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ऐसे काबू में करें सेक्स अडिक्शन

You Need To Know About Sex Addiction

You Need To Know About Sex Addiction

सेक्स अडिक्शन एक ऐसी बीमारी है, जिसका पता इस बीमारी से पीड़ित लोगों को भी आसानी से नहीं चल पाता और जब तक पता चलता है, काफी देर हो चुकी होती है। वैसे, सेक्स अडिक्शन नाम की इस मानसिक बीमारी का इलाज है। ऐसे लोगों को अगर किसी विशेषज्ञ की देखरेख में रखा जाए तो दो से तीन सप्ताह में बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। सेक्स अडिक्शन, उससे बचने के तरीके और इलाज पर पूरी जानकारी पेश कर रहे हैं दिलीप लाल :

क्या है सेक्स अडिक्शन
इंसान के जीने के लिए जिस तरह भोजन जरूरी है, उसी तरह सेक्स भी जरूरी है। लेकिन सेक्स की कम या ज्यादा इच्छा मानसिक बीमारी का लक्षण है। सेक्स करने की प्रबल इच्छा जो बेकाबू हो जाए, उसे सेक्स अडिक्शन कहा जाता है। इसे इस तरह भी समझ सकते हैं कि सेक्स की इच्छा के चलते अगर आपका काम प्रभावित हो रहा है, तो आप सेक्स अडिक्शन के शिकार हो सकते हैं। कुछ सेक्शुअल अडिक्शन एक तरह की बीमारी होते हैं जिसमें अब्सेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर (ओसीडी) भी है। इसमें मरीज यह नहीं जान पाता कि वह क्या कर रहा है। वह नहीं समझ पाता कि वह कितनी बड़ी गलती कर रहा है। ऐसा करने के लिए वह खुद को मजबूर पाता है। कई बार निराशा और ग्लानि की वजह से आत्महत्या करने जैसा कदम उठा लेता है।

क्या सेक्स अडिक्शन है, 

नियमित रूप से मास्टरबेशन करना
कामकाज के बीच में कभी-कभार पॉर्न विडियो देखना
स्टोरी (पॉर्न नहीं) पढ़ते वक्त उसमें मौजूद अश्लील प्रदर्शन वाला फोटो देखना
पार्टनर के साथ दिन में दो बार तक सेक्स करना
भड़काऊ कपड़े पहनी महिला पर नजर जाना

क्या सेक्स अडिक्शन नहीं है
नियमित मास्टरबेशन से भी संतुष्टि न मिलना
पॉर्न इतना देखा जाए कि काम प्रभावित होने लगे
सिर्फ पॉर्न फोटो/फिल्म देखना
दो बार सेक्स करने के बाद भी तृप्ति न होना
महिलाओं को लगातार घूरना

पता करें कि सेक्स अडिक्शन है या नहीं
अमेरिका के साइकायट्रिक असोसिएशन ने 2010 में एक पत्र जारी कर सेक्स अडिक्शन को परिभाषित किया था जिसके मुताबिक सेक्स अडिक्शन एक हाइपर सेक्शुअल डिसॉर्डर है। असोसिएशन ने सेक्स अडिक्शन के कुछ लक्षणों को बताया है। अगर कोई व्यक्ति कम-से-कम छह महीने से अपने अंदर सेक्स करने की अति तीव्र इच्छा महसूस करता है और उस पर नियंत्रण नहीं कर पाता, तो उसे नीचे दिए गए पॉइंट्स से अपनी आदतों का मिलान करना चाहिए। अगर नीचे दिए गए पॉइंट्स भी उसके भीतर हैं, तो वह हाइपर सेक्शुअल डिसॉर्डर या सेक्स अडिक्शन का शिकार हो सकता है:

– सेक्स से जुड़ी बातों में ज्यादा समय बीत रहा हो या मन हमेशा इसके लिए कुछ साजिश रचता हो और आपका काम इससे प्रभावित हो रहा हो।
– सेक्स करने की तीव्र इच्छा को दबाने पर एंजाइटी, डिप्रेशन, निराशा, चिड़चिड़ापन महसूस हो।
– सेक्स करने के लिए मान, सम्मान, समय, धन और शारीरिक नुकसान की चिंता न होना।
– सेक्शुअल और रोमांटिक बिहेवियर की वजह से निराशा और आत्महत्या जैसे विचार मन में आना या कभी खुदकुशी की कोशिश करना।
– सेक्स से संबंधित लेख, किताबें, फोटो, विडियो या वेबसाइट्स आदि घंटों देखना और इन्हें देखे बगैर न रह पाना।
– नाबालिग से सेक्स करने के मामले में या वेश्यावृत्ति के मामलों में लिप्त रहना।
– सेक्स फोन कॉल करके आनंद पाने की चेष्टा करना।
– दूसरों को अपने प्राइवेट अंगों को दिखाने की कोशिश करना और ऐसे मामलों में लगातार लिप्त रहना।

सेक्स अडिक्शन के कारण

आनुवंशिक वजहें
10 फीसदी लोगों में ऐसा जीन पाया जाता है, जिसकी वजह से वे किसी न किसी अडिक्शन के शिकार हो जाते हैं। विज्ञान का मानना है कि किसी भी नशीले पदार्थ का एक-दो बार सेवन करने के बाद भी उस नशे का अडिक्शन हो सकता है। ऐसा ही सेक्शुअल अडिक्शन में भी होता है। ऐसे लोगों को इससे मुक्ति मिल जाने के बाद भी दोबारा इसमें आने की आशंका रहती है।

सामाजिक वजहें
सेक्स अडिक्शन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसकी वजह लोगों का रहन-सहन और उन्हें आसानी से उपलब्ध होने वाले साधन मसलन इंटरनेट, मैगजीन, किताबें, मोबाइल, कंप्यूटर आदि हैं। इन साधनों के गलत इस्तेमाल की वजह से लोग भटक रहे हैं क्योंकि उन्हें आसानी से पॉर्न विडियो, फोटो और कहानियां आदि उपलब्ध हो जाती हैं।

व्यावहारिक वजहें
भागदौड़ से भरे आज के दौर में हम सभी अकेला जीवन ज्यादा व्यतीत करते हैं। समय की कमी की वजह से लोग आपस में मिलजुल नहीं पाते। एक-दूसरे पर निर्भरता कम हो रही है। लोग किसी से अपनी बातें कह नहीं पाते हैं। इसकी वजह से लोगों के व्यवहार में भी बदलाव आ रहा है। ऐसे में लोग अडिक्शन के शिकार हो जाते हैं।

अगर बच्चे पॉर्न मूवी देखते हैं
काफी पैरंट्स इससे बड़े परेशान रहते हैं कि उनके बच्चे पॉर्न मूवी देखते हैं या फिर मास्टरबेशन करते हैं। पैरंट्स को कभी इसके लिए बच्चे को डांटना-फटकारना नहीं चाहिए और न ही बच्चे को पता चले कि पैरंट्स इस बात को जान चुके हैं। जैसे ही आपको अपने बच्चों के व्यवहार में बदलाव महसूस हो, पैरंट्स को किसी सायकायट्रिस्ट और पीडिट्रिशन से संपर्क करना चाहिए। बच्चे उन्हें अपनी समस्या बता पाएंगे और उनका सही इलाज हो सकेगा। ध्यान दें कि कहीं आपके बच्चों का अपनी उम्र से बड़े बच्चों से घुलना-मिलना तो नहीं हो रहा है। बच्चे अगर डरे-सहमे नहीं रहते, उनका आत्मविश्वास ठीक रहता है और सामान्य खेल-कूद में हिस्सा लेते हैं तो चिंता की बात नहीं है।

हर रेपिस्ट अडिक्ट नहीं होता
अक्सर ऐसा माना जाता है कि सेक्स अपराधी (रेपिस्ट) सेक्स अडिक्शन के शिकार होते हैं, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं। कई बार सामान्य लोग भी ऐसे कामों में लगे हुए पाए जाते हैं। यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि सेक्स अपराधी इस अडिक्शन का शिकार हो ही, लेकिन ऐसे अपराधियों में लगभग 55 प्रतिशत लोग सेक्स अडिक्शन के शिकार पाए गए हैं। दुष्कर्म की कोशिश और छेड़छाड़ करने वाले 70 फीसदी से ज्यादा किशोर सेक्स अडिक्शन के शिकार हैं।

