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How will the Narendra Modi do to become prime minister

How will the Narendra Modi do to become prime minister ?

कैसे बनेगी सरकार, क्या नरेन्द्र मोदी पीएम बन सकते हैं?

 

13 सितंबर को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी बीजेपी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार बने लेकिन करीब 9 महीने के बाद फैसला होगा कि देश का प्रधानमंत्री कौन बनेगा. मोदी देश के पीएम बनेंगे या नहीं इस पर सस्पेंस बरकरार है. इसपर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं. कोई कहता है कि मोदी पीएम बन सकते हैं, कोई कहता है कि मोदी पीएम नहीं बनेंगे लेकिन बीजेपी के ही दूसरे नेता पीएम बन सकते हैं, कोई कहता है कि कांग्रेस की सरकार बन सकती है तो कोई कहता है कि थर्ड फ्रंट की सरकार बनेगी ?

देश का जो राजनीतिक माहौल में है उसमें कहा जा रहा है कि सिर्फ मोदी के समर्थन में हवा बह रही है. देश की राजनीतिक हवा अजोबीगरीब है क्योंकि जो राजनीति हवा पश्चिमी में चलती है उसकी रफ्तार पूर्वोतर राज्यों में धीमी पड़ जाती है. उत्तरी राजनीतिक हवा का असर दक्षिण राज्यों पर बेअसर होता है इसीलिए मोदी के पीएम बनने पर सवाल जायज है लेकिन वो इकलौते नेता हैं जिनकी चर्चा देश में जोरशोर से हो रही है.

मोदी के पीएम बनने की उम्मीद क्यों है?

ये तो सब मानने के मजबूर हैं कि यदि देश में कोई हवा है तो सिर्फ और सिर्फ मोदी के पक्ष में है भले इसकी पहुंच पूरे देश में नहीं है. तमाम सर्वे यही बता रहे हैं कि कि मोदी सबसे लोकप्रिय नेता हैं और बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर आएगी. देश में रोज हो रही घटनाएं में मोदी का ताल्लुकात भले हो या नहीं लेकिन हर राजनीतिक घटनाएं से मोदी का गाहेबगाहे रिश्ता जुड़ता जा रहा है और दिनोंदिन मोदी की स्थिति माकूल होती जा रही है.

उत्तरप्रदेश के दंगे में मोदी का हाथ हो ना हो लेकिन मोदी का नाम जुड़ गया है और इसका फायदा भी बीजेपी को उत्तरप्रदेश में मिल सकता है. अब बीजेपी यहां पर 35 से लेकर 50 सीट टारगेट करके चल रही है. ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मोदी देश में बीजेपी के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ सकते हैं. बीजेपी मौजूदा गठबंधन के दम पर 183 सीट से लेकर 200 सीटें तक ला सकती है.

मोदी के पीएम उम्मीदवार बनने के साथ येदियुरप्पा मोदी के समर्थन में आने का ऐलान किया है वहीं महाराष्ट्र में पहले से ही बीजेपी-शिवसेना और आरपीआई का गठबंधन है. महाराष्ट्र में राज ठाकरे को भी गठबंधन में लाने की कोशिश हो रही है वहीं हरियाणा में कुलदीप सिंह बिश्नोई से गठबंधन है.
पंजाब में अकाली दल से पुराना गठबंधन है वहीं झारखंड में बाबूलाल मरांडी को लाने की कोशिश हो रही है. अब तो आंध्रप्रदेश में चंद्रबाबू नायडू भी बीजेपी से समझौता करने में दिलचस्पी ले रहे हैं यानि नायडू से गठबंधन की संभावना दिख रही है.

कैसे बढ़ेगा गठबंधन का कुनबा ?

