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यह हैं मप्र पुलिस की चंद्रमुखी चौटाला, वुमंस की बॉडीगार्ड!

Madhya Pradesh Police Sub Inspector Namita Sahu (7)

यह हैं मप्र पुलिस की सब इंसपेक्टर नमिता साहू; जिन्हें घरवाले और मित्र-यार बबली कहते हैं। इनकी कार्यशैली बहुत हद तक सब टीवी के सीरियल एफआईआर की चंद्रमुखी चौटाला से मिलती-जुलती है। थोड़ी खट्टी-थोड़ी मीठी; इनकी कार्य और जीवनशैली में दोनों का सम्मिश्रण है। मुसीबत में फंसी महिलाओं की संकटमोचक!

भोपाल। सिनेमा जिंदगी को बहुत प्रभावित करता है, सब जानते हैं! लेकिन कार्यशैली और जीवनशैली सेम-टू-सेम हो जाए, तो अचरज होना लाजिमी है। फिल्में अच्छा भी सिखाती हैं और बुरा भी; यह आप पर निर्भर है कि आप क्या सीखना चाहते हैं। मप्र पुलिस की सब इंसपेक्टर नमिता साहू उर्फ बबली के जीवन में फिल्मों का बड़ा रोल रहा है।

ये भोपाल में महिलाओं की हिफाजत के लिए दौड़ती निर्भया पेट्रोलिंग की प्रभारी हैं। जब कोई गुंडा/मवाली इनकी पकड़ में आता है, तो रापटा/लप्पड़/थप्पड़(झापड़) मारने का इनका तौर-तरीका सेम-टू-सेम चंद्रमुखी चौटाला-सा हो जाता है। लाजिमी है कि ऐसे में कुछ विवाद भी चिपक जाते हैं, लेकिन नमिता मानती हैं कि, गेहूं के संग कभी-कभार घुन भी पिस जाता है।

 

Madhya Pradesh Police Sub Inspector Namita Sahu (1)
मेरी कोशिश तो बस यही रहती है कि महिलाओं को सुरक्षा मिले और मवालियों/गुंडों को सबक! निर्भया के जरिये महिलाओं की हिफाजत का जिम्मा लिए सुबह से लेकर देर रात तक भोपाल की सड़कों पर गश्त करतीं नमिता के चेहरे पर आपको कभी तनाव या शिकन देखने को नहीं मिलेगी। वे हंसते हुए कहती हैं-पुलिस की सेवा में आई हूं, तो अपना नैतिक और सामाजिक दायित्व निभाने में कैसी शिकन/टेंशन! आराम की नौकरी करनी होती, तो पुलिस में नहीं आती। मुझे अच्छा लगता है, लोगों की हेल्प करना। खासकर महिलाओं को मुसीबत से निकालने पर उनकी ओठों पर निर्भय-मुस्कान देखकर।

यह और बात है कि कद-काठी से भले नमिता ठेठ पहलवान-सी दिखती हों, लेकिन दिल की बहुत नरम और स्वभाव से भोली-भाली लड़की हैं। वे हंसते हुए कहती हैं-मैं क्या करूं, पुलिसिया भाषा ही कुछ ऐसी होती है कि कोई भी ऐतराज करने लगे, लेकिन सच्ची में मैं लोगों की हेल्प करना चाहती हूं, बस। मुझे सुकून मिलता है।

Madhya Pradesh Police Sub Inspector Namita Sahu (2)

कठिन परिस्थितियों में भी साहस का परिचय: पुलिस! कोई हव्वा नहीं, यह तो लोगों की हिफाजत और सहायता करने का जरिया है। ऐसा मानती हैं नमिता साहू। नमिता मप्र पुलिस की ऐसी कर्मचारी मानी जाती हैं, जो कठिन परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम हैं। समय-समय पर वे यह साबित भी कर चुकी हैं। उन्होंने वर्ष 2000-01 के दरमियान जबलपुर में एक बहुत बड़े सेक्स रैकेट का भांडा फोड़ा था। यह सेक्स रैकेट गोलबाजार के बाबा होटल से संचालित हो रहा था। नमिता जब वर्ष, 2002 में जबलपुर के माढ़ौताल में पदस्थ थीं, तब उन्होंने बच्चों की तस्करी करने वाले गिरोह को पकड़वाने में अहम भूमिका निभाई थी।

Madhya Pradesh Police Sub Inspector Namita Sahu (3)

