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न हिंदू, न मुसलमान, मेरी सरकार का मजहब होगा ‘इंडिया फर्स्‍ट’: नरेंद्र मोदी

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बिहार हुंकार भरेगा, तभी देश दम भरेगा: हुंकार रैली में नरेंद्र मोदी

नरेंद्र मोदी हुंकार रैली के मंच पर पहुंचे. पहले एक मिनट तक शंख बजता रहा. भारत माता की जय के नारे के साथ मोदी का भाषण शुरू हुआ.
आइए जानें क्या कहा पटना में नरेंद्र मोदी ने…
इस गांधी मैदान में पधारे में लाखों लाखों भाइयों बहनों. ये महारैली नहीं है, ये तो भारत की महाशक्ति का अनुष्ठान है मित्रों. ई बाबू कुंवर सिंह की धरती ने शत शत प्रणाम करता ने. भारत के स्वर्णिम इतिहास में बिहार का इतिहास बा. चाहे ऊ नंद वंश के काल होखे या मौर्य वंश के काल होखे. चाहे गुप्त वंश के काल होखे. बिहार ई भूमि होई. जहां सूर्य देव के हर रूप में पूजा होई. सूर्योदय के पूजा होवी, आर सूर्यास्त के पूजा होवी. बिहार के लोग अवसरवादी नव होएं. कुछ अपवाद छोड़ के.
यह कहकर पॉज, मुस्कुराते हैं. भीड़ का शोर तेज हो जाता है.

मैं जानता हूं कि आप क्या सुनना चाहते हैं. बिहार के समस्या के जड़ छई, सीमांचल के समस्या. पूरा मिथिलांचल बाढ़ से त्रस्त रही छी. भारत नेपाल समेत एकदा कोसी के रोग के व्यवस्था हो जाईं, ते बिहार खुशहाल हो जाई.

भाइयों बहनों, अगर रामायण काल को याद करें, तो माता सीता की याद आती है. अगर महाभारत काल को याद करें, तो कर्ण की याद आती है. अगर गुप्त वंश की याद करें, तो चंद्रगुप्त की राजनीति प्रेरणा देती है. गणतंत्र की बात करें, तो आज भी वैशाली का गणतंत्र पूरे विश्व में सिरमौर है. अगर हम सम्राट की बात करें तो आज भी सम्राट अशोक के बाद कोई याद नहीं आता. आज पाटलिपुत्र को याद करें तो पटना की हर गली याद आती है. अगर ज्ञान युग की बात करें तो नालंदा और तक्षशिला का स्मरण होता है. ये मेरा बिहार है भाइयों. और अगर आधुनिक युग में चले जाएं. भारत की आजादी के दो महत्वपूर्ण पड़ाव. एक महात्मा गांधी का चंपारण सत्याग्रह. दूसरा, गुजरात में गांधी का दांडी यात्रा का कालखंड. हिंदुस्तान की आजादी के ये दो महत्वपूर्ण पड़ाव हैं.

भाइयों बहनों, आज आप बिहार में हुंकार रैली कर रहे हैं. हुंकार रैली. ये हुंकार किसका है. रिपीट तीन बार.ये हुंकार हिंदुस्तान के करोड़ों करोड़ों गरीबों का हुंकार है, जो बिहार से उठा है. भाइयों बहनों ये सीता माता की धरती है. और जब मैं सीता माता का स्मरण करता हूं. जब सीता माता का अपहरण हुआ, तो सारे वानर सीता माता को खोजने के लिए निकले. लेकिन उनको कोई रास्ता नहीं सूझता था. कैसे जाएं कहां पहुंचे. सीता माता को कैसे खोजें. तब सभी वानर उधेड़बुन में थे. तब उस समय जामवंत की नजर हनुमान जी पर पड़ी. और उस समय हनुमान जी ने जामवंत को जो कहा था, भाइयों बहनों. जामवंत ने हनुमान को कहा था, पवनतनय बन पवन समाना, का चुप साधि रहे बलवाना.

