्रैक रिकॉर्ड से आपने जज करना चाहिए, मैं साल में एक बार  vibrant gujrat summit करता हूं  मेरे राज्य में इंवेस्टमेंट के लिए और वो प्रयोग इतना सफल हुआ है कि अब सभी राज्य उसको करने लगे है तो एक प्रकार से हमने एक ट्रैंड सेट किया है लेकिन ये मैं दो साल में एक बार करता हूं और सिर्फ दो दिन के लिए करता हूं , लेकिन मैं हर वर्ष जून  महीने में 13, 14, 15 जून जबकि गुजरात में 45 डीग्री तापमान होता है, घर के बाहर निकलने का कोई हिम्मत नहीं करता, मुख्यमंत्री सभी मंत्री सभी आईएएस ऑफिसर सभी आईपीएस आफिसर सभी फॉरेस्ट सर्विस के अफसर हम सभी हजारों की तुलना में संख्या में सभी लोग सरकार के गांव जाते है घर घर जाते है बच्चियों का स्कूल ले जाने के लिए पसीने बहाते है और उसका कारण है आज मेरे यंहा 100 % enrollment हैं ..मेरे यहां हजारों की तादाद में मैं कैटल कैंप लगाता हूं उसका परिणाम ये है कि मेरे यहां आज  दूध उत्पादन में 85:90% increase हुआ है, मेरे यहां माइनस एग्रीकल्चर ग्रोथ रहता था we are not agricultral state at all  पानी का  प्रबंध नहीं है मेरे यहां लेकिन हम हर वर्ष एक महीना कृषि महोस्तव चलाते हैं वो भी बारिश से पहले यानि मई और जून की गर्मी में यूनिवर्सिटी के  800 एग्रिकल्चरल वैज्ञानिक पूरे राज्य के हजार के करीब प्रोग्रेसिव फारमर (किसान ) सरकार का पूरा एग्रिकल्चर डीपार्टमेंट irrigation department, animal husbandry department और मुख्यमंत्री खुद मंत्री सब हम महीने भर गांव में जाते है.  किसानों के  साथ बैठते हैं पुराने पद्दतियों को कैसे छोड़ना चाहिए और नए क्या लेना चाहिए ये दवाई लेना ठीक नहीं ये है we are first in india who has started soil health card हिंदुस्तान में मनुष्य के पास हेल्थ कॉर्ड नहीं है हमारे राज्य में किसानों के पास soil health card है soil health  के कारण उसे पता चलता है कि उसके जमीन में  क्या कमियां हैं उसकी जमीन किस crop के लिए अनुकूल है उसका परिणाम ये हुआ है कि हिंदुस्तान का एग्रीकल्चरल ग्रोथ 2.5% से आगे नहीं जा पा रहा है गुजरात जो कि कभी एग्रीकल्चरल स्टेट नहीं था आज पूरे दस साल का एवरेज 10%  plus है एग्रीकल्चर का ..ये सारे कामों को आप अमीरों का काम कहते हो क्या… नंबर 2 small scale industries medium & small scale industries , medium & small scale industries हमारे देश में 19% ग्रोथ है गुजरात का 85% ग्रोथ है ये अमीरों का काम है क्या ? गुजरात में जब हम आए 11 यूनिवर्सिटी थी आज 43 यूनिवर्सिटी है क्या आप इसको अमीरों का काम कहते हैं क्या ? गुजरात मे जब मैं आया तब इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए  13 हजार सीटें थी आज एक लाख 13 हजार है क्या ये अमीरों का काम हो रहा है क्या ? मैं जब गुजरात में आया तब मेरे यंहा cotton grower cotton पैदा करते थे 23 लाख बेल मेरे यंहा product होता है  आज एक करोड़ 23 लाख बेल्स cotton पैदा होता है क्या ये अमीरों का काम है क्या तो ये राजनीति बंद होनी चाहिए ये झूठ के गुब्बारे बंद होने चाहिए और टॉफी बेचने वालों को देश स्वीकार नहीं करेगा.

