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live narendra modi vijay shankhnad rally in jhansi : नरेंद्र मोदी की झांसी में ‘विजय शंखनाद रैली’

Shri Narendra Modi addresses huge BJP Rally at Jhansi, Uttar Pradesh

बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की झांसी में ‘विजय शंखनाद रैली’ शुरू हो चुकी है. मंच पर नरेंद्र मोदी के साथ राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह, उमा भारती और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी मौजूद हैं.

नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह का बड़ा हार पहनाकर स्वागत किया गया. यह काम सौंपा गया झांसी सदर के बीजेपी विधायक रवि शर्मा को. बहुत संभव है कि यही विधायक झांसी सीट से बीजेपी के उम्मीदवार हों. वैसे एक नाम मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का भी चल रहा है इस संसदीय सीट के लिए.

यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह के बाद उमा भारती ने भाषण दिया.

उमा भारती: शेर की तरह शिकार करो बुंदेलखंड के नौजवानों
बोलिए भारत माता की जय
हम सबके बड़े भाई और आदर्श नरेंद्र मोदी जी,
उत्तर प्रदेश में अपराध मुक्त राज व्यवस्था लागू करने वाले मेरे बड़े भाई कल्याण सिंह जी
यहां उपस्थित बहनों भाइयों
बुंदेलखंड की धरती पर मोदी जी और राजनाथ जी का स्वागत. मैं मोदी जी को बताना चाहती हूं. ये जनता यहां मौजूद है, उसे सौ गुना मानना. सौ दंडी और एक बुंदेलखंडी बराबर बैठते हैं. ये लोग 100 करोड़ लोगों की ताकत रखते हैं. हमने झांसी में इतनी बड़ी सभा नहीं देखी. ये सब लोग मोदी जी के कारण उपस्थित हुए हैं. कारण, जो मोदी जी ने गुजरात में दिया है, आज देश की जनता चाहती है कि वैसे ही पूरे देश में शासन मिले.

गुजरात में महिलाएं सबसे ज्यादा सुरक्षित मानी जाती हैं. मैं चाहती हूं कि ऐसा सुरक्षित और भ्रष्टाचार मुक्त शासन देश को मिले. ये भूख है देश की जनता के अंदर आज.

आज महिलाएं बीजेपी को और नरेंद्र मोदी को आशीर्वाद दें. समर्थन दें. नौजवान, जैसे हनुमान की सेना राम के साथ लग गई थी, वैसे ही आप भी भ्रष्टाचार की लंका को जलाने के लिए, सारे नौजवान बजरंग बली की सेना बन जाओ. उठाओ मेरे साथ हाथ. और ये संकल्प लो कि ये बुंदेलखंड की जनता भूख भय भ्रष्टाचार से मुक्त सरकार के लिए मोदी जी को चुनोगी.

कांग्रेस के युवराज ने गरीबों की खटिया पर बैठकर बहुत पकौड़े खाए. मायावती ने भी खूब घोषणाएं कीं. मगर नतीजा क्या रहा.

आज मुझे आपको ये संकल्प दिलाना है. बुंदेलखंड के किसानों, नौजवानों, बुजुर्गों, आज आप तय करो. मुझे अच्छी नहीं लगती ये मेरे बुंदेलखंड की बात. हमारे यहां के लोग बाहर मजदूरी करने जाते हैं. डूब मरने का मन करता है. आज मैं कहती हूं. ऐसा समय लाओ कि बुंदेलखंड के लोग मजदूरी करने नहीं, दिल्ली पर राज करने जाएं.

आपको कोई कमी नहीं है. नदियां हैं. मेहनत है, बुद्धि है बल है, इसलिए याद रखो, एक लड़ाई गीदड़ की होती है, एक शेर की. शेर अपना शिकार खुद करता है. गीदड़ इंतजार करता है, शेर की जूठन खाने के लिए. बुंदेलखंड के नौजवानों तय करो, शेर की तरह झपट्टा मारकर अपना शिकार करोगे.

आपको जरूरत है एक कानून वाली सरकार की. अब मैं भगवान राजा राम से प्रार्थना करती हूं, स्वर्ग में बैठी रानी लक्ष्मी बाई से प्रार्थना करती हूं कि वे नरेंद्र मोदी भाई को आशीर्वाद दें.कि वे भारत के भाग्य विधाता बनें.