भाइयों बहनों, ये हुंकार रैली पूरे देश को कह रही है का चुपि साध रहे बलवाना. मेरे देशवासियों, मेरे साथ बोलोगे. आपको कहना है. हुंकार भरो हुंकार भरो. बोलोगे. मैं बोल रहा हूं का चुप साधि रहे बलवाना.जनता चीखती है. हुंकार भरो हुंकार भरो, देश हुंकार भरना चाहता है और इसे प्रेरणा देने का काम बिहार की धरती से हो रहा है. ये बिहार की विशेषता है. भारत को जब जब जिन चीजों की जरूरत पड़ी, बिहार ने उसे पूरा किया. जब देश को भगवान बुद्ध की जरूरत थी, बिहार ने भगवान बुद्ध दिया. जब देश को भगवान महावीर की जरूरत थी, बिहार ने भगवान महावीर दिए. जब देश की जरूरत थी, तब यही पटना की धरती है, जिसने दसवें गुरु गोविंद सिंह को दिया. सवा लाख से एक लड़ाऊं, तब गुरु गोबिंद नाम कहाऊं.

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और जब देश भ्रष्टाचार में डूब रहा था. लोकतंत्र खत्म होने की कगार पर था. तब यही बिहार है, जिसने जयप्रकाश नारायण को देश को दिया था.

2006-07 की घटना है. आपके मुख्यमंत्री, हमारे मित्र गुजरात आए थे. कथा सुननी है. हांएएए. तो एक शादी में आए थे. एक मेज पर खाना खा रहे थे. हमारे मेहमान थे. हमने उनको जमकर खाना खिलाया. ढोकले. खमन,गुजराती कढ़ी, हर प्रकार की मिठाई. इतना गौरव हुआ था कि उनका पेट भी भर गया और मन भी. यही इस देश की संस्कृति है. हमने मन से खिलाया था. मित्रों सार्वजनिक जीवन के उसूल होते हैं. आपने देखा होगा कि हमारे लालू जी मुझे गाली देने में कभी मौका नहीं छोड़ते. वो हमेशा कहते थे कि मैं कभी मोदी को पीएम नहीं बनने दूंगा. लेकिन तीन महीने पहले लालू जी को अकस्मात हुआ है. एक्सिडेंट हुआ. हमारे मित्र रूडी जी ने बताया. मैंने उसी वक्त लालूजी को फोन किया और उनकी खबर ली. हालचाल पूछा. मैंने मीडिया को नहीं बताया. लेकिन मैं हैरान था. लालू जी ने मीडिया को बुलाया और कहा कि देखिए गुजरात का मुख्यमंत्री. मैं इतनी गाली देता हूं. फिर भी एक्सिडेंट के बाद मेरी खबर पूछता है.

मैंने कहा लालू जी, यदुवंश के राजा श्री कृष्ण भगवान हमारे गुजरात के द्वारका में बसे थे. यदुवंश से हमारा नाता है. गुजरात द्वारका आपकी धरती है. हमें प्रेम जगना स्वाभाविक है. भाइयों. मैं यदुवंश से जुड़े सभी भाइयों बहनों को कहना चाहता हूं, कृष्ण भगवान के वंशजों को कहना चाहता हूं. मैं द्वारका नगरी से कृष्ण भगवान का आशीर्वाद लेकर आया हूं. आपकी चिंता मैं करूंगा ये मेरा वादा है.

भाइयों बहनों. कभी कभी साल में दो बार, हमारे यहां मुख्यमंत्रियों की मीटिंग होती है. पीएम उस मीटिंग को बुलाते हैं. उसमें दोपहर का लंच भी उन्हीं की तरफ से होता है. पीएम की टेबल पर पांच छह सीएम बैठते हैं साथ. एक साल पहले की बात है कि पीएम की टेबल पर हम और हमारे बिहार के मित्र मुख्यमंत्री एक ही टेबल पर आ गए. भोजन परोसा जा रहा था, मगर वह खाना नहीं खा रहे थे. इधर उधर देख रहे थे. मैं पीएम को देखूं. उनके सामने देखूं. परेशान कि बात क्या है.

