Donation (non-profit website maintenance)

Live Indian Tv Channels

सरकार 16 साल के बच्चों के ‘संबंध’ वैध करने जा रही है; आप कुछ कहेंगे नहीं?

let's talk sex

सरकार 16 साल के बच्चों के ‘संबंध’ वैध करने जा रही है; आप कुछ कहेंगे नहीं?

’16 क्या, सेक्स संबंध तो 14 वर्ष के बच्चों के मान्य होने चाहिए क्योंकि वे अब ‘सहमति’ और शोषण में अंतर बखूबी समझते हैं।’
                      – केंद्रीय कानून मंत्रालय का नोट 6 मार्च 2013 को।
‘हर दूसरी भारतीय लड़की की कम उम्र में शादी की जा रही है। 470 बच्चियां यहां 18 से कम में ही व्याही जा रही हैं जिससे उनकी पढ़ाई, सेहत और भविष्य बिगड़ रहा है।’
              – 08 मार्च 2013 को संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या फंड की रिपोर्ट
बच्चों को 14 साल की उम्र में ही सेक्स संबंध बना लेने चाहिए? 16 वर्ष तो निश्चित ही कर देना चाहिए। ‘चाहिए’, ऐसे सीधे- सीधे तो सरकार ने नहीं कहा है। किन्तु आशय यही है। होगा यही। और सरकार की ऐसी अचानक चिंता बच्चियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही सामने आई है। दो दिन पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में इस पर फैसला होना था। नहीं हो सका। क्योंकि तीन मंत्रालयों के विचार अलग-अलग थे।
गृह मंत्रालय का सोचना है कि लड़के-लड़की के बीच सहमति से सेक्स संबंध की उम्र घटाकर 16 वर्ष कर देनी चाहिए।  इस पर कानून मंत्रालय का कहना था कि 14 वर्ष बेहतर है। और महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय इन सबके विरोध में था। वह इसे मौजूदा 18 वर्ष ही रखने पर आमादा है।
हमारे बच्चों पर लिया जा रहा है यह फैसला। हमें किसी ने पूछा ही नहीं। हमारे द्वारा चुन कर भेजे गए सांसदों को बताया ही नहीं। देश में कोई बहस होने ही नहीं दी गई। महिलाओं की गरिमा न गिरे, इस पर कठोर कानून बनाने के गंभीर वादे को समय पर लागू न कर पाई यह सरकार एक अध्यादेश लाई थी। बस उसी अध्यादेश को कानून बनाने की जल्दी में आनन-फानन में कुछ भी फैसले लिए जा रहे हैं। अपराधियों के विरुद्ध तो मौत की सज़ा देने से बुरी तरह डर गई यह सरकार हमारे बच्चों को कितनी छोटी से छोटी उम्र में यौन संबंध बनाने की छूट देनी चाहिए,  इस पर होड़ मची हुई है केंद्रीय मंत्रियों में!
ऐसा क्यों? क्योंकि वे जानते हैं, कुछ नहीं होता। कुछ नहीं होगा। कोई नहीं पूछेगा। जब इतनी बड़ी युवा क्रांति के बाद किसी यौन अपराधी का कुछ नहीं बिगड़ा। इतनी चीत्कार के बाद भी महिला गरिमा गिराने की अलग-अलग ‘कैटेगरी’ रखी गईं। इतना नैतिक दबाव होने के बावजूद मृत्युदंड को केवल ‘जघन्यतम’ यानी ‘रेअरेस्ट ऑफ द रेअर’ अपराध में ही रखने की जि़द पर अड़ी रही यह सरकार। तो क्या डर इसे किसी आम भारतीय नागरिक का कि वह क्या सोचेगा? प्रश्न महिलाओं की गरिमा गिराने वाले नृशंस अपराधियों को थरथर कंपकंपा सके, ऐसा सख्त कानून लाने का था।
सारी बहस की दिशा पहले तो बदल दी स्वयं जस्टिस वर्मा आयोग ने। वह अपनी मूल बात से भटक कर न जाने किसकिस विषय में चला गया। प्रश्न उस जघन्यतम पाप करने वाले को लेकर उठा था। बालिग उम्र की सीमा से वह कुछ महीने कम था। दावा तो यही था। तो वह मज़े में ‘उम्र कम है’ कह कर छूट रहा था। ऐसा न हो, इस पर उपाय चाहा था। तो जस्टिस वर्मा आयोग न जाने विश्व के किन-किन वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, मनोविश्लेषकों के माध्यम से यह समझता रहा कि कच्ची उम्र के अपराधी बालिग होते ही अपने पुराने अपराधों से स्वयं असहमत हो जाते हैं। इसलिए उन्हें सज़ा नहीं मिलनी चाहिए!
