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वाजपेयी की तरह मोदी बख्‍शेंगे नहीं, गांधी परिवार को शायद यही डरा रहा है!

Narendra modhi vs sonia gandhi

‘पहले मेरी दादी को मारा, फिर मेरे पापा को मारा और अब मुझे भी मार डालेंगे!’ राहुल गांधी ने 23 अक्‍टूबर 2013 को राजस्‍थान में दिए अपने भाषण में जब इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्‍या का भय दिखाते हुए खुद के मारे जाने की बात कही तो कहा जाने लगा कि भ्रष्‍टाचार, घोटालों, महंगाई और अकुशल प्रशासन से जूझते अपने सरकार को फिर से सत्‍ता में लाने के लिए उन्‍होंने मतदाताओं को भावनात्‍मक रूप से लुभाने की कोशिश की है! काफी हद तक यह ठीक भी है! अगर गहराई में जाकर आप राहुल गांधी के पिछले कुछ भाषणों और क्रिया कलापों का अध्‍ययन करेंगे तो पाएंगे कि सचमुच वो डरे हुए हैं! यही नहीं, कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी सहित कांग्रेस के नेताओं, यूपीए सरकार के मंत्रियों और यहां तक कि देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिहं के ‘मोदी के खिलाफ सभी सेक्‍यूलर दल एक हो जाएं’ जैसे भाषण में भी डर की झलक साफ देखी जा सकती है! कई मीडिया घरानों व पत्रकारों की रिपोर्टिंग को देखकर भी इस डर का अंदाजा होता है! आखिर ‘मोदी फियर फैक्‍टर’ रूपी यह डर एक साथ गांधी परिवार से लेकर तमाम कांग्रेसियों, यूपीए सरकार के प्रधानमंत्री, मंत्रियों और 2जी व कोलगेट जैसे घोटालों में दलाली खाने वाले मीडिया हाउसों व पत्रकारों में क्‍यों दिख रहा है?

 

अटल बिहारी वाजपेयी की सैंद्धांतिक राजनीति ने गांधी परिवार को दिया कई जीवनदान…!!!

वाजपेयी सरकार में सोनिया गांधी की बहन को मिली राहत!

आइए फ्लैश बैक से इसकी शुरुआत करते हैं। आज से एक दशक पहले भाजपा नेतृत्‍व में एनडीए की सरकार चल रही थी। प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के मंत्रीमंडल में वसुंधरा राजे सिंधिया विदेश राज्‍य मंत्री थी। उस वक्‍त देश से बड़े पैमाने पर नायाब मूर्तियों को तस्‍करी के जरिए विदेशों में भेजा जा रहा था। तब के जनता पार्टी के अध्‍यक्ष डॉ सुब्रहमण्‍यम स्‍वामी द्वारा इस ओर ध्‍यान आकृष्‍ट करने पर विदेश राज्‍यमंत्री वसुंधरा राजे ने इसमें सीबीआई जांच का निर्देश दिया। केस सीबीआई के पास पहुंचा ही था कि तब के राज्‍यसभा में विपक्ष के नेता मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को एक फोन कॉल किया और वाजपेयी जी ने तत्‍काल इस जांच को रोकने का निर्देश दे दिया।

वसुंधरा राजे ने इसका विरोध भी किया, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी जैसे कद्दावर प्रधानमंत्री के निर्देश को भला वो कहां तक चुनौती दे सकती थीं? जांच तत्‍काल प्रभाव से रोक दिया गया। आप सोचेंगे कि इस जांच में ऐसा क्‍या था कि उसे रोकना पड़ गया? दरअसल नायाब मूर्तियों की इस तस्‍करी की प्रारंभिक जांच में कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी की बहन का नाम सामने आ रहा था। सोनिया गांधी की बहन का इटली के मिलान शहर में ‘इटनिका’ एवं दूसरी सोनिया के मायके वाले शहर अपलासानो में ‘गणपति’ नामक दो नायाब मूर्तियों की दुकान है, जहां भारत के मंदिरों से तस्‍करी होकर मूर्तियां पहुंच रही थी। सोनिया गांधी की ओर से उनके दूत मनमोहन सिंह के अनुरोध को मानते हुए अटल बिहारी वाजपेयी ने इस जांच को रोक दिया।

वाजपेयी सरकार में राहुल गांधी की गिरफ्तारी टली!

