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वायुसेना दिवस विशेष : हमसे थरथराते दुश्मन और आसमां

The power of Indian Air Force is the envy of enemies

The power of Indian Air Force is the envy of enemies

हवा में हमारी ताकत का दुनिया लोहा मानती है। युद्ध, सुरक्षा, निगरानी भारतीय वायु सेना के तीन बड़े काम हैं। वायु सेना की असीम शक्ति इतनी प्रचंड है कि हमारे सैनिक जब हवा में उड़ान भरते हैं तो आसमान का सीना चीरकर दुश्मनों के हौसले को थर्रा देते हैं। तभी भारतीय वायु सेना की गिनती दुनिया के चौथी सबसे बड़ी ताकत में होती है।

देश में मंगलवार को 81वां वायुसेना दिवस जोश और जज्बे के साथ मनाया जा रहा है। हमारे लाखों सैनिकों के बुलंद इरादों को दर्शाती  विशेष रिपोर्ट…

सुनहरे इतिहास से भविष्य की ओर

“नभ: स्पृशं दीप्तम” यह आदर्श वाक्य वायुसैनिकों को मजबूत करने में बड़ी भूमिका अदा करता है। सेना का जन्म ब्रिटिश शासन काल में 8 अक्टूबर,1932 को हुआ। उस दौरान भारतीय वायुसेना अधिनियम लागू करके इसका गठन किया गया। इसका नाम “रॉयल एयरफोर्स” रखा गया। दि्वतीय विश्वयुद्ध के बाद जापानी उगता सूरज(हिनोमारू) से समानता की वजह से वायुसेना के चिन्ह से लाल गोले को हटा दिया गया। 1945 में अपने योगदान के लिए जॉर्ज-6 ने वायुसेना को रॉयल की उपाधि से नवाजा था। हिन्दुस्तान की आजादी के बाद रॉयल शब्द हटाकर “भारतीय वायुसेना” नाम दिया गया।

बड़े ऑपरेशन

ऑपरेशन विजय (गोवा का अधिग्रहण), ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन कैक्टस एवं ऑपरेशन पुमआई को वायु सैनिकों ने अंजाम तक पहुंचाया। भारतीय वायुसेना का काम हवाई क्षेत्र की रक्षा करना, सशस्त्र बलों की दूसरी शाखाओं के साथ मिलकर राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा करना है और भारतीय सशस्त्र बल, इसरो के साथ अंतरिक्ष सम्बंधी गतिविधियों में सैन्य सहायता करना।

आपदा में राहत के सारथी

भारतीय सशस्त्र बलों के साथ जरूरत पड़ने पर वायुसेना कभी पीछे नहीं रही। जून, 2013 में उत्तराखण्ड प्राकृतिक आपदा में सेना के साथ वायुसैनिकों ने जान जोखिम में डालकर एमआई-17 हेलिकॉप्टर से बड़ी संख्या में लोगों को मौत के मुंह से बाहर निकाला। वर्ष 2004 में सुनामी,1998 में गुजरात चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं में कठिन परिस्थितियों में काम किया। श्रीलंका में वायुसेना ने ऑपरेशन रेनबो के तहत किया।

वायुसेना को आधुनिक बनाना होगा

रक्षा विशेषज्ञ भरत वर्मा ने पत्रिका डॉट कॉम से विशेष बातचीत में बताया कि नई तकनीक वाले फाइटर एयरक्राफ्ट को वायुसेना बेड़े में शामिल करना होगा और तीनों सेनाओं के तालमेल के लिए “ज्वाइंट मिलिट्री चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ” बनाने की जरूरत है। सुखोई के अलावा हमारे पास कोई आधुनिकतम स्क्वाड्रन नहीं है, 126 विमान “रफाल एमएमआरसी” डील होने के बाद भारत आने हैं, लेकिन अभी तक ये डील नहीं हो पाई। भरत ने वायुसेना प्रमुख एन.ए. के ब्राउन के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पुराने विमानों की जगह नए विमानों को नहीं लाया गया तो 2017 तक वायुसेना के सामने विमानों का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। रक्षा मंत्रालय पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए वर्मा का कहना है कि आर्मी, नेवी और वायुसेना अधिकारियों के बजाय रक्षामंत्री बाबूओं की बातों को तवज्जो देते हैं, जिसकी वजह से सही निर्णय नहीं हो पा रहे हैं।

वायुसेना के प्रमुख फाइटर विमान

सुखोई-30, मिराज-2000, मिग-29, मिग-27, मिग-23 एमएफ, मिग-21 बीआईएस, जगुआर, आईएल-76, एएन- 32, एवीआरओ, डोनियर, बोइंग 737-200, एमआई-26, एमआई-25, एमआई-17, चेतक, चीता।

भारतीय वायु सेना के प्रमुख रक्षा सौदे-

-दिसंबर 2012 में भारत और रूस ने 4 अरब अमरीकी डॉलर का समझौता किया था। इस डील के मुताबिक रूस भारत को 42 नए एसयू-30 एमकेआई कॉम्बेट एयरक्राफ्ट और 71 एमआई-17वी 5 मीडियम लिफ्ट हेलिकॉप्टर सप्लाई किए हैं। यह समझौता नई दिल्ली में भारत-रूस की वारि्षकसमिट संपन्न होने के बाद भारत के प्रधानमंत्री और रूस के प्रधानमंत्री की बातचीत के बाद हुआ।