फिर समझ आया. मैंने मेरे मित्र को कहा. चिंता मत करो. कोई कैमरे वाला नहीं है. खा लो. हिप्पोक्रेसी की भी सीमा होती है.हाहाहाहा…उसके बाद, जब मैं कहता हूं कि किसी भी हालत में बिहार को जंगलराज से बचाना था. उसके बाद गठबंधन की सरकार बनी. आज मैं देश के अर्थशास्त्रियों, पॉलिटिकल पंडितों का आह्रावन करता हूं. जितनी देर जेडीयू भाजपा सरकार चली, अगर किसी ने अच्छे से अच्छे काम किए, विकास यात्रा आगे बढ़ाई, तो भाजपा के मंत्रियों ने. बिहार के सुधार की जो खबरें आने लगी थीं, वे भी बीजेपी के मंत्रियों और विधायकों का संकल्प था, उसी के कारण हुआ था. उसके बावजूद भी. एक बार सवाल आया. दो दो चुनाव हुए. पार्टी के सामने विषय था. गुजरात से नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार में लाया जाए. मीडिया ने भी बड़ा विषय उछाल दिया था. हमारे बिहार के नेता, उनका मुझ पर इतना प्यार था. वे मुझे बुलाने के लिए इतना आतुर थे. तब मैंने सुशील जी को, नंदकिशोर जी को कहा था. मुझे बुलाने का आग्रह मत करिए. हमारा मकसद बस एक है कि बिहार में जंगलराज न होने दो. मोदी अपमानित होता है तो होने दो. नरेंद्र मोदी बिहार के बाहर रहता है तो रहने दो. बिहार में जंगलराज नहीं आना चाहिए. हमारे लिए दल से बढ़कर देश होता है.

इसीलिए मेरी पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं की इच्छा के बावजूद मैंने जंगलराज न आए. इसलिए अपमान सहन किया. लेकिन भाइयों बहनों. उनका इरादा नेक नहीं था. ये हमारे मित्र को चेले चपाटों ने कह दिया. कांग्रेस के साथ जुड़ जाओ. प्रधानमंत्री बनने का अवसर है. ख्वाब देखने लगे. और उन्होंने विश्वासघात भाजपा से नहीं किया है. विश्वासघात बिहार के कोटि कोटि जनों से किया है. ये विश्वासघात आपके साथ है.

भाइयों बहनों मैं पूछना चाहता हूं कि क्या ये विश्वासघात है.(भीड़ चीखती है हां.). विश्वासघात करने वालों को आप सजा दोगे. साफ कर दोगे (भीड़ फिर हामी भरती है.) चंपारण में गांधी जी ने अंग्रेज मुक्त हिंदुस्तान की बात की थी. आज गांधी मैदान से बिगुल बजना चाहिए कि कांग्रेस मुक्त भारत का हिंदुस्तान का सपना साकार हो.

कल रात मैं टीवी देख रहा था. कांग्रेस के मित्र परेशान हैं. मोदी शहजादा क्यों कह रहे हैं. ये नौबत क्यों आई है. अगर मैं शहजादे कहता हूं तो आपको बुरा लगता है, तो इस देश को भी इस वंशवाद से बुरा लगता है. कांग्रेस वादा करे, वह वंशवाद छोड़ देगी. मैं शहजादा कहना छोड़ दूंगा.

जेपी लोकतंत्र के लिए जिए, जूझते रहे, उसके लिए जेल में जिंदगी गुजारने को तैयार रहे. लोकतंत्र के चार दुश्मन होते हैं. एक दुश्मन है. परिवारवाद. वंशवाद. जातिवाद का जहर, सत्ता का भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता.

देश का दुर्भाग्य है मित्रों कि आज बिहार की राजनीति में ये सभी दुश्मन उभर कर सामने आ रहे हैं.

भारत सरकार, यूपीए सरकार के दस साल पूरे होने जा रहे हैं. मैं पूछना चाहता हूं. जब पिछली बार चुनाव में कांग्रेस के नेता आए थे. उन्होंने कहा था कि 100 दिन में महंगाई हटाएंगे. कांग्रेस ने वादा किया था. जरा जोर से जवाब दो. महंगाई हटी. महंगाई घटी. महंगाई बढ़ी…

भाइयों जिस कांग्रेस ने आपके साथ वादाखिलाफी की. आज दस साल हो गए. वे दिल्ली के तख्त पर बैठे हैं. क्या उन्हें घर भेजने की नौबत आई है. क्या आप उनको विदा करोगे. आज मैं सार्वजनिक रूप से आह्वान करता हूं. आपने 2004 में 2009 में सरकार बनाई. कॉमन एजेंडा के तहत आपने देश की भलाइ के लिए बात कही थी. पहले सौ दिन में जो काम करने को कहे थे, उसके भी अस्सी फीसदी नहीं किए. ऐसे लोगों को माफ करना चाहिए क्या.