एक बड़ी बहन की भूमिका में: भोपाल की सड़कों पर निर्भया पेट्रोलिंग के दौरान यहां से वहां दौड़तीं-भागतीं नमिता अपने जॉब से संतुष्ट हैं। वे कहती हैं-मेरा बचपन से ही सब इंस्पेक्टर बनने का सपना था। मैं अपने भाई-बहनों को ऊंचे पदों पर देखना चाहती थी। इसलिए जब मैं स्कूल और कॉलेज में पढ़ती थी, तब भी उनकी पढ़ाई-लिखाई को लेकर अधिक फिक्र होती थी। नमिता से छोटी चार बहनें और भाई हैं। एक बहन मंजूषा इंदौर में पढ़ती है। खुशबू सुप्रीम कोर्ट में वकालत करती है। प्रियंका आईएएस की तैयारी कर रही है, जबकि भाई धर्मवीर ने एमबीए किया है। वो अपना पुश्तैनी बिजनेस संभालता है। एक बहन विनिता आईपीए है। इन दिनों वो नादेड़(महाराष्ट्र) में एएसपी है। नमिता कहती हैं-चूंकि मैं घर में सबसे बड़ी थी, इसलिए अपने भाई-बहनों की देखभाल की जिम्मेदारी मेरे ऊपर थी।

Madhya Pradesh Police Sub Inspector Namita Sahu (4)

फिल्में भी जीवन की दिशा तय करती हैं: बचपन में अंधा कानून फिल्म देखी तो पुलिस वाली बनने का सपना पाला। बड़े होकर कई ऐसी फिल्में देखीं, जिन्होंने मुझे कठिन परिस्थितियों से लडऩा सिखाया, लोगों की मदद करने का तौर-तरीका सिखाया। मैं आपको बचपन का एक किस्सा सुनाती हूं। मेरी बहन को कॉलेज के रास्ते में कुछ टपोरी लड़कों ने छेड़ दिया। वे और भी लड़कियों पर फब्तियां कस चुके थे। एक दिन मैंने उनको सबक सिखाने की ठानी। एक बार मैं अपनी बहन के साथ कॉलेज गई। जैसे ही वो बदमाश लड़के अपनी बाइक से पास आए, मैंने उन्हें किक मारकर गिरा दिया। उसके बाद उनकी धुनाई कर डाली। उस घटना के बाद दुबारा उन्होंने किसी लड़की को छेडऩे का साहस नहीं किया। यह सब करने के पीछे मेरा एक ही उद्देश्य था कि, लड़कियां स्ट्रांग बनें, कठिन हालात में घबराएं नहीं। मैं किरण बेदी की फैन हूं। मैंने उनसे सीखा कि, कैसे आप ईमानदारी और साहस से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकते हैं।

Madhya Pradesh Police Sub Inspector Namita Sahu (5)

पहलवानी का शौक: नमिता की कहानी इसलिए फिल्मों-सी मिलती-जुलती है, क्योंकि उनका बचपन बेहद दिलचस्प रहा है। उनका परिवार मप्र के सागर की प्रतिष्ठित बिजनेस फैमिली माना जाता है। उनके परिवार में शराब के ठेकों के अलावा गल्ले का भी कारोबार होता है।  पिता जयराम बुंदेलखंड के चर्चित पहलवान रहे हैं। नमिता अपनी कहानी कु यूं बयां करती हैं-घर में पहलवानी का शौक था। बाबूजी मुझे भी अखाड़े में उतार देते थे और भाइयों से कुश्ती लड़ाते थे। उनका तर्क होता था कि, तुझे पुलिस में जाना है, तो फौलाद बनो। नमिता अपने पिता का बिजनेस भी संभालती थीं और भाई-बहनों की देखभाल भी करती थीं। नमिता बताती हैं-हमारी एक दाल मिल हुआ करती थी। मैंने उसे भी संभाला। गल्ले का कारोबार भी मैं देखती थी। लेकिन इन सबके बीच अपनी पढ़ाई जारी रखी, ताकि पुलिस में जाने का अपना साकार कर सकूं। सागर में जवाहरलाल नेहरू पुलिस अकादमी है। वहां से जब भी ट्रेनी पुलिसवालों को गुजरते देखती थी, तो पुलिस में जाने का मेरा सपना और आंखों में उतर आता।

Madhya Pradesh Police Sub Inspector Namita Sahu (6)