विदेशों में संवेदनाओं का महत्व शून्य है। वैल्यू, फैमिली वैल्यू सिस्टम तो है ही नहीं। वहां भावनाओं का सम्मान नहीं। ऐसी व्यवस्था में उपजे विचारों को हमारे भारतीय समाज पर थोपना कितना सही है? विशेषकर जबकि सारा राष्ट्र भावनाओं से उद्वेलित हो, क्रुद्ध हो, रो रहा हो?
तो कहां बात जघन्य अपराधियों की उम्र सीमा घटाने की चल रही थी,  उसकी जगह बात बच्चों के बीच संबंधों की उम्र सीमा घटाने पर होने लगी। देखिए, क्यों कह रहे हैं मंत्रालय ऐसा।
गृह मंत्रालय लाया है ऐसा प्रस्ताव। उसका कहना है वह लड़कियों को बचाना चाहता है, इसलिए उम्र 16 करना चाहता है। किससे बचाना चाहता है? वह चिंतित है कि कुछ लड़के -लड़कियां अपने माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध जीवन साथी चुन लेते हैं। विवाह के पूर्व उनमें संबंध स्थापित हो जाते/सकते हैं। ऐसे में माता-पिता उन पर यौन शोषण या दुष्कर्म के आरोप लगा देते/सकते हैं। अभी कानूनन ऐसा माना भी जाएगा, चूंकि सहमति के साथ संबंध की उम्र 18 ही है। फिर पुलिस परेशान करेगी। ज्या़दती करेगी। अत्याचार।
यानी, माता-पिता से बचाने के लिए घटाई जा रही है संबंधों की उम्र!
कानून मंत्रालय को लागू करने हैं ये कानून। वह एक कदम और आगे है। वह चाहता है यह उम्र 14 ही कर दी जाए। तर्क   नई पीढ़ी बखूबी समझती है कि सहमति से संबंध क्या हैं और बलपूर्वक किया यौन अपराध क्या। यही नहीं, कई महिला संगठन भी उम्र घटाने की बात कर चुके हैं। उनका हवाला भी दिया जा रहा है। टीन एज सेक्स का अपराधीकरण इससे रोका जा सकेगा  यह कहा जा रहा है।
उधर, महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय इसका विरोधी है। महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी उसकी है। उनकी मंत्री कृष्णा तीरथ ने कहा है कि इससे कम उम्र की लड़कियों का शोषण बढ़ेगा। बच्चों को शिकार बनाने का निमंत्रण है ऐसा कदम। विशेषकर तब, जबकि शादी की उम्र तो 18 वर्ष ही वैध है।
सरकारें जो चाहे, तय कर देती हैं/रही हैं। किन्तु क्या वह, बगै़र किसी राष्ट्रीय बहस के, हमारे बच्चों के नितांत निजी और परिवार-समाज की संरचना से जुड़े इतने संवेदनशील मामले को इतने हलके तरह से तय कर सकती है? किसने दिया उसे यह अधिकार?
एक वर्ष भी नहीं हुआ। जब संबंधों की उम्र 18 मंजूर की गई थी। चाइल्ड मैरिज प्रोटेक्शन एक्ट,1929 में यह 18 है। प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेन्स,2012 में यह 18 है। यहां तक कि इस अध्यादेश तक में  क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) आर्डिनेंस 2013 में भी 18 ही है। तो अब अचानक 16 या 14 क्यों कर देंगे? क्या हम पहले नासमझ थे?
सरकार हमसे सारी बातें पूछे, यह असंभव है। किन्तु पूछनी ही होंगी। विशेषकर ऐसे फैसले। भयावह हो सकते हैं ऐसे फैसले। छोटी उम्र की बच्चियां, शादी से पहले गर्भवती होने लगेंगी कानूनन। गर्भपात होने लगेंगे कानूनन। लड़कियों की तस्करी जैसे पाप बढ़ने लगेंगे। पकड़े जाने पर काफी कुछ सामने लाया जाएगा कानूनन। हमारे सामने स्पष्ट यह भी है कि जिन्हें संबंध बनाने हैं वे तो बना ही रहे हैं/ रहेंगे।  रुकेंगे नहीं। किन्तु रुक तो कुछ भी नहीं रहा। जघन्य हत्याएं। नृशंस दुष्कर्म। और कोई भी भयावह अपराध। तो क्या सभी में उम्र घटा दें? सजा की उम्र भी घटा दें? धाराएं ही घटा दें? हम ही न घट जाएं!

The 16-year-olds ‘relationship’ is going to be valid, you do not say anything?