भारत माता की जय.

राजनाथ सिंह: जालिम लोशन बेचने की तर्ज पर गरीबी को मार्केट कर रहे राहुल
लंबे समय के बाद इस झांसी को किसी सार्वजनिक सभा को संबोधित करने के लिए खड़ा हुआ हूं. जो कुछ भी देख रहा हूं, कह सकता हूं कि यह जनसभा नहीं जनसैलाब देख रहा हूं. आप लोगों ने नरेंद्र भाई का सभी नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया. लेकिन बहनों भाइयों परंपरा है, स्वागत इकतरफा नहीं होना चाहिए. इसलिए मैं भी इस वीरभूमि झांसी और इसके सपूतों का स्वागत करता हूं. नरेंद्र भाई यह बुंदेलखंड की धरती वीरों की धरती है. यहां के बारे में कहा जाता है. कि यहां के बुंदेलों के ऊपर 52 तीर चुभे होते थे, फिर भी दुश्मनों के हौसले पस्त कर देते थे.

बुंदेलखंड के भाइयों ने गरीबी भले ही देखी हो, मगर आन बान शान से समझौता नहीं किया. लेकिन सबसे बड़ा अभिशाप जो झेलना पड़ रहा है, वह गरीबी का है, बेरोजगारी का है. मैं कह सकता हूं कि यूपी के दूसरे इलाकों की तुलना में गरीबी और बेरोजगारी का प्रतिशत ज्यादा है. आए दिन यहां के किसानों को सूखे और अकाल के संकट से जूझना पड़ रहा है. कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी यहां आए थे. सब्जबाग दिखा गए थे. कह रहे थे कि यहां के विकास के लिए इतना बड़ा पैकेज दे दूंगा कि तकदीर बदल जाएगी. साढ़े चार साल गुजर गए, कहां गया पैकेज का पैसा, कितना लाभ हुआ बुंदेलखंड का. ये मुझसे बेहतर आप जानते हैं. आज भी सूखे की स्थिति है. किसानों को बीजेपी के शासनकाल में सस्ते दर पर खाद मिल जाती थी. आज उससे तीन चार गुना दामों में मिल रही है. इतना ही नहीं लोग भुखमरी के शिकार हो रहे हैं. बिजली आ नहीं रही. पानी का संकट पहले से गहरा है. अजीबोगरीब हालात हैं.

लेकिन आज नरेंद्र भाई ने जो गुजरात में किया है. मैंने प्रत्यक्ष देखा है. उसकी प्रशंसा केवल अपने देश में नहीं विदेशों में भी हो रही है. अमेरिका भी इसकी प्रशंसा कर रहा है.इसलिए मुझे पक्का भरोसा है कि जिस दिन पीएम की बागडोर आपके हाथ में होगी. उसी दिन देश की तकदीर और तस्वीर बदल जाएगी.

बीजेपी यह मानती है कि सचमुच भारत माता को हम वैभव के शिखर पर पहुंचाना चाहते हैं. तो ये तभी होगा, जब समाज की अंतिम सीढ़ी पर बैठा व्यक्ति, जिस दिन उसके चेहरे पर मुस्कान हो जाएगी, उसी दिन तरक्की होगी.

आपने 6 साल भारत माता के सपूत अटल जी की सरकार को देखा. कौन इस सच्चाई को देखेगा. स्वतंत्र भारत के इतिहास में लगातार 6 सालों तक महंगाई पर काबू पाने की सफलता अगर किसी ने हासिल की है, तो उनका नाम है पंडित अटल बिहारी वाजपेयी.

यहां लोगों को याद दिलाना चाहता हूं. आजाद भारत में गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ने का सिलसिला बीजेपी ने शुरू किया था. जब बीजेपी की सरकार नहीं थी. उसके पहले जब खेतीबाड़ी के लिए बैंक से कर्ज लेते थे, तो 14 फीसदी से ज्यादा की ब्याज दर पर कर्ज मिलता था. 2003 में बीजेपी की सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड देकर 8.5 फीसदी की दर पर कर्ज देना शुरू किया.

आगे क्या हुआ. बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद मैंने देखा. जहां बीजेपी की सरकार है, वहां सीएम से अपील की. किसी भी किसान से 4 फीसदी से ज्यादा दर पर कर्ज का ब्याज न लिया जाए.