नाना और पिता से मिली जीवटता: बच्चे कच्ची माटी-से होते हैं। माता-पिता उन्हें जैसे चाहें, बना सकते हैं। नमिता कहती हैं-सबके जीवन में उनके घरवालों का बड़ा महत्व होता है। मेरे जीवन में भी ऐसा ही है। मैं जब बहुत छोटी थी। शायद चार वर्ष की, तब मेरी मां मुझे लेकर अंधा कानून फिल्म देखने गई थीं। फिल्म में हेमामालिनी को देखकर बहुत अच्छा लगा। तब से मेरे जेहन में एक बात बस गई थी कि, मुझे तो बस पुलिस वाली बनना है। यह बात शायद मेरे पिताजी को समझ आ गई और उन्होंने बचपन से ही मुझे स्ट्रांग बनाया। पिताजी प्रोफेशनल पहलवान रहे हैं। वो मुझे अखाड़े ले जाते। खेतों में ट्रैक्टर चलवाते, बिजनेस में सहयोग लेते। वहीं मेरा नाना रामेश्वर गुप्ता की जीवटता ने भी मुझे बहुत प्रभावित किया। वे मुंबई हिंदी विद्या पीठ के अध्यक्ष रहे हैं। अभी 94 वर्ष के हैं, लेकिन आज भी वे नौजवानों से रहते हैं। एकदम ऊर्जावान।

 

डोले-सोले बनाने का शौक: नमिता खुद को फिट रखने के लिए भी वक्त निकालती हैं। उन्होंने अपने घर में ही छोटा-सा जिम बना रखा है। ड्राय फ्रूट, गुड़ आदि का सेवन करती हैं, ताकि एनर्जी बनी रहे। नमिता कहती हैं-जीवन में फिटनेस सबसे बड़ी चीज है। मैं पुलिस वाली हूं, इसलिए मेरा फिट रहना बेहद जरूरी है। नमिता को अजय देवगन,अक्षय कुमार के अलावा हॉलीवुड की एक्ट्रेस एंजेलिना जोली के स्टंट पसंद हैं। नमिता हंसते हुए कहती हैं-लाइफ भी तो एक स्टंट ही है! वैसे भी स्टंट वही कर सकता है, जो एकदम फिट हो। वैसे मैं इसलिए भी इनकी फैन हूं, क्योंकि साहसिक खेलों में मेरी बचपन से
रुचि रही है।

जूडो और साहसिक खेलों में दिलचस्पी: नमिता को साहसिक खेलों में खूब दिलचस्पी रही है। वे स्कूलस्तर तक एनसीसी में रहीं। वर्ष, 2003 में कटक(उड़ीसा) में नेशनल प्रतियोगिता के दौरान उन्हें ब्राउन बेल्ट मिला। इन सबके अलावा नमिता को फास्ट ड्राइविंग, हॉर्स राइडिंग और हैरतअंगेज कारनामे, जैसे शरीर के ऊपर से बाइक निकलवाना आदि किए हैं। नमिता बताती हैं-महिलाओं को स्ट्रांग भी होना चाहिए। मैंने अपने खेतों में खूब ट्रैक्टर चलाया। वर्ष, 2000 में एक फास्ट कार ड्राइविंग प्रतियोगिता में इनाम भी जीता था। फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा ने पुरस्कार दिया था। मेरे घर में दो घोड़े हैं-भोला और शंकर। मैं जब अपने घर सागर जाती हूं, हॉर्स राइडिंग अवश्य करती हूं। नमिता को डॉग्स पालने का भी शौक है। इनके घर में तीन प्रजातियों के डॉग्स हैं।

 

परिजनों को आईपीएस विनिता अपने बड़ी बहन नमिता पर गर्व करते हुए कहती हैं-वो शुरू से ही बोल्ड रही है। जो भी करने की ठानी, उसे हासिल किया। उसने मुझे आगे बढऩे-पढऩे की प्रेरणा दी, उसी की बदौलत आज में आईपीएस बन सकी। नमिता की मां स्नेहलता के मुताबिक, नमिता बचपन से ही पुलिस वाली बनना चाहती थी। जब वो स्कूल/कॉलेज में थी, तब भी लड़कियों की हेल्प करती थी।

News Source : bhaskar.com
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अंकिता सिंह

Web Title : Madhya Pradesh Police Sub Inspector Namita Sahu, Nirbya Charge Of Patrolling,Women’s Safety

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Posted by on Feb 15 2014. Filed under आधी आबादी. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

1 Comment for “यह हैं मप्र पुलिस की चंद्रमुखी चौटाला, वुमंस की बॉडीगार्ड!”

  1. Dabangghindu

    Brave girl must be given full security and authority

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