ये कांग्रेस ने सत्ता पाते ही कहा था कि गंगा की सफाई करेंगे. आज पूरा गंगा का पट देख लीजिए. एक प्रकार से बीमारियों का गढ़ बनाकर रख दिया है. क्या हमारी प्राण प्रिय गंगा साफ होनी चाहिए कि नहीं. कांग्रेस को ये वादा पूरा करना चाहिए था कि नहीं. मेरे नौजवान दोस्तों, ये कांग्रेस ने कहा था कि वे सत्ता में आएंगे और नौजवानों को रोजगार देंगे. वो तो दिया नहीं, महंगाई बढ़ा दी.

आज गरीब के घर चूल्हा नहीं जलता. बच्चे रात रात रोते हैं. मां आंसू पीकर सुलाती है. ये पाप किसका है. क्या गरीब की थाली में रोटी नहीं होनी चाहिए. भाइयों बहनों. मेरा किसान आज महंगाई की मार से वो भी मर रहा है. जिस तरह से खाद की कीमतें बढ़ रही हैं. और ये सरकार देखिए. किसान को खाद मिल नहीं रहा है. लेकिन आपके बरौनी में खाद का जो कारखाना लगा है, उस पर ताले लगे हुए हैं. देश को नुकसान हो रहा है. लेकिन ये दिल्ली की सरकार. इसे न किसान की परवाह है, न गरीब की परवाह है. भाइयों बहनों. हिंदुस्तान में गरीबों की भलाई के लिए एक बीस सूत्री प्रोग्राम चलता है. हर सरकार उसे लागू करती है. और भारत सरकार हर छह महीने में उसका लेखा जोखा लेती है. और उसका रिपोर्ट प्रकट करती है. उसको लागू करने वाले पहले पांच स्थान पर राज्य भाजपा शासित राज्य हैं. लेकिन बिहार का नंबर. ये हमारे मित्र गरीबों की बातें करते हैं. बीसवें नंबर पर खड़ा है. ये गरीबों के नाम पर रोटी सेंकने वाले लोग. मजाक बना रखा है. जिस प्लानिंग कमीशन के अध्यक्ष पीएम हैं. वह कहता है कि अगर आपकी घर की आय दिन भर की 26 रुपये है. वह गरीब नहीं है. क्या आप सहमत हैं. अरे 26 रुपये में परिवार को चाय नहीं मिलती. उनका एक नेता कहता है कि पांच रुपये में खाना मिल जाता है. इन्हें गरीबी और भूख का पता नहीं है. इन्होंने गरीबी नहीं देखी. हमने गरीबी देखी है. उसमें पैदा हुए हैं. जिया है.

मित्रों बिहार ने ढेर सारे रेल मंत्री दिए. भाइयों बहनों मैं रेल मंत्री सोच भी नहीं सकता हूं. मैं तो रेलवे के डिब्बे में चाय बेचते यहां आया. और चाय बेचने वाले को रेल की मुसीबतों का जितना पता होता है, उतना रेल मंत्री को भी नहीं पता होता. टीटी को संभालना पड़ता, गार्ड को संभालना पड़ता. ट्रेन में कैसे भी करके चढ़ना पड़ता. मैंने सब संभाला है.ये लोग गरीबी की बात कर रहा हूं.

‘दीने इलाही का बेदाग बेड़ा,

वो डूबा दहाड़े में आकर गंगा में आकर’
ये ताकत है इस जमीन की. सिकंदर को यहां लाकर पटका. जिस भूमि ने सिकंदर के इतिहास को थाम लिया. उसी भूमि पर हिंदुस्तान की सीमा पर मेरे बिहार के जमीन वतन की रक्षा कर रहे थे. पाकिस्तानियों ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया. वे शहीद हुए. हिंदुस्तान का हर बच्चा, शहीदों के लिए गौरवगान करता है. प्रेरणा लेता है. लेकिन यहां एक ऐसी सरकार बैठी है. जिसका मंत्री कहता है कि सेना में तो मरने के लिए ही जाना जाता हो. डूब मरो मेरी सेना का अपमान करने वाले.

