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Muslim personal law can’t override criminal law: Court

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क्रिमिनल लॉ से ऊपर नहीं है मुस्लिम पर्सनल लॉ: कोर्ट

 

नई दिल्ली।। दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट ने शरीयत कानून के तहत रेप के आरोप से बरी मुस्लिम शख्स की जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ देश के आपराधिक कानून (क्रिमिनल लॉ) से ऊपर नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि देश का कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। कानून के सामने समानता की संवैधानिक अवधारणा को मुसलमानों के लिए बने किसी कानून और गैर मुसलमानों के लिए बने किसी और कानून से अलग नहीं किया जा सकता। अडिशनल सेशन जज कामिनी लॉ ने कहा कि जहां तक देश के आपराधिक कानून की बात है, लड़की और आरोपी के महज एक ही धर्म (मुसलमान) से होने का मतलब यह नहीं है कि आरोपी को विशेष राहत दिए किए जाने की जरूरत है।

निचली अदालत ने इस मामले को शादी से जुड़ा मानते हुए आरोपी को जमानत दे दी थी। इस शख्स पर अपने ही समुदाय की 17 साल की लड़की को अगवा कर रेप करने का आरोप है। गौरतलब है कि मुस्लिम पसर्नल लॉ देश के कानून के मुताबिक शादी की उम्र से अलग उम्र (15 साल) का प्रावधान करता है।

मगर, तीस हजारी कोर्ट ने इसे आपराधिक मामला माना। जज ने कहा कि भारत धर्मनिरपेक्ष अवधारणाओं से शासित होता है और शरिया इससे ऊपर नहीं है। मुस्लिम पसर्नल लॉ शादी, तलाक और निजी संबंधों पर लागू होता है, लेकिन यह आपराधिक मामलों में लागू नहीं किया जा सकता।

News source : indiatimes

Short URL: http://jayhind.co.in/?p=3177

Posted by on Sep 25 2013. Filed under खबर, सच. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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