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हिन्दू नववर्ष

hindu nav varsh

कई दिनों से देख रही हूँ लोग ईसाई नववर्ष को ऐसे महिमामंडित कर रहे हैं जैसे ये नववर्ष ना होता तो हम आदिम युग में जी रहे होते। देखिये विरोध हम भी नहीं कर रहे हैं आपको मनाना हैं मनाइये कौन रोक रहा हैं मगर आप हमारे हिन्दू नववर्ष को अपने कुतर्को से अपमानित करने का प्रयास करेंगे तो यह हम नहीं होने देंगे। अगर आपको लगता हैं इसाई नववर्ष श्रेष्ठ हैं तो आइये आज हिन्दू और इसाई नववर्ष को वैज्ञानिक कसौटी पर परखते हैं

इसवी सन गणना का आकाशीय पिंडो और ऋतुओ से कोई सम्बन्ध नहीं हैं इन्हें एक के बाद दो और दो के बाद तीन – इस गणना का ही ध्यान रहता हैं। रविवार के सोमवार क्यों आता हैं मंगलवार क्यों नहीं आता इसका इनको कोई ज्ञान नहीं पर भारतीय ज्योतिष का विद्यार्थी इन सब रहस्यों को जानता हैं क्योकि वारो का नामकरण भारतीय ज्योतिषयो ने ग्रहों के आधार पर उनके परिक्रमा पथ व् प्रभाव को देख कर किया।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री मोरार जी देसाई पर इसवी सन के हिसाब से जन्मदिन मनाने पर मुसीबत ही टूट पड़ी क्योकि उनका जन्म 29 फरवरी को हुआ था और 29 फरवरी वापस आने के लिए उनको तीन वर्ष तक इन्तजार करना पड़ता था। क्योकि इसवी सन 365 दिन 5 घंटे 52 मिनट और 45 सेकेण्ड का होता हैं सो तीन वर्ष तक तो प्रतिवर्ष 365 दिन का माना जाएगा पर चौथे वर्ष फरवरी महीने को 29वी तारीख बढ़ा कर 366 दिन का मान लिया जाता हैं। अब गणित के इस झमेले को भी देखे कि क्या 5 घंटे 52 मिनट और 45 सेकेण्ड को चार से गुणा करने पर 24 घंटे का एक दिन बन पायेगा? नहीं इसमें उनकी ही गणना से सवा सात मिनट का अंतर रहेगा। इस कमी के कारण इसवी सन गणना आगे पीछे चलती रहती हैं।

हमारी तिथिया वैदिक विज्ञान -आकाशीय गणनाओ पर आधारित हैं हम डंके की चोट पर कह सकते हैं की अमावस्या को ही सूर्यग्रहण होगा और पूर्णिमा को ही चंद्रग्रहण होगा आगे पीछे नहीं, क्या ऐसा कोई दावा इसवी सन मानने वाला कर सकता हैं।हमारे ज्योतिषी आकाश में चंद्रमा को देखकर तिथि और माह बता सकते हैं क्या कोई व्यक्ति आकाश देख कर ये बता सकता हैं की आज अंग्रजी महीने की अमुक तारीख और महीना होना चाहिए। क्या कोई अंग्रेजी तारीख के हिसाब से ये बता सकता हैं की समुन्द्र में ज्वार-भाटा कौन कौन सी तारीख को आएगा ?

भारतीय संवत गणना में तीसरे वर्ष अधिमास आता हैं। इस वैज्ञानिक तरीके से ऋतुओ का शुद्धिकरण हो जाता हैं। आज हजारो हजारो वर्ष हो गए परन्तु वसंत ऋतु हमारे चैत्र और वैसाख में ही वृक्षों में नव पल्लव को अंकुरित करेगा। ज्येष्ठ और आषाढ़ मास में ही सूर्य तपेगा। श्रावण और भादो में ही वर्षा होगी, मार्गशीर्ष और पौष मास में ही कडकडाती ठण्ड पड़ेगी। माघ और फाल्गुन में ही पतझड़ प्रारम्भ होगी। ऋतुओ का इतनी वैज्ञानिक सूझ बुझ कही नहीं हैं। हमारी तिथि वृद्धि, तिथि क्षय अप्रमाणिक होते तो प्रकृति कभी हमारा साथ नहीं देती।

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भारत -एक हिन्दू राष्ट्र

अंकिता सिंह

Web Title :  हिन्दू नववर्ष

Keyword : hindu nav varsh ,new year

Short URL: http://jayhind.co.in/?p=4246

Posted by on Jan 1 2014. Filed under हिन्दुत्व. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

2 Comments for “हिन्दू नववर्ष”

  1. adbhut jankaar dhanyawad mehtavapoorn jankari ke liye

  2. Pratap Mishra

    main sahamat hoon apki baato se aur pichle kai varsho se main apne prakritik aur purn vaigyanik adhar par vikasit panchang adharit navvarsha manata hoon..

    Hindu hone ka mujhe garv hai..Jai Hind

    Pratap Mishra

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