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मैं प्रधानमंत्री जी से सहमत हूं, हमें सरदार पटेल वाला सेक्युलरिज्म चाहिए: नरेंद्र मोदी

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सांप्रदायिकता के गंभीर आरोप झेलने वाले बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पटेल जयंती पर कहा कि देश को सरदार पटेल के सेक्युलरिज्म की जरूरत है, वोट बैंक के सेक्युलरिज्म की नहीं. वह गुजरात के भरूच में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के शिलान्यास कार्यक्रम में बोल रहे थे.

प्रस्तावित सरदार पटेल की मूर्ति दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति होगी. इसकी ऊंचाई 182 मीटर होगी और इसका चेहरा नर्मदा बांध की ओर होगा. यह अमेरिका की मशहूर ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ से दोगुना ऊंची होगी. 2500 करोड़ के खर्च वाली इस योजना को मोदी ने  प्रदेश के विकास, आकर्षण, देश के गौरव और पटेल के सपने से जोड़ा.

उन्होंने संकेतों में कहा कि सरदार पटेल की यह प्रतिमा भारत को वैसा स्थान दिला सकती है जैसा चीन को उसके विकसित शहर शंघाई ने या जापान को बुलेट ट्रेन ने दिलाया. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को अब हल्के में लेने के दिन अब लद गए हैं.

पढ़िए उनका भाषण ज्यों का त्यों.

भाइयों-बहनों
नर्मदा के तट पर आज नए इतिहास और नए संकल्प का शिलान्यास हो रहा है. कई सालों से इस सपने को मैंने मन में संजोया था. कई लोगों ने इस सपने में रंग भरे थे, सुझाव दिए थे. कई मनोमंथन के बाद इस योजना गर्भाधान हुआ. अनेक लोगों का मार्गदर्शन, प्रेरणा, आशीर्वाद मिला. उन सबका अभिनंदन-नमन करता हूं. यह हम सबका सपना है.

नर्मदा जिला छोटा जिला है, इसके विकास के लिए और आने वाले दिनों में यह काम और सरलता से हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर कई फैसले हुए हैं. लेकिन सबका मूल्यांकन करने के बाद सरकार को लगा कि अच्छा होगा कि इस काम को गति देने के लिए यहां एक छोटे से तालुका (कस्बा) का निर्माण हो.

मुझे पानी के मुद्दे पर कई सुझाव आए. आदिवासी भाइयों का पूरा अधिकार है, पानी उनको मिलेगा. किसानों को भी पानी मिलेगा. हमने टेक्निकल सॉल्यूशन खोजा है. नर्मदा के बाएं किनारे को भी सिंचाई का लाभ मिले, इसके लिए भी काम किया जाएगा.

नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध और इसके जरिये गुजरात-राजस्थान में पानी पहुंचाने का प्रयास सरदार पटेल का सपना था. किसी जमाने में प्यासों के लिए पानी की मटकी भी घर के बाहर रखने वालों को समाज आदर से देखता था. हमारे यहां, खास तौर से गुजरात-राजस्थान में पानी का मू्ल्य है, क्योंकि हमने पानी की तंगी झेली है.

आज भी गुजरात सरकार का सबसे ज्यादा बजट पानी के काम के लिए दिया जाता है. सरदार सरोवर बांध परियोजना के लिए पिछली सरकारों ने जितना खर्च किया, उससे डबल खर्च हमारी सरकार ने पिछले दस सालों में किया. लेकिन इस सारे काम का सपना सरदार पटेल ने देखा. यह उन्हीं के सपने पर सारा काम हो रहा है.

अगर हम पानी की व्यवस्था न कर पाते तो कहां होते, कौन जानता हमें. गुजरात में नेगेटिव ग्रोथ थी, लोग छोड़कर जा रहे थे. आज राजस्थान के किसी भी व्यक्ति से मिलते हैं तो कहता है कि आपने बहुत अच्छा काम किया, जो हमें पानी दिया. इस सबके लिए सरदार पटेल जिम्मेदार हैं.

