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कई बीमारियों की जड़ है माँसाहार

side effects of eating non veg

side effects of eating non veg

Is the root of many diseases masahar

विश्व में पहले यह आम धारणा थी कि मांसाहार शाकाहार से अच्छा भोजन है तथा कुछ लोगों का यह मानना था कि मांसाहार शरीर को मजबूत बनाता है और अत्यधिक ऊर्जा प्रदान करता है। इस सोच ने विश्व के अधिसंख्य लोगों को मांसाहारी बनाने के लिए प्रेरित किया। इसी सोच ने समूचे विश्व में बड़े-बड़े और आधुनिक बूचड़खानों को स्थापित किया। मुर्गी पालन, बकरी पालन और सूअर पालन आदि इसी सोच का परिणाम हैं, परन्तु जैसे-जैसे स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ी है, लोगों में मांसाहार के प्रति आकर्षण कम हो रहा है। आज विश्व के अनेक देशों में शाकाहार अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। भारत तो पहेले ही शाकाहार पर जोर देता रहा है।
हमारा देश आहार के मामले में प्राचीन काल से ही जागरूक रहा है। सम्पूर्ण स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हमारी संस्कृति में आहार और इसकी शुद्धि पर विशेष ध्यान दिया गया है। एक स्वस्थ जीवन के लिए शाकाहार को प्राथमिकता दी गयी है। छान्दोग्योपनिषद् में कहा गया है- “आहारशुद्धौ सत्वशुद्धि:। अर्थात भोजन की शुद्धि होने पर मानव की अन्तरात्मा शुद्ध होती है। “अन्नमयं हि सौम्य मन:” अर्थात जैसा अन्न खाया जाता है, वैसा ही मन, बुद्धि, विचार इत्यादि हो जाते हैं। मनु स्मृति में कहा गया है कि “अन्नं ब्रह्म इत्युपासीत” अन्न ब्रह्म है- यह समझकर उसकी उपासना करनी चाहिए। भागवत पुराण में कहा गया है कि वह व्यक्ति जो स्वाद इंद्रियों को नियंत्रित नहीं कर सकता वह अन्य इंद्रियों पर भी नियंत्रण नहीं रख सकता। वह व्यक्ति जो स्वाद इंद्रियों को नियंत्रित कर लेता है उसकी समस्त इंद्रियां पहले ही नियंत्रित हो जाती हैं। अल्प भोजन करना स्वास्थ्यवद्र्धक होता है। यदि भूख से अधिक भोजन किया जाए तो वह शरीर में विष का काम करता है। बेंजामिन फ्रैंकलिन ने कहा है कि “उदर ही समस्त रोगों का जड़ है।” अंग्रेजी कहावत है “अत्यधिक खाने वाले अपनी कब्र को अपने ही दांतों से खोदते हैं” बहुत से लोग अधिक भोजन करने के कारण उत्पन्न हुए रोगों से मरते हैं।

दुनिया के भोजन से जुड़े सभी विशेषज्ञों ने और विशेषकर अमेरिका के शोध वैज्ञानिकों ने प्रमाण के साथ यह सिद्ध कर दिया है कि शाकाहारी भोजन मनुष्य की आयु बढ़ाता है एवं उसको अनेक प्रकार के शरीर के कष्टदायक रोगों से बचाता है। अमेरिका वासियों की पहले मांसाहार प्राथमिकता हुआ करती थी परन्तु जब से शाकाहार की महत्ता को वे समझे हैं, शाकाहार उनकी प्राथमिकता बन गयी है। हमारे यहाँ तो ऋषियों, मुनियों ने उपनिषदों में पहले ही लिखा है-“अल्प भुक्तम् बहु भुक्तम्” अर्थात जो लोग कम भोजन करते हैं वे लम्बे समय तक भोजन करते हैं।