सेक्स अडिक्शन के नुक्सान
सेक्स अडिक्शन का शरीर पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता। मसलन इसकी वजह से ऐसा कुछ नहीं होता कि यौन शक्ति पर बुरा प्रभाव पड़ने लगे। ऐसे मामलों में जो मुख्य प्रभाव पड़ते हैं वे इस तरह हैं:

1. मानसिक और भावनात्मक प्रभाव
सेक्स अडिक्ट जो लोग हैं, उनके अंदर मानसिक परेशानियां देखी जाती हैं। ऐसे लोगों का कामकाज में मन नहीं लगता। उनका काम प्रभावित होने लगता है।

2. रिश्तों पर प्रभाव
सबसे बड़ा प्रभाव रिश्तों पर पड़ता है। हमेशा पॉर्न में लिप्त रहने की वजह से ऐसे लोग अपने नजदीकी लोगों को वक्त नहीं दे पाते। शादीशुदा जिन्दगी भी प्रभावित होती है।

3. आर्थिक प्रभाव
वक्त की बर्बादी के चलते कई मामले ऐसे भी देखे गए हैं जब सेक्स अडिक्शन के शिकार लोगों को आर्थिक नुकसान भी होता है।

4. सामाजिक प्रभाव
जब लोग ऐसे लोगों को जानते हैं, तो उन्हें देखने का उनका नजरिया बदल जाता है। ऐसे लोगों से वे बचने लगते हैं और गिरी निगाह से देखते हैं।

ये हैं अडिक्शन से छुटकारा पाने के तरीके

1. डॉक्टर के पास जाएं
जिन लोगों को लगता है कि वे सेक्स अडिक्शन के शिकार हैं, उन्हें फौरन साइकॉलजिस्ट या साइकायट्रिस्ट के पास जाना चाहिए। साइकॉलजिस्ट काउंसिलिंग और बिहेवियर मॉडिफिकेशन के आधार पर उसका इसालज करते हैं और मरीज के विचारों में परिवर्तन लाने की कोशिश करते हैं। ऐसे लोगों को दूसरे कामों में व्यस्त रहने की सलाह दी जाती है। उन्हें समझाया जाता है कि वे संगीत, लॉन्ग वॉक आदि का सहारा लें और अपने परिवारवालों के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताएं। साइकायट्रिस्ट दवाओं के माध्यम से इलाज करता है। अगर व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार है और उसे ओसीडी और सिजोफ्रेनिया जैसी बीमारियां हैं तो उसका सायकायट्रिस्ट दवा देकर करते हैं। दवा कितने दिनों तक खानी होगी, यह फैसला रोग की स्थित के मुताबिक होगा।
अगर यह तय हो जाता है कि आप सेक्स अडिक्शन के शिकार हैं तो फौरन इन तरीकों को आजमाएं :

2. इन तरीकों को आजमाएं
अगर यह तय हो जाता है कि आप सेक्स अडिक्शन के शिकार हैं तो फौरन इन तरीकों को आजमाएं:

इंटरनेट से बचें, परिवार से मिलें
– अकेले में इंटरनेट का इस्तेमाल करना बंद कर दें।
– परिवार के बीच ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं।
– बच्चों के साथ खेलें। उनसे घिरे रहें।
– म्यूजिक, पेंटिंग जैसी किसी हॉबी को विकसित करें और इसमें बिजी रहें।

धर्म-अध्यात्म
– धार्मिक अनुष्ठानों में मन लगाएं और उनसे जुड़ें।
– सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लें यानी पास-पड़ोस के लोगों से सुख-दुख बांटें।
– मन में कोई बुरी बात आती है तो अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जिन्हें आप अच्छा समझते हैं।
– अपने कमरे में धार्मिक पुस्तकें रखें, कैसेट सुनें, कैलेंडर रखें।