अब भी गुलामी का इतना बोझ है, आजादी के इतने साल बाद भी. हम गुलामी की छाया से अब तक निकल नहीं पाए हैं. और हमने गुलामी की छाया से निकलने के लिए इस गुलामी के साये को तोड़ने के लिए कुछ ऐसे काम करने होंगे. जिसके कारण हम गर्व के साथ आत्मसम्मान के साथ दुनिया के सामने खड़े हों. आज मैं आपको याद दिलाता हूं. 15-17 साल पहले हिंदु्स्तान में जब बजट पेश किया जाता था, तो उसे शाम को पांच बजे पार्लियामेंट में रखा जाता था. आजादी के पचास साल बाद भी ऐसा होता था. किसी ने सोचा ये क्यों ऐसा था. इसलिए था क्योंकि अंग्रेजों के जमाने से परंपरा थी. जब हमारे यहां शाम के पांच बजते थे, तब ब्रिटेन में 11 बजते थे और उस समय उनके यहां संसद का काम शुरू होता था. जब वाजपेयी जी प्रधानमंत्री बने तब यह परंपरा तोड़ी गई औऱ सुबह 11 बजे बजट रखा जाना शुरू हुआ.

हमारी सोच में पता भी नहीं चलता है कि गुलामी किस कदर दबोच रही है. मित्रों इस सोच के सामने एक स्वाभिमान के साथ खड़े होने की आवश्यकता है. भारत को हीन भाव से देखे जाने की आदत सी हो गई है. भारत से हो, चलो बाजू जाओ. जब वाजपेयी जी ने शासन में आने के कुछ ही समय बाद परमाणु बम विस्फोट किया, तो पूरी दुनिया ने लोहा माना. दुनिया अब हिंदुस्तान का नाम सुनती है, तो कहती है, हां कुछ तो है. मित्रों दुनिया के अंदर हमारे देश का कोई नागरिक क्यों न हो. कोई परंपरा क्यों न हो. आज के युग में समय की मांग की. हिंदुस्तान आजाद होने के बाद भी अगर दूसरे देशों को गौरव से देखा जाता हो, तो हमारे हिंदुस्तान को क्यों न देखा जाए

किसी जमाने में चाइना को कौन देखता था. चाइना ने एक शंघाई बना दिया. दुनिया के सामने पेश कर दिया. लोगों की चाइना की तरफ सोचने की आदत बदल गई. ये जो पुराने पर नया चाइना बना, शांघाई के आसपास बना. जापान ने जब बड़ी स्पीड की बुलेट ट्रेन बनाई तो दुनिया ने कहा, अरे भाई कुछ तो है. अमेरिका ने अरबों डॉलर खर्च कर चांद पर भेजा, दुनिया ने लोहा माना.

हमारा भी एक ग्लोबल पोजिशनिंग करना चाहिए. सवा अऱब का देश एक ताकत बनकर उभरना चाहिए। अनेक मार्ग हो सकते हैं. अनेक क्रिया प्रतिक्रिया हो सकती हैं.

आज ये सरदार पटेल का स्मारक सिर्फ…सरदार सरोवर डैम बना, सरदार साहब का सपना पूरा हुआ. वो हमारे गुजरात के थे. मगर ये सपना बहुत बड़ा है. ये भव्य स्मारक. जिसकी ऊंचाई हिंदुस्तान की तरह देखने के लिए मजबूर करेगी.

इतने बड़े राजे रजवाड़ों को एक करने का काम. अंग्रेजों की कुटिल कूटनीति का पर्दाफाश, ये भारत का सामर्थ हम दुनिया के सामने पेश करना चाहते हैं. अगर इतिहास की धरोहर देखें तो चाणक्य के बाद इस देश को एक करने का काम किसी ने किया, तो वह हैं सरदार पटेल.

क्या हम राणा प्रताप का सम्मान करेंगे. हम छत्रपति शिवाजी महाराज का सम्मान करेंगे. हम भगत सिंह, सुखदेव राजगुरु का सम्मान करेंगे. क्या वो बीजेपी के मेंबर थे क्या. क्या उन्हीं का सम्मान होगा देश में, जो भाजपा का सदस्य हो.