आपने गुजरात नहीं देखा. मध्य प्रदेश देखा होगा. वहां पर हमारे किसान भाइयों को एक फीसदी और शून्य फीसदी दर पर कर्ज मुहैया कराया जा रहा है.

मैं आपको यह भी विश्वास दिलाना चाहता हूं.जिस दिन बीजेपी को दस बरस के लिए शासन चलाने का मौका मिल जाएगा. हम यह तय करेंगे कि एक भी किसान परिवार न बचे, जिसमें खेती के अलावा एक बेटे को, एक जवान को नौकरी का अवसर न मिल जाए, ऐसा परिवार शेष न बचे.

नौजवानों, तुम्हारे सपने बीजेपी की सरकार ही पूरा कर सकती है.

मोदी जी पीएम बनने पर हमारे इस बुंदेलखंड की विशेष नजर होनी चाहिए. मैंने देखा है कि आपने गुजरात के पिछड़े इलाके में आपने विशेष ध्यान दिया. आदिवासी इलाकों में विशेष काम हुआ है. आपको वहां दिखता है कि हुकूमत कैसे चलाई जाती है.

आज मोदी मोदी की गूंज हिंदुस्तान के कोने कोने में दिखाई देती है.बहनों भाइयों याद रखना. कांग्रेस के लोगों ने जब जब चुनाव का समय आया, आपको सब्ज बाग दिखाया. आज ये कांग्रेस के राहुल गांधी गरीबी की मार्केटिंग कर रहे हैं. जैसे जालिम लोशन की मार्केटिंग होती है.

रोडवेज की बसों में, वैसे ही. मैं सोनिया और राहुल से पूछना चाहता हूं. 65 साल के काल में सबसे ज्यादा लंबे समय तक आपने हुकूमत की. तो गरीबी यदि पैदा की है. तो कांग्रेस ने पैदा की है. नौजवानों में बेरोजगारी की है.

गरीबों की बस्ती में दो घंटे चारपाई पर लेटकर मीडिया के लोगों को बुलाकर फोटो खिंचवाते हैं. वीडियो बनाते हैं. लोगों को जाकर दिखाते हैं. यहां पर क्या गरीबी की जिंदगी कल्याण सिंह ने नहीं जी. बहन उमा भारती जी ने. क्या विनय कटियार ने नहीं जी. किसकी बात करते हो राहुल ने. लेकिन इनके बहकावे में कभी मत आना.

इन्होंने केवल आपके पेट पर ही लात नहीं मारी, आपके स्वाभिमान पर चोट पहुंचाने का काम किया है. ये सपा और बसपा. यहां पर आकर बराबर कांग्रेस की आलोचना करती हैं, लेकिन दिल्ली में जाकर सपा और बसपा, कांग्रेस को समर्थन देने का काम करती हैं. क्या ये आपके साथ धोखा नहीं है. यहां यूपी में सपा, बसपा और कांग्रेस एक दूसरे की पीठ खुजलाते हैं. वहां दिल्ली में पीठ सहलाते हैं. सिर्फ सीबीआई के डर से.

ऐ सपा बसपा के नेताओं. समर्थन दे दिया. अब सीबीआई से क्लीन चिट मिल गई. अब तो समर्थन वापस ले लो. अब तो यूपी की जनता के स्वाभिमान की चिंता करो.

लंबे समय तक बुंदेलखंड की जनता ने सपा-बसपा और कांग्रेस की झोली भरी है. आज मैं आपसे अपील करता हूं कि आप मोदी भाई को पीएम बनाने के लिए बीजेपी की झोली भर देना.

आज चाहे पाकिस्तान हों, चीन हों. मालदीव, कुछ लाख का देश है. ये सब हमें इतना कमजोर देश मानने लगे हैं. ये भारत को जब होता है, आंख दिखा देता है. सुनता नहीं है. पाकिस्तान की ये जुर्रत. हमारे आपके परिवार का जवान. जो सीने का बटन खोलकर सीमा की रक्षा करता है. पाकिस्तान के जवान आते हैं और उसका सिर काटकर ले जाते हैं और सोनिय गांधी, राहुल गांधी चुप्पी साध लेते हैं. चीन के जवान महीनों जमे रहे. उसका जवाब देने की भी हिम्मत नहीं हुई. हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे.

