Donation (non-profit website maintenance)

Live Indian Tv Channels

क्या भारत में भी कभी ऐसा हो सकेगा

Politics

(करण थापर) 3 सप्ताह पूर्व मैंने आस्ट्रेलिया की प्रतिनिधि सभा (यानी लोकसभा) में आधा घंटा क्या गुजारा मेरी तो आंखें खुल गईं। 19 मार्च को मैंने प्रश्रकाल देखा और मुझे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। जो मैं आगे बताने वाला हूं उसका एक-एक शब्द पूरी तरह सत्य है। आप चाहें तो इसे खुद http://www.abc.net.au/newsradio/parliament/pod-casts.htm पर चैक कर सकते हैं।

फिर भी मैं दो तथ्यों की ओर संकेत करके अपनी बात शुरू करता हूं। पहली बात यह कि गत वर्ष अक्तूबर में प्रश्रकाल के दौरान ही प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने विपक्ष के नेता टोनी एबट की इतनी जोरदार आलोचना की कि उन्हें मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा था। सुश्री गिलार्ड ने अपने भाषण में उनकी पुरुषवादी मानसिकता पर प्रहार किए थे। दूसरी बात यह कि इस घटना के बाद सदन के अध्यक्ष पद में बदलाव हुआ। एनी बर्क को केवल 6 माह ही इस पद पर काम करने का मौका मिला।

अब मैं बताता हूं जो 19 मार्च को हुआ। प्रश्रकाल की शुरूआत विपक्ष के नेता के सवाल से हुई और एक बार फिर प्रधानमंत्री ने उनकी पुरुषवादी सोच पर डंक चलाया। इस पर विपक्ष की कार्रवाई के संचालक (एम.ओ.बी) ने मोर्चा संभाला और मांग की कि जूलिया अपने शब्द वापस लें लेकिन अपने अंतिम कुछ वाक्य उन्होंने बहुत चिल्ला कर कहे।

बिना एक भी क्षण का विलम्ब किए अध्यक्ष ने एम.ओ.बी. को सदन से बाहर निकलने को कहा। बिना कोई हील-हुज्जत किए उन्होंने आज्ञा का पालन किया। फिर प्रधानमंत्री की ओर मुड़ते हुए अध्यक्ष ने उन्हें अपनी टिप्पणी वापस लेने को कहा। प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया ऐसी थी : ‘‘यदि विपक्ष के नेता को किसी भी प्रकार से कष्ट पहुंचा है तो मैं अपने शब्द वापस लेती हूं।’’ अध्यक्ष इससे संतुष्ट नहीं हुए और प्रधानमंत्री को जोरदार लताड़ लगाते हुए आदेश दिया, ‘‘प्रधानमंत्री बिना किसी शर्त के अपने शब्द वापस लेंगी।’’ फिर भी प्रधानमंत्री ने झिझक दिखाई तो अध्यक्ष जोरदार आवाज में गरजे, ‘‘मैं आदेश देता हूं : क्या प्रधानमंत्री शब्द वापस लेंगी?’’

इस खिंचाई के बाद प्रधानमंत्री को आदेश का पालन करना पड़ा। हल्की लेकिन स्पष्ट आवाज में  प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मैं अपने शब्द वापस लेती हूं।’’ अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया और सदन की कार्रवाई को आगे बढ़ाया।

जिस तरह अध्यक्ष ने विपक्ष के न सिर्फ अग्रिम बैंचों को बल्कि खुद प्रधानमंत्री को हैंडल किया उस पर विश्वास करना भी मुझे कठिन लग रहा था। मैंने अपने आपसे सवाल किया, ‘‘क्या भारत में भी कभी ऐसा हो सकेगा?’’आश्चर्य की बात तो यह है कि अगले 20 मिनट यही सारा कुछ दोबारा हुआ। एक, दो नहीं, कुल तीन बार ऐसा हुआ।

पहली बार तब जब विपक्ष के अगले बैंचों पर बैठे एक सदस्य ने वित्तीय सेवाओं के मंत्री को अकारण बीच में टोका तो उसे तत्काल अपने शब्द वापस लेने को कहा गया और साथ ही कहा गया, ‘‘मेयो हलके का प्रतिनिधि जितनी जल्दी और चुपचाप बाहर निकल जाए उतना ही अच्छा होगा।’’ उसने ऐसा ही किया।

लेकिन इससे मंत्री महोदय कुछ ज्यादा ही जोश में आ गए और टिप्पणी कर दी, ‘‘इस सदन में बहुत समझदार लोग बैठे हैं।’’ लेकिन अध्यक्ष को यह बात भी नाखुशगवार लगी और उन्होंने मंत्री को अपने शब्द वापस लेने को कहा। बिना किंतु-परन्तु किए मंत्री जी ने भी ऐसा ही किया।

फिर विपक्ष की एक अन्य सदस्य ‘प्वाइंट ऑफ आर्डर’ के बहाने प्रधानमंत्री को टोकने के लिए उठी हालांकि उसका  नुक्ता बिल्कुल फालतू था। अध्यक्ष ने उसे बीच में टोक कर बैठने का आदेश दिया लेकिन वह झिझक गई। इस पर अध्यक्ष महोदय भड़क गए और उसे तत्काल सदन से निकलने का आदेश दिया। चुपचाप और फटाफट उसने भी आदेश का पालन किया।

क्या आप एक क्षण के लिए भी यह कल्पना कर सकते हैं कि हमारी लोकसभा का कोई अध्यक्ष ऐसा फौलादी अनुशासन लागू कर सकेगा चाहे वह हमारी मृदुभाषी मीरा जी हों या उनके पूर्ववर्ती धाकड़ अध्यक्ष?

इससे भी बड़ी बात यह है कि क्या आप यह कल्पना कर सकते हैं कि हमारे सांसद बिना कोई सवाल-जवाब किए तत्परता से सदन से बाहर जाने के आदेश का पालन करेंगे? मैं बेबाकी से कहूंगा कि न विपक्ष की अगली कतारों में सुशोभित सदस्य और न ही हमारे प्रधानमंत्री बिना हील-हुज्जत के अध्यक्ष के आदेश को स्वीकार करेंगे।

इसी कारण मैंने वैब लिंक दिया है ताकि जो कुछ मैंने लिखा है आप स्वयं उसकी सत्यता प्रमाणित कर सकें। हमारी संसद का सत्र दोबारा शुरू होने में अभी 2 सप्ताह हैं तो इस अवधि में प्रत्येक सांसद को इस वैबसाइट पर पधार कर खुद अपनी आंखों से देखना चाहिए कि आस्ट्रेलियाई प्रतिनिधि सभा कितनी कुशलता से काम करती है। इस पूरे काम में उन्हें 30 मिनट से ज्यादा समय नहीं लगेगा लेकिन जो कुछ वे सीखेंगे वह जिंदगीभर के लिए अनमोल सबक होगा।

Via : punjabkesari.in

Short URL: http://jayhind.co.in/?p=1828

Posted by on Apr 7 2013. Filed under खबर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

Leave a Reply

*

Recent Posts

Photo Gallery