अब दूसरी घटना पर आते हैं। दूसरी घटना वोस्‍टन एयरपोर्ट से जुड़ा है। 26 सितंबर 2001 में अमेरिका के वोस्‍टन एयरपोर्ट पर 1 लाख 60 हजार अमेरिकी डॉलर के साथ राहुल गांधी को अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई ने गिरफ्तार किया था। इस पैसे के स्रोत की सही जानकारी राहुल गांधी नहीं दे पाए थे, जिसकी वजह से उन्‍हें गिरफ्तार किया गया। एक बार फिर से सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह के जरिए अटल बिहारी वाजपेयी तक इसकी सूचना पहुंचाई और प्रधानमंत्री वाजपेयी ने इसे सैद्धांतिक राजनीति का तकाजा मानते हुए राहुल गांधी को वहां से छुड़वा लिया। अमेरिकी कानून के मुताबिक 10 हजार डॉलर कैश के गिरफ्तार होने वोले व्‍यक्ति को आठ साल तक की सजा का प्रावधान है।

वाजपेयी ने क्‍वात्रोच्चि को भी बचाया!

तीसरी घटना भी अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल से ही जुड़ी है। डॉ सुब्रहमनियन स्‍वामी के अनुसार, मलेशिया ने बोफोर्स घोटाले के मुख्‍य आरोपी एवं सोनिया गांधी के बेहद नजदीकी महरूम क्‍वात्रोच्चि को गिरफ्तार किया था और उसके भारत में प्रत्‍यर्पण के लिए उसने भारत सरकार से संपर्क भी किया था, लेकिन सोनिया सोनिया गांधी द्वारा भेजे गए आग्रह संदेश के कारण वाजपेयी जी ने क्‍वात्रोच्चि को प्रत्‍यर्पण कर भारत लाने से ही मना कर दिया!

सोनिया गांधी के खिलाफ जांच से पहले ही वाजपेयी ने वकील बदल दिया!

चौथी घटना सोनिया गांधी की शैक्षणिक योग्‍यता और फिर से वाजपेयी सरकार से जुड़ी है। सोनिया गांधी की शैक्षणिक योग्‍यता पर जब डॉ सुब्रहमनियन स्‍वामी ने दिल्‍ली हाईकोर्ट में मुकदमा दायर किया तो हाईकोर्ट ने सीबीआई को इसकी जांच करने को कहा। सीबीआई की एक टीम इटली और रूस गई, लेकिन वहां की सरकार ने कहा कि हम सभी दस्‍तावेज दे सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको भारत के अदालत में एफआईआर दर्ज कराना होगा। उस समय सीबीआई के वकील राजू रामचंद्रन थे।

राजू रामचंद्रन अदालत में प्राथमिकी दर्ज कराने की याचिका देने ही वाले थे कि उन्‍हें बदल कर एक कांग्रेसी वकील मल्‍होत्रा को उनकी जगह लगा दिया गया। मल्‍होत्रा ने सीबीआई की ओर से सोनिया गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की अपील ही कोर्ट में नहीं की। उस वक्‍त कानून मंत्री अरुण जेटली थे। डॉ सुब्रहमनियन स्‍वामी के शब्‍दों में, जब मैंने अरुण जेटली से इस बारे में पूछा तो उन्‍होंने कहा कि मैं क्‍या कर सकता हूं? राजू रामचंद्रन को बदलने का निर्देश प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने दिया था।

लालकृष्‍ण आडवाणी भी सोनिया से हाथ जोड़ कर माफी मांग चुके हैं!

पांचवी घटना कालेधन से जुड़ी हुई है। मशहूर वकील रामजेठमलानी ने कालेधन पर सुप्रीम कोर्ट में एक चायिका डाली हुई है। उस याचिका में उन्‍होंने स्विस बैंक में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के एकाउंट होने की बात कही है। यही नहीं, पूरे गांधी परिवार को रूस की खुफिया एजेंसी केजीबी से धन मिलने की बात भी उन्‍होंने कही। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की ओर से तब के प्रधानमंत्री पद के दावेदार लालकृष्‍ण आडवाणी ने चुनाव जीतने पर विदेशी बैंकों में जमा कालेधन को लाने की बात कही थी। भाजपा ने कालेधन की जांच को लेकर अपनी ओर से एक आंतरिक समिति का भी गठन किया था, जिसने गांधी परिवार की ओर ऊंगली उठाई थी। बाद में लालकृष्‍ण आडवाणी ने अपनी आंतरिक समिति द्वारा नाम लेने की वजह से हाथ जोड़कर सोनिया गांधी से माफी मांग ली थी।

रॉबर्ट वाड्रा को भी भाजपा के ड्राइंग रूम नेताओं ने बचाया!

