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ये डॉक्टर करना चाहती थी ‘गरीबी’ का इलाज, मजबूत इरादों से किया था IAS टॉप

Shena Agarwal Ias Topper 1

इस लड़की का नाम है शेना अग्रवाल। शेना के लिए आइएएस अफसर बनना सिर्फ एक काम या पढ़ाई नहीं थी। यूं तो लोग अपना करियर बनाने के लिए बहुत से काम करते हैं लेकिन शेना के लिए आइएएस अफसर बनना एक जुनून था। जब कोई उनसे एक आइएएस के रूप में उनके भविष्य की बात करता था तो उनके हाव-भाव बदल जाते थे और फिर नरम आवाज की ये लड़की बन जाती एक कड़क आवाज वाली आइएएस ऑफिसर।

शेना का सारा जुनून उनकी आंखों में चमकने लगता और फिर वो बात करने लगती थीं एक आइएएस अफसर की तरह। जब उन्होंने टॉप किया था उस समय बात करने पर शेना ने कहा, “मैं मैदान में उतरकर काम शुरू करने के लिए अब और इंतजार नहीं कर सकती।”

 

यूपीएससी 2011 के नतीजों में देशभर में टॉप करने वालीं हरियाणा की शेना अग्रवाल ने एम्स से डॉक्टर की पढ़ाई की लेकिन मरीजों की सेवा करते उसे महसूस हुआ कि देश में गरीबी से बड़ी कोई बीमारी नहीं है और उसका इलाज करने के लिए यूपीएससी बेहतर प्लेटफॉर्म बन सकता है। उन्‍होंने इस सफलता के मूलमंत्र के बारे में कहा, ‘जो करो दिल से करो और लगन से करो।’10वीं की पढ़ाई हरियाणा से करने बाद उच्च शिक्षा के लिए जब शेना दिल्ली पहुंची तो वहां भी टॉप करने की आदत नहीं छोड़ी और एआईपीएमटी में टॉप किया।

 

शेना अग्रवाल ने कहा कि आईएएस बनने के लिए सबसे पहले आपको दृढ़ निश्चय करना चाहिए।  एक बार आपने फैसला कर लिया तो फिर इस पर दोबारा मत सोचिए बस पढ़ाई में जुट जाइये। सबसे ज्यादा जरूरी सेल्फ स्टडी है, आप कोचिंग भी ले सकते हैं लेकिन निरंतर सेल्फ स्टडी जरूरी है। अंतिम एक दो महीनों में पढ़कर भी परीक्षा पास नहीं की जा सकती। इस परीक्षा के लिए एक निश्चित शेड्यूल के साथ लगातार पढ़ाई जरूरी है। सफलता को कोई एक खास मंत्रा नहीं है। बस दृढ़ निश्चय कीजिए और जुट जाइये। लेकिन पढ़ाई को खुद पर बोझ नहीं बनाना चाहिए, पढ़ाई के साथ मस्ती भी कीजिए।Shena Agarwal Ias Topper

2010 की परीक्षा में शेना ने 305वीं रैंक हासिल की थी और आईआरएस ज्वाइन किया था। शेना ने साल 2004 की सीबीएसई पीएमटी परीक्षा में भी पूरे देश में टॉप किया था। शेना युमनानगर के डॉ. सीके अग्रवाल और श्रीमती पिंकी अग्रवाल की बेटी हैं। शेना ने यमुनागर के ही संत निश्चल सिंह पब्लिक स्कूल से 10वीं की परीक्षा 95 प्रतिशत अंकों और 12वीं की परीक्षा दयानंद पब्लिक स्कूल नाभा (पंजाब) से 92 प्रतिशत अंकों के साथ पास की थी।