अरे दुश्मन जो सेना के जवानों को मारते हैं, उनके खिलाफ आवाज उठनी चाहिए और आप कह रहे हो कि वो सेना में मरने के लिए जाते हैं.बिहार के मेरे भाइयों. अपमान सहन करोगे. नहीं का शोर.

भाइयों बहनों, इनको हमेशा के लिए ऐसा सबक सिखाओ कि कभी आने वाले समय में अपमान करने की हिम्मत न जुटा सकें. देश आज परिवर्तन चाहता है. चारों तरफ से हम पर कीचड़ उछाला जा रहा है. कोई बाकी नहीं रहा. पूरे देश में ऐसा माहौल बनाया गया है. लेकिन इनको मैं कह रहा हूं कि जितना ज्यादा कीचड़ उछालोगे, कमल उतना ही खिलेगा. इसलिए मैं आपसे अनुरोध कहने आ रहा हूं कि आज एक नए संकल्प के साथ लोग कहते हैं कि आज यहां पर ऐतिहासिक रैली हुई है. मैं कहता हूं कि ये सिर्फ ऐतिहासिक रैली नहीं है. ये नए इतिहास की नींव रखने वाली घटना है. और उसी घटना को लेकर हम जब आगे पढ़ रहे हैं. नए उमंग और उत्साह के साथ. भारत के भाग्य को बदलने के लिए हम आगे बढ़ें. आप सबका मैं बहुत बहुंत आभारी हू.

बिहार की बीजेपी ने दिल्ली सरकार से पचास हजार करोड़ का पैकेज मांगा है. ये मांग पूरी होनी चाहिए. आप लिखकर रखिए, अगर दिल्ली जीत ली हमने, तो 200 दिन का सवाल है. जो प्यार बिहार ने हमें दिया है. जो पलक पांवडे बिछाकर स्वागत किया है. मित्रों मेरे जीवन में कभी ऐसा सौभाग्य नहीं मिला.
मैं आपके प्यार को ब्यज समेत चुकाऊंगा. हमारा मंत्र है विकास. सारी समस्याओं का समाधान है. जो लोग मुसलमानों की बात करते हैं. उनको भी कहना चाहता हूं. मेरे मुसलमान भाई हज यात्रा के लिए जाते हैं. हर एक राज्य का कोटा तय हुआ. गुजरात के मुसलमानों के लिए कोटा है चार हजार आठ सौ का. बिहार के लिए सात हजार से कुछ ज्यादा. बिहार में ये जो सांप्रदायिक सदभाव की बातें कर रहे हैं. बिहार का कोटा है सात हजार का, जाने वालों की एप्लिकेशन आती हैं सिर्फ छह हजार. क्यों क्योंकि बिहार के गरीब मुसलमान के पास पैसे नहीं हैं. जाएगा कैसे. और गुजरात में हज का कोटा साढ़े चार हजार है. लेकिन अर्जी आती है चालीस हजार की. ये क्यों आती हैं. क्योंकि वहां का मुसलमान सुखी है.

गुजरात में कच्छ औऱ भरूच का जिला, जहां सबसे ज्यादा मुसलमानों की सबसे ज्यादा आबादी है. अगर पूरे गुजरात में किसी जिले की सबसे ज्यादा प्रगति हो रही है, तो वह इन्हीं दोनों जिलों की हो रही है. ये लोगों के हाथ में हमारे विरोधी धूल झोंक रहे हैं. मैं गरीब मुसलमानों से. मैं गरीब हिंदू भाइयों से पूछ रहे हैं. मेरा गरीब हिंदू भाई बताए कि आपको मुसलमानों के खिलाफ लड़ना है. या गरीबी के खिलाफ. (भीड़ गरीबी के खिलाफ) मैं गरीब मुसलमान से पूछना चाहता हूं कि आपको हिंदू के खिलाफ लड़ना है. या गरीबी के खिलाफ (भीड़ गरीबी के खिलाफ)

आओ हम दोनों मिलकर गरीबी के खिलाफ लड़ाएं.

