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कांग्रेस सत्ता में होती तो छत्तीसगढ़ का एक किलो कोयला भी नहीं बचता : नरेंद्र मोदी

बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर स्थित जगदलपुर में चुनावी सभा को संबोधित किया. उन्होंने हमेशा की तरह स्थानीय बोली में लोगों का स्वागत किया और प्रदेश सरकार की उपलब्धियां गिनाईं.

उन्होंने दावा किया कि विकसित छत्तीसगढ़ बनाने का सपना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देखा था और यह तभी पूरा होगा जब रमन सिंह की सरकार वापस आएगी.

प्रदेश की संपदा के गुणगान और युवाओं के आह्वान के अलावा मोदी के इस भाषण की खास बात थी दलितों और आदिवासियों का बार-बार जिक्र. पटना में ‘यदुवंश’ समुदाय पर डोरे डालने वाले मोदी ने इस बार खास तौर से पिछड़ों और आदिवासियों से बीजेपी को वोट देने की अपील की.

modi says nation wants development but congress gives slogans

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उन्होंने दावा किया कि खाद्य सुरक्षा हिंदुस्तान में सबसे पहले छत्तीसगढ़ ने दी और इसके बाद ही यूपीए को इसकी अहमियत समझ आई. मोदी ने अपने भाषण में मुख्यमंत्री रमन सिंह की तारीफ झोंकने में कोई कसर नहीं छोड़ी. उन्होंने यहां तक कह डाला कि आने वाले 5 सालों में रमन सिंह छत्तीसगढ़ को गुजरात से भी आगे ले जाएंगे. छत्तीसगढ़ में 11 और 19 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने हैं.

पढ़िए मोदी का पूरा भाषण

माई दंतेश्वरी के कोटि कोटि प्रणाम

मैं पहले भी कई बार जगदलपुर आया हूं. बस्तर के अंदरूनी इलाकों में दौरा किया है. मैं बीजेपी का संगठन का काम देखता था. तब मुझे व्यापक भ्रमण करने का सौभाग्य मिला. बस्तर जिला पूरे केरल राज्य से भी बड़ा है. इस बस्तर के पास इतनी संपदा है. लेकिन देश का दुर्भाग्य कि कांग्रेस ने अपनी हुकूमत के समय इस इलाके की जरा भी परवाह नहीं की. उस दौरान यहां वह पिकनिक के लिए आते थे. यार-दोस्तों को लेकर जंगलों में आते थे. हमारे आदिवासियों को दिखाते थे. गरीबी की प्रदर्शनी करते थे. छत्तीसगढ़ के नागरिकों को जीवन भर अटल बिहारी वाजपेयी का आभार नहीं भूलना चाहिए. यह उन्हीं की दूरदृष्टि थी कि अलग राज्य बनने से यहां के लोगों को अवसर मिलेंगे तो यहां के लोगों और मिट्टी में ऐसा दम है कि वह बाकी राज्यों के मुकाबला कर सकता है. छत्तीसगढ़ का निर्माण करने के लिए आज मैं अटल जी का गौरव-अभिनंदन करता हूं. उनके मन में दलितों, शोषितों और आदिवासी भाई बहनों के प्रति विशेष लगाव था. वह नारे नहीं दिया करते थे. वह मोटी-मोटी बातें नहीं करते थे. समाज को ताकतवर करने के साथ दूर की सोच के साथ योजना बनाते थे, फैसले करते थे और सरकार को काम में लगाते थे.

इस देश में आदिवासी समाज कब से है. हजारों साल से है कि नहीं है? आदिवासी समाज गरीब और पिछड़ा है कि नहीं है? देश आजाद हुआ, कांग्रेस की इतनी सरकारें आईं. लेकिन किसी भी सरकार को आदिवासियों की याद नहीं आई. उनके बच्चों की चिंता नहीं हुई. यह अटल बिहारी वाजपेयी देश को पहले प्रधानमंत्री मिले जिन्होंने आदिवासियों के कल्याण के लिए अलग मंत्रालय बनाया, अलग सचिव नियुक्त किए और बजट बनाया. इसके बाद आदिवासियों के जीवन में सुधार हुआ.

इतना ही नहीं, हमारे नॉर्थ ईस्ट में सबसे ज्यादा आदिवासी रहते हैं, उसके लिए उन्होंने अलग संकलन की व्यवस्था की. और जैसे अटल जी ने हमें छत्तीसगढ़ दिया, वैसे ही आदिवासियों के विकास के लिए नई व्यवस्था दी.

