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कांग्रेस का इतिहास ???

कांग्रेस का इतिहास ???

भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी का इतिहास कितना गौरवशाली रहा है. इस बात की विवेचना के लिए पूरा लेख पढ़ना ज़रूरी है. आपको याद होगा इसकी स्थापना विदेशी ने की थी और उद्देश्य भारत को आज़ादी दिलाना नहीं था. बल्कि अँग्रेज़ों की जब सत्ता पर पकड़ ढीली पद रहीं थी तब भारत के आमिर लोगों को सत्ता में भागीदारी रूपी टुकड़े देकर पैठ बनाए रखना वेदेशियों का मकसद रहा. धीरे धीरे जब कांग्रेस को लगा की वो खुद सत्ता पा सकते हैं और जब इसमें भारतीयों का, यानी की उन भारतीयों का बाहुल्या हुआ जो सत्ता के भूखे थे तब इसने देश की आज़ादी की तरफ हाथ पैर मारना चालू किया. परंतु कांग्रेस में प्रजातंत्र कभी नहीं रहा ये हमेशा विदेशियों या विदेशी विचारधारा वालो की जागीर बनी रही.

history of the congress

history of the congress

यही कारण था की जब सुभाष चंद्र बोस विधिवत चुन लिए गये तब गाँधी जी जैसे महापुरुष ने भी उनसे इस्तीफ़ा माँग लिया था. जब प्रधानमंत्री चुनने की बात आए तो जिन्ना जो कि नेहरू से सीनियर थे, को दरकिनार कर दिया गया. नेहरू जी जब प्रधान मंत्री बने तब भी उन्होंने हिन्दी को अपना दर्ज़ा नहीं दिलाया बल्कि अँग्रेज़ी को कामकाज की भाषा से नवाज़ा. बल्लभ भाई पटेल को गृह मंत्रालय देकर भी कश्मीर के मामले में दखल नहीं करने दिया. कांग्रेस में हमेशा भारत विरोधी और पार्टी को जागीर समझने वालों का बोलबाला रहा इंदिरा गाँधी ने देशी बहू मेनका को घर से निकालकर विदेशी बहू को सर आँखों पे बिठाया, आम आदमी को भ्रमित रखने में कांग्रेस हमेशा कामयाब रहीं क्योकि हम गोरी चमड़ी या विलायती चीज़ें ज़्यादा पसंद रहीं. हर काला व्यक्ति गोरे से नफ़रत करात रहा और अपने से अधिक गोरे के चरण चुंबन करता रहा तभी तो आरके धवन ने कहा था की में राहुल के बेटे के भी पैर छूना पसंद करूँगा.

ऐसी चाटुकरिता भरी पार्टी को देश की उन्नति की फुर्सत कहाँ से रही होगी. हम राजीव गाँधी के चिकने चूपदे चेहरे पर आकर्षित होते रहे वो बोफोर्स जैसे कांड के कांड बेशर्मी से करते गये फिर भी हम अब सोनिया जी के पिच्छलागगॉ बनकर यू पी ए बनाते गये. जो कांग्रेस छोड़ कर नयी पार्टी बनाते वो भी कांग्रेस के साथ गठबंधन करते गये सत्ता सुंदरी की खातिर. कांग्रेस का चरित्र कांग्रेस पार्टी तक सीमित नहीं, इसका वायरस तो पुर देश में फैल चुका है . हम अपनी मानसिकता बदलने को तैयार नहीं, तानाशाही हमें संगठित रख पाती है.

 

दीपक सक्सेना
लिन्क : http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/akela19041964/entry/%E0%A4%95-%E0%A4%97-%E0%A4%B0-%E0%A4%B8-%E0%A4%95-%E0%A4%97-%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%B6-%E0%A4%B2-%E0%A4%87%E0%A4%A4-%E0%A4%B9-%E0%A4%B8

Short URL: http://jayhind.co.in/?p=1185

Posted by on Jul 13 2012. Filed under खबर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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