खानपान
– पुरुषों को अधिक खटाई और महिलाओं को अधिक मिठाई से बचना चाहिए।
– ज्यादा गर्म भोजन का सेवन न करें।
– ऐसे भोजन से परहेज करें जो सुपाच्य नहीं है।

3. योगाभ्यास और क्रियाएं

कामजयी मुद्रा
गैरजरूरी कामवेग को शांत करने के लिए कामजयी मुद्रा का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे तुरंत अंकुश लगता है। तर्जनी के अग्रभाग (टिप) से अंगूठे के नाखून को दबाकर रखें। बाकी अंगुलियों सामने की ओर फैली रहेंगी, लेकिन उनमें तनाव नहीं होना चाहिए। कभी-कभी बाकी अंगुलियां आगे की ओर झुक जाएं तो कोई बात नहीं। चलते-फिरते, बैठते-उठते इस मुदा को किया जा सकता है। मुदा का अभ्यास करते वक्त मन में सकारात्मक विचार लाने चाहिए, ग्लानि का भाव नहीं होना चाहिए।

स्वप्रबोधन चिकित्सा पद्धति
अपने आप कामवेग को शांत करने की प्रक्रिया को स्वप्रबोधन चिकित्सा पद्धति कहते हैं। इस विधि को नियमित रूप से करने पर काफी फायदा होता है। इससे मन को काबू करने की शक्ति बढ़ती है। इसके करने के लिए जमीन पर आसन बिछाकर लेट जाएं या आरामदायक स्थिति में बैठ जाएं। आंखों को बंदकर दोनों हाथों को ज्ञान मुदा की स्थिति में रखें। कुछ मिनट तक धीरे-धीरे गहरी, लंबी सांस लें और धीरे-धीरे छोड़ें। सांस को रोकें नहीं। इसके बाद इसी स्थिति में ‘ओम’ जाप करते हुए सांस लें और भंवरे की तरह गुंजन करते हुए धीरे-धीरे नासिका से सांस छोड़ें। इस क्रिया को लगभग 10 बार करें। इस दौरान मन में सोचें कि आपके कष्ट का समय खत्म हो चुका है। धीरे-धीरे आपके अंदर सकारात्मक विचार पैदा हो रहे हैं।

ज्ञान मुद्रा
अंगूठे को तर्जनी के सिरे पर लगाएं व बाकी तीनों अंगुलियों को सीधी रखें। इस मुद्रा से स्मरण और संकल्प शक्ति बढ़ती है। मन भटकता नहीं है।

4. सेक्स अडिक्शन एनोनिमस (SAA)
यह ऐसे लोगों का संगठन है जो सेक्स अडिक्शन के शिकार हैं। यहां कोई फीस नहीं ली जाती और न ही दवा दी जाती है। मीटिंग में इसके सदस्य जीवन के कड़वे अनुभवों, इससे जीवन में होने वाले नुकसान और काबू पाने की कहानी शेयर करते हैं। मीटिंग में आने वाले नए सदस्यों को इससे छुटकारा दिलाने के लिए मदद भी करते हैं। इससे पीड़ितों का आत्मबल बढ़ता है और उनमें इस बुरी आदत को छोड़ने की शक्ति विकसित होती है। दुनिया के कई देशों में एसएए की मीटिंग हो रही है और इसके सदस्यों की संख्या एक लाख से ज्यादा है। अपने देश में दिल्ली में इसकी मीटिंग हो रही है और अब तक लगभग 300 सदस्य इस संगठन से जुड़ चुके हैं। इस मीटिंग से जुड़ने वाले लोगों की पहचान छिपाकर रखी जाती है।

हेल्पलाइन : एसएए की मीटिंग अटेंड करने के लिए saawaredelhi@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