भाइयों-बहनों जब छत्तीसगढ़ बना तब मैं यहां काम करता था, गुजरात में मुख्यमंत्री नहीं था. तब यह राज्य कांग्रेस के पास गया और मैंने भाइयों-बहनों, वो तीन साल जब मैं याद करता हूं, उस समय यहां के मुख्यमंत्री के जोर और जुल्म के कारनामों को याद करता हूं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं. ऐसा मुख्यमंत्री था कि प्रदर्शन कर रहे हमारे कार्यकर्ताओं पर ऐसा अत्याचार किया कि छह-छह महीने तक कार्यकर्ता जेल में रहे. ऐसा जुल्मी शासक देश में नहीं हुआ दूसरा. तब लगा कि कहीं अटल जी का छत्तीसगढ़ को विकसित बनाने का सपना अधूरा तो नहीं रह जाएगा. लेकिन भाइयों बहनों मैं छत्तीसगढ़ के दलितों, आदिवासियों को सलाम करता हूं. वे हालात समझ गए और पहले ही चुनाव में उस जुल्मी शासल को ऐसे उखाड़ कर फेंक दिया कि हिंदुस्तान में कांग्रेस के बुरे दिन की गिनती शुरू हो गई.

आप कल्पना कीजिए भाइयों-बहनों, अगर आपने दस साल डॉक्टर रमन सिंह और बीजेपी को नहीं दिए होते तो आज अपने छत्तीसगढ़ का हाल क्या हुआ होता. लुटेरों के हाल में प्रदेश चला गया होता तो कुछ नहीं बचता. कांग्रेस की दिल्ली सरकार कोयले के पीछे पड़ गई, कोयले के पीछे, आपके छत्तीसगढ़ का एक किलो भी कोयला नहीं बचता, लूट लेते. ये हाल करके रखा है इन्होंने भाइयों-बहनों. यहां कांग्रेस का पंजा पड़ता तो छत्तीसगढ़ तबाह हो जाता.

अटल बिहारी वाजपेयी ने कोई खून खराबे के बिना, प्रेम से तीन राज्य बनाए थे, झारखंड, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़. कोई भी व्यक्ति इन तीन राज्यों के इतिहास का लेखा-जोखा कर लें. आप देख लें झारखंड और उत्तराखंड पिछड़ता चला गया. एक अकेला छत्तीसगढ़ आगे निकल गया. कारण क्या है. कारण आप लोगों की दीर्घदृष्टि और समझदारी है. उत्तराखंड में राजनीतिक अस्थिरता रही इसलिए प्रगति नहीं रही. केदारनाथ में कितना बड़ा हादसा हो गया. लेकिन सरकार को परवाह नहीं. झारखंड देखिए, हिंदुस्तान का सबसे समृद्ध प्रदेश. लेकिन इतनी बड़ी कुदरती संपत्ति होने के बाद भी दिनों-दिन गिरता चला गया. छत्तीसगढ़ इसलिए बचा क्योंकि आपने रमन सिंह और भारतीय जनता पार्टी पर भरोसा किया और विकास की यात्रा को आगे बढ़ाया.

मैं गुजरात की धरती से प्रार्थना करने आया हूं कि हिंदुस्तान के लोगों ने दल, जाति, संप्रदाय, बिरादरी या रिश्तेदारी के लिए वोट दिए होंगे, लेकिन अब वक्त बदल चुका है. अब वोट देना है तो विकास के लिए वोट देना है. विकास के लिए वोट देना है. आज ऐसी सरकार चाहिए कि आपका और आपके बच्चों का भी भला हो और ऐसी सरकार भाजपा और डॉक्टर रमन सिंह ही दे सकते हैं. मैं आग्रह करने आया हूं कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में अब कोई और रुकावट नहीं आनी चाहिए.

हमारे घर में भी जब बच्चे 13 साल के हो जाते हैं तो तेजी से बढ़ने लगते हैं. हर 6 महीने में कपड़े छोटे हो जाते हैं. ऊंचाई और वजन बढ़ने लगता है. छत्तीसगढ़ का भी ऐसा महत्वपूर्ण समय है. छत्तीसगढ़ का भी 13 से 18 वाली उम्र में प्रवेश हो गया है. इस समय अगर सही लालन-पालन किया गया तो यह प्रदेश कितना आगे बढ़ेगा इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं.

ये पांच साल बड़े अहम हैं. डॉक्टर रमन सिंह ने मजबूत नींव रख दी है. छत्तीसगढ़ को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए 2013 से 2018 सबसे अहम कालखंड है. इस समय छत्तीसगढ़ सशक्त हो गया तो विकास यात्रा रुकेगी नहीं. मैं छत्तीसगढ़ के भाई-बहनों के लिए कहने आया हूं कि यह चुनाव आने वाले 100 सालों की नींव डालने वाला चुनाव है. वोट विकास के लिए होना चाहिए. वोट बैंक की राजनीति को दफना देना चाहिए.

मैं देख रहा हूं. क्या कभी जगदलपुर में इतनी विराट सभा किसी ने देखी है. ये आंधी है आंधी. ये हवा बदल चुकी है. देश विकास चाहता है. गरीबों के लिए काम करने वाली सरकार चाहता है. ये कांग्रेस पार्टी, नारे देती है. कांग्रेस का हाथ, गरीब का साथ. क्या हुआ भाई. ये पहले आपको हाथ दिखाते थे, सत्ता आई तो हाथ आजमाने लगे और जब मास्टरी आ गई तो हाथ की सफाई के सिवा और कुछ काम ही नहीं कर रहे.

