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नरेन्द्र मोदी और बीजेपी हैं एकमात्र विकल्प

narendramodi

नरेन्द्र मोदी का विवादों से बहुत पुराना नाता है, इसमे कितनी सच्चाई है और कितना झूठ इसका आकलन करना मेरे वश का नहीं पर में इतना जरूर जानना चाहता हूँ अपने पाठको से की क्या इस देश के पास, आम जनता के पास मोदी या भाजपा के अलावा इस वक्त कोई और विकल्प मौजूद है?

 

इसे मोदी की लोकप्रियता कहें या बदनामी की न्यूज चैनलो की कोई भी खबर बिना मोदी के पूरी नहीं होती. आज समाचार पत्र पत्रिका मे हमारे देश के प्रधानमंत्री का जिक्र हो ना हो पर नरेन्द्र मोदी का जिक्र जरूर होता है और यही हाल हमारे इस मंच का भी है, जहाँ पर अगर कोई लेखक ज्यादा कॉमेंट वाले ब्लॉग लिखना चाहता है तो उसमे मोदी का नाम डालना जरूरी हो जाता है.

 

भाजपा और मोदी की अच्छाई और बुराई के बारे मे बहुत सारे लेख लिखे गये है, दिन रात इससे सम्बंधित खबरे आती हैं, बहस कराये जाते है पर ए सारे लेख, खबरे और बहस मिलकर एक आम इंसान के जेहन मे एक सवालिया निशान छोड़ देते हैं और उसके लिये पक्ष और विपक्ष का फैसला लेना कठिन हो जाता है. मैं भी उसी आम इंसान मे शामिल हूँ जो ए तय नहीं कर पा रहा की अगली बार मे मैं किसे वोट करूं और क्यों? खैर इन सब के बीच मैने उन सभी विकल्पो पर गौर करने की सोची है जो मेरे पास या एक आम इंसान के पास मौजूद हैं.

 

पहला विकल्प – कांग्रेस: कांग्रेस एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने सबसे ज्यादा दिनो तक इस देश पर शासन किया है और 1947 से लेकर आज तक जो एक आम इंसान के जीवन शैली मे परिवर्तन हुआ है, देश का जो विकास हुआ है उसका श्रेय निःसंदेह रूप से इसे दिया जाना चाहिये. इसमे कोई शक नहीं की देश ने 1947 के बाद से बहुत सी तरक्की कर ली और वो भी हर एक क्षेत्र मे. कांग्रेस पार्टी के अन्दर लाल बहादुर शास्त्री और वल्लभ भाई पटेल जैसे कई नेता हुए जिनका विरोध विपक्षी पार्टी भी नहीं कर पाती. पर कांग्रेस में ऐसे नेताओं को हाशिये पर रखा गया, उनकी संदेहास्पद मौत हुयी और शायद तभी से कांग्रेस पार्टी अपने मूल दिशा से भटक गयी.

 

आज कांग्रेस की क्या हालात है वो किसी से छुपी नहीं है, “इस मंच पर भी जब कोई कांग्रेस समर्थक लेखक द्वारा कोई लेख लिखा जाता है तो उसमे या तो दूसरी पार्टी की बुराई होती है या फिर उनके पुराने नेताओं का जिक्र”. कांग्रेस के काले कारनामो का जिक्र करने बैठूं तो शायद मेरा ये लेख कभी पूरा ही न हो पाए इसलिए सिर्फ इतना कहूँगा की आज कोई भी एक वजह नहीं है जिसकी वजह से मैं कांग्रेस को वोट दूँ. अगर किसी के पास हो तो वो जरुर बताये ताकि मैं अपने विचार बदल सकूँ. एक वजह जो हमेशा कांग्रेस पार्टी की तरफ से या उनके समर्थको की तरफ से बताया जाता है वो ये की वो धर्म निरपेक्ष पार्टी हैं पर इतिहास गवाह है की इन्होने हमेशा से धर्म निरपेक्षता के नामे पर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति की है. इनके दावों की पोल ऐसे उदहारण भी खोलते हैं जिसमे इनके शासनकाल में हुए ज्यादातर दंगे, सिख और ईसाईयों की कम जनसख्याँ के बावजूद मुस्लिम को अल्पसख्यक बताना प्रमुख हैं.

 

दूसरा विकल्प – तीसरा मोर्चा: अगर अभी के सर्वे रिजल्ट को सत्य माना जाए तो इस देश में तीसरे मोर्चे की सरकार बन्ने की संभावना सबसे ज्यादा है. इस मोर्चे में इतनी क्षेत्रीय पार्टिया है की उनका भी अलग अलग विश्लेषण संभव नहीं है एक लेख में. इसमें कोई शक नहीं की कुछ क्षेत्रीय पार्टियों का कार्य स्वागत योग्य है जैसे बीजू जनता दल और जनता दल यूनाइटेड परन्तु ये दोनों पार्टियाँ मिलकर भी सरकार बना पाने में सक्षम नही है. ऐसा भी नहीं है की इनके नेत्रित्व को स्वीकार कर लिया जाएगा खासकर मुलायम जी, लालू जी और मायावती जी की पार्टी के द्वारा.

