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लड़कियों की इस आदत के पीछे है एक गहरा राज़, जानना चाहेंगे आप ?

Scarves Have Become An Important Accessory For Girls

कभी पर्दा प्रथा और बुर्के का पुरजोर विरोध करने वाली लड़कियां आज स्कार्फ के बिना घर से बाहर कदम नहीं रखती। लड़कियां सिर्फ सर ढंकने या फैशन के लिए स्कार्फ का उपयोग नहीं करती, बल्कि पूरा चेहरा इससे कवर करके चलती हैं। 

रायपुर में सिमी के आतंकियों के पकड़े जाने के बाद पुलिस और प्रशासन ने चेकिंग दुरुस्त कर दी है। लड़कियों को स्कार्फ़ न बांधने की हिदायत दी जा रही है। नक्सल प्रभावित होने के कारण पहले भी राज्य में स्कार्फ़ के विरुद्ध अभियान चलाये गए हैं। गाडियां रोकी, चालान काटे पर इसका कोई असर युवतियों पर नजऱ नहीं आया। पुलिस चेक पॉइंट के पहले स्कार्फ निकालकर बाद में वापस बांध लेती हैं लड़कियां।

छत्तीसगढ़ में लड़कियों का स्कार्फ प्रेम इस कदर है कि इस पर सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी कई जोक्स आये दिन वायरल हो जाते हैं। ‘यार अपने यहां तो स्कार्फ से लड़कियों को पहचानना पड़ता है, चेहरा तो किसी का दिखता ही नहीं’, जैसे जुमले अक्सर लड़कों कि जुबां पर होते हैं।

पर इन सब बातों से अलग, लड़कियों के अपने कई कारण हैं स्कार्फ बांधने के। कुछ लड़कियां तो यहां तक कहती हैं कि भले ही हम मोबाइल रखना भूल जाएं पर स्कार्फ के बिना कहीं बाहर नहीं जाती। वहीं कुछ लड़कियां तो अपने आउट फिट से मैचिंग स्कार्फ भी रखने लगी हैं।

 

नाम न बताने की शर्त पर रायपुर की एक स्टूडेंट ने बताया कि पहले बॉयफ्रेंड के साथ कहीं भी जाने में डर लगता था, लगता था कि कोई जान पहचान का या कोई रिश्तेदार मिल गए तो क्या सोचेंगे मेरे बारे में। पर अब स्कार्फ से चेहरा बंधा रहता है तो मैं उसके साथ कहीं भी आसानी चली जाती हूं और पहचाने जाने का डर भी नहीं होता।

 

रायपुर मेडिकल कॉलेज की स्टूडेंट श्रद्धा का कहना है कि वो रात में भी कहीं भी जाती है तो अपना फेस कवर करके जाती है। इससे अनसेफ इलाकों से गुजरने में भी डर नहीं लगता। मैं अक्सर टू व्हीलर से चलती हूं ऐसे में बिना स्कार्फ के कहीं भी जाना अटपटा लगता है। धूल मिट्टी के साथ साथ सुन बर्न की टेंशन भी नहीं रहती।

 

लड़कों के बेवजह कमेंट्स नहीं सुनना पड़ता
साइंस कॉलेज में पढऩे वाली निधि का कहना है कि फेस ओपन रहता है तो अक्सर लड़के कुछ न कुछ बेहूदा कमेंट करते थे। जिससे पूरा मूड स्पोइल हो जाता था।स्कार्फ बंधा रहने से ऐसे कमेंट्स सुनने को नहीं मिलते। फालतू टेंशन से मुक्ति मिल जाती है स्कार्फ से।

 

कुछ लड़कियों ने माना कि इससे घुटन होती है पर सन-बर्न और पोलुशन से बचने का ये बेस्ट आप्शन है। वहीं कई लड़कियों ने यह भी कहा कि पर्सनली फेस कवर करने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है पर सभी बांधते हैं इसलिए वो भी बंधती है। ताकि ऑड न लगे।

 

वहीं लड़कियों के फेस कवर करने पर लड़कों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये। एक का कहना था कि अच्छा है जो लड़कियां स्कार्फ बांधती हैं। एटलीस्ट हमें टेंशन नहीं होती कि कोई हमारी गर्ल फ्रेंड या बहन को घूर रहा है।

 

वहीं रायपुर के एक मनचले लड़के ने कहा कि स्कार्फ़ के चक्कर में हमें संभल कर रहना पड़ता है। पता चला कभी किसी स्कार्फ वाली पे कमेंट कर दिया और वो कजिन निकल गई तो घर में जो बैंड बजेगी उससे कोई बचा नहीं पायेगा।

 

Source : bhaskar
Posted by on Nov 27 2013. Filed under आधी आबादी. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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