इनके आइएएस बनने की शुरूआत तब हुई जब वे एम्स में एमबीबीएस करने के बाद इंटर्नशिप कर रही थीं। आइएएस की परीक्षा देने का इरादा भी इसी से किया जब वे एक गांव में इंटर्नशिप कर रही थीं। गांव के लोगों का इलाज करते हुए उन्हें देश में फैली एक और बीमारी का पता चला जिसका तुरंत इलाज करना जरूरी था। यह बीमारी थी गरीबी। लेकिन शेना को यह पता था कि जब तक वे किसी बड़े प्रशासनिक पद पर नहीं होंगी, तब तक वो इस बीमारी का इलाज नहीं कर सकती हैं। तब शेना ने आइएएस की परीक्षा देने का दृढ़ निश्चय किया और अपने इस इरादे में कामयाब भी हो गईं।

सबसे पहले उन्होंने इंटर्नशिप करते हुए ही 2009 में पहली बार परीक्षा दी थी लेकिन उसमें वे पहला राउंड भी पार नहीं कर सकीं। अपनी सक्सेस स्टोरी बताते समय जब उन्होंने यह बताई तो उनके चेहरे पर कोई परेशानी नहीं बल्कि एक प्यारी सी मुस्कान थी। हंसते हुए ही वो बोली थीं कि यह परीक्षा महज एक अभ्यास थी। इस परीक्षा के जरिए शेना परीक्षा के बारे में एक आइडिया लगाना चाहती थीं कि आखिर उन्हें कितनी मेहनत करने की जरूरत है। 2010 में अपनी दूसरी कोशिश में उन्हें भारतीय राजस्व सेवा (आइआरएस) में प्रवेश मिल गया।

अब बारी थी अपने तीसरे प्रयास की जो मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ। इस प्रयास में तो शेना ने वह कारनामा कर डाला जो काबिले तारीफ था। 2011 में उन्होंने सिविल सेवा की परीक्षा पास की। इस परीक्षा में शेना ने टॉप किया था। जब शेना से बात की गई तो वे बोलीं कि उन्हें सफल होने की पूरी उम्मीद थी लेकिन यह नहीं सोचा था कि परीक्षा में टॉप कर देंगी। शेना को अपने स्कूल के दिनों से ही टॉप करने की आदत थी। शेना ने 2004 में सीबीएसई की प्री-मेडिकल परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। एम्स की प्रवेश परीक्षा में भी 19 वें स्थान पर थीं।

जब शेना के आइएएस की परीक्षा में टॉप करने के बारे में उनकी दादी ने सुना तो उन्हें खुशी जरूर हुई लेकिन शेना की तरह उन्हें इस सफलता पर कोई हैरानी नहीं हुई। उन्हें पता था कि उनकी पोती शेना के लिए यह करना कोई बड़ी बात नहीं है।

अपनी इस सफलता पर शेना ने यह भी कहा था कि इससे हरियाणा के उन लोगों को एक अच्छा मैसेज जाएगा जो लड़कियों को गर्भ में ही मार देते हैं। शेना बोलीं कि इससे लोगों को इस बात का पता चलेगा कि लड़कियां भी हर वो काम कर सकती हैं जो लड़के कर सकते हैं।

शेना अग्रवाल का जन्म 3 अप्रैल 1987 को रोहतक शहर में हुआ था। उन्होंने अपनी नर्सरी की पढ़ाई रोहतक से ही की। शेना को घर में प्यार से बुलबुल बुलाते हैं। डा. अग्रवाल का परिवार साल 1991 में रोहतक से यमुनानगर में आकर बस गया। जहां शेना ने अपनी 10वीं क्लास तक की पढ़ाई पूरी की।

शेना को स्वीमिंग और बैडमिंटन खेलना ज्यादा पसंद हैं। अभी भी जब उन्हें फुर्सत मिलती है तो वह बैडमिंटन बैट उठा लेती हैं। शेना को ए.आर रहमान के गाने सुनना बहुत पसंद है। मूड फ्रेश करने के लिए वो रहमान के गाने सुनती हैं।

 

This year’s IAS topper Shena Agrawal said today she never kept note of the number of hours she spent on her studies while preparing for the Civil Services examination, and in course of her preparations she got full cooperation from her family.

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अंकिता सिंह

Web Title : 
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Posted by on Dec 21 2013. Filed under आधी आबादी. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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