मैं तो यह भी कहना चाहता हूं पीएम मनमोहन सिंह. आपके कलेजे में अगर दम नहीं है, तो हमारे सेना के जवानों का खुला हाथ छोड़ दो, देखो कैसा करिश्मा दिखाते हैं.

मैं यह भी बताना चाहता हूं कि 2014 के चुनावों में देश के सामने पेश किया है जिस व्यक्ति को, उसने छोटी चीजों के लिए भी समझौता नहीं किया. मेरी बात आज सुन लेना. जिस दिन मोदी के पीएम पद की शपथ लेने की जानकारी मिल जाएगी, पाकिस्तान और चीन की घिग्घी बंध जाएगी.

नरेंद्र मोदी: मैं रोने-धोने नहीं, आंसू पोंछने आया हूं
भारत माता की जय (मंच पर बैठे नेताओं को संबोधन)…और बुंदेलखंड के वीर सपूत भाइयों और बहनों
ये मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे इस वीर भूमि पर आने का सौभाग्य मिला. और जब भी 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की बात आती है, तो बुंदेलखंड का परचम, झांसी का परचम पूरे हिंदुस्तान में नई ऊंचाइयों के दर्शन कर आता है. ये वीर भूमि है. ये प्रज्ञावानों की भी भूमि है.और जिसके लिए हमारी वर्तमान पीढ़ी गर्व करती है, वो हॉकी के जादूगर ध्यानचंद भी इसी मिट्टी की पैदाइश थे.(भीड़ ने किया चीयर्स) उस मिट्टी को मैं नमन करता हूं.

मैं आपके पास रोने धोने नहीं आया हूं. न आंसू बहाने आया हूं. न आंसू बहाने वालों की कोई कथा सुनाने आया हूं. मैं आज आपके यहां आया हूं आपके आंसू पोछने को विश्वास देने के लिए. मैं संकल्प लेकर आया हूं कि बुंदेलखंड की कठिनाइयों में जी रही, गरीबी में पनप रही, यहां के गरीब के आंसू पोंछने का मैं संकल्प लेकर आया हूं.

क्या यहां की जनता में दम नहीं है, यहां के किसानों में दम नहीं है. अगर दम नहीं है…तो लखनऊ और दिल्ली में नहीं है.(भीड़ का शोर) उनको परवाह नहीं है.भाइयों बहनों. मैं हेलिकॉप्टर से आ रहा था. इतनी सारी नदियां, इतना पानी, उसके बाद भी बुंदेलखंड प्यासा क्यों है. यहां की धरती सूखी क्यों है. यहां का किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर क्यों होता है.

भाइयों बहनों मैं दिल्ली की सल्तनत से सीधा सवाल पूछता हूं. जवाब दे. क्या कारण है कि जहां जहां उनके पैर पड़े, उनको शासन करने का अवसर मिला है. वो चाहे आंध्र प्रदेश हो, चाहे महाराष्ट्र हो. उसमें भी चाहे विदर्भ का सूखा इलाका हो और चाहे कांग्रेस का समर्थन करने वाली यहां की सरकार हो. इन्हीं सब राज्यों में सबसे ज्यादा मेरे किसान भाई बहन आत्महत्या क्यों करते हैं.हिंदुस्तान के और राज्यों में ऐसा है क्या. न इन लोगों को गांव की परवाह है, न गरीब की परवाह है, न किसान की परवाह है. जब चुनाव आते हैं तो हमारे कांग्रेस के मित्र रेवड़ी बांटने लग जाते हैं.और आजकल जहां जाते हैं, वहां पैकेट और पैकेज की बातें करते हैं. आपके यहां भी आया था. आपको लगा होगा कि भला करने आया था. नहीं मित्रों. वो पैकेज आपका भला करने नहीं, वो तो यूपी के नेताओं का मुंह बंद करने लिए टुकड़ा फेंकने के लिए भेजा गया था. दिल्ली और लखनऊ ने मिलकर आपस में बांट लिया पैकेज, आपके यहां नहीं आया.

कोई मुझे बताए, यहां मंडी का निर्माण होने वाला था. हुआ (भीड़ से आवाज आती है ‘नहीं हुआ’) यहां कुआं खोदने की बात की गई थी. नजर आता है.यहां नदियों पर चेकडैम बनाने की बात हुई थीं. कहीं पानी नजर आता है. तो रुपया गया कहां. ये पैकेज उनके पॉकेट के लिए होता है.

