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आज देश को मजबूत लीडरशिप की जरूरत: टाटा

सरकार ने आर्थिक हालात समझने में देर की: रतन टाटा

सरकार ने आर्थिक हालात समझने में देर की: रतन टाटा

With the economy in distress, leading industrialist Ratan Tata has said India has lost the confidence of the world and the government has been slow to recognise it.

He also said the government has “swayed” under the influence of vested interests in private sector and policies have been “changed, delayed and manipulated”.

Tata, who demitted office as Tata group Chairman last December, said Prime Minister Manmohan Singh has held India’s “esteem high but in recent times we have lost that esteem”.

“We have lost the confidence of the world. We have been slow to recognise that in the government,” he told CNN-IBN while responding to a query on PM’s silence on investors losing confidence.

He further said it would be good for the country if policies were implemented as they were written.

“The government has issued policy which vested interests, quite often in private sector have changed, delayed or manipulated that policy. So, for one reason or the other, the government has swayed with those forces,” Mr Tata said.

Recollecting the 1991 reforms, when “the brave moves were made”, he said “it’s the same team. What has happened in my view is that there have been forces…too many competing interests. By and large whatever is happening should be looked at to the benefit of the people of India not to few vested interest in India”.

While stressing that his respect for the leadership of Dr Singh continued to be “very high”, he, however, said there is a lack of leadership in the country to lead from the front.

”…we don’t have leadership that we have been talking about, that is leading from the front,” Mr Tata said.

He further said the government is being pulled in different directions, even from within it.

“We should have one view…the team has been pulling in different directions, allies are pulling in different directions…states are pulling in one direction. We are not consolidating ourselves in the government,” Mr Tata said.

On Gujarat Chief Minister Narendra Modi’s leadership, he said: “I think in Gujarat he has proven his leadership and he has moved Gujarat into a position of prominence. I am not in a position to gaze what he would do in a country.”

 

सरकार ने आर्थिक हालात समझने में देर की: रतन टाटा

अर्थव्यवस्था में नरमी के बीच प्रमुख उद्योगपति रतन टाटा ने कहा है कि भारत ने दुनिया का भरोसा खो दिया है और सरकार इस बात को समझने में देरी कर दी है.

उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार निजी क्षेत्र के निहित स्वार्थों के प्रभाव में बहती गयी और उसी प्रभाव में नीतियों में बदलाव, देरी अथवा हेरफेरी की गयी. टाटा ने पिछले साल दिसंबर में टाटा ग्रुप के चेयरमैन का पद छोड़ा था.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत के गौरव को उंचा बनाए रखा था लेकिन हाल के समय में हमने वह गौरव खो दिया है.

निवेशकों का विश्वास टूटने पर प्रधानमंत्री की चुप्पी संबंधी एक सवाल के जवाब में टाटा ने सीएनएन आईबीएन चैनल पर कहा, हमने दुनिया का भरोसा गंवा दिया है. सरकार में हम इसे पहचानने में धीमे रहे.

उन्होंने कहा कि यह देश के लिए अच्छा होगा अगर नीतियां वैसे ही कार्यान्वित हों जैसे उन्हें बनाया गया है. टाटा ने कहा, सरकार नीति जारी करती है, निहित स्वार्थ अक्सर उसमें बदलाव, देरी या हेरफेर करवा लेते हैं. सरकार किसी न किसी कारण से इन ताकतों के सामने झुक जाती है.

साल 1991 के सुधारों को याद करते हुए टाटा ने कहा कि जब साहसी कदम उठाये गये थे. उन्होंने कहा, अब भी वही टीम है. लेकिन मेरे विचार में हुआ यह है कि अनेक प्रतिस्पर्धी हित हैं. मोटे तौर पर जो कुछ हो रहा है उसे भारत की जनता के हित की दृष्टि से देखा जाना चाहिए न न कि देश के कुछ निहित स्वार्थों के फायदे के लिए.

सिंह के नेतृत्व में अपने भरोसे को दोहराते हुए उन्होंने यह भी कहा कि देश में आगे बढ़कर अगुवाई करने वाले नेतृत्व की कमी है. उन्होंने कहा कि सरकार को इसके भीतर से भी अनेक दिशाओं में खींचा जा रहा है.

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर उन्होंने कहा, मेरी राय में गुजरात में उन्होंने अपने नेतृत्व को सिद्ध किया है और गुजरात को प्रमुख स्थान पर खड़ा कर दिया है. पर वह देश के स्तर पर क्या करेंगे यह देखने की स्थिति में मै नहीं हूं.

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Posted by on Aug 29 2013. Filed under खबर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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