 

शाज़ी ज़मां: एक सवाल आपकी छवि के बारे में देश में जो लोग आपको पसंद करते है वो आपको इतना पसंद करते हैं कि वो आपके चेहरे का मुखौटा लगाकर सामने आते है, जो पसंद नहीं करते वो यहां तक कहते हैं कि आपका जो चेहरा है वो खुद एक मुखौटा है, जो आपका चेहरा है वो खुद एक मुखौटा है ऐसा वो  कहते हैं . आप क्या हैं?

 

मोदी: भगवान ने मुझे अगर शक्ति दी होती खुद को जानने की समझने की तो मैं न जाने कहां से कहां पहुंच गया होता और इसलिए मेरे पास ईश्वर ने वो शक्ति नहीं दी है कि मैं खुद को जान पाऊं…आप जैसे मित्रों के माध्यम से ही जानने की कोशिश करता हूं. कभी आपको अच्छा लगता हूं कभी आपको बुरा लगता हूं लेकिन सब चीज मेरे सरआखों पर है. घोर विरोध है तो भी सरआंखो पर है अतिशय प्रेम है तो भी सरआंखो पर है विरोध है उसको प्रेम में पलटने का प्रयास करुंगा और जो प्रेम करते है लेकिन अंधा करते हैं तो उनको सत्य दिखाने की भी कोशिश करुंगा. दोगली जिंदगी नहीं जिउंगा  मुखौटा बनकर के देश के सामने नहीं रहूंगा जैसे हूं वैसे ही जीने की कोशिश करुंगा.

 

राजीव खांडेकर: मोदी जी आपके ऊपर जो प्रेम करने वाले है उससे महाराष्ट्र में एक नया संकट पैदा हो गया है वो ये कि राज ठाकरे आपको सपोर्ट कर रहे हैं उनका ये कहना है कि सबसे पहले उन्होनें ये कहां ये बात कही थी कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री होने चाहिए और शुरू से वो ये करते आए हैं कहते आए हैं लेकिन अब जब वो आपको सपोर्ट कर रहे है तो आपके पार्टा के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि ये बिन बुलाए मेहमान और इनके सपोर्ट की जरुरत नहीं है और अगर सपोर्ट करना है तो अंदर आकर करें. आप इन सारी चीजों को कैसे देखते है ?

 

मोदी: जंहा तो 16 मई के बाद जब चुनाव नतीजे आएंगे मेरा पक्का विश्वास है कि सरकार चलाने के लिए कोई भी ऐसे सपोर्ट की जरुरत नहीं पड़ेगी लेकिन देश चलाने के लिए सबके सपोर्ट की जरुरत रहेगी और मेरा ये मत है कि लोकतंत्र में देश चलाने के लिए राजनीति से ऊपर उठकर के हर किसी का सहयोग लेना चाहिए, सरकार चलाने के लिए जरुरत पड़ने वाली नहीं है, जनता हमें भरपूर देने वाली है. लेकिन देश चलाने के लिए सबका सपोर्ट लेना चाहिए अगर अमेठी में राहुल जी जीत के आते हैं संभावना कम है और वो लीडर ऑफ द opposition बनते हैं तो उनका भी सहयोग लेना चाहिए ये मेरा मत है, देश ऐसे नहीं चलता है जी देश चलाना है तो सबको साथ लेकर चलना पड़ता है, सरकार चलाने के लिए ठीक है जनता ने जो verdict दिया है उनको लेकर चलेंगे

 

शाज़ी ज़मां: इस पर मतभेद है लगता है पार्टी में कि रॉबर्ट वॉड्रा पर कारवाई होगी या नहीं होगी ?

