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1,000 विद्वानों ने 25 वर्षों में तैयार किया पहला हिंदू विश्वकोष

Hindu encyclopedia to be unveiled today

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हिंदू धर्म विश्वकोष (इनसाइक्लोपीडिया ऑफ हिंदुइज्म) के अंतरराष्ट्रीय संस्करण का सोमवार को अमेरिका में लोकार्पण किया गया। हिंदू धर्म व संस्कृति से जुड़े भारत व दुनिया के लगभग एक हजार विद्वानों, प्रोफेसरों, अनुसंधानकर्ताओं और विशेषज्ञों के सहयोग से इसे 20 सालों में तैयार किया गया है। अंग्रेजी में तैयार हिंदू धर्म विश्वकोष में पहली बार भारत की महान आध्यात्मिक संस्कृति का अत्यंत गहरा, विशुद्ध प्रामाणिक, शैक्षणिक और विज्ञानसम्मत व्यापक सारतत्व मौजूद है।

11 खण्डों एवं 7 हजार प्रविष्टियों वाले इस विशालकाय विश्वकोष का प्रकाशन प्रख्यात संत व ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ‘मुनि जी’ की अध्यक्षता वाले भारतीय संस्कृति शोध संस्थान (इंडियन हेरिटेज रिसर्च फाउंडेशन) द्वारा कराया गया है। यह विश्वकोष लाखों-लाख वर्ष पूर्व के इतिहास, विज्ञान, कला, संस्कृति, संगीत, नृत्यकला, नाट्यकला, स्थापत्यकला, राजनीति, धर्म, दर्शन आदि का संक्षिप्त सारतत्व है। खास बात यह है कि यह हिंदू धर्म विश्वकोष केवल हिंदुत्व के ज्ञान-विज्ञान को ही प्रदर्शित नहीं करता, बल्कि इसमें आध्यात्मिक संस्कृति के समस्त पंथों सिख, जैन और बौद्ध आदि की परंपराओं को भी समाहित किया गया है।

कोलंबिया स्थित साउथ कैरोलिना विश्वविद्यालय के परिसर में संपन्न इस लोकार्पण कार्यक्रम में स्वामी चिदानंद सरस्वती के अलावा प्रख्यात समाजसेवी अन्ना हजारे, साउथ कैरोलिना की राज्यपाल निक्की हेले, विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. हैरिस पेस्टीड्स, अमेरिका में भारत के महावाणिज्यदूत अजीत कुमार आदि मौजूद रहे। विश्वकोष के प्रधान संपादक डॉ. केएल शेषगिरि राव और प्रबंध संपादक साध्वी भगवती सरस्वती ने भारत की ओर से अतिथियों का स्वागत किया गया। साध्वी भगवती सरस्वती ने बताया कि इस विश्वकोष को लेकर अमेरिका में खासा उत्साह देखने को मिला है।

भारतीय संस्कृति से विश्व को रूबरू कराएगा विश्वकोष

स्वामी चिदानंद सरस्वती के मुताबिक, हिंदू धर्म के अलावा अन्य धर्मो के विश्वकोष पहले से मौजूद हैं।hindu ऐसे में विश्व के प्राचीनतम हिंदू धर्म के विश्वकोष की आवश्यकता को पूरा करने के लिए यह प्रयास किया गया। भारत की महान संस्कृति ने दुनिया भर को मार्ग दिखाया है और यह विश्वकोष उसी की जरूरत को पूरा करते हुए भारतीय संस्कृति के उजले व अत्यन्त गहरे पक्षों का परिचय विश्वजनमानस को कराएगा। अमेरिका में इसके लोकार्पण कराने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म विश्वकोष के बारे में पहला विचार उन्हें अमेरिका में ही आया था। इसके बाद उन्होंने इस पर अमेरिका में रहने वाले मित्रों, विद्वानों और भारतीय परिवारों से इसकी चर्चा की। इस विश्वकोष को तैयार करने में अमेरिकी प्रोफेसरों और वैज्ञानिकों ने अग्रणी भूमिका निभाई। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत लगातार प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। इस देश की सबसे बड़ी संपदा है आध्यात्म। इसी के माध्यम से आज दुनिया सुखी जीवन के मंत्र तलाश रही है।

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Posted by on Aug 27 2013. Filed under खबर, हिन्दुत्व. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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