व्यक्ति को चाहिए कि वह शाकाहारी एवं सात्विक भोजन (फलाहार, दुग्धाहार, सब्जियां, शहद, मूंग, गेहूं आदि) का सेवन करे। सात्विक भोजन से शरीर में शांत रस उत्पन्न होता है जिससे बुद्धि निर्मल रहती है और व्यक्ति का अपनी वासना पर पूर्ण अधिकार रहता है। राजसी भोजन ( कचौड़ी, पूड़ी, खट्टा, मिर्च युक्त, मांस, गांजा, भांग एवं मादक द्रव्य) से व्यक्ति वासना प्रिय, पापी एवं रोगी बन जाता है। तामसी भोजन (बासी रसहीन चीजें, तेल की तली हुई चीजें, मिठाइयां, गरिष्ठ पदार्थ) से हृदय रोग सहित अनेक गंभीर रोगों की उत्पत्ति होती है।
अनेक शोधों से यह सिद्ध हो चुका है कि मांसाहार मानव शरीर के लिए अनुकूल नहीं है। मांसाहार अनेक व्याधियों का जन्मदाता है। मांसाहारी लोगों की रक्त नलिकाओं में “कोलेस्ट्रोल” जम जाता है, जिसके कारण दिल को पहुंचने वाले रक्त की आपूर्ति में बाधा होने लगती है। अत: उच्च रक्तचाप की संभावना बनने लगती है और इसके साथ ही दिल का दौरा और लकवा जैसे रोगों को निमंत्रण मिल जाता है। मांसाहारी पुरुषों को हृदय रोग के अलावा “प्रोस्टेट कैंसर” तथा मांसाहारी महिलाओं को गर्भाशय, डिम्बाशय (ओवरी) और स्तन कैंसर होने की ज्यादा संभावना होती है। चिकित्सा वैज्ञानिकों ने यह भी स्वीकार किया है कि मांसाहारी लोग शाकाहारी लोगों की अपेक्षा ज्यादा बीमार पड़ते हैं।

एक तथ्य के अनुसार एक किलोग्राम मांस में लगभग 12-13 ग्रेन “यूरिक एसिड” पाया जाता है। “यूरिक एसिड” एक प्रकार का रसायन है जो शरीर में जहर का काम करता है। खून में इसकी मात्रा अधिक हो जाने पर दिल की बीमारी, लीवर का रोग, टी.बी., रक्ताल्पता, मांस संबंधी रोग, हिस्टीरिया, गठिया आदि अनेक खतरनाक रोग पैदा हो जाते हैं। यही “यूरिक एसिड” के कण जब जोड़ों में इकट्ठा होने लगते हैं तब गठिया तथा संधिवात (आस्टियो आर्थराइटिस) के रोगों के होने की संभावना बढ़ जाती है। मुख्यत: “सेचुरेटेड फैट्स” और “कोलेस्ट्रोल” मांस और डेयरी उत्पाद में ज्यादा मिलता है, जिसके अत्यधिक सेवन से हृदय के बीमार होने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। फाइबर जो “ब्लड कोलेस्ट्रोल” को घटाने में सहायक होता है वह केवल “प्लांट फ्रूड्स” में पाया जाता है।

एक शोध के अनुसार शाकाहारियों में मांसाहारियों की तुलना में 36 प्रतिशत कम “मेटोबौलिक सिन्ड्रोम” (पांच प्रमुख खतरे-उच्च रक्तचाप, लो एच डी एल कोलेस्ट्रोल, हाइ ग्लूकोज लेवल, उच्च ट्राइग्लिसराइड्स, अस्वास्थ्यक कमर की परिधि, में से तीन की प्रमुखता) पाया जाता है। “मेटोबौलिक सिन्ड्रोम” हृदय रोग, मधुमेह एवं “स्ट्रोक” का प्रमुख कारक है। मांसाहारी भोजन में केवल 60 प्रतिशत हिस्सा ही शरीर के लिए उपयोगी होता है शेष 40 प्रतिशत हिस्से में हानिकारक और टॉक्सिक पदार्थ होते हैं। मांसाहार पेट के लिए भारी होता है तथा एसिडीटी पैदा करता है, जिससे उदर संबंधी कई बीमारियां उत्पन्न होती हैं। इसमें “फाइबर” नहीं होता है। फाइबर शरीर के लिए अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। जो लोग रेसा युक्त आहार करते हैं उनमें हृदय रोग, उदर कैंसर, पाइल्स, मोटापा, डायबिटीज, कब्ज, हार्निया, डायवर्टीकुलाइटिस, इरिटेबल बाउल सिन्ड्रोम, डेन्टल कैरीज और गॉलस्टोन्स का खतरा कम होता है। फाइबर-अनाज, फली, बीज वाले फल, खट्टे फल, गाजर, गोभी, हरी पत्तेदार सब्जियां, सेब, तरबूज-खरबूज, आडू, आदि में पाया जाता है।

