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जागो हिन्दु ! जागो

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मित्रो ये कैसी विडंबना है की आज हमारी पाकिस्तान में रहने वाली बहनों पर सिर्फ इसलिए अत्याचार हो रहे है क्योकि वो हिन्दू है .. अभी तक जबरन धर्म परिवर्तन , सामूहिक बलात्कार , अपहरण और बलात्कार के बाद नृशंस हत्याओ की घटनाओ पर पाकिस्तानी जिहादी सरकार द्वारा पर्दा डाला जाता रहा है पर जब आज रिंकल नाम की इस हिन्दू लड़की ने अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई है तो पाकिस्तानी कोर्ट ही ऐसा फैसला सुना रही है की न्यायालय का नाम परिवर्तित कर अन्यायालय कर दिया जाये तो कुछ गलत नहीं होगा ….
यह पुनः उन लडकियो को उन्ही को सौंपने को कह रही है जिन्होंने उनके माँ बाप के सामने सामूहिक बलात्कार किया और जबरन उठा के ले गए .. जन्हा एक ओर वो इन्हें उन्ही शैतानो को सौंप रही है जिन्होंने इनकी जिंदगी को नरक और उनको चलती फिरती लाश बना के रख दिया .. वही दूसरी ओर उन लडकियो के लाख न्यायालय परिसर में ही रो रो के और चीख चीख के अपने माता पिता से मिलने के करुण अनुरोध को साफ़ इंकार कर कर रही है … उसका तर्क है की इन लडकियो को उनके माता पिता से नहीं मिलने दिया जा सकता है क्योकि उनके द्वारा कलमा पढ़ के धर्म परिवर्तन किया जा चूका है और अब वो हिन्दू (काफ़िर) नहीं मुस्लिम है .. ये कैसा न्याय है ? वो मुस्लिम उन लडकियो को जो उनके ही खिलाफ कोर्ट तक गयी .. दोबारा अपने हाथो में पाकर क्या करेंगे ? कभी विचार किया है आपने ? वही उनके माँ बाप अपनी बेटियों की शक्लें इसलिए नहीं देख पाएंगे क्योकि वो हिन्दू है और उन्होंने अपनी बेटिया मुस्लिमो के सम्भोग के लिए ही पैदा की थी … उनका अपराध इतना है की उन्होंने हिन्दू घर में जन्म लिया और अल्पसंख्यक होने के बावजूद हर प्रकार के अमानवीय अत्याचारों और दुर्व्यवहारों के बावजूद भी अपना धर्म नहीं छोड़ा और द्रढ़ता से अड़े रहे ..
उनका अपराध सिर्फ इतना है की उन्होंने ये सोचा की आज भी हिन्दुस्थान में शिवाजी महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान की औलादे बसती है जो उन पर होने वाले अत्याचारों का प्रतिकार अवश्य लेगी .. लेकिन काश वो एक बार इस मुगलिस्तान में आके देख पाते की अब यंहा पर इन्हें कोई नहीं जानता .. वो भले मुट्ठी भर होके संघर्ष कर रहे हो लेकिन यंहा पर अब कोई हिन्दू शेष नहीं है बल्कि उनका स्थान जयचंद की कायर , नपुंसक और अत्यंत असंवेदनशील नाजायज औलादों धर्मनिरपेक्षो ( नौटंकीबाजों ) ने ले लिया है … जिनके लिए धर्मनिरपेक्ष शब्द की परिभाषा ही बदल के रख दी है .. उनके लिए इस शब्द का अर्थ न्याय और सर्व धर्म समभाव नहीं बल्कि दुसरे संप्रदाय की खुसी के लिए अपनी गर्दने झुका के जूते खाना और इसके बाद उन्हें कटवाना रह गया है ..