और भाइयों बहनों, ये बुंदेलखंड को जो पैकेज मिला, उसका आधा हिस्सा यूपी के बुंदेलखंड को मिला और आधा एमपी में पड़ने वाले बुंदेलखंड को. और आज मैं सीना तानकर गर्व से कह सकता हूं कि मेरी पार्टी के सिपाही आदरणीय शिवराज सिंह जी चौहान, जब उनके पास पैकेज आया, तो पाई पाई बुंदेलखंड की भलाई के लिए खर्च हुई. उसका नतीजा ये रहा कि 30 प्रतिशत से ज्यादा भूमि को सिंचाई पहुंचने का काम पूरा कर दिया. उस इलाके में पहले जो फसल होती थी. उससे तीन गुना फसल शिवराज जी ने पैदा कर दिखाई. आज मैं ये बीजेपी के नेता के रूप में नहीं कह रहा हूं.

प्लानिंग कमीशन, जिसके अध्यक्ष देश के पीएम होते हैं. उसने कहा कि इस पैकेज का उत्तम उपयोग किसी ने किया, तो एमपी की सरकार ने, बीजेपी ने किया और यहां, यहां सब लूट लिया. आपके नाम पर आता है. जाता इनकी जेब में है. और इसलिए भाइयों-बहनों, अब ये पैकेज की बातें बहुत हो चुकी हैं. अब वक्त आ गया है कि सपा-बसपा-कांग्रेस को पैकिंग कर रवाना करो.

ये सपा यहां जो कारनाम करती है. राममनोहर लोहिया जहां भी होंगे, उनको इतनी पीड़ो होती होगी, जिसकी कल्पना भी नहीं कर सकते. ये सबका लूटते हैं. समाजवादी का स, बहुजन समाज पार्टी का ब और कांग्रेस का. यानी सबका. ये तीनों तिकड़ी लूटते हैं. इन्होंने यूपी को, बुंदेलखंड को तबाह कर दिया है.

मैंने भी यूपी में दौरा किया है. जब संगठन का काम करता था, यहां के हर जिले में गया हूं. यहां के लोगों को जाना है समझा है. यहां की प्राकृतिक संपदा को समझा है. मैं विश्वास से कहता हूं कि यूपी के पास इतना सामर्थ है कि यूपी अकेला अपने बलबूले पर पूरा हिंदुस्तान की गरीबी को मिटा सकता है. ये ताकत यूपी में है.लेकिन न उनको विकास करने में रुचि है, न यहां के नौजवानों का भविष्य बनाने में रुचि है. उन्हें सिर्फ सत्ता की गणित बनाना. गठजोड़ की राजनीति करना, भाई से भाई को लड़ाना, सबको बांटते जाना, यही इनका कारोबार है.

भाइयों बहनों अगर यूपी की धरती पर, सब वादों का इकट्ठा यहां लालन पालन हुआ है. सारे वाद यहां उभार कर रखे हैं. ये धरती हैं, जहां एक तरफ कांग्रेस का अहंकारवाद है, समाजवादी पार्टी का परिवारवाद है और बहुजन समाज पार्टी का व्यक्तिवाद है, ये वादों से भरे हुए लोग आपके वादे पूरा करना नहीं चाहते. वे अपना ही पेट भरना चाहते हैं. और इसलिए भाइयों, बहनों. जब तक उत्तर प्रदेश इन तीनों प्रकार के संकटों से मुक्ति का संकल्प नहीं करता, तब तक मेरे नौजवान मित्रों, आपका भाग्य नहीं बदल सकता.

मित्रों आज मैं, शासन के मेरे अनुभव के आधार पर आपको विश्वास दिलाने आया हूं. पिछले 12-13 साल में जो काम करने का सौभाग्य मिला, उस काम को देखते हुए आपको विश्वास दिलाने आया हूं. मैं देशवासियों को कहता हूं, झांसी की धरती से कहता हूं, रानी लक्ष्मीबाई का पुण्य स्मरण करते हुए कहता हूं. मेरे देशवासियों, आपने कांग्रेस को साठ साल दिया. हमें सिर्फ साठ महीने देकर के देखो. साठ साल में उन्होंने जो तबाह किया है. मैं बीजेपी के सिपाही के नाते विश्वास दिलाता हूं कि आपने साठ महीने के लिए भी अवसर दिया तो हम आपकी तकदीर भी बदल देंगे और देश की तकदीर भी बदल देंगे.

