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इस भारतीय शख्स ने दी थी आइंस्टीन के सिद्धांत को चुनौती, जानें पूरी कहानी

Great mathematician dr vashisht narayan singh who challenged Einstein Gauss theory

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इस बिहारी शख्स ने दी थी आइंस्टीन के सिद्धांत को चुनौती | (14 मार्च- मैथ डे)

डा वशिष्ठ नारायण सिंह ने न सिर्फ आइंस्टिन के सिद्धांत E=MC2 को चैलेंज किया, बल्कि मैथ में रेयरेस्ट जीनियस कहा जाने वाला गौस की थ्योरी को भी उन्होंने चैलेंज किया था।
ऐसा कहा जाता है कि अपोलो मिशन के दौरान डा सिंह नासा में मौजूद थे, तभी गिनती करने वाले कम्प्यूटर में खराबी आ गई। ऐसे में कहा जाता है कि डा वशिष्ठ नारायण सिंह ने उंगलियों पर गिनती शुरू कर दी। बाद में साथी वैज्ञानिकों ने उनकी गिनती को सही माना था।
अमेरिका में पढ़ने का न्योता जब डा वशिष्ठ नारायण सिंह को मिला तो उन्होंने ग्रेजुएशन के तीन साल के कोर्स को महज एक साल में पूरा कर लिया था।
14 मार्च को मैथ डे के रूप में मनाया जाता है। मैथ डे मूल रूप से एक ऑनलाइन कम्प्टीशन था, जिसकी शुरुआत 2007 से हुई थी। इसी दिन पाई डे (Pi) भी मनाया जाता है, जिसका उपयोग हम मैथ में करते हैं। मैथ डे पर हम आपको बता रहे हैं एक ऐसे गणितज्ञ के बारे में, जिनका लोहा पूरी दुनिया मानती है। इन्होंने कई ऐसे रिसर्च किए, जिनका अध्ययन आज भी अमेरिकी छात्र कर रहे हैं। हाल-फिलहाल डा वशिष्ठ नारायण सिंह मानसिक बीमारी सीजोफ्रेनिया से ग्रसित हैं। इसके बावजूद वे मैथ के फॉर्मूलों को सॉल्व करते रहते हैं।

डा वशिष्ठ नारायण सिंह का जन्म बिहार के भोजपुर जिले के बसंतपुर गांव में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। यह गांव जिला मुख्यालय आरा से 12 किलोमीटर की दूरी पर है।
वशिष्ठ नारायण सिंह ने छठवीं क्लास में नेतरहाट स्कूल में एडमिशन लिया। इसी स्कूल से उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और पूरे बिहार में टॉप किया। इंटर की पढ़ाई के लिए डा सिंह ने पटना साइंस कॉलेज में एडमिशन लिया। इंटर में भी इन्होंने पूरे बिहार में टॉप किया।
1960 के आस-पास बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग का नाम पूरी दुनिया में था। तब देश-विदेश के दिग्गज भी यहां आते थे। उसी दौरान कॉलेज में एक मैथमेटिक्स कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कांफ्रेंस में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बार्कले के एचओडी प्रो जॉन एल केली भी मौजूद थे।
कांफ्रेंस में मैथ के पांच सबसे कठिन प्रॉब्लम्स दिए गए, जिसे दिग्गज स्टूडेंट्स भी करने में असफल हो गए, लेकिन वशिष्ठ नारायण सिंह ने पांचों सवालों के सटिक जवाब दिए। उनके इस जवाब से प्रो केली काफी प्रभावित हुए और उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका आने को कहा।
डा वशिष्ठ नाराय़ण सिंह ने अपनी परिस्थितियों से अवगत कराते हुए कहा कि वे एक गरीब परिवार से हैं और अमेरिका में आकर पढ़ाई करना उनके लिए काफी मुश्किल है। ऐसे में प्रो केली ने उनके लिए विजा और फ्लाइट टिकट का इंतजाम किया। इस तरह डा वशिष्ठ अमेरिका पहुंच गए।
वशिष्ठ नारायण सिंह काफी शर्मिले थे, इसके बावजूद अमेरिका के कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में उनकी काफी अच्छे से देखरेख की गई। यही से उन्होंने PhD करके डॉक्टरेट की उपाधी पाई। डा सिंह ने ‘साइकिल वेक्टर स्पेश थ्योरी’ पर शोध कार्य किया और पूरे दुनिया में छा गए।
इस शोध कार्य के बाद डा सिंह वापस भारत आए और फिर दोबारा अमेरिका चले गए। तब इन्हें वाशिंगटन में एसोसिएट प्रोफेसर बनाया गया।
वे वापस भारत लौट आए। तब उन्हें खुद यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के प्रोफेसर डा केली और नासा ने रोकना चाहा, लेकिन वे नहीं माने और भारत वापस आ गए।
1971 में वापस आने के बाद इन्हें आईआईटी कानपुर में प्राध्यापक बनाया गया। महज 8 महिने काम करने के बाद इन्होंने बतौर गणित प्राध्यापक ‘टाटा इंस्टीच्युट ऑफ फण्डामेंटल रिसर्च’ ज्वाइन कर लिया। एक साल बाद 1973 में वे कोलकाता स्थित आईएसआई मे स्थायी प्राध्यापक नियुक्त किए गए।

