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क्या है सेकुलरिज़्म ?

मित्रो, आप सब शायद उस खबर से परचित होंगे जिसमे बिहार के मुख्यमंत्री नितीश जी ने ये कहा है की देश का राष्ट्र्यपति “सेकुलर” होना चाहिए |

इन दिनों न. भा . टा के ब्लॉग जगत में भी विजय सिंघल जी  अपने दो लेख सेकुलरिज्म पर लिख चुके हैं जिमें उन्होंने बताया है की किस तरह से सरकार सेकुलर शब्द का प्रयोग कर के बहुसंख्यक समाज के हितो की अनदेखी कर रही हैं |
पर क्या आप सचमुच में जानते हैं कि सेकुलरिज्म क्या है? आजकल गलतफहमी में सेकुलर मतलब केवल “हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई” समझ लिया जाता है और, ऐसा करके कुछ लोग गर्व की अनुभूति भी करते हैं …. जबकि हकीकत में लोगों को सेकुलरता का सही अर्थ तक मालूम नहीं है |दरअसल… सेकुलर शब्द लैटिन भाषा के “सेकुलो” (Seculo) शब्द से निकला है।जिसका अंग्रेजी में अर्थ है ‘इन दी वर्ल्ड (in the world) ..!कहानी कुछ यूँ है कि ‘कैथोलिक ईसाइयों’ में संन्यास लेने की परम्परा प्रचलित है।इसके अनुसार संन्यासी पुरुषों को मौंक(Monk) और महिलाओं को नन (Nun) कहा जाता है। परन्तु जो व्यक्ति संन्यास लिए बिना समाज में रहते हुए सन्यासियों के धार्मिक कामों में मदद करते थे, उन्हें “”सेकुलर””(Secular) कहा जाता था। और सेकुलरिज्म कि कहानी कुछ यूँ है कि 15 वीं सदी में पोप को असीमित अधिकार प्राप्त थे ,यहाँ तक कि उसे यूरोप के किसी भी राजा को हटाने तथा नए राजा को नियुक्त करने और किसी को भी धर्म से बहिष्कृत करने तक के अधिकार प्राप्त थे। यहाँ तक कि पोप की अनुमति के बिना कोई राजा शादी भी नहीं कर सकता था। एक बार  इंग्लैंड के राजा हेनरी 8 वें (1491-1547) ने 1533 में अपनी रानी कैथरीन (Catherine) को तलाक देने और एन्ने बोलेन्न (Anne Bollen) नामक विधवा से शादी करने के लिए पॉप क्लीमेंट 7th से अनुमति मांगी तो पॉप ने साफ़ मना कर दिया और हेनरी को धर्म से बहिष्कृत कर दिया। इस पर नाराज़ होकर हेनरी ने अपने राज्य इंग्लैंड को पोप की सता से अलग करके ‘चर्च ऑफ़ इंग्लैंड “की स्थापना कर दी|

इसके लिए उसने 1534 में इंग्लैंड की संसद में ‘एक्ट ऑफ़ सुप्रीमैसी (Act of suprimacy ) नामक कानून पारित किया …जिसका शीर्षक था “सेपरेशन ऑफ़ चर्च एंड स्टेट ( separation of church and state) ” जिसके अनुसार चर्च न तो राज्य के कामों में हस्तक्षेप कर सकता था और न ही राज्य चर्च के कामों में दखल दे सकता था। इस चर्च और राज्य के अलगाव के सिद्धांत को उसने “सेकुलरिज्म(Secularism)” का नाम दिया| बाद में जार्ज  जाकोब  हालियैक  ने १८५१ में इस शब्द प्रयोग  चर्च  की  नीतियों  से अपने मतभेद प्रकट करने के लिए किया |
आज भी अमेरिका में सेकुलरिज्म का यही अर्थ माना जाता है परन्तु  भारत में कुछ धूर्तों और सत्तालोलुप लोगों ने सेकुलर शब्द का अर्थ “धर्मनिरपेक्ष “कर दिया जिसका मूल अंग्रेजी शब्द से दूर का भी सम्बन्ध नहीं है |  यही नहीं इन लोगों ने सेकुलर शब्द का एक विलोम शब्द भी गढ़ लिया “साम्प्रदायवाद “।

आज यह इस “सेकुलर ” अर्थात “धर्म निरपेक्ष ” शब्द ने भारत में क्या रूप ले लिया है  शायद  ये बताने की आगे जरुरत नहीं क्यूँ आप भली भांति परचित होंगे |

लेखक : केशव

Source : http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/akroshit-mann/entry/%E0%A4%95-%E0%A4%AF-%E0%A4%B9-%E0%A4%B8-%E0%A4%95-%E0%A4%B2%E0%A4%B0-%E0%A4%9C-%E0%A4%AE

Short URL: http://jayhind.co.in/?p=1258

Posted by on Jun 20 2012. Filed under मेरी बात, सच. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

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