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घबड़ाए हुए लोग हिसाब मांग रहे हैं

narendra modi

 

प्रधानमंत्री ने ठीक कहा कि जिन्होंने साठ साल कुछ नहीं किया, वे हमसे साठ दिन का हिसाब मांग रहे हैं। कांग्रेस को विपक्ष में रहने की आदत नहीं, सो नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ क्या ली कि शुरू हो गए थे कांग्रेसियों के ताने। पहले इस तरह की बातें सिर्फ कांग्रेस के प्रवक्ताओं से सुनने को मिलती थीं। अब लगता है कि सोनिया गांधी खुद सेनापति बन गई हैं इस नए युद्ध की। जिस महिला ने अपनी सरकार के शासनकाल में मुंह नहीं खोला, वह अब हर दूसरे दिन मोदी सरकार पर वार करती सुनाई देती हैं।

पिछले सप्ताह सेक्यूलरिज्म को खत्म करने का दोष लगाया उन्होंने प्रधानमंत्री पर। केरल में कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार बनने के बाद सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं शुरू हो गई हैं। सच यह है कि दंगे हुए हैं सिर्फ उत्तर प्रदेश में, जहां कानून-व्यवस्था संभालना राज्य सरकार का काम है। पर अखिलेश को बदनाम करने का क्या फायदा, जब सीधा वार हो सकता है उस व्यक्ति पर, जो सांप्रदायिक हिंसा के कारण बदनाम है।

कांग्रेस का साथ न दे रहा होता मीडिया, तो मोदी को चिंता करने की जरूरत न होती। लेकिन उत्तर प्रदेश के दंगों को ऐसे पेश किया है कई अंग्रेजी अखबार और टीवी चैनलों ने, जैसे इनके पीछे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का सीधा हाथ है, सो दोष प्रधानमंत्री के सिर लगता है। जब भी कांग्रेस आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों से ध्यान हटाना चाहती है, तो ‘सेक्यूलरिज्म खतरे में है’ का नारा गूंज उठता है।

इस बार इसलिए यह नारा बुलंद किया जा रहा है, क्योंकि प्रधानमंत्री ने देश की आर्थिक दिशा बदलने की बातें शुरू कर दी हैं। ऐसी बातों से कांग्रेस को खतरा है। नरेंद्र मोदी अगर देश में ऐसी आर्थिक नीतियां लाने में सफल हो जाते हैं, जिनसे संपन्नता आ जाए, तो कांग्रेस का वापस आना नामुमकिन हो जाएगा। कांग्रेस की ‘समाजवादी’ आर्थिक नीतियों ने गरीबों को सार्वजनिक सेवाओं से वंचित रखकर गरीबी हटाने के नाम पर गरीबी कायम रखी है। सरकारी स्कूल रद्दी होंगे, तो गरीबों के बच्चे शिक्षित कैसे बनेंगे? सरकारी अस्पताल खराब होंगे, तो गरीब महिलाओं के नवजात बच्चे जिंदा कैसे रहेंगे? अगर बिजली, पानी, रोजगार न हो, तो गरीबी खत्म होना असंभव है। आजादी की 68वीं सालगिरह पर भारत माता का हाल इतना बुरा है कि बयां करते रोना आता है।

यह लेख लिखने से पहले इत्तफाक से मुझे महाराष्ट्र के कुछ देहाती क्षेत्रों से गुजर कर आना पड़ा। यकीन मानिए कि सौ किलोमीटर लंबे सड़क-मार्ग में मैंने एक भी स्वच्छ गांव नहीं देखा और न ही दिखी एक सुंदर नगरी या इमारत। रास्ते में दिखे सड़ते कूड़े के ढेर, आवारा कुत्ते, बेहाल बच्चे, टूटी सड़कें और कीचड़ और गंदी नालियों में डूबे बाजार। ऐसा है भारत निर्माण, जो कांग्रेस ने शासनकाल में हमको बख्शा है। नरेंद्र मोदी के साथ अगर देश के करोड़ों मतदाताओं ने आशाएं बांध रखी हैं, तो इसलिए कि पहली बार किसी राजनेता ने परिवर्तन का वायदा किया है। मोदी को दिखता है कि जिस रास्ते पर हम चलते आए हैं, वह रास्ता ही गलत था। नई दिशा से बहुत खतरा है उन पुराने राजनेताओं को, जिनकी राजनीतिक सोच पुरानी हो गई है। इसलिए वे हिसाब मांग रहे हैं।

 

लेखिका : तवलीन सिंह

Posted by on Aug 18 2014. Filed under मेरी बात. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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