दल से बड़ा देश होता है. और देश के लिए मरने वाला हमारे लिए सबसे बढ़कर है. और इसीलिए सरदार साहब को किसी दल के साथ जोड़ना उनका अपमान है. वो दल उनके इतिहास का हिस्सा है. इससे नरेंद्र मोदी भी इनकार नहीं कर सकता.

हमें विरासत को कभी बांटना नहीं चाहिए. हमारी विरासतें सांझी होती हैं. लेकिन देश आजाद होने के बाद गांधी जी छुआछूत के खिलाफ जीवन भर लड़ते रहे. मगर ये जो नई राजनीतिक छुआछूत बढ़ गई है. हम इसे भी नष्ट करें.

मित्रों मुझे दो दिन पूर्व पीएम से मिलने का अवसर मिला. उन्होंने एक बात बहुत अच्छी कही. मैं आभार व्यक्त करता हूं. मीडिया के मित्र समझ नहीं आए. बात उलटी तरफ चली. हो सकता है उनकी रोजी रोटी की डिमांड थे.

पीएम ने कहा कि सरदार साहब सच्चे सेकुलर थे. हम भी कहते हैं कि देश को सरदार साहब वाला सेकुलरिज्म चाहिए. वोट बैंक वाला नहीं. और इसलिए प्रधानमंत्री जी, सरदार साहब का सेकुलरिज्म चाहिए इस देश को.

भारत एक हुआ. राजे रजवाड़े किसी एक संप्रदाय या समाज के नहीं थे. सब अलग अलग परंपराओँ से थे.

इसलिए मित्रों मैं भारत के प्रधानमंत्री का अभिनंदन करता हूं. आग्रह करता हूं. हम सब मिलकर सरदार साहब का सेकुलरिज्म आगे बढ़ाएं

कुछ लोगों के मन में आता होगा क्यों इतना बड़ा स्मारक. बाबा साहेब आंबेडकर, उनके कई स्मारक हैं. मगर मानना पड़ेगा कि दलित शोषित समाज के लिए वह भगवान का रूप हैं. और जो भी पीड़ित दलितों के लिए भला चाहते हैं, उन्हें बाबा साहेब आंबेडकर को प्रेरणा मिलती है. तब ये नहीं पूछा जाता कि वो किस दल से थे. उनका जीवन हमें प्रेरणा देता है.

ये सांझी विरासत है, हम सबको गर्व होना चाहिए. हम सबका दिल देश के लिए होना चाहिए.

नई पीढ़ी को कहा पता चलेगा कि लौह पुरुष कैसे हुए। वो कौन सी शक्ति थी उनके अंदर. हम सरदार साहब का स्मारक बनाने के साथ साथ हिंदुस्तान के कोने कोने में फिर से एक बार एकता का मंत्र पहुंचाना चाहते हैं. हम इस बात से भली भांति परिचित हैं.कि भारत की प्रगति शांति एकता और सदभाव के बिना नहीं हो सकती. मां के दूध में कभी दरार नहीं हो सकती. प्रांतवाद के झगड़े, भाषावाद के झगड़े, जातिवाद और ऊंच नीच के झगड़े. इन चीजों ने हमारे देश को तबाह कर दिया. किसी दल के किसी राजनेता की झोली तो भर गई होगी, लेकिन मेरी भारत मां का गौरव क्षीण हुआ. अगर हमें वो गौरव फिर से हासिल करना है, तो एकता के मंत्र को घर घऱ तक पहुंचाना होगा. इस स्मारक के जरिए सरदार साहब के सपनों का स्मरण करते हुए, उनकी आवाज जिसे कई बरसों से दबोचा गया था. उसे बुलंद करके. कई लोगों ने सरदार साहब की आवाज पहली बार सुनी होगी. रोंगटे खड़े हो गएं. मन में फीलिंग आता है.