(मोदी-मोदी का शोर…भाषण रुक जाता है कुछ देर के लिए)

भाइयों-बहनों, आप मुझे बताइए. मेरे नौजवान मित्र मेरे सवाल का जवाब देंगे. मन से बात करेंगे. क्या बुंदेलखंड का कोई नौजवान. अपना गांव, अपना घर छोड़कर के मुंबई की, गुजरात की झुग्गी झोंपड़ी में जाना चाहता हूं.(नहीं का शोर)अपने बूढे मां बाप को छोड़ना चाहता है, रोजी के लिए दर दर भटकना चाहता है (नहीं का शोर)

भाइयों बहनों इन्होंने आपको गांव-परिवार छोड़ने के लिए मजबूर किया. पेट भरने के लिए. मां बाप का पेट भरने के लिए नौजवान गुजरात की धरती पर आकर पसीना बहा रहा है.

भाइयों मैं गर्व से कहता हूं यूपी-बिहार आंध्र के लोगों ने इतना पसीना बहाया कि उनकी मेहनत से मेरा गुजरात चमक रहा है. अगर यही पसीना यहां बहा होता तो मेरा उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड कहां से कहां पहुंच गया होता. मैंने एक नया प्रयोग किया है. हमने कुछ कारखानेदारों को बुलाया. इनमें यूपी के बिहार के नौजवान मजदूरी करते हैं. अब वो आठ घंटा काम करते हैं. फिर चले जाते हैं. एक कमरे में 25 लोग रहते हैं. मैंने इन्हें कहा कि आप हिसाब लगाइए कि अगर ये सप्ताह में छह दिन आठ घंटे काम करता है. जितना आउटपुट देता है. उसका हिसाब लगाइए. अगर उसका मन करता है, दो चार घंटे ज्यादा काम करने का. और उसको जोड़िए और उस आउटपुट के आधार पर उसके काम के घंटे तय किए जाएं. हौसला होगा तो काम करेगा, नहीं करेगा, तो नहीं करेगा.

मित्रों पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया. यहां के जो नौजवान हैं, वे आठ के बजाय 12-13 घंटे काम करने लगे, एक साल का काम छह महीने में करने लग गए. मैंने कहा कि ये जो नौजवान छह महीने में काम कर गए हैं. उन्हें तनख्वाह के साथ छह महीने की छुट्टी दो. और छुट्टी तब दो, जब यहां खेती का मौसम हो, खेत का काम निकला हो. वो यहां खेत में काम करेगा. मां बाप की मदद करेगा. तनख्वाह मिलेगी. फिर वापस जाकर काम करेगा. ये पायलट प्रोजेक्ट सफल हो गया, तो मेरे नौजवान यूपी का भी भला करेंगे और गुजरात का भी.क्यों आया ये विचार. क्योंकि मन किया कि यहां के लड़कों को हर तरह के अवसर मिलने चाहिए.

मगर दिल्ली के पास सोचने के लिए समय भी नहीं है.अब लोकसभा का चुनाव आ गया है. ये दिल्ली वालों को अपने काम का हिसाब देना चाहिए कि नहीं. अब कहते क्या हैं. जो साझा घूम रहे हैं. भ्रष्टाचार पर आपको क्या कहना है, जवाब दो. क्यों नहीं दे रहे जवाब. ये महंगाई, ये माताओं-बहनों पर बलात्कार. जवाब देने को तैयार नहीं. आप मुझे बताइए कि ये चुनी हुई सरकार, ये जनता की सेवक है कि नहीं. जनता को जवाब देना चाहिए कि नहीं. ये अपने आपको बादशाह और शाहजादा मानते हैं.