 

The man was given by Einstein’s theory challenged AB | (14 March – Math Day)

Dr. Vashishtha Narayan Singh Challenge not only Ainstin theory E = MC2, but the math genius Reyrest called the Theory of Ghaus he was challenged.
It is said that Dr Singh NASA during the Apollo missions were present, counting only glitch in the computer. So said Dr. Vashishtha Narayan Singh started counting on his fingers. Later his fellow scientists had believed to be accurate count.
Dr. Vashishtha Narayan Singh invited to read in the U.S. when he was three years of graduation course was completed in just one year.
As Math Day is celebrated on March 14. Math Day was originally an online Kmptishn, beginning from 2007. The same day, pie day (Pi) is also celebrated, in which we use the math. Math Day, we’re telling you about a mathematician, whose iron holds the whole world. He conducted such research, the American students whose studies are today. Most – The Dr. Vashishtha Narayan Singh Sijofrenia suffer from mental illness. Despite this, the math formulas to keep the Solv.

Dr. Vashisht Narayan Singh’s birth Basantapur village of Bhojpur district of Bihar was born in a poor peasant family. The village is 12 kilometers from the district headquarters, Ara.
Vashisht Narayan Singh took admission in the sixth class Netrhat school. He passed the matriculation examination from the school and topped the entire state. Prime Minister to study inter taken admission in Patna Science College. He also topped the intermediate state.
1960 around the world in the name of Bihar College of Engineering. The country – foreign giants came here. During the conference that was held at the College Mathematics. In this conference, University of California, Barclay’s HOD Prof. John L. Kelly was also present.
Math Problems in the conference’s five most difficult, the veteran students have failed to do, but accurate Vashishtha Narayan Singh answered all five questions. Their response Prof. Kelly impressed and asked them to come to the U.S. for further studies.
Vasishta Narayhn Dr Singh said he was informed of the circumstances and in the U.S. come from a poor family is very difficult for them to study. The visa and flight ticket Prof. Kelly arranged for them. Dr Vasishta thus reached America.
Vashisht Narayan Singh were quite Sharmile, despite their very best at the University of California were supervised. He found the PhD degree and doctorate. The Prime Minister ‘Cycle Vector Space Theory and research on the world dork.
The research work by Dr Singh came back to India and then went to America again. Then he was an associate professor at Washington.
He returned back to India. The University of California professor Dr Kelly himself and NASA tried to stop, but they would not come back to India.
After his return in 1971 he was made professor at IIT Kanpur. He just 8 months after working as a mathematics professor, Tata Institute of Fundamental Research have joined. A year later in 1973 he was appointed Permanent faculty in ISI Kolkata.

Source : bhaskar.com

Short URL: http://jayhind.co.in/?p=1734

Posted by on Mar 16 2013. Filed under खबर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

1 Comment for “इस भारतीय शख्स ने दी थी आइंस्टीन के सिद्धांत को चुनौती, जानें पूरी कहानी”

  1. Ravi Ranjan singh

    aisa desh hai mera

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