 

मोदी : ये मैं समझता हूं कि बहुत ही गंदा सवाल है , बहुत गंदा सवाल है.. एक तरफ देखें तो कोई कानून से परे नहीं है मान लीजिए नरेंद्र मोदी पर कोई इल्जाम हो और कल मानो नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गया तो क्या उस पर केस चलने चाहिए कि नहीं चलने चाहिए चूंकि मैं प्रधानमंत्री बन गया तो इसलिए  नहीं नहीं सब बंद करो ऐसा तो नहीं होना चाहिए. मैं किसी से परे तो हूं नहीं  मैं मेरी बात बताता हूं मैं जिनके लिए आपने पूछा मैं उनके लिए जबाव नहीं दे रहा हूं इसलिए मिक्सअप मत करना वो न्यूज ट्रेडर वाला खेल आप तो नहीं करेंगे मुझे आप पर भरोसा है लेकिन सरकार में मेरा 14 साल का अनुभव मैं बताता हूं मैंने कभी किसी की फाइल खोली नहीं किसी की भी नहीं और मेरा ये मत रहा है कि अगर मैं उसमें उलझ जाता तो उसमें घुसता ही चला जाता मैं कोई अच्छा काम नहीं कर पाता लेकिन मैंने वो दरवाजे ये मेरा व्यक्तिगत सोच है इसको मैं सरकारी सोच के रुप में नहीं बता रहा हूं. मैंने अपने आपको इससे अलग कर लिया 14 साल में और मैंने नए पॉजीटीव initiative पर ही बल दिया. मुझे मालूम तक नहीं होता है पुरानी चीजें है चलती होगी चलती होगी वो सरकार जाने सरकार का काम जाने हम पांच साल के लिए आते है पांच साल में ये कूड़ा कचरा लेकर घूमते रहेंगे कि कुछ अच्छा करेंगे. तो व्यक्तिगत मेरा मत है कि मेरी शक्ति ये कूड़े कचरा में न जाए ये मेरा मत है . मेरी शक्ति सकारात्मक कामों में जाए अच्छा करने में जाए वरना पांच साल बहुत कम समय होता है जी इसमें हम उलझे रहेंगे तो देश का भला क्या करेंगे. बाकि कानून कानून का काम करता रहे वो करता रहे.

 

शाज़ी ज़मां: ये सवाल इसलिए उठा, ये सावल मैं इसलिए पूछ रहा हूं कि आपके पार्टी की ही आवाज थी की जमाई बाबू जेल जाएंगे इसलिए हमने सवाल पूछा?

 

मोदी: देखिए आपने सवाल गलत पूछा, अच्छा बुरा किया ये मेरा मुद्दा नहीं है , हर गली मोहल्ले की चीजें हम इक्ट्ठी करके वो सारे जवाब मुझे देना पड़े ऐसा करोगे तो कैसे चलेगा भई…मेरी पार्टी का जो official stand है वही हम तो  reflect करेंगे .

 

शाज़ी ज़मां: एक बड़ा राष्ट्रीय प्रश्न

 

कश्मीर का क्या हल है ?

 

शाज़ी ज़मां: क्या ये सही है कि आप की तरफ से कोई पहल हुई थी एक अलगाववादी से बात करने कि.

 

मोदी: मुझे तो सुनकर हैरानी हुई… ये कहां से आया खैर आज तो शायद मैंने मालूम नहीं मैंने मीडिया देखा नहीं पर क्लियर हो गया किसी ने कह दिया कि नहीं नहीं हम कोई मोदी के दूत नहीं है मुझे तो नाम भी मालूम नहीं हैं ऐसे ही कोई खबर चलती है.

 

शाज़ी ज़मां: पाकिस्तान के बारे में आपकी पार्टी आरोप लगाती है यूपीए पर कि कमजोर रवैया है पाकिस्तान के प्रति आपकी नजर में मजबूत रवैये की परिभाषा क्या है?

 

मोदी: पहली बात ये है हम लोग देश को ऐसे चलाएं, देश को ऐसा बनाएं,  ताकि कोई हमें आंख न दिखाए और हमे भी दुनिया के सामने आंख दिखाकर के व्यवहार नहीं कर सकते हैं. आंख दिखाकर के भी दुनिया नहीं चल सकती, आंख झुकाकर भी नहीं चल सकती है. बात आंख मिलाके होनी चाहिए  और वो अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में reciprocacy होती है वहीं उत्तम तरीका होता है

 

शाज़ी ज़मां: इसी से जुड़ा एक और सवाल सवाल ये कि क्या आप अमेरीका जाएंगे अगर प्रधानमंत्री बनते हैं तो

 

मोदी: ये बड़ा loded सवाल है जी ये loded सवाल है देश की जनता ने मुझे देश का काम करने के लिए चुना है.