– रूस, भारत के साथ हुए सौदे के तहत इस साल भारतीय वायु सेना (आईएएफ) को 4 प्लस प्लस पीढ़ी के छह और जेट लड़ाकू विमानों की आपूर्ति करेगा। इस सौदे के तहत 2015 तक 29 और विमानों की आपूर्ति की जाएगी। पिछले साल हमने चार विमानों की आपूर्ति की थी। इस साल हमने एक विमान सौंप दिया है और छह शेष सौंपे जाने हैं। रूसी कंपनी ने भारत के साथ 5.5 करोड़ डॉलर के दो और सौदे किए जिसके अंतर्गत यह भारत में एमआईजी के विमानों और भारी मशीनों के रखरखाव के लिए केंद्र स्थापित करेगा।

– इस साल मास्को में हुए एमएकेएस शो में एमआईजी ने 2010 में भारत के साथ 1.5 अरब डॉलर का सौदा किया था, जिसके अंतर्गत 29 एमआईजी-29के-केयूबी लड़ाकू विमान देने पर सहमति बनी।

– सितंबर में भारतीय वायुसेना की क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से 70 टन वजनी सी-17 मालवाहक विमान को वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया। हिंडन एयर बेस में इसके लिए एक नई स्क्वाड्रन बनाई गई है जिसका नाम “स्काईलार्डस” रखा गया है। भारत और अमरीका के बीच सैन्य सामग्री खरीद समझौते के तहत कुल 10 ग्लोबमास्टर विमान (सी-17) खरीदे जाएंगे। अब तक तीन सी-17 की डिलवरी की जा चुकी है। साल 2014 तक भारत को सभी दस विमान मिलने की उम्मीद है। सी-17 ग्लोबमास्टर मालवाहक विमान रूस के आईएल-76 की जगह लेगा।

ऎसी है हमारी ताकत

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा वायुसेना के ढांचे की बात करें तो पुराने विमान वायुसेना को बैशाखियों पर चलने को मजबूर कर रहे हैं। वर्ष 2009 में चीन ने 60 वीं मिलिट्री परेड पर शक्ति प्रदर्शन करके दुनिया को सैन्य शक्ति का अहसास कराया था, उस समय चीन के पास 9000 एयरक्राफ्ट, 2000 फाइटर प्लेन और भारत के पास 3000 विमान, 790 लड़ाकू विमान थे।

तीनों अंगों में सशक्त हथियार 

देश पर जब कभी संकट आया या आपातकाल के हालात बने तो हर मुसीबत का सामना वायु सेना ने बहादुरी से किया। देश के तीनों अंगों में इसे सशक्त हथियार की संज्ञा भी दी जाती है। हर परिस्थति में थलसेना, नौसेना के साथ कदम से कदम मिलाकर हर जंग को जीतने के जज्बे के साथ वायु सैनिक जिंदगी और मौत से बेफिक्र होकर संघर्ष करने को तैयार खड़े रहते हैं।

चीन और पाक के मुकाबले भारतीय वायुसेना

भारत के खिलाफ चीन और पाक हमला बोल दे तो भारत के पास इतनी मजबूत वायुसेना नहीं है, कि वह दोनों देशों को मुकाबला कर सके। पाक वायुसेना के पास अभी 22 स्क्वाड्रन हैं जिनमें से हर स्क्वाड्रन में 18 के हिसाब से 396 विमान हैं और भारत के पास 34 स्क्वाड्रन हैं। दोनों तरफ जंग की सूरत से भारतीय वायुसेना की तैनाती पर सरसरी नजर डालें, तो यह बात सामने आती है कि अगर भारत अपने 34 स्क्वाड्रन में से पाक के खिलाफ 22 स्क्वाड्रन उतारता है तो उसके पास चीन के खिलाफ मात्र 10-12 ही बचेंगे। कुल मिलाकर हमारे पास केवल पाक से लड़ने के लिए पर्याप्त वायुक्षमता है। दोनों मोर्चों पर एक साथ निपटने के लिए नहीं है।

रक्षा मंत्रालय यह बात जरूर कह रहा है भारतीय वायुसेना में 2016-17 तक स्थिति में सुधार हो जाएगा और वह चीन का मुकाबला करने में सक्षम होगा, लेकिन तब तक पाक की वायुसेना की क्षमता बढ़ जाएगी। 1971 और उससे पहले के घटनाक्रम पर नजर डालें तो पाक को जरूरत पड़ने पर चीन ने तुरंत विमान उपलब्ध कराए थे। यदि 2020 की वायुसेना की स्थिति पर एक नजर डालें तो उस समय पाकिस्तान से मुकाबला करने के लिए बराबर के स्क्वाड्रन उतारने पर चीन के खिलाफ 14 स्क्वाड्रन की ताकत बढ़ जाएगी। इन 14 स्क्वाड्रन में एसयू-30 एमकेआई, राफेल और एलसीए (स्वदेशी तेजस) होंगे।

Report by : patrika.com

Short URL: http://jayhind.co.in/?p=3424

Posted by on Oct 8 2013. Filed under खबर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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