राजनीति में कोई स्थायी दोस्त नहीं होता है ना ही दुश्मन. भले बीजेपी से कई दलों ने दूरियां बना ली है लेकिन बीजेपी के लिए ये पार्टियां अछूती नहीं है. तमिलनाडु में डीएमके और एआईडीएमके बीजेपी से गठबंधन कर चुकी है ये माना जा रहा है कि जयललिता से मोदी की दोस्ती है और वो बीजेपी से गठबंधन कर सकती हैं. तमिलनाडु में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 6 फीसदी है इसलिए जयललिता को मुस्लिम वोट खोने का कम खतरा है.

वहीं उड़ीसा में नवीन पटनायक बीजेपी के पुराने सहयोगी रहे हैं वो भी बीजेपी के पक्ष में झुक सकते हैं वहां पर मुस्लिम वोटरों का कोई मुद्दा नहीं है क्योंकि सिर्फ 3 फीसदी मुस्लिम मतदाता उड़ीसा में है लेकिन ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में बीजेपी से शायद समझौता नहीं करेगी क्योंकि पश्चिम बंगाल में 25 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं ऐसे में ममता चुनाव के बाद ही कोई फैसला लेंगी.

असम में भी असम गण परिषद बीजेपी से समझौता कर चुकी है. सिर्फ आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु और उड़ीसा में बीजेपी से क्षेत्रीय पार्टियों का समझौता हो गया तो मोदी के पीएम बन सकते हैं लेकिन ये संभावनाएं किंतु और परंतु पर आधारित है.

अगर मोदी के नेतृत्व में एनडीए को 230 से 240 सीटें भी आ गई तो मोदी के नेतृत्व में ही सरकार बनने की संभावना दिख रही है. अक्सर यही होता है आ रहा है कि ऐसी स्थिति में घूमंतू पार्टियां समर्थन करने का तैयार हो जाती है. एनसीपी से लेकर बीजेडी, मायावती से लेकर ममता सरकार में शामिल हो सकती है या बाहर से समर्थन कर सकती है.

मोदी को क्या करना चाहिए ?

राजनीति भी अजीब चीज है जहां सीधी उंगुली से नहीं टेढ़ी उंगुली से घी निकाला जाता है. साम दाम दंड भेद इसका अस्त्र है तो बातचीत शस्त्र है. हो सकता है कि मोदी से परहेज करने वाली पार्टियां मोदी की वजह से गठबंधन करने में टालमटोल करने की कोशिश करे. इस स्थिति में मोदी को उन राज्यों में जमकर प्रचार करना चाहिए जहां पर बीजेपी कमजोर है.

इन राज्यों में मोदी को धुंआधार रैली करने की जरूरत है ताकि क्षेत्रीय पार्टियों को अहसास हो जाए कि बीजेपी से गठबंधन करने का सौदा घाटे का नहीं बल्कि मुनाफे का हो सकता है. मोदी को यूपी, बिहार, तमिलनाडु, और आंध्रप्रदेश में खास तौर पर ध्यान देने की जरूरत है.

मोदी की एक खासियत है कि वो बड़े उत्साही है और 24 घंटे राजनीति के बारे में ही सोचते रहते हैं. कैसे वोटर बीजेपी की तरफ रूख करे वो काफी कोशिश कर रहे हैं. नये मतदाताओं को रजिस्ट्रेशन कराने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं वहीं जो उनके फेसबुक, ट्विटर और एसएमएस से जुड़े हैं उन्हें भी बीजेपी में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं. जनता यूपीए सरकार से परेशान है और मोदी विकास, महंगाई और भ्रष्ट्राचार के मुद्दे पर चुनावी नैय्या पार करने का मन बना लिया है.

(पार्ट टू अगले लेख में) 

धर्मेन्द्र कुमार सिंह, सीनियर प्रोड्यूसर, एबीपी न्यूज़

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Posted by on Sep 21 2013. Filed under मेरी बात. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

1 Comment for “How will the Narendra Modi do to become prime minister”

  1. Sumit

    Agar BJP ko sarkar banana h to use anpne purane MP ko badlakar naye chahre lana hoga….nhi to MP & Cg se hi BJP har jayegi…jaha par ye dhyan nhi de rahe h…….

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