अनेक बीमारियां जीवाणु के कारण होती है जो मांसाहार के माध्यम से व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करती हैं जबकि शाकाहार इससे मुक्त होता है। उदाहरण के तौर पर “साल्मोनेला टाइफीमूरियम” नामक जीवाणु शरीर में अंडे के खाने से पहुंचता है, जिसके कारण न्यूमोनिया और ब्रोंकाइटिस होने की संभावना बढ़ जाती है। एक अध्ययन से यह भी प्रकाश में आया है कि मांसाहारी जानवरों में शाकाहारी जानवरों की तुलना में 10 गुना “हाइड्रोक्लोराइड एसिड” पाया जाता है, जबकि मनुष्य के शरीर में इस मात्रा में यह रसायन नहीं मिलता है। इससे यह सिद्ध होता है कि मानव शरीर शाकाहार के लिए सर्वोत्तम है। यहाँ कहने का तात्पर्य यह है कि शाकाहार शरीर के क्रियाकलापों के बेहतर संचालन में जहाँ सहयोगी बनता है, वहीं मांसाहार शरीर के व्यवहार के विपरीत होता है जो हमारी इन्द्रियों को उनके कार्य में बाधा डालता है और अंतत: एक दिन हृदय सहित समस्त शरीर रोगों की गिरफ्त में आ जाता है। अत: शाकाहारी बनें-स्वस्थ रहें। (साभार-साप्ताहिक पाञ्चजन्य से)

 

भोजन में सप्ताह में 500 ग्राम से अधिक रेड मीट का सेवन व्यक्ति में कैंसर पीड़ित होने की संभावना को बढ़ा देता है। जलाया या प्रोसेस्ड किया हुआ मांस कार्सिनोजेन (कैंसर पैदा करने वाले कारकों ) को बढ़ा देता है।भोजन में लहसून, प्याज, हल्दी आदि का सेवन कैंसर की संभावना को कम कर देता है। ब्रासिका कुल क़ी सब्जियों जैसे ब्रोकली, पत्ता गोभी, फूल गोभी, बंदगोभी (ब्रसल स्प्राउट्स) में पाया जानेवाला इस्थियोसायनेट एवं एन्डोल्स हमारे लीवर को कैंसर पैदा करनेवाले तत्वों (कार्सिनोजेंस) को डीटोक्सीफाय कर देता है। गाजर, अंगूर एवं बेरीज में पाया जाने वाला तत्व फ्लेवेनोआइड्स कैंसर पैदा करनेवाले फ्री- रेडिकल्स को शरीर से बाहर करने में मदद करता है।
माँसाहार जिन असाध्य रोगोंको जन्म देता है उस पर अन्य ताज़ा खोजों के परिणाम निम्न हैं—1-रक्त् वाहिनियों की भीतरी दीवारों पर कोलेस्ट्रोल की तहों का जमना हृदयरोग तथा उच्च रक्त चाप का मुख्य कारण है। कोलेस्ट्रोल का सर्वाधिक प्रमुख स्रोत अंडा है फिर माँस, मलाई, मक्खन और घी होते हैं।२-मिर्गी (एपीलेप्सी)—यह संक्रमित माँस व बगैर धुली सब्जियां खाने से होता है।

३-आंतों का अल्सर, एपेन्डीसाइटिस, आंतों और मलद्वार का कैंसर–ये भी शाकाहारियों की अपेक्षा माँसाहारियों में अधिक होते हैं।

४-गुर्दे की बीमारियाँ—अधिक प्रोटीन युक्त भोजन गुर्दे खराब करता है। शाकाहारी भोजन फैलावदार व पेलेटेविल होने से पेट जल्दी भरता है अत:उससे मनुष्य आवश्यकता से अधिक प्रोटीन नहीं ले पाता है जब कि माँसाहार से आसानी से आवश्यकता से अधिक प्रोटीन खाया जाता है।

५-संधिवात, गठिया व अन्य वात रोग—माँसाहार खून में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ाता है जिसके जोडों पर जमाव होने के कारण ये रोग उत्पन्न होते हैं। ये देखा गया है कि माँस, अंडा, चाय, काफी आदि छोड-ने पर इस प्रकार के रोगियों को लाभ पहुँचा।