हमने सबसे पहले महात्मा मंदिर बनाया. ये मजे की बात है, जब हमने ये मंदिर बनाया. काम अभी भी चल रहा है. लेकिन उस समय हमें किसी ने चैलेंज किया, कि मोदी तुम तो बीजेपी वाले हो, गांधी बीजेपी में नहीं थे. तो क्यों बना रहे हो. मगर जब सरदार साहब की बात आई, तो परेशानी क्यों हो रही है. मित्रों आज गुजरात गर्व महसूस कर रहा है. पहले 31 अक्टूबर को जो सरकारी एड आते थे, उसमें सरदार साहब कहीं नहीं होते थे. आज ऐसा नहीं है. ये गुजरात इफेक्ट है. हमारे महापुरुषों को भुला कैसे दिया जा सकता है.हमारी भी किसी ने आलोचना की हो, तब भी उनके महान कामों की पूजा करना आगे वाली पीढ़ी का काम होता है. हमारी कोशिश है कि हिंदुस्तान की आने वाली पीढ़ी इतिहास को जिए और जाने ये हमारा प्रयास है.

कोई समाज अपने इतिहास को भूलकर के, अपने इतिहास के ग्रासरूट से अगर बिखर जाता है, तो जैसे मूल से उखड़ा हुआ पेड़ कितना भी बड़ा क्यों न हो. वैसे ही समाज की धारा सूख जाती है, इतिहास से उसको ताकत और प्रेरणा मिलती है. रास्ते खोजने को मिलते हैं. हमारे देश के लिए अगर समाज के मन में आवश्यकता है. तो हमारे समाज का इतिहास बोध होना चाहिए.

ये सरदार साहब की प्रतिमा के माध्यम से हम आने वाली पीढ़ी को वो नजराना देना चाहते हैं. भाइयों बहनों ये मूर्ति कैसे बनेगी. इसमें हम दुनिया भर के एक्सपर्ट लगाएंगे. छोटा काम नहीं है. कितनी धातुओं को मिलना होगा.

ये बता देता हूं कि मूर्ति ऐसी बनेगी, जो सदियों तक सलामत रहे. इस काम को हम हिंदुस्तान की एकता के लिए जोड़ना चाहते हैं. इसलिए तिजोरी से रुपये निकाल मूर्ति बन जाए. ये नहीं चाहते. जन जन को जोड़ना चाहते हैं. क्योंकि सरदार साहब ने एकता का काम किया था, वही सरदार साहब का संदेश बन जाए, इसलिए हर गांव को जोड़ना चाहते हैं. उनसे हम कुछ मांग रहे हैं. क्या मांग रहे हैं. कुछ लोगों ने गंदे शब्द प्रयोग किए। उनके दिमाग में गंदगी है.

किसान, उसके घर में तलवार तोप भी है, तब भी वह सबसे ज्यादा किसी को प्रेम करता है, तो खेती के औजार को करता है. उसके लिए वह सबसे ज्यादा मूल्यवान होता है. सरदार वल्लभ भाई पटेल किसान थे, लौह पुरुष थे. सरदार पटेल ने एकता का काम किया था. इसलिए हिंदुस्तान के हर कोने को जोड़ना है. वह किसान थे, इसलिए किसान को जोड़ना है. वह लौह पुरुष थे, इसलिए लोहे को मांगना है. हमने हर गांव पंचायत से प्रार्थना की है. कि किसान ने खेत के अंदर जिस औजार का प्रयोग किया है. वो औजार जो भारत मां की गोद में खेला है. जिसने गरीब के पेट को भरने के लिए भारत मां के साथ कष्ट झेला है. मुझे तोप नहीं चाहिए. मुझे तलवार चाहिए. मुझे तो मेरे किसान ने खेत में जो औजार इस्तेमाल किया है, उसका टुकड़ा चाहिए. उसे पिघलाएंगे. अच्छे से अच्छा स्टील निकालेंगे. उस लोहे का अर्क उस मूर्ति में जगह पाएगा, तब हिंदुस्तान का हर नागरिक कहेगा, मेरा गांव भी इसमें है.

हम गांव के मुखिया के तस्वीर लेंगे, गांव का छोटा सा इतिहास लेंगे. पूरा स्मारक बनेगा, उसमें एक वर्चुअल वर्ल्ड होगा, जिसमें हिंदुस्तान के सात लाख गांवों की तस्वीर होगी, कथा होगी, कोई पचास साल बाद आएगा, तो अपने गांव का इतिहास देखेगा.ये पवित्र काम हम करेंगे.