भाइयों-बहनों, यह पंजा कोयले को भी नहीं छोड़ता है. आज कल तो लोग कोयले और प्याज को लॉकर में रखने की सोच रहे हैं. भाइयों-बहनों हिंदुस्तान का गरीब जो ज्वार, बाजरा, मक्के की रोटी के साथ प्याज खाकर गुजारा करता था, उससे प्याज को भी छीन लिया गया है. ऐसी सल्तनत को पूरे हिंदुस्तान से छीन लेने की जरूरत है. एक सवाल पूछूं, जवाब दोगे. ये कांग्रेस पर आपको भरोसा है? (पब्लिक की ओर से ‘नहीं’ की आवाज) इन्होंने 100 दिनों में महंगाई घटाने का वादा किया था. इन्होंने वादाखिलाफी की.

छत्तीसगढ़ के भाई-बहन कांग्रेस की एक भी बात नहीं मानेंगे, मुझे विश्वास है. क्या रमन सिंह सरकार न होती तो क्या कभी बस्तर यूनिवर्सिटी बन सकती थी क्या? आज डॉक्टर नहीं मिल रहे लोगों को? क्योंकि कांग्रेस की सरकार मेडिकल कॉलेज खोलने को तैयार नहीं. रुपयों के थैले के बिना कॉलेज नहीं खिलते. रुपयों के ढेर लगे बिना एडमिशन नहीं मिलता. मैं रमन सिंह को बधाई देता हूं कि उन्होंने यहां मेडिकल कॉलेज खोलकर गरीबों को मदद करने का बीड़ा उठाया है.

रमन सिंह कम लोग समझते हैं. लेकिन हम ‘चावल वाले बाबा’ कहें तो लोग कहते हैं कि हां हमारे मुख्यमंत्री. दिल्ली के शहजादे आपकी आंखों में धूल झोंक रहे हैं कि खाद्य सुरक्षा कानून लाए. छत्तीसगढ़ के भाई-बहनों आप इस बात का सबूत हैं कि हिंदुस्तान में सबसे पहले खाद्य सुरक्षा छत्तीसगढ़ सरकार ने दी है. यूपीए को यह बात छत्तीसगढ़ को ही देखकर समझ आई.

सरकार विकास के लिए हो, लेकिन संवेदनशील भी हो. माओवाद, बंदूकों का शोर, चारों ओर खून की होलियां, इसके बावजूद जब मजबूत दिल का नेता होता है तो संकट के बीच भी विकास की नैया को आगे बढ़ाता है. यह रमन सिंह ने करके दिखाया है. मैं दो सरकारों का चेहरा दिखाना चाहता हूं. पॉलिटिकल पंडित गौर से सुनें. मई महीने में डॉ. रमन सिंह विकास यात्रा पर घूम रहे थे. उसी समय कांग्रेस के मित्र भी घूम रहे थे. माओवादियों ने हमला बोल दिया. कांग्रेस के काफी लोग मारे गए. अभी पटना में बहुत बड़ी राजनीतिक रैली में आतंकवादियों ने हमला बोला. बीजेपी नेताओं को मौत के घाट उतारने की साजिश हुई. रमन सिंह ने क्या किया और बिहार के मुख्यमंत्री ने क्या किया. डॉ. रमन सिंह मीडिया के सामने आ गए और कहा कि हमारी चूक रही होगी तो उसकी गहराई में जाएंगे. उन्होंने आदेश दिए और उसी पल अपनी यात्रा स्थगित कर दी. इतना ही नहीं, खुद रमन सिंह कांग्रेस के मारे गए नेताओं के घर गए और उनके परिवार वालों के दुख में शामिल हुए. जिन्होंने उस दिन रमन सिंह का चेहरा देखा होगा वे कितनी पीड़ा अनुभव कर रहे थे. इसके दो दिन बाद ही नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की मीटिंग में सबने उनके धैर्य की तारीफ की.

दूसरी तरफ पटना में इतने बड़े कांड के बाद वहां की सरकार महफिल मना रही है. छप्पन भोग परोसे जा रहे हैं. पीड़ा का नाम नहीं. कैसी बॉडी लैंग्वेज, कैसी भाषा. पत्रकार ने पूछा कि आपकी चूक तो तपाक से कह दिया कैसी चूक. अहंकार से भरा हुआ. मैं डॉक्टर रमन सिंह के धैर्य और उनकी कुशलता को अभिनंदन देता हूं. मुझे विश्वास है कि आने वाले 5 साल में रमन सिंह की अगुवाई में छत्तीसगढ़ गुजरात से भी आगे निकल जाएगा और वह मेरे लिए सबसे बड़े गौरव का विषय होगा.

इसलिए भाइयों-बहनों भारी संख्या में मतदान करें. कमल का बटन दबाएं और 100 साल का भविष्य सुनिश्चित कर लें. आप इतनी बड़ी संख्या में आए, आपका अभिनंदन करता हूं.

Source : Aaj tak

Posted by on Nov 7 2013. Filed under खबर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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