आज ये देश को उल्टी सलाह दे रहे हैं. मैं आपको वादा करने आया हूं. मैं कहने आया हूं. हमारी सरकार का एक ही मजहब है और ये मजहब है इंडिया फर्स्ट. नेशन फर्स्ट. भारत सबसे आगे.सरकार की एक ही भक्ति है, भारत भक्ति, एक ही शक्ति है. सवा अरब लोगों की शक्ति. इसी मंत्र के साथ आगे बढ़ना है.

मेरे साथ दोनों मुट्ठी बंद कर पूरी ताकत से बोलिए. भारत माता की जय…पूरा हिंदुस्तान आपको देख रहा है. बोलिए वंदे मातरम.

मेरी एक छोटी सी प्रार्थना है. आप यहां से जाएंगे. कोई जल्दबाजी नहीं करेगा. गांव तक सलामत जाएँगे. किसी कार्यकर्ता को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. शांति से जाओगे. जल्दबाजी नहीं करोगे.और दूसरी बात हमें शांति और एकता को बनाए रखना है. किसी भी हाल में शांति पर चोट नहीं आनी चाहिए. हिंदुस्तान में कहीं भी शांति पर चोट नहीं आनी चाहिए. ये संकल्प लेकर जाइए

पूरी ताकत से बोलिए…वंदे मातरम
(मोदी मोदी का शोर…)

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली का भाषण:


बिहार के कोने कोने से आए हुए लाखों की संख्या में बहनों और भाइयों. मैंने 1977 का चुनाव भी देखा है. लेकिन ये उत्साह जो मैं अपने सामने देख रहा हूं. ये परिवर्तन की लहरें जो अपने सामने देख रहा हूं. जिन्हें ये लहरें समझ नहीं आएंगी. वो इनके सामने बह जाएंगे. आज 44 दिन हुए, 13 सितंबर को भारतीय जनता पार्टी ने श्री नरेंद्र मोदी को पीएम पद का अपना उम्मीदवार घोषित किया था. 44 दिन में जमीन की हकीकत बदली हुई नजर आती है. 44 दिन में देश का राजनीतिक नजारा बदला हुआ नजर आता है. और आज आप लाखों की संख्या में आए हो. मुझे याद है, जब चार दशक पहले, इसी ऐतिहासिक मैदान में जेपी के नेतृत्व में एक बहुत बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ था. वह आंदोलन था एक भ्रष्ट सरकार को हटाने का. इसी मैदान में जेपी के साथ आकर प्रसिद्ध कवि दिनकर जी ने जो पंक्तियां लिखी थीं, मंच पर लिखी हुई थीं. सिंहासल खाली करो कि जनता आती है. आज जो उत्साह मैं अपने सामने देख रहा हूं. ये एक नहीं दो सिंहासन खाली करवाने के लिए बीजेपी के कार्यकर्ता खड़े हुए हैं. एक सिंहासल बदलेगा दिल्ली का और एक पटना का. बीजेपी के नेतृत्व को जिन्होंने चुनौती दी है. बीजेपी की विचारधारा को जिनने चुनौती दी है. बीजेपी के कार्यकर्ताओं के स्वाभिमान को जिन्होंने चुनौती दी है. आज उस परिवर्तन के लिए बीजेपी कार्यकर्ता खड़े हो गए हैं. ये वो आंदोलन था, आज से 40 साल पहले जिसकी कल्पना दीनदयाल उपाध्याय और राममनोहन लोहिया ने दी थी. उपाध्याय जी ने नारा दिया था कि कांग्रेस हटाओ और इस देश को बचाओ. इस देश में जब भी गैरकांग्रेस सरकार आई, तो वही नारा आगे बढ़ा था. और आज 2014 के चुनाव के लिए दिल्ली में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गैरकांग्रेसी सरकार स्थापित करने के लिए खुद को वचनबद्ध किया है.

