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बेमानी है हिन्दू धर्म की अन्य धर्मों से तुलना

There is no comparison with other religions of Hinduism

There is no comparison with other religions of Hinduism

There is no comparison with other religions of Hinduism

 

स्वयंभू इस्लामिक धर्मगुरु जाकिर नाईक पिछले कई वर्षों से अन्य धर्मावलंबीयों को शास्त्रार्थ की चुनौति दे रहे थे कि यदि कोई उसे गलत साबित तो वे इस्लाम छोड देंगे । इस बहाने वे अन्य धर्मों का सरेआम मजाक उडा रहे थे । खुद को सबसे बडा विद्वान स्वयंभू मुस्लिम धर्मगुरु मानने वाले श्री जाकिर नाईक जी बहुत दिनों से अपने मत को ही अंतिम सत्य मानकर खुद को महान साबित करने पर तुले थे ।

जैसा होना था वैसा ही हुआ और खुद को हिन्दू या यूँ कहिए सनातन धर्म के ज्ञाता समझने वाले एक अज्ञात से धर्मगुरु रामपाल जी महाराज ने जाकिर नाईक की चुनौति को स्वीकार करते हुए उन्हें धर्मचर्चा अर्थात शास्त्रार्थ के लिए सादर निमंत्रण भेज दिया और तारीक भी ९ मार्च तय कर दी गई व इसका लगातार विज्ञापन दिया गया ।

वही हुआ जिसकी आशंका थी अर्थात श्री जाकिर नाईक जी धर्मचर्चा में नहीं आना था और नहीं आए और न ही भविष्य में कभी आने का कोई संकेत ही दिया । खैर यह तो होना ही था और ऐसा होने से हिन्दू धर्म की पताका कोई ओर ऊँची होकर फहराने नहीं लगी जैसा विवेकानंद के शिकागो प्रवास के दौरान हुआ था । मेरा तो यही मानना है कि श्री रामपाल जी महाराज को जाकिर नाईक की चुनौति को चुनौति मानना ही नहीं चाहिए था और इसे उपेक्षित कर देना चाहिए था क्योंकि नाईक को चुप कराने के लिए कोई भी ऐरा-गैरा चुनौति स्वीकार कर लेता तो भी यही परिणाम रहना था जो रामपाल जी महाराज के चुनौति स्वीकार करने से रहा है ।

हिन्दू धर्म और अन्य धर्मों में तुलना असंभव

दरअसल तुलना वहाँ की जाती है जब दो विचारों या धमों में लगभाग समानता हो अर्थात जिनमें समान तत्वो की अधिकता हो और असमान तत्वो की न्यूनता । बिलकुल समरूप अथवा बिलकुल विपरीत तत्वों की तुलना नहीं की जा सकती । इस आधार पर हिन्दू धर्म की इसलाम तो क्या इसाई, पारसी या फिर दुनियां के किसी भी धर्म से तुलना नहीं की जा सकती जिसका जन्म भारत से बाहर हुआ है । आइए जाने कि हिन्दू और गैरहिन्दू धर्मों में मुख्य-मुख्य आधारभूत अंतर क्या है जो इनकी तुलना करने में आडे आ रहे है-

(१). सत्य निरपेक्ष है या सापेक्ष

हिन्दू धर्म में सत्य को निरपेक्ष माना गया है अर्थात सत्य इसलिए सत्य नहीं कि वह किसी आप्त पुरुष या ईश्वर द्वारा कथित है अपितु वह अपने आप में सत्य है इसलिए आप्त पुरुष ने सत्य को कथित किया है । यदि कोई आप्त पुरुष सत्य को असत्य करार दे दे तो भी सत्य, सत्य ही रहेगा न कि वह असत्य हो गाएगा । इसके विपरीत इस्लाम, इसाई या अन्य गैर हिन्दू धर्म में सत्य को सापेक्ष माना गया है । इन धर्मावलंबियों के अनुसार सत्य इसलिए सत्य है कि उक्त कथन उनके श्रद्धेय मोहमद, ईसा मसीह या उनके आप्त पुरुष द्वारा कथित है न कि सत्य अपने आप में सत्य है ।

