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क्या इस्लाम आतंक का पर्याय बना गया हे ?

नैरोबी मॉल हमलाः धर्म पूछकर गोली मार रहे थे इस्लामिक  आतंकवादी

नैरोबी मॉल हमलाः धर्म पूछकर गोली मार रहे थे इस्लामिक आतंकवादी

‘कौन थी पैगंबर की मां?.. फिर मारी गोली’

 

नैरोबी के मॉल में खून की होली खेल रहे सोमालियाई अल-शबाब उग्रवादियों के खिलाफ फाइनल ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। शनिवार शाम से अब तक हमलावर 68 लोगों की जान ले चुके हैं, जिनमें सात भारतीय भी हैं। करीब 30 लोग अभी भी आतंकियों के कब्जे में बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि हमलावरों में कुछ महिलाएं भी शामिल हैं। उधर, मौत के पंजे से किसी तरह बचकर आए चश्मदीद जो कहानियां बयां कर रहे हैं, वे दहला देने वाली हैं। उनके मुताबिक मॉल में घुसे आतंकवादी लोगों को धर्म पूछ-पूछकर बेरहमी से मार रहे हैं।अंग्रेजी वेबसाइट ‘डेली मेल’ ने कई चश्मदीदों के दिल दहला देने वाले अनुभव छापे हैं। चश्मदीदों ने बताया कि कैसे हमलावर बेरहमी से लोगों को छांट-छांट कर मार रहे थे। मौत का खौफ ऐसा था कि बचने के लिए कुछ लोग स्टोररूम में जा छिपे, तो कुछ ने खुद को खाली डिब्बों में बंद कर लिया। कुछ तो मरे होने का नाटक करने लगे।

इन चश्मदीदों के मुताबिक आतंकवादी पुरुषों, महिलाओं, बच्चों को लाइन में खड़ा कर उनसे पैगंबर मोहम्मद की मां का नाम या फिर कुरान की आयतें पूछ रहे थे। न बताने पर उन्हें ‘काफिर’ बताकर AK-47 से मारा जा रहा था। एक जश्मदीद जोशुआ हाकिम ने बताया, ‘मैंने कार्ड पर छपे ईसाई नाम पर अंगूठा रखकर हमलावरों को दिखाया। उन्होंने इसके बाद मुझे जाने को कह दिया। इसके बाद एक भारतीय आगे आया और उन्होंने उससे पैगंबर की मां का नाम क्या पूछा। जब वह जवाब नहीं दे सका तो उन्होंने उसे गोली मार दी।’

हमले के चश्मदीद गुजरात के रहने वाले शशि के मुताबिक आतंकियों ने मॉल में मौजूद लोगों से उनके धर्म के बारे में पूछा उसके बाद जिन्होंने खुद को मुस्लिम कहा उन्हें छोड़ दिया और बाकी जो भी मिले उनकी हत्या कर दी। जानकार बता रहे हैं कि अलकायदा से जुड़े संगठन अल शबाब के इस हमले में धर्म के नाम पर पूछकर लोगों को मारना पहले से तय रहा होगा।

21 साल की हना ने उस खौफ की कहानी बयां की। उन्होंने बताया, ‘हम मॉल में एक जगह से दूसरी जगह भाग रहे थे, लेकिन गोलियों की आवाजें लगातार तेज होती जा रही थीं। इसके बाद हमने 60 दूसरे लोगों के साथ खुद को एक बड़े स्टोररूम में बंद कर लिया। हमारे साथ कुछ बच्चे और घायल भी थे। तब हमें लग रहा था कि हमलावर चोर हैं और वे स्टोररूम में नहीं आएंगे।’

न्यू जीलैंड के ग्रेग एल्डस ने बताया कि उन्होंने खुद को एक डिब्बे में बंद कर लिया था। डिब्बे से उन्होंने देखा कि कैसे उनसे महज 60 फीट दूर एक शख्स को गोली से उड़ा दिया गया। रेडियो प्रेजेंटर सादिया अहमद के मुताबिक उन्होंने देखा कि कुछ बंधक उठे और अरबी में कुछ कहने लगे। हमलावरों ने उन्हें जाने दिया। सादिया के मुताबिक उनके एक कलीग ने हमलावरों को बताया कि वह मुस्लिम है और अरबी में कुछ सुनाया। इसके बाद हमलावरों ने उसे भी जाने दिया।

 

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Posted by on Sep 23 2013. Filed under सच. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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