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कैसे बनेगी सरकार,मोदी नहीं तो फिर कौन?

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नरेन्द्र मोदी के पीएम बनने की संभावना है लेकिन मोदी पीएम नहीं बने तो तो फिर कौन पीएम बनेगा. क्या लालकृष्ण आडवाणी की किस्मत का सितारा चमकेगा या कांग्रेस की सरकार फिर बनेगी या फिर थर्ड फ्रंट की सरकार बनेगी.

कैसे बनेगी सरकार, क्या नरेन्द्र मोदी पीएम बन सकते हैं? Part -1 

 

वैसे भी राजनीति, शेयर मार्केट, खेल और टीआरपी में कब क्या होगा कहना मुश्किल नहीं बल्कि नामुमकिन हो जाता है. राजनीति भी शेयर मार्केट के सेंसेक्स की तरह है कभी मातम छा जाता है तो कभी बहार आ जाती है. अब सिक्के के दूसरे पहलू के बारे में बात करते हैं .

मोदी फेल हुए तो क्या आडवाणी पास होंगे ? 

मोदी जब बीजेपी के चुनाव समिति के अध्यक्ष बने थे तब भी सवाल उठ रहा था कि पीएम उम्मीदवार शायद ही बन पाए जब अब वो पीएम के उम्मीदवार बन गये तो सवाल ये उठ रहा है कि पीएम कैसे बनेंगे और अगर वो पीएम बन जाते हैं तो ये भी सवाल उठ सकता है कि देश कैसे चलाएंगे. अभी का जो माहौल है उसमें सवाल उठना लाजिमी है. अब सवाल ये उठ रहा है कि अगर मोदी को चुनावी अंकगणित धोखा देता है तो फिर क्या होगा.. इस स्थिति में आडवाणी देश के पीएम बन सकते हैं यानि प्रधानमंत्री की दौर में आडवाणी भी रेस में है.

राजनीति में कुछ भी हो सकता है इस संभावनाएं से इंकार नहीं किया जा सकता है लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि अगर मोदी पीएम नहीं बनते हैं तो आडवाणी के पीएम बनने की संभावनाएं कम दिख रही है. अब मोदी के बिना बीजेपी के बारे में सोचना शायद गलत हो सकता है . पार्टी जिसके नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है क्या नीतीश कुमार मोदी के रहते हुए आडवाणी को समर्थन कर पाएंगे. जो मोदी को समर्थन नहीं करेंगे क्या वो आडवाणी को समर्थन करेंगे. आडवाणी के समर्थन में एक परिकल्पना चल रही है कि मोदी को दरकिनार करके वो पीएम बन सकते हैं . ये परिकल्पना सही भी हो सकती है औऱ गलत भी हो सकती है.

आडवाणी पीएम के रेस में तभी आएंगे जब एनडीए की सीटें 210 के नीचे हो लेकिन तब एनडीए विरोधी पार्टियां कांग्रेस और थर्ड फ्रंट की सरकार बनाने की कोशिश करेगी या आडवाणी को . सिर्फ नीतीश के भरोसे आडवाणी पीएम नहीं बन सकते हैं. नीतीश कुमार क्या करेंगे कहना मुश्किल है, हो सकता है कि वो कांग्रेस से हाथ मिला लें. नीतीश के अलावा कोई और पार्टियां आडवाणी के समर्थन में कभी रूख जाहिर नहीं की है . जो पार्टियां एनडीए से दूरियां बनाई थीं उस समय बीजेपी के मुखिया मोदी नहीं बल्कि आडवाणी थे.

ये पार्टियां आडवाणी के जितने विरोधी थे उतने ही मोदी के विरोधी हैं लेकिन अब इस खेल मोदी आगे निकल चुके हैं तो आडवाणी से थोड़ी हमदर्दी हो गई है लेकिन मुस्लिम मतदाताओं को आडवाणी के प्रति वही रूख है जो पहले था. खैर राजनीति भी शतरंज की तरह है जिसे कभी समझना आसान होता है तो कभी पहेली बन जाती है इसीलिए राजनीति में कुछ भी सकता है.

क्या कांग्रेस की सरकार बन सकती है ?