(२). अहिंसा परमो धर्मः

अहिंसा या दया हिन्दू धर्म का मूल है तभी तो कहा गया है- जहाँ दया तहां धर्म है….. । इसलिए हिन्दू ऐसे धर्म की कल्पना नहीं कर सकता जिसमें हिंसा का जरा सा भी समावेश किया गया हो । बाइबल पढते हुए कोई हिन्दू जब यह लिखा हुआ पाता है कि ईसा मसीह ने एक रोटी और एक सूखी मछली से सभी अनुयाइयों का पेट भर दिया तो वो समझ नहीं पाता कि यह कैसा ईश्वर है या ईश्वर का पुत्र है जिसे पेट भरने के लिए मछली को मारना या खाना पडा ? इसस�� अच्छा तो वो भूखा रह लेता । एक हिन्दू कुछ इसी प्रकार की धारणा इसलाम या अन्य उन सभी धर्मों के प्रति रखता है जो अहिंसा का समर्थन निरपेक्ष रूप से नहीं करते । हिन्दू और अन्य धर्मों में यह दूसरा मुख्य अंतर है । हिन्दू जीव मात्र के लिए दया और कल्याण की भावना रखता है जबकि अन्य धर्म ऐसा नहीं सोचते ।

(३).आत्मा की एकता और अमरता

हिन्दू न केवल आत्मा को अजर अमर मानता है अपितु सभी आत्माओं की एकता में भी विश्वास करता है अर्थात वो मानता है कि सभी जीवों में एक जैसी आत्मा निवास करती है इसके विपरीत अन्य धर्म यह मानते है कि ईश्वर ही आत्माओं को पैदा करता है और वही नष्ट भी करता है । इसाई धर्म तो पशुओं में आत्मा के अस्तित्व को नकारते हुए केवल मनुष्यों में ही इसके अस्तित्व को स्वीकारता  है । यही कारण है कि वो इसे उपभोग की वस्तु मानता है जिसे मनुष्यों के उपभोग के लिए ईश्वर ने सृजित किया है । इसके विपरीत एक हिन्दू को भोजन या अन्न को जूठा छोडने में भी हिंसा नजर आती है कि इस व्यर्थ किए गए अन्न से किसी अन्य की भूख मिटाई जा सकती थी ।

(४). हिदू खुला जबकि अन्य सभी बंद धर्म है

हिन्दू व अन्य धर्मों में यह अंतर सबसे महत्वपूर्ण है । जब कोई भी नया विचार (या धर्म) पनपता है तो उस वक्त वह सर्वथा उपयुक्त और सत्य प्रतीत होता है लेकिन कलांतर में उसमें कमियां दृष्टिगोचर होने लगती है । ऐसे में इस पूर्ववर्ती विचारधारा के विपरीत दूसरी विचारधारा पनपती है । आगे चलकर इन दोनों विचारधाराओं को समन्वित करने वाली तीसरी विचारधारा का विकास होता है । इस प्रकार से यह किसी विचार या धर्म के विकास के लिए निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है । हिन्दू धर्म कि विशेषता यही है कि यह धर्म किसी एक व्यक्ति द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्त मात्र न होकर अनेकानेक व्यक्तियों के विचारों का समुहिक प्रतिफल है जो हजारों सालों में परिमार्जित हुआ है । इस प्रकार से हिन्दू धर्म एक खुला धर्म है जो विचार से नहीं अपितु विवेक से विकसित हुआ है । इसके विपरीत अन्य धर्म चाहे वह इस्मला हो चाहे इसाई या कोई अन्य, सभी बंद धर्म है जो एक व्यक्ति मात्र के विचारों पर आधारित है और जो यह मनकर चलते है कि समय अपरिवर्तित रहता है और व्यक्ति का विवेक भी । इन धर्मों में विचारों के विकास का कोई महत्व नहीं है । यही कारण है कि इन धर्मों में विशेष आग्रह अथवा वैचारिक कट्टरता पाई जाती है । इसाई धर्म में जो थोडी बहुत उदारता पाई जाती है उसका हेतु प्रोटेस्टेंट विचारधारा का विकास है अन्यथा इसाई धर्म भी उतना ही अनुदार और कट्टर होता जितना इस्लाम है । बेशक हिन्दू धर्म भी उतना ही कट्टर होता जितना इसाई या इस्लाम धर्म है यदि इसमें विभिन्न विचारधाराओं का समावेश न हुआ होता ।