वो इतने बड़े धर्मनिरपेक्ष है की उनके लिए दुसरे संप्रदाय को खुश करना इतना आवश्यक हो गया है की चाहे उनके परिवार या घर में ही उन्हें प्रताड़ित किया जाये लेकिन वो आवाज नहीं उठाएंगे क्योकि उनके ऊपर सांप्रदायिक होने का धब्बा न लग जाये … क्योकि आज अपने आपको गर्व से हिन्दू कहना मात्र ही आपको सांप्रदायिक बना देता है .. वही अगर एक मुस्लिम या ईसाई खुद को फख्र से मुस्लिम या ईसाई कहता है तो वो केवल मुस्लिम या इसाई ही रहता है और उसकी प्रसंशा की जाती है की वो अपने धर्म के लिए कितना संलग्न है … हमारी ऐसी मानसिकता के कारन ही आज हर हिन्दू अपने आपको हिन्दू कहना शर्म समझता है और धर्मनिरपेक्ष ( कथित नौतान्किबाज़ एक आडम्बर मात्र ) कहना गर्व की बात समझता है .. अगर एक मुस्लिम के घर कोई बचा जन्म लेता है तो वो उसे मुस्लिम बनता है अगर इसाई के घर जन्म लेता है तो वो उसे इसाई बनाता है वही अगर एक हिन्दू के घर कोई बच्चा जन्म लेता है तो वो उसे गीता रामायण या महाभारत की शिक्षा न देकर धर्मनिरपेक्ष बनाता है …
तो हे विदेशी तुच्छ काफ़िर हिन्दुओ तुम निहायत ही मुर्ख हो जो हमसे सहायता की आशा रखते हो अरे हम तो खुद ही बहुसंख्यक ( एक भ्रम ) होके अपनी बहु बेटियों की रक्षा नहीं कर सकते तो तुम्हारी क्या खाक करेंगे .. तुम जिल्लत की मौत मरके इत्मिनान से नरक में जाओ .. क्योकि अगर हमारे सामने ये स्तिथि आएगी जब हम अल्पसंख्यक होंगे ( जो की हमारा अकाट्य सत्य भविष्य है ) तो हम अपना धर्म छोड़ के परिवर्तन कर लेंगे क्योकि हम धर्मनिरपेक्ष है तुम्हारी तरह सांप्रदायिक नहीं .. हम केवल मानवता या इंसानियत के नाम पर भी तुम्हारे लिए नहीं बोल सकते क्योकि तुम सब साले हिन्दू हो और हमारी संवेदनशीलता साम्प्रदायिको (हिन्दुओ ) के लिए नहीं है …तो हमें क्षमा करें .. ये शिवाजी जैसे लोग कौन है हम नहीं जानते .. इनका अखंड भारत का स्वप्न क्या था उसके विषय में भी हम नहीं जानते .. हम तो केवल शिखंडी को जानते है क्यों की हम उसी की संतति है और उसी के गुणों के अधिकारी और प्रचारक है …
शर्म खाओ हिन्दुओ .. अब भी अगर किसी व्यक्तिविशेष जो हिन्दू ( सांप्रदायिक ) या धर्मनिरपेक्ष ( नपुंसक नौटंकीबाज़ ) न होकर तनिक इंसान ही हो तो इंसानियत के नाम पर ही इन निर्दोष और पागल गर्व से अपने आपको हिन्दू कहने वाले पागलो के लिए आवाज उठा सके तो महान दया होगी .. और जो कुछ सच्चे हिन्दू मुझ ‘आर्य पंडित ‘ की तरह (जिन्हें ये धर्मनिरपेक्ष पागल और साम्प्रदायिकता फ़ैलाने वाले कीड़े कहती है ) ही विचारधारा रखते हो मेरे इस आर्टिकल को व्यापक रूप से लाइक टैग और शेयर करें जिससे की प्रत्येक हिन्दू ( सांप्रदायिक – यंहा हिन्दुस्थान में भी हिन्दू अल्पसंख्यक ही है क्यों की वो सांप्रदायिक है और बाकि हिन्दू नहीं धर्मनिरपेक्ष है ) का खून अपने भाई बहनों के लिए खौल सके …
जय श्री राम , जय हिंदुत्व , जय अखंड हिन्दुराष्ट्र भारत …
source-save hindu

Short URL: http://jayhind.co.in/?p=974

Posted by on Jul 29 2012. Filed under खबर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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