६-रक्त धमनियों का मोटा होना—इसका कारण भोजन में पोलीसेच्युरेटेड फेट, कोलेस्ट्रोल व केलोरीज का आधिक्य है। माँसाहारी भोजन में इन पदार्थों की अधिकता रहती है जब कि शाकाहारी भोजन में बहुत कम। सब्जी, फल इत्यादि में ये पदार्थ न के बराबर होते हैं। अत: शाकाहारी भोजन इस रोग से बचाने में सहायक है।

७-कैंसर—यह जानलेवा रोग माँसाहरियों की अपेक्षा शाकाहारियों में बहुत कम पाया जाता है।

८-आंतों का सड़ना—अंडा, माँस आदि खाने से पेचिश, मंदाग्नि आदि बीमारियाँ घर कर जाती हैं, आमाशय कमज़ोर हो जाता है व आंतों में सड़न होने लगती है।

९-त्वक रोग, मुहाँसे आदि—त्वचा की रक्षा के लिये विटामिन ए का सर्वाधिक महत्व है जो गाजर, टमाटर, हरी सब्जियों आदि में ही बहुतायत में होता है, यह शाकाहारी पदार्थ जहाँ त्वचा की रक्षा करते हैं वहीं माँस, अंडे, शराब आदि त्वचा रोगों को बढावा देते हैं।

१०-अन्य रोग—जैसे माइग्रेन, इंफेक्शन से होने वाले रोग, स्त्रियों के मासिक धर्म सम्बन्धी रोग आदि भी माँसाहारियों में अधिक पाये जाते हैं।

सारांश यह है कि जहाँ शाकाहारी भोजन प्राय: प्रत्येक रोग को रोकता है वहीं माँसाहारी भोजन प्रत्येक रोग को बढावा देता है। शाकाहार आयु बढ़ाता है तो माँसाहार आयु घटाता है।

नोट:-पश्चिम भक्तो के लिए बता दूँ यह शोध पश्चिम के वैज्ञानिको ने की है नाम इस प्रकार है अफ्रीकन रिसर्च फाउंडेशन के डा0अन्ना स्पोरी,जर्मनी के प्रोफेसर एग्नरबर्ग( जर्मनी की इंस्टीट्यूट आफ सोशल मेडिसन एंड एपीडीमिओलोजी),अमेरिका के डा0 ई0बी0एमारी,इग्लेंड के डा0 इन्हा और डा0 आर0 जे0 विलियम|

The think most people in the world has led to carnivores. Similarly, the entire world into thinking big – big and established modern slaughterhouses. Poultry, goat and piggery etc. The result of this thinking, but like – such as health awareness, the people of meat is less glamorous. Today, in many countries of the world is focused on adopting vegetarianism. India has been pushing vegetarianism in advance.
Our country has been aware since ancient times in terms of diet. Keeping in mind the overall health of our culture has been focus on diet and its purification. Vegetarianism, priority has been given to a healthy life. Chhandogyopanisd stated – “Aharshuddhu Satvshuddhi. Namely the purification of food is pure human conscience.” Must Annmayn sober mind “means the food is eaten, so the mind, intellect, etc. are considered.

The first priority of the people of the United States was a vegetarian, but when they get to the importance of vegetarianism, vegetarianism has become a priority. Here we saints, sages of the Upanishads is already written – “short Buktm multi Buktm” ie those who eat less feed for longer.

Should the person that vegetarian and Sattvic food (Fruits, milk, vegetables, honey, kidney bean, wheat, etc.) to eat. Sumptuous meal (pizza, fried bread, sour, chili with meat, Hemp, hemp and substance) of the person beloved lust, sin and the patient becomes. Passionate food (stale uninteresting things, oil fried, sweet, rich foods) giving rise to serious diseases, including heart disease.
Many studies have proven that the human body is not suited for meat. Flesh is the creator of many diseases. Carnivores in the blood vessels of the people “cholesterol” accumulates, causing disruptions in the supply of blood to the heart seems to be arriving. Therefore seems to be prone to high blood pressure as well as diseases such as heart attack and stroke get the invitation. Carnivorous heart disease than men, “prostate cancer” and carnivorous women uterus, graafian follicle (ovary) and are more likely to develop breast cancer. Medical scientists also acknowledged that non-vegetarians than people get sick.