इसलिए मेरा मनना है कि हिन्दू धर्म की अन्य धर्मों से कोई तुलना नहीं की जा सकती । क्या सागर की तुलना किसी तालाब से की जा सकती है या बरगद की तुलना कैकटस से की जा सकती है ? इसलिए मेरा मानना है कि रामपाल जी महाराज को जाकिर नाइक की चुनौति को केवल और केवल चुप कराने के लिए स्वीकार करने की कोई आवश्यकता नहीं थी । इस्लाम में इतने अंतरद्वंव है कि उसे तो कोई भी ऐरा-गैरा यहां तक कि नास्तिक हिन्दू भी चुप करवा सकता था । कारण यह नहीं कि हिन्दू धर्म अन्य धर्मों से उत्तम है अपितु कारण यह है कि हिन्दू धर्म अन्य धर्मों से अधिक विकसित और परिमार्जित है ।

लेखक : विजेंद्र कुमार

Via : NBT Blog

English Translation

Self-styled Islamic cleric Zakir Naik Dharmavlnbiyon the past several years, others were polemical challenge to prove him wrong if someone then they will leave Islam. The excuse they were making fun of other religions in public. Self-styled Muslim cleric believed himself to Mr. Zakir Naik greatest living scholar from many days to do this as the only truth was out to prove himself great.

was fixed and the constant advertising.

Mr. Zakir Naik ie what happened was feared and hated to Dharmcharcha did not live nor gave any sign of coming in the future.Rampal Ji Maharaj, who is going to accept the challenge.

Hinduism and other religions the impossible

In fact there is the equality that is nearly two ideas or contain the same elements in Dmon excess and deficiency of disparate elements. All the elements can not be identical or opposite. What Christianity Islam on the basis of Hinduism, Zoroastrianism or the world can not be compared with any religion is born out of India. Let’s go and Hindu religions Garhindu main – the main difference is basic compared to what is coming hinders –

(1). Truth is absolute or relative

If Apt man declared a false truth, truth, truth will remain not gonna sing that to be untrue. In contrast, Islam, Christianity or other non-relative truth in Hinduism is considered. The statement is so true that these religions are true to their revered Mohamad, Apt men by Jesus Christ or not the alleged truth is truth itself.

(2). Ahimsa Paramo dharmaH

Violence or compassion is called only if the origin of Hindu religion – the religion here and have mercy ….. . Hindu religion can not imagine why even a small part of the violence has been introduced.kill or eat better? So with this he would go hungry. A Hindu or a similar perception of Islam holds that all religions are not the absolute support of non-violence. The second major difference in Hindu and other religions. Hindu life just feels compassion for the welfare of other religions do not.

(3). Unity of soul and immortality

is destroyed. Denying the existence of the animal soul in Christianity only human beings accept its existence. That is why he considers it an object of consumption, which is created by God for human consumption.

(4). Regarded Hindu religion is open to all other

This difference is most important in Hinduism and other religions. When a new idea (or religion), where it is estimated that at the time seemed perfect and true, but the loopholes in Klantr become more visible. Unlike the previous view that the ideology thrives. Later these two ideologies is to coordinate the development of the third ideology. Thus, the development of an idea or religion is an ongoing process. Hinduism is a religion open to the idea but a conscience is developed. These religions have no significance in the development of ideas. That is why a special request or ideological fanaticism is found in these religions. Hinduism is of course equally fanatical Christianity or Islam as if it had not included the various ideologies.

So I have to admit that none of the other religions of Hinduism can not be compared. Ocean compared to what can be a pond or from Banyan Kakts can be compared? So I believe the Zakir Naik Rampal Ji Maharaj only and only to silence the challenge was no need to accept. Anybody in that era so Antrdwnv Islam – Hindu Gara even atheists can get too quiet.

Short URL: http://jayhind.co.in/?p=1678

Posted by on Mar 12 2013. Filed under हिन्दुत्व. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

1 Comment for “बेमानी है हिन्दू धर्म की अन्य धर्मों से तुलना”

  1. Anuj Sogarwal

    Ye jakir nike kuch nahi , bs bakwas krta rhta h.

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