मित्रों, केंद्र की वो सरकार है, जिसने देश के शासन को बर्बाद किया है. इतिहास की सबसे भ्रष्ट सरकार ये रही है. देश की अर्थव्यवस्था को चूर चूर किया है. नेतृत्व निराशापूर्ण है. इसीलिए जहां जहां हमारे जननेता जा रहे हैं, लाखों का समूह उनके स्वागत के लिए खड़ा हुआ है. परिवर्तन की लहर हमेशा बिहार से उठी है. 40 की 40 सीट लाकर आप फिर उसका नेतृत्व करेंगे.

बिहार ने हिंदुस्तान में इतिहास का निर्माण किया है. और इस जनसभा ने भी देश में नए इतिहास का निर्माण किया है. इसलिए बिहार के मेरे बहनों भाइयों. अपनी तरफ से और बीजेपी की तरफ से आप सभी का शीश झुकाकर स्वागत करता हूं. समय समय पर बिहार में इतिहास बना है. और मैं जानता हूं कि इतिहास निर्माण का साक्षी यह बिहार रहा है. भगवान बुद्ध और भगवान महावीर की कर्मस्थली यह बिहार रहा है. कौन भूल सकता है दयानंद सरस्वती को. 1857 में जो बिहार के वीरों ने क्रांति का बिगुल बजाया था. 85 साल के वीर कुंवर सिंह. किन किन को याद करूं. चाणक्य ने इसी बिहार की धरती से एक साधारण से बालक को उठाकर उसकी योग्यता को विकसित किया और उसी के माध्यम से नंद वंश का सफाया कराया और चंद्रगुप्त मौर्य को सम्राट बनाया था. आज रैली के माध्यम से मैं कह सकता हूं कि बिहार की जनता ने संकल्प लिया है. कि रेलवे प्लेटफॉर्म पर चाय बेचने वाले साधारण लड़के को, जिसे अटली जी और आडवाणी जी का आशीर्वाद है. उसे देश का प्रधानमंत्री बनाने का फैसला किया है.

मुझे भरोसा है कि आप इतिहास बनाएंगे. मैं कह सकता हूं कि नरेंद्र भाई सिर्फ बीजेपी द्वारा प्रोजेक्ट किए हुए पीएम के उम्मीदवार नहीं हैं. बल्कि हिंदुस्तान के जन जन के आशा, भरोसा और विश्वास हैं. और मैं यह भी बताना चाहता हूं.

आप सभी जानते हैं कि दिल्ली की कांग्रेस की सरकार ने देश की जनता का भरोसा तोड़ दिया है. 55 वर्षों से अधिक हुकूमत कांग्रेस ने की है.125 करोड़ की जनसंख्या को एक महान भारत बनाने के लिए यह कम समय नहीं होता. मगर कांग्रेस ने अपने शासनकाल में गरीबी, बेरोजगारी, कंगाली को बढ़ाया है. यही सबसे बड़ी उपलब्धि इस कांग्रेस पार्टी की रही है. इसीलिए मैं कहता हूं कि इस पार्टी ने इस देश के भरोसे को तोड़ दिया है. उसे पुनः कायम कर सकता है, तो देश का सबसे ज्यादा लोकप्रिय नेता नरेंद्र भाई ही कर सकता है.

साढ़े नौ साल पहले महंगाई बढ़ने का सिलसिला शुरू हुआ. पीएम भरोसा दिलाते रहे 100 दिनों के अंदर. छह महीनों के अंदर महंगाई कम होगी. मगर ये जारी है. मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं. आपने बीजेपी के नेतृत्व की सरकार भी देखी है. अटल जी के शासन में छह साल में एक दिन भी, आजाद भारत के इतिहास में महंगाई को बढ़ने नहीं दिया.

आज मैं यह भी कहना चाहता हूं कि हमारा ये बिहार ऐसा राज्य है. जहां की 85 फीसदी जनता गांवों में रहती हैं. इनकी गरीबी और बेरोजगारी को कोई दूर कर सकता है, तो बीजेपी की सरकार ही दूर कर सकती है. हम जानते हैं कि भारत दिल्ली, मुंबई की चौड़ी सड़कों में. ऊंची इमारतों में नहीं रहता है. यह गांव गली में रहता है, जब इसका विकास होगा, तभी स्वप्न साकार होगा.