आज देश में ताज महल देखने के लिए यात्री आते हैं. अमेरिका में स्टेचू ऑफ लिबर्टी देखने के लिए यात्री जाएंगे. हम चाहते हैं ये पूरे विश्व के लिए महान केंद्र बने. हमारी ऊंचाई को देखे. इस देश की ऊंचाई को नापे. और जब ये पूरा स्मारक बनेगा. हम देशवासियों के लिए वह प्रेरणा का तीर्थ होगा. विश्व भर के लिए प्रवासन का धाम बन जाएगा. हर एक को अपने अपने लिए जो चाहिए वो मिलेगा.

इस स्मारक में भारत के भविष्य को हमने जोड़ा है. देश में आदिवासियों के कल्याण के लिए चाहे जिस सरकार ने जो काम किए हों. उन सबको हम संग्रहित करना चाहते हैं. मेरे आदिवासी भाई बहनों के जीवन में नया उमंग उत्साह कैसे आए, वे संपन्न कैसे बनें. अगुवा कैसे बनें. उसके रिसर्च का काम भी इसी स्मारक के तहत हो.
ये देश गांव का देश है. पटेल किसान पुत्र थे. किसान के कल्याण के लिए कौन से नए विज्ञान की जरूरत है, गांव आधुनिकता की तरफ कैसे बढ़े. किसान आधुनिकता के मार्ग को कैसे आगे बढ़ाए. ये उनको शिक्षा दीक्षा कैसे मिले, एग्रीकल्चर के लिए. गांव गरीब किसान के लिए. ये काम भी हम इससे जोड़ना चाहते हैं.

मित्रों दुनिया में इस काम को करने वाली श्रेष्ठ कंपनियों को बुलाया है. तीन साल पहले उस कल्पना को सामने रखा. उसे साकार करने के लिए एक्सपर्ट आए. तीन साल उसके पहलुओं की बारीकी में लगे. तब जाकर हम इसे आगे बढ़ा रहे है. जब हमने पहली बार कहा था इस काम का. मुझे कच्छ के लोगों ने चांदी से तौलकर भेंट दी थी. मैंने पूछा, भई अभी इतनी जल्दी क्यों दे रहे हो. अभी तो योजना बन रही है. तब कच्छ के लोगों ने जवाब दिया. मोदी जी, अगर सरदार साहब न होते, इस बांध का सपना न देखा होता, तो हमारे कच्छ में पानी न पहुंचता, हम उनके कर्जदार हैं. मुंबई गया. वहां चांदी से तौला, वह भी इसी में लगेगा.

हमें हिंदुस्तान के जन जन को जोड़ना है. शासन, जन देश की शक्ति, भारत सरकार की शक्ति सबको जोड़ना है. धरती भले गुजरात की हो, सपना हिंदुस्तान का है.

हम कई बरसों से कह रहे हैं कि सरदार सरोवर बांध का काम पूरा हो. मगर कुछ लोग हैं, जो बयान नहीं देते, पेट में रोटी नहीं जाते. कुछ मित्रों ने मोदी को समाप्त करने की सुपारी फैलाई है. पता नहीं क्या क्या गंध फैलाते रहते हैं.

मुझे पता कि पीएम की टीम हर शब्द सुनती है, उनके बॉस की टीम सुनती है. इसलिए मैं कहना चाहता हूं, सरदार सरोवर डैम में बस गेट लगाना बाकी है. बाकी काम हो चुका है. गेट के बाद ही सबसे ज्यादा पानी भरेगा. कई बार पीएम से मिला. कहा, तीन साल लगेंगे. बंद मत करने देना, खड़े तो करने तो, मिले पीएम तो बोले कि बात तो आपकी समझने की है. एक साल बाद मिला, तो बोले कि अरे अभी तक नहीं हुआ. फिर मिले तो फिर वही बात.