 

ऐसे में ये कहना अनुचित नहीं होगा की विधान सभा चुनाव में जरुर इन्हें वोट किया जा सकता है पर लोकसभा चुनाव में ऐसी पार्टियों को वोट देने का मतलब है की उन्हें सौदेबाजी कर के किसी भी अनचाही सरकार में शामिल होने का मौका देना. इनमे से बहुत सी पार्टियों का ये कहना है की वो धर्म निरपेक्ष पार्टियाँ हैं पर इनके कारनामे साफ़ जाहिर करते हैं की वो हिन्दू विरोधी पार्टियां हैं और मुस्लिम वोट के लिए हमेशा मुस्लिम समुदाय को अल्पसंख्यक मानती हैं जबकि जनसँख्या के आधार पर साफ़ तौर पर जाना जा सकता है की जैन, बौध्ह, सिख और इसाई धर्म के लोगो की सख्यां हमशा से अल्पसंख्यक रही हैं.

 

 

अंतिम विकल्प – भारतीय जनता पार्टी:

 

भारतीय जनता पार्टी एक ऐसी पार्टी है जो हमेशा से विवादों में रही है, चाहे वो सत्ता में हो या नहीं हो पर इस पार्टी के नेता अपने कारनामो से हरवक्त सुर्खियाँ बटोरते रहते हैं. ये इस देश का सौभाग्य है या दुर्भाग्य ये तो मुझे नहीं पता पर इतना पता है की इन्हें भी ६ साल के लिए केंद्र की सत्ता मिली थी. भले ही कुछ रिपोर्टों के जरिये अटल बिहारी बाजपेयी को एक बहुत लोकप्रिय नेता साबित किया गया हो पर इस पार्टी के कुछ नेताओं के दोहरे चरित्र की वजह से, पार्टी के अति आत्मविश्वास की वजह से और इनके शासन काल में हुए कुछ काले कारनामो की वजह से आम जनता ने इन्हें दुबारा सत्ता देने से मन कर दिया. सत्ता से बाहर होने के बाद इन्हें एक और मौका मिला वापस सत्ता में आने का पर इनकी दुबारा हार ने ये साबित कर दिया की अटल बिहारी बाजपेयी के बाद आये लाल कृष्ण आडवानी के नेतृत्व पर उन्हें भरोसा नहीं है.

 

अगर इस बार के चुनाव की बात करें तो भी इस पार्टी की हालात बहुत ज्यादा नहीं सुधरी है पर हाल के लिए गए फैसलों से जिस तरह से इस पार्टी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं उसने इस पार्टी को एकमात्र बड़ी पार्टी के रूप में उभरने का मौका दिया है और ये बात आज के सर्वे से भी साबित होती है. हालाँकि लोकसभा चुनाव से पहले कई राज्यों के चुनाव होने हैं और अगर उन चुनावों में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सरकार बचाने के साथ राजस्थान और दिल्ली की सत्ता हथियाने में कामयाब होती है तो निःसंदेह इसके बाद के सर्वे में कुछ और सकारात्मक रिजल्ट आयेंगे इस पार्टी के बारे में. इस पार्टी के बारे में ये कहा जाता रहा है की ये दंगा करवाने वाली पार्टी है या मुस्लिम विरोधी पार्टी है पर अगर गुजरात दंगे की बात को छोड़ दिया जाए (क्यूंकि ऐसे कई दंगे कांग्रेस के शासन काल में हो चुके हैं जिनकी बात भी नहीं की जाती) तो इनका कोई भी फैसला मुस्लिम विरोधी हो ऐसा नजर नहीं आता.

 

हालाँकि मेरे पास एक और विकल्प है की मैं वोट ही न करूँ पर ये सही नहीं होगा इस लोक तंत्र के लिए और अभी तक के मेरे इस लेख से साफ़ जाहिर है की निर्दोष न मानते हुए भी एक स्थिर और विकास शील सरकार के लिए मेरे पास भाजपा के अलावा कोई विकल्प नहीं है. हो सकता है की कई लोग मेरे इस विचार से सहमत न हों उनके लिए मैं ये भी कहूँगा की मैंने भाजपा के पक्ष में वोट करने के लिए कोई कसम नहीं खायी है, अगर आज भी मुझे कोई एक सही कारण मिल जाए जिसकी वजह से मुझे कोई और विकल्प नजर आये तो मुझे वो सहर्ष स्वीकार होगा.

 

लेखक  : शिशिर सिंह

Blog :  http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com

Short URL: http://jayhind.co.in/?p=2731

Posted by on Aug 26 2013. Filed under मेरी बात. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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