मैं सबको भरोसा दिलाना चाहता हूं कि जिस दिन बीजेपी की सरकार आएगी, उस दिन सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता जो किसान है, हम उसकी हालत सुधारने की, उसकी क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए काम करेंगे. किसान की जेब में पैसा होगा, तो व्यापारी का व्यापार चलेगा. दुकानदार की दुकान चलेगी. डॉक्टर की डॉक्टरी चलेगी. वकील की वकालत चलेगी. पूरा हिंदुस्तान चलेगा.

आपको यह भी बताना चाहता हूं कि अटल जी की सरकार में मैं कृषि मंत्री बने. मैंने निवेदन किया. अटल जी मान गए. पहले किसानों को खेती के लिए 14 से 20 फीसदी दर पर ब्याज मिलता था. मैंने कहा कि यह कहां का इंसाफ है. अटल जी ने कहा, कम करो. पहली बार साढ़े आठ फीसदी की दर पर किसान ऋण किया गया. फिर बीजेपी की राज्यों में सरकार बनी, तो इसे और घटाया. आज हमारी मध्यप्रदेश समेत कई सरकारें, शून्य फीसदी दर पर कर्ज दे रही हैं किसानों को. इसकी कल्पना देश क्या कोई दुनिया में भी नहीं कर सकता है.

मैं आपको भरोसा दिलाना चाहता हूं कि ये फॉर्मूला क्यों जरूरी है. बिहार में कभी अकाल कभी सूखा पड़ जाता है. इसीलिए हमने तय किया है कि खेत की बुवाई के पहेल किसान की खेत की आमदनी तय करनी चाहिए. यदि फसल बर्बाद हो जाती है, तो जो खेत की आमदनी बुवाई के पहले तय की गई है, उसकी सरकारी तंत्र द्वारा अदायगी दी जानी चाहिए. हम किसान की माली हालत सुधारेंगे. अगर हम भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाना चाहते हैं, तो यह जरूरी है.

लेकिन यह कांग्रेस की सरकार जो 55 सालों से हुकूमत कर रही है. करप्शन के नए रेकॉर्ड बना रही है.

हमारे पीएम जिस चीज पर हाथ रख देते हैं. आलू पर हाथ रखा. गायब हो गया. कोयला खदानों की फाइल पर हाथ रख दिया. फाइल गायब हो गई. ऐसे देश के प्रधानमंत्री हैं. ऐसे ही गांव की रहने वाली बुढ़िया ने, जब उसे जानकारी मिली कि जिस पर हाथ रख देते हैं वह गायब होता है, तो वह पीएम के पास गई. मनमोहन सिंह ने पढ़ा तो समझ आया कि बुढ़िया के कमर में दर्द है. पीएम बोले इसे एक लाख दे दो. उसने मना कर दिया. दो लाख दे दो. फिर मना कर दिया. तो डॉक्टर साहब मनमोहन सिंह ने पूछा कि तुम्हें क्या चाहिए. बुढ़िया ने कहा, मैंने सुना है, आप जिस पर हाथ रख देते हैं. वह गायब हो जाता है. तो मेरी पीठ में बहुत दर्द है. उस पर हाथ रख दीजिए, दर्द चला जाएगा.

मैं सीबीआई के लोगों से कहना चाहता हूं. आप प्रधानमंत्री से कुछ कहलवा नहीं सकते. वह कुछ बोलेंगे ही नहीं, तो आप पूछेंगे कैसे.

एक युवराज कहते हैं. कि दादी को लोगों ने मार डाला, पिता को मार डाला. अब मुझे भी मार डालेंगे. अरे मैं कहना चाहता हूं कि क्या हो गया है, जनता का दिल नेतृत्व करने वाला शेरे दिल होना चाहिए, नरेंद्र मोदी की तरह होना चाहिए.

आपके पास एसपीजी सुरक्षा है. अगर आपकी जान को खतरा है, तो देश की सेना की बटालियन अपनी सुरक्षा में लगा लो. मगर जनता के सामने रोने की, उसकी भावना का शोषण करने की कोशिश न करो.

मैं आपको यकीन दिलाना चाहता हूं कि बीजेपी समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना चाहती है.बिहार की जनता आप वचन दीजिए कि 40 की 40 सीटें बीजेपी की झोली में जाएंगी.

Via : Aaj Tak

Posted by on Oct 27 2013. Filed under खबर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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