इतना ही नहीं एमपी वगैरह में पुनर्वास को देखने के लिए पूर्व जजों की अध्यक्षता में कमेटी हो. भले महाराष्ट्र में कांग्रेस की और बाकी दो में हमारी सरकार हो. इन तीनों राज्यों ने पुनर्वास का काम पूरा कर दिया. भारत सरकार की कमेटी ने स्वीकार कर लिया. मौखिक रूप से कहा, अखबारों में छपा. अब बस मीटिंग बुलाकर फाइनल ऑर्डर देना है. गेट बना लीजिए. पिछले आठ महीनों से रुका पड़ा है. मैं अफसरों से कहता हूं. पूछो क्या तकलीफ है.साहब आप समझते तो हैं. मैं खुला बोलूं. समझ गए न. मुझे नहीं बोलना.

इसीलिए काम रुका है. मैं आज फिर नर्मदा मैया के तट से पीएम को आग्रह करता हूं. महाराष्ट्र गुजरात को पानी चाहिए. मध्य प्रदेश को बिजली चाहिए. महाराष्ट्र का चार सौ करोड़ मिल जाएगा.

मैं यहां बड़ा शिलालेख लगाने को तैयार हूं. ये काम केंद्र सरकार ने किया. मोदी का नाम भी मत लो. कम से कम डैम का काम पूरा करने की इजाजत दो. ऐसे काम में राजनीति नहीं होनी चाहिए. भाइयों बहनों मैं आशा करता हं. इस नर्मदा के तट पर, गुजरात के पशुओं की, गरीबों की, किसानों की, पेड़ पौधों की आवाज देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचेगी. दल से बड़ा देश होता है, ये भाव उनके मन में जगेगा और भारत के लिए इतना बड़ा अच्छा काम, पूरा करें, गर्व करें, रिबन कटें. वो चाहें तो मैं आऊंगा नहीं. मैं आज कहता हूं आपका है. आप आनंद कीजिए, मगर पूरा कीजिए.

भाइयों बहनों, आज जब हम एकता का मंत्र लेकर चले हैं, तब देश को जोड़ना ये सपना लेकर चले हैं तब, सरदार पटेल के भव्य स्मारक का निर्माण करने जा रहे हैं तब, विश्व का सबसे ऊंचा स्टेचू ऑफ लिबर्टी से दो गुना बड़ा, उसका निर्माण करने जा रहे हैं तब, एकता का स्मारक है, एकता का संदेश है, भाषा अनेक, भाव एक, राज्य अनेक, राष्ट्र एक, पंथ अनेक, लक्ष्य एक. बोली अनेक, स्वर एक, रंग अनेक, तिरंगा एक, समाज अनेक, भारत एक, रिवाज अनेक, संस्कार एक, कार्य अनेक, संकल्प एक, राह अनेक, मंजिल एक, चेहरे अनेक, मुस्कान एक. ये एकता का संदेश हम लेकर चले और भाइयों बहनों. ये भारत की विशेषता है,विविधता में एकता.
हम अनेक संप्रदाय पंथ बोली भाषा होंगे, हम सब एक हैं.हमारी एकता की गारंटी ही. हमारे उज्जवल भविष्य की गारंटी है. इस स्मारक से सदियों तक एकता को बनाए रखने का काम इसी तीर्थ क्षेत्र से मिले.

मैं आदरणीय आडवाणी जी का बहुत आभारी हूं. सरदार साहब से उनका लगाव रहा है. इस महान काम में उनका आशीर्वाद मिले, इसके लिए आभारी हूं. देश से प्रार्थना है, हर गांव मिलकर जिम्मेदारी ले. 15 दिसंबर को उनके जम्मदिन के दिन रन फॉर यूनिटी है, देश के नौजवान दौड़ें. हर स्कूल कॉलेज में भाषण हों. निबंध प्रतियोगिता हों. पूरे देश में एकता का ही माहौल बने.

राष्ट्रयाम जाग्रयाम वयम. एकता के लिए निरंतर जागरण चाहिए. पुण्य स्मरण चाहिए. एकता के लिए एक होकर चलना चाहिए. सोचना चाहिए, इस मंत्र को पहुंचाने के लिए आज पवित्र काम का प्रारंभ हो रहा है.
दोनों हाथ ऊपर कर पूरी ताकत से बोलिए, सरदार पटेल अमर रहें.

Source : Aaj Tak

Posted by on Oct 31 2013. Filed under खबर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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