इन्होंने पा लिया छुटकारा

घर में ही नजरें डाल रही थीं डाका
मैं अपनी बुरी आदत से परेशान था। जब किसी महिला को देखता तो मेरी नजर वहां से हटती ही नहीं थी। यह जानते हुए कि मैं गलत कर रहा हूं, मैं खुद को रोक नहीं पाता था। मेरी परेशानी तब बढ़ गई, जब घर में बेटी और बहू को भी मैं गंदी नजर से देखने लगा। इससे बचने के लिए मैं घर में काले ग्लास वाला चश्मा पहनने लगा। अपनी बुरी आदत से परेशान होकर मैंने आत्महत्या की कोशिश भी की। बाद में साइकायट्रिस्ट से संपर्क किया। नियमित रूप से इन विशेषज्ञों के संपर्क में रहने के बाद अब मैं सामान्य हूं।
– आर. के. सिंह, उम्र 65 साल, दिल्ली

आदत छूटी पर लुट जाने के बाद
जब मैं 11 साल का था, तभी पॉर्न मूवी देखने का मौका मिला। उसके बाद अश्लील किताबें पढ़ने लगा और कॉल गर्ल्स अटेंड करने लगा। घरवालों ने बिजनेस में लगा दिया। शादी भी हो गई लेकिन कॉल गर्ल्स से संपर्क नहीं छूटा। इसी साल मुझे SAA की मीटिंग अटेंड करने का मौका लगा। मुझे अब बुरी आदतों से छुटकारा तो मिल गया है लेकिन मैं एचआईवी पॉजिटिव हूं।
 राम सिंह, उम्र 45 साल, फरीदाबाद

अमेरिका में पता चला अडिक्शन है
मैं दिल्ली में बिजनेस करता था। मैं किडनी ट्रांसप्लांट कराने अमेरिका गया। हॉस्पिटल में नर्स से गलत हरकत करने पर मुझे साइकायट्रिस्ट के पास भेज दिया गया। वहां डॉक्टर ने बताया कि मैं सेक्शुअल अडिक्शन का शिकार हूं। किडनी की सर्जरी के बाद जब मैं स्वस्थ हुआ तो मुझे एसएए की मीटिंग अटेंड करने भेज दिया गया। अब मैं बिल्कुल ठीक हूं।
– आनंद कुमार, उम्र 40 साल, दिल्ली

बदले की भावना ने बनाया मुजरिम
जब मेरे पिता काम पर जाते, तो सौतेली मां प्रताड़ित करती थी। बड़े होने पर मुझे एक लड़की से प्यार हो गया। बाद में लड़की ने धोखा दे दिया और अपने प्रेमी के साथ मिलकर मेरी हत्या करने की कोशिश की। उसके बाद मुझे सभी लड़कियों से नफरत हो गई। बदला लेने के लिए मैं रेप करने लगा। जेल में एसएए की मीटिंग अटेंड की। तब से मैं सामान्य जीवन जी रहा हूं।
– ईवन पीटर, उम्र 45 साल, अमेरिका

ज्यादा जानकारी के लिए यहां जाएं

वेबसाइट
सेक्स अडिक्शन पर भरपूर जानकारी के लिए देखें ये वेबसाइट्स:
http://tinyurl.com/phjtlh
http://tinyurl.com/q777ocl

यूट्यूब विडियो
यह विडियो आपको बताएगा कि वे कौन-से लक्षण हैं जिनके आधार पर आप किसी को सेक्स अडिक्ट कह सकते हैं:

टॉप ऐप्स
Breaking Sex Addiction
ओएस: ऐंड्रॉयड
कीमत: फ्री

Porn and Sex Addiction
ओएस: ऐंड्रॉयड
कीमत: फ्री

एक्सर्पट्स पैनल
डॉ. प्रकाश कोठारी, सीनियर सायकायट्रिस्ट, मुंबई
डॉ. राजेश नागपाल, सीनियर सायकायट्रिस्ट, मनोबल क्लिनिक, दिल्ली
आचार्य विक्रमादित्य, आयुवेर्दाचार्य एवं योगाचार्य, विवेकानंद आश्रम, दिल्ली
डॉ. पूजा, डाइटीशियन, एशियन क्लिनिक, दिल्ली

Thanks to  navbharattimes.indiatimes.com

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Posted by on Sep 1 2013. Filed under मेरी बात. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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