In fact, according to an approximately 12-13 kg grain meat “uric acid” is found. “Uric acid” is a type of chemical toxins in the body works. When the amount in the blood of heart disease, liver disease, tuberculosis, anemia, meat-related diseases, hysteria, rheumatism etc. are causing many dangerous diseases. That “uric acid” when the particles begin to accumulate in the joints and rheumatoid arthritis then (osteo arthritis) increases the chances of getting the disease. Mainly “saturated fats” and “cholesterol” to get more meat and dairy products, resulting from excessive intake process begins when the heart sick. Fiber which “blood cholesterol” that helps reduce the “Plant Fruds” is found.

According to a research, 36 percent lower in vegetarians than non-vegetarians “Metobulik syndrome” (five major risk – high blood pressure, low H D L cholesterol, high glucose levels, high triglycerides, waist circumference Aswasthek, three of prominence) found is. “Metobulik syndrome,” heart disease, diabetes and “stroke” is the key factor. Siditi stomach is heavy on meat and produces so many abdominal diseases arise. The “fiber” is not. Fiber is very important for the body. People who have a diet Resa heart diseases, stomach cancer, piles, obesity, diabetes, constipation, hernia, Daywartikulaitis, irritable bowl syndrome, reduces the risk of dental Karryj and Golstons. Fiber – grains, beans, fruits, citrus fruits, carrots, cabbage, green leafy vegetables, apples, watermelon – muskmelon, peaches, etc. is found.

For example, “Salmonella Taifimuriam” reaches the bacteria in the body by eating eggs, which increases the chances of getting pneumonia and bronchitis. This proves that the human body is best for vegetarianism.is overpowered. Hence Become Vegetarian – stay healthy. (Sincerely – from weekly Paञchjny)

 

More than 500 g per week in food intake of red meat increases the chances of a person suffering from cancer. Be burned or processed meat carcinogen (cancer causing agents) increases.

Food, garlic, onion, turmeric, etc. intake reduces the chance of cancer. Brasika Total descent vegetables such as broccoli, cabbage, cauliflower, cabbage (Brsl sprouts) found Isthiyosaynet and Andols bound by our liver cancer-causing substances (Carsinojens) makes the Ditoksifay. Carrots, grapes and berries Flevenoaids element found to cause cancer when free – radicals in the body that helps.

Rogonco malignant non-vegetarianism which gives rise to the results of other fresh discoveries are as follows –

1 – Rkt layers of cholesterol on the inner walls of the vessel’s starboard side is the main cause of heart disease and high blood pressure. The most important source of cholesterol egg meat, cream, butter and ghee are.

2 – epilepsy (epilepsy) – This is by eating infected meat and vegetables without a wash.

3 – intestinal ulcers, Apendisaitis, intestines and anus cancer – even vegetarians are more than Maँsaharion.

4 – kidney disease – kidney failure is a high protein diet.

5 – arthritis, gout arthritis and other – non-vegetarianism which increases the amount of uric acid in the blood, joints, these diseases are caused due to the congestion. It has been observed that meat, eggs, tea, coffee and left – to the benefit of this type of patients.

6 – thickening of blood vessels – Polisechyureted because fat in the diet, excess cholesterol and is Kelorij. Non of these substances in food that vegetarian food is very low in abundance. Vegetable, fruit, etc. These substances are negligible. So the vegetarian diet help prevent the disease.

7 – Cancer – This deadly disease is found much lower in vegetarians than Maँsahrion.

8 – intestinal decay – egg, eating meat and dysentery, indigestion and diseases are home, becomes weak stomach and intestines begin to decay.

that encourage skin diseases.

10 – Other diseases – such as migraine, infection illness, etc. Maँsaharion women in menstrual disorders are more frequent.

The summary is that the vegetarian diet almost every disease that prevents disease, promotes each of the non-vegetarian food. Vegetarianism to non-vegetarianism age decreases when age increases.

Note: – West devotees to tell this research western scientists of the name is the African Research Foundation Dr. 0 Anna Spori, Germany Professor Agnrberg (German Institute of Social Medicine and Apeedimioloji), U.S. Dr. 0 E 0 B 0 Amari, Iglend the Dr J 0 R 0 0 0 Inha and Dr. William |

Short URL: http://jayhind.co.in/?p=1707

Posted by on Mar 14 2013. Filed under आयुर्वेद. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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