 

शाज़ी ज़मां: आपकी शख्सियत के एक पक्ष को हम देखते हैं वो आपका औपचारिक चेहरा है जो इस समय भी देख रहे हैं मंच पर भी देखते है इसके अलावा भी तो एक नरेंद्र मोदी होंगे अब 10 बजे से ज्यादा हो गया है इस वक्त आधिकारिक और राजनैतिक कार्य जब समाप्त होता है तो नरेंद्र मोदी क्या करते है?

 

मोदी: मेरा कोई कार्यकाल समाप्त होता ही नहीं हैं मैं बहुत workoholic हूं और सोने का समय या खाने का समय इतना छोड़ दूं जो मैं खुद के लिए ईश्वर ने जो व्यवस्था की है जो मुझे उपयोग करना पड़ता है बाकि सारा समय मैं और मेरा गुजरात  लोगों के काम इसी में लगा रहता हूं जी, देखिए आज मैं अभी आया एअरपोर्ट से पूरे दिन भर मैं छत्तीसगढ़ था महाराष्ट्र था मेरी 3d सभा थी लेकिन जब मैं जलगांव से निकला तो मुझे पता चला कि बड़ी आंधी आई है तो मैंने वहीं से शुरू कर दिया कि बताओ भाई क्या स्थिति है  मरे हैं क्या लोग कहीं नुकसान हुआ है फटाफट  मैं उसमें लग गया . इसके कारण आपके पास भी देर से पहुंचा. तो मैं चैन से बैठ नहीं सकता हूं. मेरा मन ऐसे में ब्रम्हाण हो चुका है यही मेरी जनती ही मेरा भगवान है.

 

सुमन डे: मोदी जी इस दफ्तर में पैर रखके ही पता चला कि आप स्वामी विवेकानंद जी के बड़े भक्त हैं आपके बार बार भाषण मैं वो  आते हैं मैं बंगाल से हूं  बैलूर मथ  से आपका लगाव है मैंने सुना था कि आप बैलूर मथ गए थे साधू बनने के लिए तो क्या वो हिस्सा आपके जिंदगी का  बताएंगे हमें ?

 

मोदी: वैसे अभी भी कुछ मेरे साथी स्वामी जी जो हैं अभी भी हैं वहां वो भी बताएंगे आपको स्वामी अपस्थानंद जी हैं अब तो आयु भी बहुत हो गई अभी मैं उनके पास गया था लंबे अर्से तक उनके पास रहा था उनके गुरुबंधु थे उनके पास भी मैं काफी रहा था तो चाहे वो एक अलग दुनिया है अब इसको कहां खोलेगें.

 

सुमन डे:: आज कल मिस करते हैं उस दुनिया को ?

 

मोदी: मेरा बहुत ही उन सबसे बड़ा लगाव है, सबसे लगाव है मेरा लेकिन अब जो कर नहीं पाता हूं तो याद करता हूं तो पीडी से पीड़ा हो जाती है तो मैं इसी काम मैं लगा रह जाता हूं.

 

सुमन डे: मोदी जी अपने राज्य से जुड़ा कुछ सवाल पुछना चाहेंगे? एक है कि आप पे ये आरोप सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस लगा रही है कि आप राज्य को तोड़ना चाहते हैं ? आप दार्जिलिंग एक सीट के लिए आप गोरखालैंड की जो मांग है उसको sympathy से विचार करने का आश्वासन दिया है जो कि सत्ताधारी पार्टी बोल रही है कि राज्य को तोड़ने की कोशिश कर रहे है ?

