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अब हीरो दिया मेरे भारत ने

narendra-modi

 

देशप्रम और राष्ट्रियता से लबालब फिल्में बनाने के लिए मशहूर निर्देशक और अभिनेता मनोज कुमार को उम्मीद है कि नरेंद्र मोदी देश के लिए सच्चे नायक साबित होंगे।

मोदी से जुड़ी यादें हमसे साझा कर रहे हैं भारत कुमार।

1984, मे चुनाव प्रचार के लिए अहमदाबाद गया था। उसी वक्त नरेंद्र भाई मोदी से मुलाकात हुई। यूं तो किसी इंसान को जानने-समझने के लिए आधे घंटे का वक्त काफी होता है और मैं दो दिन वहां था। इस बीच उनसे अच्छी- खासी बातचीत हुई। मैं नहीं जानता, उस वक्त पार्टी में उनका ओहदा क्या था, लेकिन जिसे देखिए, वही नरेंद्र भाई, नरेंद्र भाई की पुकार लगाता रहता। कार्यकर्ताओं के बीच वे खासे लोकिप्रिय थे। वही लोकिप्रियता अब भी बरकरार है तो इसमें ताज्जुब की कोई बात नहीं। दरअसल, मोदी जी कार्यकर्ताओं से इतने अपनेपन के साथ मिलते हैं कि हर कोई उन पर फिदा हो जाता है। हां, मेरी- उनकी इसिलए भी जम गई, क्योंकि मेरे झोले में होम्योपैथिक दवाओं का खजाना भरा था। भाषण देते हुए किसी का गला बैठ जाए तो मैं एक जादू की पुड़िया निकालकर बढ़ा देता — “इसे खा लीजिए! गला ठीक हो जाएगा।’

वही नरेंद्र मोदी अब देश की बागडोर संभालने जा रहे हैं तो उनसे उम्मीदें होना स्वाभाविक है। न सिर्फ मुझे बल्कि पूरे मुल्क की जनता को आशा है कि कुछ नया होगा, बेहतर होगा। और देखिए न, वे कितने निर्भीक होकर, हौसले और विशवास के साथ, निडर भाव से चुनाव मैदान में उतरे और विजयी हुए हैं। अपनी बात खुल्लम-खुल्ला कहते हैं, कोई हिचक नहीं, कहीं- किसी तरह का संदेह नहीं है। यही दृढ़ता भरोसा बढ़ाती है।

हां, तो मैं उन दिनों की बात बता रहा था। एक जनसभा में मैं और नरेंद्र जी इकट्ठा थे। वहां एक सज्जन भाषण दे रहे थे। वे ऐसी बातें कह रहे थे, जो वल्गर थीं। हालांकि उन्हें सुनकर जनता हंस रही थी, लेकिन नरेंद्र जी को ये सब कुछ अच्छा नहीं लगा। उन्होंने मुझसे कहा — “मनोज भाई। इन्हें चुप कराइए। हमें सस्ती लोकप्रियता नहीं चाहिए।’

आज जब वो लम्हा याद करता हूं तो मन खुशी से भर उठता है। अगर मजबूत आधार न हो तो क्षिणक लोकिपर्यता वैसे ही नष्ट हो जाती है, जैसे मिली होती है। ये बात मोदी साहब बहुत पहले से जानते हैं। आजकल टेलीविजन पर इमेज बिल्डिंग के तमाम टोटके आजमाए जाते हैं, लेकिन नरेंद्र जी को ऐसे किसी प्रचार की जरूरत नहीं है। वे जमीन से जुड़े नेता हैं, इसिलए कार्यकर्ता को भी उनके कहे और किए पर भरोसा है। पिछले दिनों जब भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिला, वे मां के पास आशीर्वाद लेने गए। इसके बाद पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक के समय संसद के आगे माथा झुकाया और अपनी पार्टी के बारे में कहा कि भाजपा मेरी मां है। ऐसी भावुकता और समपर्ण हमने पहले कभी नहीं देखा। इतिहास में ऐसे अवसर नहीं मिलते। नरेंद्र मोदी उस व्यक्ति की तरह हैं, जो पुरानी कहानियों में ही पाया जाता है। सत्ता, स्वाभिमानी और समझदार व्यक्ति। मुझे इस बात का अभिमान है कि वे भारत के नागिरक हैं, नेता हैं।
हमारे देश ने दुनिया को जीरो (शून्य) दिया था, जिससे गिणत को आधार मिला और अब भारत की मिट्टी ने एक नया हीरो दिया है, जो संसार के सामने देश का गौरव बढ़ाएगा। मैं उनकी शख्सियत पर नज़र डालता हूं तो पाता हूं कि उनमें रामायण के राम जैसे गुण हैं और श्रीकृष्ण सरीखी प्रतिभा है। जैसे राम ने वनवास काटा, वैसे ही वे भी हिमालय की गुफाओं में रहे, चाय की दुकान चलाई और फिर कृष्ण जैसे ही कमर्योगी बने। कितने दृढ़ हैं वे कि सीमा पर तैनात सैनिक की तरह हर मुश्किल से लगातार, बिना थके लड़ते रहे और प्रधानमंत्री की गद्दी पर आसीन हो रहे हैं।

व्यक्तित्व

आरोप श्रीराम और श्रीकृष्ण पर भी लगे। गांधीजी को प्राणों की आहुति देनी पड़ी। मोदी पर भी आरोप लगे हैं, लेकिन इनसे कोई नहीं बचा है। मोदी निश्छल हैं और ये अहम बात है।

फिल्में-

नरेंद्र मोदी सांस्कृतिक व्यक्ति हैं। विश्वास है कि वे साफ-सुथरी, पारिवारिक फिल्मों को बढ़ावा देंगे और फिल्मकारों के हितों के लिए काम करेंगे।

पॉलिसी

भारत जैसे विविधतापूर्ण देश की जनता के लिए कैसी फिल्में बनें, इसको लेकर सांस्कृतिक पॉलिसी होनी चाहिए, जल्द ही लिखेंगे पीएम को पत्र।

16 मई 2014। चुनाव नतीजे आने का िदन। हर किसी की नज़र वोटों की िगनती पर थी। जैसे ही भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिला, मोदी सीधे मां से मिलने पहुंचे व आशीर्वाद लिया। जीत के बाद संसद भवन पहुंचे तो नतमस्तक हो गए, ऐसी भावुकता और समर्पण मैंने पहले कहीं नहीं देखीं।

 

Posted by on May 25 2014. Filed under खबर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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