’16, Sex relations should be valid for 14 year olds because they “consent” and exploitation are well aware of the difference. ”
– Union Law Ministry’s note of March 6, 2013.

‘Every second Indian girl is getting married at a young age. Here the children are under 18, at 470 so that their studies Wyahi, deteriorating health and future. ”
– March 8, 2013, the United Nations Population Fund Report

Children at the age of 14 should make same-sex relationship? 16 years you definitely should. ‘Must’, it plainly is not the Government. But the intent is the same. That would be. And the sudden concern of the government has come up with an eye on the safety of babies. Two days ago, the cabinet had to be decided on. Could not. Because the idea of ​​three different ministries – were different.

Home Office to think that the boy – girl between the age of sexual consent should be reduced to 16 years. The ministry said the law is better than 14 years. Ministry of Women and Child Welfare and all was in opposition. He is intent on keeping the current 18 years.

The decision is to be taken on our children. Someone asked us not. Sent by us by choosing not told lawmakers. There was to be no debate in the country. The dignity of women fell hard on this legislation did not apply at the time of the serious commitment that the government brought an ordinance. Just a quick rush to enact the ordinance – instant decisions are going to do anything.

Why? Because they know, nothing happens. Nothing will happen. No one will ask. After such a big youth revolution of a sex offender not impaired. After whooshing down the dignity of women isolated ‘Category’ was kept. Despite pressure only so much death ‘Jgnytm’ or ‘Rearest of the rare’ crime stood on the government to keep Jihd. So afraid of what he would think it a common Indian citizen? Questions to the dignity of women falling chill Thrthr heinous criminals, it was a strict law.

Changed the whole direction of the discussion before the Justice Verma Commission itself. He does not know what his original thing  wandered from the subject walked. Questions were raised about the Jgnytm sin. Adults age limit was reduced to a few months. This was the claim. The beautiful ‘young’ the tax exemption was saying. Otherwise, the remedy sought. So they should not be punished!

The importance of emotions in foreign countries is zero. Value, value systems do not have a family. Not respect the feelings. Indian society impose our ideas on the creation of a system that’s so true! Especially the whole nation to provoke emotion, angry, crying for?

So heinous criminals where it was going to reduce the age limit, instead of the relationship between children’s age seemed to be decreasing. Look, why are you saying this ministry.

Home Ministry proposal that has brought. He says he wants to protect the girls, ages 16 to do so. Who wants to save? He is concerned that some boys – girls her parents against the will of the spouses choose. Among them are former marriage relationship / can. The parents put them on charges of sexual abuse or rape / can. Even now considered by law to be concerned with the age of consent is 18. Then the police will bother. Jyahdti said. Tyranny.

Ie, parents have the relationship of age to avoid being reduced!
Law Ministry to enforce these laws. It is a step forward. He wants it to be as early as age 14. The new generation that understands the logic of the relationship between consent and forced sexual crime. Moreover, many women have to lower age groups. He is invoked. This would prevent the criminalization of teenage sex is being said.

The Ministry of Women and Child Welfare is the opponent. Women’s safety is her responsibility. His Minister Krishna Tirath has said that it will exploit young girls. Is an invitation to move to prey on children. Especially while the 18-year-old marriage is valid.

Whether governments, tend to set / is. But he, Bgahr a national debate, our children’s very private and family – related to the structure of society as such a sensitive matter can set so lightly? Who gave him this right?

Not even a year. 18 when the relationship was approved. Child Marriage Protection Act, 1929, it is 18. Protection of the child from sexual Ofens, in 2012 it is 18. Even in this Ordinance to the Criminal Law (Amendment) Ordinance 2013 is also 18. So why will suddenly 16 or 14? What we were stupid?

The government asked us many things, it is impossible. But will be asked. Particularly decisions. Such decisions can be catastrophic. The children of younger age, pregnant before marriage legally cease to matter. Solicitation will be aborted. Trafficking of girls will grow as sin. Caught quite a few will be brought before the law. It is clear to us that relationship to be as they are / will be. Not to wait. But nothing stops it. Heinous murders. Brutal rape. And any horrendous crime. Then subtract all ages? Please reduce the age of punishment? Reduce, streams? We should not be happening!

Kalpesh Yagnik
 
दैनिक भास्कर समूह के नेशनल एडिटर

Short URL: http://jayhind.co.in/?p=1721

Posted by on Mar 16 2013. Filed under आधी आबादी, खबर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

1 Comment for “सरकार 16 साल के बच्चों के ‘संबंध’ वैध करने जा रही है; आप कुछ कहेंगे नहीं?”

  1. Kumar Shrestha

    agar aap kuch karna chahte hain tho iske khilaf petition file kare.
    we will give full support

Leave a Reply

*

Recent Posts

Photo Gallery