 

मोदी: इतने बड़े देश में आप regional aspirations को घाव मार मार करके दबाने की कोशिश करोगे तो घाव ज्यादा उभरेगा sympathically हर एक की भावनाओं को समझना चाहिए, समझाने की कोशिश करनी चाहिए और संवाद से रास्ते निकल सकते है और ये बात सार्वजनिक रुप से मुझे कहनी चाहिए मैंने कही है .

 

सुमन डे: तो आप समझ के गोरखालैंड के मांग को निरस्त करेंगे?

 

मोदी : नहीं नहीं मैं क्या कहता हूं अगर मेरे इस भाषण के वाक्य को किसी ने चैलेंज किया है तो मैं आपको समझा रहा हूं कि क्या है तो ये है

 

शाज़ी ज़मां: एक सवाल आपके manifesto के बारे में राम मंदिर,  uniform civil code लंबे समय से रहा है पार्टी के agenda.  वो कभी पुरा नहीं हुआ जिस तरह से वादा किया गया ?आपकी छवि तेज तर्रार नेता की है क्या आप वाकई पूरा भी कर सकते है इसे?

 

मोदी : देश तेजतर्रारी से  नहीं चलता है जी, देश संविधान से चलता है देश संवैधानिक मर्यादाओं से चलता है और देश आगे भी संविधान की मर्यादाओं से ही चलने वाला है तेजतर्रार वो चुनाव के लिए होता है देश चलाने के लिए नहीं होता हैं.

 

राजीव खांडेकर: मोदी जी महाराष्ट्र में आज आपके जो साथ है शिवसेना और आपको बाहर से सपोर्ट कर रही है वो महाराष्ट्र नव निर्माण सेना है इन दो नेताओं के जो नेता है राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में हमेशा लोगों को ऐसा लगा है कि ये दोनों साथ आएगें तो अच्छा हो जाएगा. क्या आपने कभी ये कोशिश की है कि इसमें आप कुछ कर सकें क्योंकि आपके दोनों के साथ बहुत ही अच्छे रिश्ते हैं शुरू से.

 

मोदी: देखिए व्यक्तिगत संबंधों को राजनीति के तराजू से तौलना ठीक नहीं होगा. और इसलिए मैंने कभी मेरी मर्यादाओं का उल्लघन नहीं किया है . मित्रता तक ही बातों को सीमित रखा है  कभी भी मैंने इस विषय का initiative नहीं लिया है  न ही इन चीजों को हाथ लगाया है. और न ही वो काम मुझको किसी ने दिया है तो मैं मान न मान मैं तेरे मेहमान करके मैं क्यों उलझूं भाई, मैं ऐसी चीजों में उलझता नहीं हूं.

 

शाज़ी ज़मां: एक आखिरी सवाल

 

क्या आप के समर्थन में बॉलीवुड बंट गया है ?

 

शाज़ी ज़मां: क्या ये सही है ?

 

मोदी: मेरा बॉलीवुड से बहुत कम परिचय है जी मैं उस पूरे दुनिया को जानता ही नहीं हूं थोड़ा बहुत ये मुख्यमंत्री बनने के बाद कुछ लोग मिलने आए वो भी व्यावसायिक कारणों से मिले है लोग मुझे, मुझे इस दुनिया से कोई मेरा परिचय नहीं है कोई ज्यादा अब बाकी तो हर एक अपने अपने position  लेता है ? बॉलीवुड है तो उनके विचार रहते होंगे . हर व्यक्ति को अपना वाणी स्वातंत्रय होता है विचारने का अधिकार होता है . और वो पूरे देश में अलग अलग  विचार के लोग मिलेंगे . हम कभी ऐसा तो मीटिंग करते हैं..  IITians में कोई भेद हुआ है क्या, मीडिया में भेद हुआ है क्या ? 6 मीडिया वाले मोदी के पक्ष में 8 मीडिया वाले नहीं ऐसा debate तो कभी नहीं करते

 

शाज़ी ज़मां: अगर ये मौका हो आपके सामने कि आप आमिर खान की फिल्म देंखे या सलमान खान की  किसकी देखना चाहेंगे ?

