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नमो चाय पर चर्चा: हिंदूत्व और विकास एक साथ

 Chai pe charcha with NAMO

इस तस्वीर को देखकर आप समझ सकते हैं कि मैं किस बारे में बात करने जा रहा हूं. अपने रूम के पास में स्थित इस चाय की दुकान पर जब पहुंचा तो देखा कि नरेंद्र मोदी के चुनावी कैंपेन का हिस्सा नमो चाय पर चर्चा लगा हुआ है. जिस पर लिखा था एक साथ 1000 जगहों पर 300 शहरों में एक ही दिन एक ही समय…… नमो लाइव

 

मैंने अपने छोटे से जीवनकाल में कभी इस तरह का हाईटेक चुनाव प्रचार नहीं देखा. मोदी अगर केरल के कोच्चि में बोलेंगे या ओडिशा के भुवनेश्वर में बोलेंगे तो उसका लाइव टेलिकास्ट चाय की दुकान पर होगा. आम जनता तक मोदी की बात पहुंचाने का यह एक कारगर उपाय साबित हो सकता है.

 

इस तरह के प्रचार का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें कम पैसे में आप ज्यादा लोगों तक पंहुच सकते हैं. एक चाय की दुकान पर अमूमन 15-20 लोग होते हैं. अगर वहां टीवी सेट लगा दिए जाएं तो भीड़ और ज्यादा बढ़ जाएगी. यानी की चाय वाले की आमदनी भी बढ़ेगी और मोदी को सुनने वाले लोग भी बढ़ेंगे. खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह बेहतरीन कॉन्सेप्ट साबित हो सकता है. बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी जहां कहीं भी रैली करेंगे वहां से सीधा प्रसारण देश के उन दूर दराज इलाकों में होगा जहां मोदी खुद नहीं पहुंच सकते.

 

लोकसभा की कुल 543 सीटों पर चुनाव होने हैं. और चुनावों में मुश्किल से 100 दिन भी नहीं बचे हैं. ऐसे में नरेंद्र मोदी हर लोकसभा क्षेत्र में तो पहुंच नहीं सकते हैं. तो ऐसी स्थिति में बीजेपी के लिए नमो चाय पर चर्चा जनता तक मोदी को पंहुचाने का एक बेहतरीन विकल्प है.

 

वैसे नरेंद्र मोदी ने इस तरह का प्रयोग साल 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भी किया, और नरेंद्र मोदी का ये प्रयोग सफल भी रहा.

भारत में चाय की दुकान का खासा महत्व है. गांव, गली-मुहल्ले की चाय की दुकान क्रिकेट कमेंट्री से लेकर राजनीतिक बहस का केंद्र होता है. देश के तमाम छोड़े – बड़े मुद्दे वहीं तय होते हैं. यूपी बिहार जैसे राजनीतिक प्रदेशों में तो प्रदेश का मुख्यमंत्री और देश का प्रधानमंत्री भी वहीं तय हो जाता है.

 

टीवी विश्लेषणों से कहीं ज्यादा राजनीतिक विश्लेषण चाय की दुकान पर होते हैं. अगर भारत-पाकिस्तान का मैच चल रहा हो तो जीत से लेकर हार तक का विश्लेषण वहीं हो जाता है. तमाम राजनीतिक दलों के क्षेत्रिय नेता भी वहीं होते हैं. राजनीतिक बहसों का ऐसा दौर चलता है जो सुबह से शाम तक चलता ही रहता है. कई बार तो चाय की दुकानों पर चलने वाली बहसे उत्तेजक रूप ले लेती हैं. मामला इतना गंभीर हो जाता है कि दो धड़े बन जाते हैं. चाय की दुकान संसद जैसी हो जाती है. जहां पक्ष – विपक्ष दोनों होता है. ऐसे में बीजेपी और नरेंद्र मोदी की नमो चाय पर चर्चा का कॉन्सेप्ट हिट हो सकता है.

 

अगर आप मोदी के चाय पर चर्चा को कहीं देखें या सुने तो इसमें एक और खास बात है. इस तरह के आयोजन से बीजेपी एक बार फिर हिंदू वोटरों को संगठित करने का प्रयास कर रही है. मोदी के भाषण से पहले 2-3 घंटे तक इस पर हिंदू देवी देवाताओं के भक्ति गीत चलते हैं. और ठीक वही गीत एक साथ सभी 1000 जगहों पर चलते हैं जहां नमो चाय पर चर्चा लगा होता है.

 

यानी की मोदी के भाषण से पहले हिंदू वोटरों को हिंदूत्व के नाम पर संगठित किया जा रहा है और दूसरी तरफ मोदी के विकासात्मक भाषण से उन वोटरों को संगठित किया जा रहा है जो मोदी में विकास पुरुष की छवि देखते हैं. यानी की एक साथ एक ही मंच पर विकास और हिंदूत्व दोनों की बात.

 

हिंदूत्व बीजेपी का मूल-मंत्र रहा है. बीजेपी की उत्पत्ति ही हिंदूत्व के धरातल पर हुई थी. बीजेपी की सहयोगी स्वयंसेवी संस्था आरएसएस और बजरंग दल जैसे संगठन भी हिंदूत्व के मुद्दे पर ही बीजेपी के साथ देते रहे हैं. बीजेपी के लिए राम मंदिर का मुद्दा पहले से ही अहम रहा है.

 

राम मंदिर के मुद्दे पर ही बीजेपी ने उच्च हिंदू जातियों को शुरू से ही अपने पाले में रखे हुए है. ऐसे में मोदी की विकास और सर्व समाज की बात में हिंदूत्व की बात कहीं दब रही थी. क्योंकि बीजेपी की रैलियों में पार्टी का पूरा ध्यान मोदी को विकास पुरुष दिखाने की होती है. तो मोदी को विकास पुरूष दिखाने के चक्कर में पार्टी कहीं ना कहीं अपने हिंदूत्व के ऐजेंडे से भटकती दिख रही थी अब मोदी चाय पर चर्चा के साथ हिंदूत्व के वोटरों को भी अप्रत्यक्ष रुप से लुभाते दिखेंगे.

 

यानी की बीजेपी तकनीक के सहारे चाय पर चर्चा के साथ एक बार फिर हिंदू वोटरों को जोड़ने की कोशिश करेगी. साथ ही चाय पर चर्चा के दौरान भारत की ग्रामीण आबादी टीवी की चकाचौंध में उस भारत के सपने को देखेगी जिसे मोदी अपने भाषणों में दिखाते हैं.

By पंकज कुमार  एबीपी न्यूज

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भारत -एक हिन्दू राष्ट्र

अंकिता सिंह

Web Title : Namo Tea discussed: Hindutva and development

Keyword : narendra, modi, voters,chai pe charcha, Gujarat, Chief, Minister, Narendra, Modi, Gujarat, Chief, Bharatiya, Janata, Narendra, Modi, Chai, Gujarat, Chief, Minister, Bharatiya, Janata

Posted by on Feb 12 2014. Filed under मेरी बात. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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