मैं सुन रहा हूं. शाहजादे ने जो भाषण दिया. मैं गंभीर सवाल उठाना चाहता हूं. उन्होंने कहा कि जब मेरी दादी मर गई. मुझे बहुत गुस्सा आया. मैं शाहजादे से पूछना चाहता हूं कि क्या ये सच है कि सभी कांग्रेसियों को गुस्सा आया. क्या ये सच है कि आपने और आपकी पार्टी के लोगों ने हजारों सिखों को जिंदा जला दिया और आज तक एक को भी सजा नहीं हुई. क्या आपको सिर्फ दादी का मौत का गुस्सा आया. क्या आपको उन हजारों सिखों को मारने वालों पर गुस्सा आया. पीड़ा हुई. और आज जब दिल्ली में चुनाव आए हैं, तो आपने उस घाव पर नमक छिड़कने का पाप किया है. जिन परिवारों के नौजवानों को जिंदा जला दिया गया और आज आप दादी की मौत पर आए गुस्से की बात कर रहे हो. मानवता में यकीन करने वाला कोई भी व्यक्ति उन्हें माफ नहीं कर सकता.

मैं गंभीर सवाल पूछता हूं. आखिर ये शाहजादे हैं कौन. एक एमपी हैं. क्या हिंदुस्तान के इंटेलिजेंस के लोग. भारत की अत्यंत गुप्त जानकारी उस व्यक्ति के साथ कैसे शेयर कर रहे हैं, जिसने गुप्तता की कोई शपथ नहीं ली है. देश जानना चाहता है और आए दिन हिंदुस्तान की सरकार के लिए घंटों विवाद करने वालों से भी पूछना चाहता हूं. कोई बताए क्यों हिंदुस्तान की इंटेलिजेंस शाहजादे को जाकर रिपोर्ट करती है. खुफिया एजेंसी के लोग उनके राजनैतिक भाषणों के लिए इनपुट देते हैं.

उन्होंने कहा कि मुजफ्फर नगर में आईएसआई मुस्लिम नौजवानों के संपर्क में है. शाहजादे, देश में हुकूमत की पार्टी की है. क्या कारण है कि आईएसआई आपकी नाक के नीचे यूपी में पैर पसारने की ताकत रखती है. आप क्या कर रहे हो. देश जवाब मांगता है.

आपने रिलीफ कैंप में रह रहे लोगों पर एक गंभीर लगाया है कि वे लोग आईएसआई से मिले हैं. शाहजादे साहब आपका जिम्मा है. वो कौन नौजवान हैं, उनके नाम सार्वजनिक करो. वे कौन हैं, जो आईएसआई के साथ मिले हैं. और अगर नाम घोषित नहीं करते हो,तो किसी कौम पर इस तरह का इल्जाम लगाने से पहले आपका जिम्मा बनता है. और अगर नाम नहीं है, तो देश के उन नौजवानों से आप सार्वजनिक माफी मांगो. ये आपका जिम्मा है.

ये दिल्ली की सरकार. ऐसा लगता है कि जैसे वो कोई न्यूज एजेंसी है. जिसका काम सिर्फ हमको खबर देना है. कि आईएसआई ये कर रही है. अरे तुम्हारा काम खबर देना है कि आईएसआई को ठीक करने का है.मुझे बताएं मित्रों, क्या आप ऐसे नेताओं पर भरोसा कर सकते हैं. उखाड़ फेंको. इसने तबाही का मंजर कर रखा है. और इसलिए भाइयों बहनों गरीबी का मजाक उड़ा रहे हैं. इनके लिए, गरीबी एक मजाक का साधन बन गया है.

पुराने जमाने में राजा महाराजाओं के बड़े बड़े महल हुआ करते थे. समय बीता. उनका पतन हुआ. युद्धों में पराजय हुई. समय रहते उनके बड़े बड़े महल नहीं संभले तो खंडहर हो गए. उनके बच्चों के बाप दादा अब खंडहर दिखाने ले जाते हैं. बताते हैं कि हमारे दादा के दादा यहां से राज करते थे. आजकल ये शाहजादे भी अपने पूर्वजों का पराक्रम देखने लगते हैं. हमारे पिता जी ने क्या किया. हमारी दादी जी ने क्या किया. हमारे नाना जी ने क्या किया. उनके पराक्रम का अवशेष देखने गरीब की झोपड़ी में जाते हैं. ये उनके पूर्वजों के पराक्रम का परिणाम है.

आपके बुंदेलखंड में आए थे. राशन कार्ड भी ले गए. अब तक लौटाया भी नहीं. आपको याद है न.और वो बेचारी राशन कार्ड के लिए तरस रही है. शाहजादे नारा लगवाते हैं. लोग कहते थे कि आधी रोट खाएंगे. अब शाहजादे कहते हैं कि पूरी रोटी बोलो. साठ साल लग गए, आधी रोटी से पूरी रोटी तक पहुंचने में. भैया. पेट भर रोटी में तो ये और 100 साल लगा देंगे. क्या आप इंतजार करना चाहते हो. गरीबों का मजाक उड़ा रहे हैं.