मोदी के पक्ष में हवा जरूर बह रही है लेकिन इतना तो साफ है कि चारों दिशाओं में हवा नहीं है. हवा है या नहीं ये अन्तोगत्वा चुनाव के नतीजे ही बताएंगे क्योंकि 2004 में वाजपेयी की हार का एहसास की भनक लगाने में सारे धुरंधर फेल हो गये थे. वाजपेयी ने हार के बाद कहा था कि “हम हारे कैसे इसका पता नहीं लेकिन वो जीते कैसे उसे भी पता नहीं” . सच यही है कि हर बार भारत की राजनीति का मिजाज का पता लगाना आसान नहीं होता है सिर्फ रूख पर संभावनाएं बता सकते हैं .

भले कांग्रेस बहुत कमजोर है लेकिन सरकार बनाने के रेस में पीछे नहीं है. ऐसी स्थिति से इंकार नहीं किया जा सकता है कि जब मोदी विरोधी पार्टियां ये निर्णय करती है कि मोदी को पीएम नहीं बनने देंगे और लेफ्ट, सपा, बीएसपी, टीएमसी, डीएमके और टीआरएस निर्णय करती है कि कांग्रेस की ही सरकार बने ये तभी संभव है जब एनडीए को 200 से 220 सीटें नहीं मिलती है तब कांग्रेस की सरकार बनने से इंकार नहीं किया जा सकता है. ये सच है कि मोदीमय में कांग्रेस को कम आंका जा रहा है.

मोदी की तुलना में कांग्रेस की राजनीतिक जमीन बड़ी है फिलहाल कांग्रेस गठबंधन का बीज नहीं बो पा रही है तो फसल कैसे काटेगी. हो सकता है कि तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, पीएमके, एमडीएमके, टीआरएस और हैदराबाद के सांसद असाउद्दीन आवैसी फिर से कांग्रेस को समर्थन कर दे और वहीं कांग्रेस बिहार में लालू यादव और नीतीश कुमार में से एक से समझौता कर सकती है और वहीं यूपी में समाजवादी पार्टी और बीएसपी में से एक पार्टी से गठबंधन करने की कोशिश कर सकती है.

अगर बिहार और यूपी में कांग्रेस गठबंधन करती है तो मोदी का खेल खराब हो सकता है और पीएम रेस में पीछे चल रही है कांग्रेस तीसरी बार सरकार बनाने का सपना देख सकती है.

क्या थर्ड फ्रंट की सरकार बन सकती है  ?

जिस दिन मतगणना होगी उसी दिन तय हो जाएगा कि दिल्ली में सरकार किसकी बनेगी. अगर ऐसी स्थिति आती है कि एनडीए 200 का आंकड़ा पार नहीं करता है और वहीं कांग्रेस 130 सीटों पर सिमट जाती है तब क्या हो सकता है.

ऐसी स्थिति में कांग्रेस मोदी को पीएम की कुर्सी से दूर रखने के लिए तुरुप का पत्ता चल सकती है. कांग्रेस कह सकती है कि थर्ड फ्रंट अपना नेता चुने और कांग्रेस बाहर से समर्थन करेगी इस स्थिति में कोई भी डार्क हॉर्स पीएम बन सकता है ये मुलायम हो सकते हैं, नीतीश हो सकते है, ममता हो सकती हैं या नवीन पटनायक भी सकते हैं.

भले कांग्रेस समर्थन देकर बाद में समर्थन वापस ले ले चूंकि कांग्रेस के समर्थन में कोई भी सरकार केन्द्र में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई है यानि केन्द्र में सरकार बनाने के चारो विकल्प खुले हैं चूंकि राजनीति अंकगणित से नहीं बल्कि जमीनी केमिस्ट्री से भी चलती है.

(बीजेपी 2004 में क्यों हारी और क्या सबक ली पढ़े अगले लेख पार्ट – 3 में ) 

कैसे बनेगी सरकार, क्या नरेन्द्र मोदी पीएम बन सकते हैं? Part -1 

धर्मेंद्र कुमार सिंह, एबीपी न्यूज

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Posted by on Sep 22 2013. Filed under मेरी बात. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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