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हज सब्सिडी का सच

उच्चतम न्यालायय का फैसला

बी एन शुक्ला एवं भूतपूर्व भाजपा राज्य सभा सदस्य प्रफुल्ल गोरादिया ने Public Interest Litigation याचिका दर्ज़ की जिसमें भारत सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय यात्रा में दी जाने वाली हज़ सब्सिडी को असंवैधानिक बताकर समाप्त करके का आग्रह किया गया था। उसके जवाब में उच्चतर न्यालाय जे उसे जारी रखने का निर्देश दिया, ऐसा मानसरोवर झील पर जाने वाली यात्रा में सरकार द्वारा २०० रुप्ये की सब्सिडी का संदर्भ देते हुआ दिया गया। मानसरोवर झील तिब्बत में है।

truth of subsidy for haj

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ये है कारण की क्यो मुस्लिम समुदाय के लोग अधिकतर कांग्रेस के वोट बैक है हज सब्सिडी का सच

सत्ता की मलाई चाटते रहने के लिये और अपने वोट बैक को सुरक्षित रखने के लिये यूपीए सरकार मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति अपनाये हुये है,
इसके लिये खुले आम संविधान की धज्जियां उड़ाई जाती है और उच्चतम न्यायालय के आदेशो का पालन भी नही किया जाता ।

पंथनिरपेक्ष शासन में सरकार का यह उत्तरदायित्व नहीं बनता कि वह पक्षपात करते हुये समुदाय विशेष के नागरिकों को उनके धार्मिक कर्मकांड अथवा परंपरा को पूरा करने के लिए आर्थिक सहायता दे।
सरकार कर्मकांड के लिए सुविधाएं जैसे कानून व्यवस्था कायम रखने, लोगों को जनसुविधाएं उपलब्ध कराने और यातायात के लिए सड़क आदि बनाने में तो सार्वजनिक धन का इस्तेमाल कर सकती है, लेकिन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से कर्मकांड के लिए उस धन का इस्तेमाल नहीं कर सकती।
आइये देखते है सरकार किस तरह आम जनता द्वारा दिये टैक्स का दुरुपयोग कर रही है ।

हज सब्सिडी के सदर्भ में उच्चतम न्यायालय ने 8मई 2012 को सरकार ने आदेश दिये की
1 हज सब्सिडी को बंद किया जाये और उच्चतम न्यायालय ने इसके लिये दस वर्ष की समय सीमा निधरित कर दी ।
2 प्रधानमंत्री के सद्भभावना शिष्टमंडल में प्रतिनिधियों की संख्या में कमी करने का भी निर्देश सरकार को दिया ।
3 15अप्रेल 2012 को आदेश दिया की हज सब्सिडी पाच वर्ष मे एक बार के स्थान पर जीवन मे एक बार दी जाये ।

अब देखते है कैसे काग्रेस सरकार सविंधान के पथनिरपेक्षता के सिद्धान्त की धज्जियां उड़ाती है।
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पहले बात इस वर्ष की इस वर्ष कुल 5लाख हज आवेदन मे से 1 लाख 45 हजार लोगो को सरकार ने हज की अनुमति दी है जो
पिछले वर्ष से 25 हजार अधिक है । गत वर्ष 1लाख 20 हजार हाजी सरकारी सब्सिडी पर हज पर गये थे ।
गत वर्ष 900 करोड़ रुपये हज सब्सिडी पर खर्च हुये ।

कुछ दिनो पहले दिल्ली में हज कमेटी के साथ एक बैठक में विदेश मत्री एस एम कृष्णा ने कहा कि
रुपये के अवमूल्यन , ईधन की कीमतो मे वृद्धि के कारण इस वर्ष प्रत्येक हाजी पर 30-35हजार का अधिक खर्चा होगा।
और इस वर्ष हज सब्सिडी पर खर्च की रकम का आकड़ा लगभग 1500 करोड़ पहुचेगा , इसे सरकार वहन करेगी ।
मतलब उच्चतम न्यायालय के 8मई2012 को दिये आदेशो अवमानना ,

10वर्ष मे कम करते हुये खत्म करने के आदेश दिये लेकिन सब्सिडी कम करने के स्थान पर बढाई जा रही है ।

आपको जानकर हैरत होगी की सरकार ने पिछले पांच साल में 3750करोड़ रुपये हज सब्सिडी पर खर्च किये है ।

सद्भभावना शिष्टमण्डल के नाम पर मुस्लिम नेताओ की जनता के पैसे पर विदेश यात्रा की मौज
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भारत सरकार सऊदी अरब हर वर्ष 30 लोगों तक का शिष्टमंडल अपनी तरफ से हज यात्रा पर भेजती है ।
जबकि उच्चतम न्यायालय ने इस पर रोक लगाते हुये कहा था इसके लिये दो सदस्य पर्याप्त है ।
गत वर्ष नवम्बर में राज्यसभा के उप सभापति के. रहमान खान 3 दर्जन से अधिक मुस्लिम नेताओ का सद्भावना मंडल लेकर गये
साथ ही डाक्टरो, मेडिकल सहायको का एक बड़ा दल भी गया , इस पर कुल 200 करोड़ खर्च हुये ।

इस वर्ष इसी तरह के सद्भावना दल पर 300करोड़ खर्च होने का अनुमान है ।

अति विशिष्ट कोटे से हर साल 1100काग्रेसी कार्यकर्ता और नेता सरकारी सब्सिडी पर हज करते है ।
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हज कमेटी मे सरकारी दखल और कमीशन खोरी भ्रष्टाचार का आलम यह है
की कुर्रा( लाटरी) निकालने से पहले ही अवैध रुप से सरकारी कारिन्दो के नाम तय हो जाते है ,
सरकार को लथेड़ते हुये उच्चतम न्यायालय ने 8मई 2012 वी आई पी कोटे की 800सीटे प्राइवेट टूर वालो के कोटे को देने के आदेश दिये

