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आरएसएस और दुष्प्रचार

आरएसएस और दुष्प्रचार

 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

फेसबुक पर जितने भी सो काल्ड सेकुलर जो असल में तुष्टिकरण के नीति के पोषक हैं वो सभी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दिन भर गालिया देते हैं कुछ महानुभाव तो ये भी कहते पाए गए हैं कि “हम यहाँ संघियों को सेकुलर बनाते हैं” और कुछ को संघ साम्प्रदायिक संगठन लगता हैं और कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने घर आये लोगो को कभी पानी नहीं पिलाया होगा वो नागपुर रेलवे स्टेशन के बाहर ये उम्मीद करते हैं की कोई संघी उनको स्टेशन पर मिठाई और पानी लेकर खड़ा मिलेगा, खैर ऐसा ही बहुत सा दुष्प्रचार मैं संघ के बारे में फेसबुक पर सुनती पढ़ती थी|

संघ को जानने का मेरे पास कोई साधन नहीं था सिवाय इंटरनेट के और इंटरनेट की जानकारी पर मुझे ज्यादा विश्वास नहीं था, और मेरी उत्कंठा लगातार बढती जा रही थी की आखिर आरएसएस हैं क्या? आखिर में मैंने अपने शहर के संघ कार्यालय का पता किया और एक दिन अपनी एक सहेली को लेकर संघ कार्यालय पहुच गयी वहाँ मौजूद प्रचारक जो समाज सेवा के लिए घर परिवार सभी छोड़कर पूर्णकालिक संगठन के कार्यो को कर रहे हैं उनसे मुलाकात हुई परिचय के बाद बहुत देर तक उनसे संघ के इतिहास और चलाये जा रहे कार्यो के बारे में जानकारी ली, मैं पूरा टाइम उनकी आलोचना करती रही और वो पुरे धैर्य के साथ मेरी बात सुनते और उसका जवाब देते रहे मेरे कटु सवालों के सारे जवाब उन्होंने हँस कर और संतोषप्रद दिए और उन्होंने मुझे संघ की मुख्य पत्र पांचजन्य और बहुत सारी किताबे भी दी हैं पढने को, और मुझे गहन आश्चर्य हुआ यह जानकार कि संघ १२० से भी अधिक आनुसंगिक संगठनों के जरिये पूरे देश में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में काम कर रहे हैं।

नक्सली इलाको में इनके कार्यकर्ता आदिवासी बच्चो के लिए होस्टल चला रहे हैं उनको मुफ्त शिक्षा कपडे सभी दे रहे हैं शहरी क्षेत्रो में सरस्वती शिशु मंदिरों के जरिये भारतीय संस्कृति के साथ वैज्ञानिक तरीके से लाखो बच्चो को राष्ट्रभक्त बना रहे हैं और देश को एक सभ्य और सुसंस्कृत पीढ़ी तैयार कर रहे हैं अब ये आपको तय करना हैं की आप अपने बच्चो को कान्वेंट में पढ़ाकर नशेडी और व्यभिचारी बनायेंगे जो आपको बुढापे में ओल्ड एज होम पहुचायेगा या इन मंदिरों में पढ़ा कर संस्कारवान बनायेगे| खैर बात हो रही थी संघ के कार्यो पर संघ बिना किसी सरकारी फंड के बहुत सारी समाज सेवा के कार्यो को अंजाम दे रहा हैं| जब कही प्राकृतिक आपदा आती हैं तो सरकारी सहायता के पहले संघ की सहायता पहुचती हैं इसका नवीनतम उदाहारण इलाहाबाद में रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में देखने को मिला, बाढ़ और भूकंप में ये हर घर से अनाज नमक मशाले दाल सब्जी एकत्र करके प्रभावित क्षेत्रो में भेजते हैं और किसी की सहायता के पहले उसके धर्म और जाति नहीं पूछते जबकि असम में जब विपदा आई तो कुछ मुस्लिम सांसदों ने ये सहायता शिविरों के बाहर बोर्ड लगाया की सहायता सिर्फ मुस्लिमो के लिए हैं और इसाई धर्म वाले इस सहायता की आड़ में बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन करवाते हैं मगर संघ बिना किसी स्वार्थ के ये सहायता प्रदान करता हैं|

चीन युद्ध में इनके कार्यो से प्रसन्न होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री ने इनको आरडी परेड में शामिल किया जो अभी तक किसी भी गैर सरकारी सेवा संगठन को नहीं मिला हैं| अगर बात साम्प्रदायिकता की जाए तो मैंने इनका अखबार और किताबे पढ़ी एक भी साम्प्रदायिक बात मुझे नजर नहीं आई उल्टा ये उग्र राष्ट्रवाद की बात करते हैं और प्राणियों में धर्म या जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करते हैं इनके संगठन से हर धर्म के लोग जुड़े हुए हैं ये “वसुधैव कुटुम्बकम “ सर्वे भवन्ति सुखिन जैसे सूत्र से सबको जोड़ने का प्रयास करते हैं अपने किसी भी स्वयंसेवक के उपनाम से ना पुकार कर नाम के आगे जी लगा कर पुकारते हैं  और ये सब  तो उन्ही को गलत लगेगा जो देशद्रोही होंगे|

“नमस्ते सदा वत्सले मात्र भूमि” इतने पवित्र भाव से धरती को माँ कह कर नमस्कार करने वाले इनको देशद्रोही और वन्देमातरम का विरोध करने वाले देशभक्त लगते हैं| खुद इन्होने कभी भी कोई सेवा का काम नहीं किया होगा मगर ये आरएसएस को कोसते नजर आयेंगे वहाँ हिन्दू तकलीफ में हैं आरएसएस क्या कर रही हैं और ध्यान दीजियेगा मित्रो एक तरफ ये आरएसएस का दुष्प्रचार करके उसकी जड़े भी कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं और खुद कुछ करने की अपेक्षा आरएसएस से उम्मीद लगाए बैठे हैं अरे उस संगठन की जितनी क्षमता हैं वह उतना कार्य कर रही हैं और अगर आप चाहते हैं की वह और ज्यादा काम करे तो उससे जुड़े अपना सहयोग दे वह और भी कार्य करेगी, मगर नहीं ये करेंगे तो यहाँ आलोचना कौन करेगा?

दुनिया में शायद ही कोई इस तरह से निस्वार्थ काम करने वाला संगठन होगा। आप सभी से निवेदन हैं की आप लोग भी मेरी तरह सिर्फ एक बार संघ कार्यालय पर जाए उनके कार्यो को बारे में जाने और उनसे पूछे फिर फैसला ले की क्या गलत हैं और क्या सही, और ऐसा मुझे विश्वास हैं की आप उनके बारे में एक बार जान लेंगे तो आप भी उनके मुरीद हो जायेंगे|

लेखिका : अवंतिका सिंह

Short URL: http://jayhind.co.in/?p=2199

Posted by on May 20 2013. Filed under मेरी बात. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

3 Comments for “आरएसएस और दुष्प्रचार”

  1. You are Right….
    But this congress govt. does not want that RSS grow…

  2. ankit tripathi

    mere mitra ham aapse sahmat hai

  3. nagendra

    जितने सेकुलर है वो देश का बहुत बड़ा नुकसान कर रहे है इन्हें जल्द ही देश से हटाओ और नकारो और सनातनी समर्थक बनो और हर हिंदू को जागृत करो

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