मित्रों आप बताइए क्या 26 रुपये में आपके परिवार का एक दिन का गुजार चल सकता है. शहर में रहने वालों का 32 रुपये में गुजारा हो सकता है. क्या इतने में परिवार के साथ चाय भी हो सकती है. पीएम जिस प्लानिंग कमीशन के अध्यक्ष हैं, वह कहता है कि आप 26 रुपये से, 32 रुपये से ज्यादा कमाते हो, तो आप गरीब नहीं हो. ये इनकी मानसिक गरीबी देखिए. ये लोग गरीबों का भला नहीं कर सकते. भाइयों बहनों गरीब कैसे गुजारा करता है, किस प्रकार से अपनी जिंदगी गुजारता है, उसका इन्हें पता तक नहीं है.

मित्रों आज जरूरत है, कांग्रेस मुक्त, सपा मुक्त और बसपा मुक्त भारत. देश को लूटने वालों को जब तक आप विदाई नहीं देंगे. आपका भला नहीं होगा. भाइयों बहनों, इसी धरती से 1857 में एक नारा गूंजा था. अपने बच्चे को पीठ पर बैठा कर वीरांगना लक्ष्मी बाई ने नारा दिया था. मेरी झांसी नहीं दूंगी. कहां था न.मित्रों 1857 का संग्राम, रोटी और कमल, एक क्रांति के प्रतीक बने थे.

भाइयों और बहनों ये संग्राम रोटी और कमल लेकर आया था और बुंदेलखंड जाग उठा था. आज हम एक बार फिर लक्ष्मी बाई की धरती पर कमल लेकर आए हैं. मित्रों, और लक्ष्मी कहां विराजित होती है. कमल पर ही विराजित होती है. अगर कमल है, तो लक्ष्मी आएगी. और लक्ष्मी आएगी तो रोटी आना पक्का है दोस्तों, ये क्रांति लेनी है.

मित्रों, लक्ष्मी बाई ने ललकार किया था कि नहीं दूंगी नहीं दूंगी मेरी झांसी नहीं दूंगी. मित्रों मेरे साथ नारा बुलाएंगे. पूरी ताकत से बुलाएंगे. मित्रों मैं कहूंगा. आप जरा नारा समझ लीजिए. ये बुंदेलखंड की धरती की आवाज है. मित्रों रानी लक्ष्मीबाई ने कहा था, नहीं दूंगी, नहीं दूंगी, मेरी झांसी नहीं दूंगी. मित्रों मैं कहता हूं. बेईमानों को नहीं देंगे नहीं देंगे. आप कहिए मेरा देश नहीं देंगे…नारे का शोर…दो बार बोलिए…शोर और तेज

मित्रों ये देश हम बेईमानों को नहीं देंगे. भाइयों बहनों लूट चली है. भारतीय जनता पार्टी ने मुझ जैसे एक सामान्य व्यक्ति को,पिछड़े परिवार में पैदा हुआ, रेलवे के डिब्बे में चाय बेचने वाला बच्चा. ये पार्टी की महानता देखिए. ये बीजेपी के संस्कार देखिए. ऐसे पिछड़े परिवार के व्यक्ति को देश के पीएम का उम्मीदवार घोषित किया.भाइयों बहनों आप मुझे प्रधानमंत्री मत बनाइए. आप मुझे चौकीदार बनाए. और भाइयों बहनों मैं दिल्ली में जाकर चौकीदार की तरह बैठूंगा. आपको विश्वास दिलाता हूं. आप ऐसा चौकीदार बैठाओगे मैं देश की तिजोरी पर कोई पंजा नहीं पड़ने दूंगा. इसलिए मैं चौकीदार की तरह सेवा करना चाहता हूं.

आपने उन्हें साठ साल दिए. मुझे साठ महीने दीजिए. हम तकदीर भी बदलेंगे और तस्वीर भी.

पूरी ताकत से बोलिए. भारत माता की जय. ताकत से बोलिए. ये मीडिया वाले आपकी तस्वीर लेना चाहते हैं.

Posted by on Oct 25 2013. Filed under खबर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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