 

मोदी: पहली बात  है कि आप भी ईश्वर को प्रार्थना करो कि मुझे मूवी देखने का समय मिले और मैं देखने के लिए जाऊं फिर जिसकी पहली मिलेगी देखूंगा. दोनों एक साथ नहीं देख पाऊंगा .

 

राजीव खांडेकर : लेकिन क्या आप बिल्कुल फिल्में नहीं देखते हैं.

 

मोदी: मौका ही कहां मिलता है जी, बहुत पहले देखते थे एक कोई अमिताभ जी के साथ उनका एक  लॉन्चिंग था तो मैंने पा देखी थी. और एक शायद वो आए थे हमारे अनुपम जी उन्होंने wednesday बनाया था.. वो दो फिल्में पिछले 10 साल में एक शायद विवेकानंद जी के 150 जंयती पर बनीं , मैं खुद उसमें मेहनत करता था उसको सफल करने में तो इसलिए चला गया था.

 

राजीव खांडेकर: तो विवेकानंद की फिल्म कैसी लगी थी ?

 

मोदी: अच्छी बनी है. अच्छी बनी है,  यानि हमारी young generation, international भी young generation को मैसेज देने के लिए और बड़ा ही बड़ा चमात्कार नहीं बताया वो अच्छा लगा मुझे बिल्कुल simple एक समाज सेवक कैसा होता है वैसा फिल्म है वो.

 

शाज़ी ज़मां: तो नरेंद्र मोदी कभी relaxe नहीं करते ?

 

मोदी: मेरा कार्य ही मेरा relaxation है अलग मुझे एक्सट्रा जरुरत नहीं पड़ती

 

राजीव खांडेकर: कितने बजे शुरू होता है दिन आपका ?

 

मोदी: आम तौर पर मैं 5 बजे उठता हूं और वो मैं आरएसएस में था तबसे आदत लगी हुई है. मेरी नींद बहुत कम है बहुत कम है. साढ़े तीन घंटे बहुत हो गया और इसलिए मेरे सारे जो परिचित मित्र है मेरे डॉक्टर मित्र है उन सबकी मेरे लिए यही शिकायत रहती है की भले नींद न आए सो जाओ लेकिन मेरे लिए वो sufficient होती है देखिए मैं इतना घंटों तक काम करके आया हूं  आराम से आपसे बातें कर रही  हूं , जी.

 

सुमन डे: राज्य में अभी सबसे बड़ा  issue  है कि शारदा का घोटाला , राज्य सरकार नहीं चाहती है कि किसी भी मूल पर सीबीआई न हो? आपको क्या लगता है आप खुद सिलीगुड़ी में रैली में मुद्दे को उछाले थे ?तो आपको क्या लगता है कि होना चाहिए या नहीं?

 

मोदी: ये चिट फंड का मसला हैं न बहुत गरीब लोगों का पैसा गया है  इतने छोटे छोटे लोगों का पैसा गया है अब वो उसमें से कुछ लोगों ने आत्महत्या करने तक गए. ऐसी स्थिती में लोगों को भरोसा हो ऐसे कदम तो उठाने ही चाहिए कौन सा फौरम हो क्या न हो वो एक अलग विषय है..लेकिन लोगों को भरोसा हो ऐसे कदम तो उठाने ही चाहिए

 

ABP ANANDO और ABP MAJHA और  ABP NEWS की तरफ से आपका बहुत धन्यवाद हमनें बहुत ध्यान से आपके प्रश्नों को सुना और अगर आप सत्ता में आते हैं तो हम चाहतें हैं कि मिल कर हम उन जवाबों का मूल्यांकन करें फिर बात करें

 

मोदी: नहीं नहीं करते रहना चाहिए, करते रहना चाहिए और बंगाल के लोगों के लिए हम कहेंगे भालो आछे और महाराष्ट्र के लोगों के लिए कहेगें भरतवा बढ़ावा ….

 

धन्यवाद

Posted by on Apr 22 2014. Filed under वीडियो. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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