इस वर्ष हज कमेटी ,सऊदी सरकार की मदद से हज यात्रियो को मुफ्त सिम बांटेगी जिसमें हज कमेटी के अधिकारियो के , अस्पताल व अन्य आपातकालीन सुविधाओ के नम्बर रहेगे ताकि हज यात्रियों को अरब मे असुविधा ना हो । हालाकि इसके लिये भारत सरकार कोई खर्च नही करने वाली है । यह सिम केवल उन्हे दी जायेगी जो सरकारी हज कमेटी के माध्यम से हज करने वाले है ।

जानिये कैसे दी जाती है हज सब्सिडी
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सरकार प्रत्येक हज यात्री से मात्र 16हजार रुपये लेती है बाकि खर्च सरकार देती है ।
सब्सिडी नकद नही दी जाती इसे सब्सिडी का बड़ा हिस्सा हवाई कंपनियों और खासतौर से सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया को बड़े पैमाने पर हजयात्रियों को जेद्दा ले जाने और वापस लाने के लिए किराये में राहत के रूप में दिया जाता है।
सरकारी विमानन कंपनी के घाटे और पायलटो को वेतन ना मिलने का ये भी एक कारण है
क्योकी सरकार एयर इण्डिया को भी नकद भुगतान नही करती बल्कि ईधन के बाण्ड जारी किये जाते है ।
भारत में 26शहरो से हज यात्रा के लिये विमान उड़ान भरते है।
इस वर्ष 1500करोड़ रुपये एयर इण्डिया को भुगतान किये जायेगे।

कैसे हुई शुरुआत हज सब्सिडी की :
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आजादी के बाद 1952 तक मुम्बई की मुगल शिपिंग कम्पनी के जहाजो से लगभग सात हजार लोग ही हज पर जाते थे , इसके बाद तब यात्रियो के बढते दबाव और तस्करी और मानव व्यापार की बढती घटनाओ के कारण सरकार ने मुगल शिपिंग कम्पनी का अधिग्रहण कर लिया । इसके बाद सरकार ही हज यात्रियों की व्यवस्था करने लगी ।
पानी के जहाज़ से की जाने वाली हज यात्रा की लागत लगातार महंगी होते जाने के बाद जब सरकार ने इसका किराया बढ़ाने का प्रस्ताव किया तो मुस्लिम समाज ने इसका जमकर इस आधार पर विरोध किया कि ऐसा करने से उनका एक धार्मिक कर्तव्य पूरा होना कठिन होता जायेगा।
चूंकि हज यात्रियों के अलावा बाकी लोगों ने हवाई यात्रा का विकल्प उपलब्ध होने के कारण जलयात्रा को थकाऊ और लंबा समय लगने से लगभग छोड़ दिया था,
इसलिये 1954में काग्रेस सरकार ने मुस्लिम समाज के सामने यह विकल्प रखा कि
वह अगर जलयात्रा की जगह हवाई यात्रा करने को राज़ी हो जाये तो ऐसा करने से दोनों के यात्रा व्यय में जो अंतर आयेगा उसकी पूर्ति सब्सिडी के रूप में सरकार कर देगी।

नेहरु सरकार द्वारा शुरु की गई इस मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति को किसी भी सरकार ने खत्म नही किया । सभी वोट बैक की राजनीति में लगे रहे हज सब्सिडी को बद करने के लिये

वाजपेयी सरकार के समय ससदीय कमेटी ने सिफारिश की थी लेकिन बंद नही कर पाये , उसके बाद 2004 मे काग्रेस गठबधन की सरकार आने के बाद मामला ठडे बस्ते मे डाल दिया गया।

हज सब्सिडी पर सवाल
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विश्व भर में भारत ही ऐसा देश जो हज पर सब्सिडी देता है , मक्का मदिना में सबसे ज्यादा भारतीय मुस्लिम हज पर जाते है ।
काग्रेसी सरकार द्वारा शुरु की गई हज सब्सिडी समाज मे वैमनस्य बढाती है , समुदायो मे झगड़े होते है । क्योकि पक्षपात होता है तो अन्य धर्म के लोगो का रोष आना स्वाभाविक है ।

आखिर इस देश का हर नागरिक टैक्स देता है फिर केवल मुस्लिमो को ही अपने धार्मिक कर्मकाण्ड के लिये सरकार सब्सिडी देती है
सरकार क्यो नही —
हिन्दुओ को अमरनाथ यात्रा, कैलाश मानसरोवर के लिये सब्सिडी देती है ?

ईसाइयो को येरुशलम जाने के लिये क्यो नही सरकार सब्सिडी देती है ?

सिखो को पाकिस्तान मे स्थित गुरुद्वारो के लिये सरकारी सहायता क्यो नही मिलती ?

ये सब ये साबित करता है कि इस देश में सरकार खुद संविधान का उल्लघंन कर रही है और इसके लिये न्यायपालिका से भी झूठ बोला जाता है । आंकड़े छुपाये जाते है अवमानना की जाती है ।
अगर समाज में इस पक्षपात को लेकर धार्मिक संगठन और राजनैतिक कार्यकर्ता आपस मे भिड़ते है
समाज में तनाव फैलता है तो इसके लिये यूपीए सरकार खुद दोषी है ।

Short URL: http://jayhind.co.in/?p=1360

Posted by on Aug 13 2012. Filed under इतिहास, मेरी बात, सच, हिन्दुत्व. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

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