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संघ विचार परिवार

मैं लिख चुका हूँ कि डा. हेडगेवार संघ को एक बिजलीघर की तरह मानते थे, जहाँ श्रेष्ठ और संस्कारवान् कार्यकर्ता तैयार किये जाते हैं। ये ही कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर देश हित में कार्य करते हैं। भारत ही नहीं विदेशों में भी ऐसे एक-दो नहीं सैकड़ों संगठन हैं, जो स्वयंसेवकों द्वारा स्थापित किये गये हैं और सफलता से स्वतंत्रतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। लेकिन इनमें से 37 संगठन ऐसे हैं, जो संघ से सीधे जुड़े हुए हैं अर्थात् जिनको संघ का अंग माना जाता है। वे साल में एक बार संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक में आकर अपना-अपना वृत्त निवेदन करते हैं अर्थात् अपने कार्य की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं और आगे के लिए मार्गदर्शन लेते हैं। वैसे ये सभी संगठन पूरी तरह स्वतंत्र हैं और संघ इनके कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करता। इनमें से कई संगठन तो स्वयं सैकड़ों अन्य संगठनों से मिलकर बने हैं।
इन सभी संगठनों को मिलाकर ‘संघ विचार परिवार’ या संक्षेप में ‘संघ परिवार’ कहा जाता है। लेकिन यह आवश्यक नहीं है कि इनके सभी सदस्य संघ के स्वयंसेवक ही हों। वास्तव में इनके अधिकांश सदस्य कभी भी संघ के स्वयंसेवक नहीं रहे, लेकिन अधिकांश कार्यकर्ता संघ से सम्बंधित रहे हैं। यहाँ मैं इनमें से कुछ प्रमुख संगठनों का संक्षिप्त परिचय दे रहा हूँ-
भारतीय मजदूर संघ – यह भारत में सबसे बड़ा मान्यताप्राप्त मजदूर संघ है। इसकी स्थापना प.पू. गुरुजी के आशीर्वाद से श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी ने की थी। अन्य मजदूर संगठनों के विपरीत भा.म.संघ का नारा है- ‘देशहित में करेंगे काम, काम के लेंगे पूरे दाम’। भा.म.संघ में सैकड़ों छोटे-बड़े मजदूर संघ शामिल हैं। रेलवे, डाकतार, परिवहन आदि कई क्षेत्रों के मजदूर संघों में इसका वर्चस्व है।
भारतीय किसान संघ – इसकी स्थापना भी ठेंगड़ी जी के आशीर्वाद से हुई थी। यह किसानों का सबसे बड़ा मान्यताप्राप्त संघ है।

वनवासी कल्याण आश्रम – इसकी स्थापना बालासाहब देशपांडे द्वारा की गयी थी। यह वनवासी और गिरिवासी क्षेत्रों में कार्य करने वाला सबसे बड़ा समाज सेवी संगठन है। यह हजारों की संख्या में प्रकल्प अर्थात् सेवा प्रोजैक्ट चलाता है, जैसे छात्रावास, अस्पताल, स्कूल आदि। इसके कारण वनवासी क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों की धर्म-परिवर्तन की गतिविधियों पर लगाम लगी है। इसमें हजारों पूर्णकालिक कार्यकर्ता हैं। सभी राज्यों में इसकी शाखायें हैं, जो विभिन्न नामों से कार्य कर रही हैं। इसके लिए संसाधन केवल दान से एकत्र किये जाते हैं।
विश्व हिन्दू परिषद – यह हिन्दू धर्म के सभी पंथों और उप-पंथों का एक मात्र संगठन है। हिन्दू समाज में व्याप्त तमाम बुराइयों को दूर करने के लिए प्रयास रत है। इसके मार्गदर्शक मंडल में हिन्दुओं के सभी सम्प्रदायों के आचार्य और शंकराचार्य भी शामिल हैं। यहाँ तक कि इसमें सिख, जैन, बौद्ध, आर्य समाज तक शामिल हैं। गौहत्या बंदी और श्री राम जन्म भूमि के लिए आन्दोलन इसी ने चलाया था।
अ.भा. विद्यार्थी परिषद – यह छात्रों का सबसे बड़ा मान्यता प्राप्त संगठन है। अन्य छात्र संगठन जहाँ उच्छृंखलता के कारण बदनाम हैं, वहीं विद्यार्थी परिषद इस बुराई से मुक्त है। इसका मूल मंत्र है- ज्ञान, शील, एकता।
भारतीय जनता पार्टी – पहले इसका नाम भारतीय जनसंघ था, जिसका विलय जनता पार्टी में कर दिया गया। उसके टूट जाने पर यह भा.ज.पा. के नाम से कार्यरत है। यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा राजनैतिक दल है। संघ ने ���पने अनेक श्र����ष्ठ कार्यकर्ता इसको दिये हैं।
राष्ट्र सेविका समिति – इसे संघ की महिला शाखा कहा जाता है। इसकी भी दैनिक शाखायें हजारों स्थानों पर लगती हैं। महिलायें ही इसकी समस्त पदाधिकारी हैं।
राष्ट्रीय सिख संगत – यह राष्ट्रवादी विचारधारा वाले सिख बंधुओं का संगठन है, जो संघ से प्रेरणा लेता है। इसकी सभी राज्यों में शाखायें हैं। हजारों लाखों केशधारी और सहजधारी सिख बंधु इसके सदस्य हैं।
राष्ट्रीय मुस्लिम सम्मेलन – यह राष्ट्रवादी विचारधारा वाले मुस्लिम बंधुओं का संगठन है, जिसकी स्थापना संघ के वरिष्ठ प्रचारक मा. इन्दे्रश जी के आशीर्वाद से हुई है। इस संगठन में लाखों मुस्लिम बंधु शामिल हैं और उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।
सेवा भारती – यह भी समाज सेवा करने वाला संगठन है, जो मुख्यतः शहरी क्षेत्रों में कार्यरत है। इसके भी हजारों प्रकल्प विभिन्न स्थानों में चल रहे हैं। अनेक संगठन इससे जुड़े हुए हैं।
भारत विकास परिषद – यह एक ऐसा संगठन है, जिसके सदस्य प्रायः अच्छी आर्थिक स्थिति वाले व्यवसायी और स्वरोजगार रत व्यक्ति हैं। वे समय तो अधिक नहीं दे पाते, लेकिन आर्थिक सहायता बहुत करते हैं और उस सहायता का उपयोग अनेक सेवा प्रकल्प चलाने में किया जाता है। इसे काले अंग्रेजों द्वारा चलाये जाने वाले लायन्स क्लब, रोटरी क्लब आदि का जबाब माना जा सकता है।
भारतीय शिक्षा समिति – यह हजारों की संख्या में शिशु मन्दिर, विद्या मन्दिर आदि विद्यालय चलाने वाला संसार का सबसे बड़ा गैर-सरकारी संगठन है। यह विभिन्न राज्यों में अनेक नामों से कार्यरत है।
इनके अतिरिक्त और भी दर्जनों संगठन हैं, जैसे विश्व संवाद केन्द्र, संस्कार भारती, प्रज्ञा भारती, अ.भा. शिक्षण मंडल, अ.भा. अधिवक्ता परिषद, इंडियन मेडिकोज आॅर्गनाइजेशन, उपभोक्ता परिषद, सहकार भारती, विज्ञान भारती, माधव नेत्र पेढ़ी आदि, जो विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं।

 

लेखक विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’

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Posted by on May 5 2012. Filed under सच, हिन्दुत्व. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

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