छठी घटना की चर्चा भी कर लेते हैं, उसके बाद मूल मुद्दे पर लौटेंगे कि आखिर गांधी परिवार इतना डरा हुआ क्‍यों है? सोनिया गांधी के दामाद और प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा-डीएलफ डील की जिस खबर को मीडिया के सामने परोस कर ‘आप’ पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने सुर्खियां बटोरी थी, उससे करीब 18 महीने पहले भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने वर्ष 2011 में इस मामले में लोकसभा में चर्चा कराने के लिए आवेदन दिया था।

राज्‍यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली भी इस पर चर्चा चाहते थे। लेकिन निशिकांत दुबे के आवेदन पर लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्‍वराज, लालकृष्‍ण आडवाणी, वेंकैया नायडू व भाजपा के वर्तमान अध्‍यक्षा राजनाथ सिंह को आपत्ति थी। इस पर पार्टी के अंदर दो बार बैठक हुई और उसके बाद इन  ‘ड्राइंग रूम नेताओं’ ने निशिकांत दुबे को आवेदन वापस लेने को कहा। इन सभी का मानना था कि सोनिया गांधी के परिवार पर निजी हमला नहीं किया जाना चाहिए।

भ्रष्‍टाचार के खिलाफ ‘नो टॉलरेंस’ नीति पर चलने वाले नरेंद्र मोदी हैं गांधी परिवार के डर की असली वजह! 

अब वर्तमान हालात पर आते हैं। वर्तमान में भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के दावेदार गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी को बनाया गया है। मोदी पिछले 12 साल से जिस तरह के कांग्रेस, एनजीओ व मीडिया के हमले से लगातार जूझते हुए मजबूत हुए हैं और वह व्‍यावहारिक राजनीति करते हुए ‘जैसे को तैसा’ के अंदाज में आगे बढ़ रहे हैं। उनकी यही कार्यशैली गांधी परिवार, कांग्रेस पार्टी, यूपीए सरकार और भ्रष्‍टाचार में घिरे कुछ मीडिया हाउसों को डरा रहा है! सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच में यह सामने आ चुका है कि टाइम्‍स ऑफ इंडिया जैसे अखबार समूह ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ रची गई साजिश में एक पक्षकार के रूप में हिस्‍सा लिया! ‘जैसे को तैसा’ नीति पर चलते हुए एक खबर पर तो नरेंद्र मोदी सरकार ने टाइम्‍स ऑफ इंडिया के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा तक दर्ज करा दिया ! वर्तमान में मोदी के अलावा शायद ही किसी राजनेता में ऐसा दुस्‍साहस है कि वह देश के लीडिंग मीडिया हाउस को अदालत में घसीटे!

जिसे ‘मौत का सौदागर’ कहा था, उसका भय तो सताएगा ही!

कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने घृणित राजनीति की पराकाष्‍ठा को पार करते हुए कभी नरेंद्र मोदी को ‘मौत का सौदागर’ कहा था। सोनिया गांधी का वही ‘मौत का सौदागर’ गांधी परिवार के सपने में अगले प्रधानमंत्री के रूप में बार-बार आकर डरा रहा है! प्रधानमंत्री का उम्‍मीदवार बनने के बाद नरेंद्र मोदी जिस तरह से गांधी परिवार पर लगातार हमले कर रहे हैं, वह जनता को भा रहा है, लेकिन गांधी परिवार को डरा रहा है। नरेंद्र मोदी आम जनता के समर्थन से अपनी ही पार्टी के ड्राइंग रूम नेताओं को दरकिनार कर आगे बढ़े हैं। इससे उनकी एक मजबूत छवि बनी है। जबकि दूसरी ओर नौ साल से सत्‍ता सुख भोगते हुए भी कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी की छवि आम जनता में एक जिम्‍मेवारी से मुक्‍त भ्रमित युवा नेता की बनी हुई है!

12 लाख करोड़ के घोटाले का दाग है, तो डर लगेगा ही!

इतना ही नहीं, सोनिया-राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी के नेतृत्‍व में चल रही यूपीए सरकार के नौ साल के शासन में 2जी, कोलगेट, कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स, इसरो-देवास, हेलीकॉप्‍टर, रक्षा सौदा ,रेलवे, आदर्श घोटाला आदि सहित करीब-करीब 12 लाख करोड़ रुपए का घोटाला सामने आ चुका है! इसमें 48 लाख करोड़ का थोरियम घोटले का पर्दाफाश होना अभी बांकी है। नरेंद्र मोदी घोटाले, घपले ओर भ्रष्‍टाचार के लिए सीधे प्रधानमंत्री और गांधी परिवार पर हमला कर रहे हैं। वह दर्शा रहे हैं कि यदि अगले प्रधानमंत्री वो बन गए तो भ्रष्‍टाचार व भ्रष्‍टाचारियों के प्रति कोई नरमी नहीं बरतेंगे! गुजरात के उनके 12 साल का शासन इसका उदाहरण है।

मोदी वाजपेयी की तरह बख्‍शेंगे नहीं, यह डर क्‍या कम है?

गांधी परिवार के डर की वजह शायद यही है। उत्‍तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक जिस तरह नरेंद्र मोदी की सभाओ में भीड़ उमड़ रही है, वह समूची कांग्रेस पार्टी व यूपीए सरकार को डरा रहा है। गांधी परिवार को लग रहा है कि यदि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए तो वह अटल बिहारी वाजपेयी की तरह सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्‍यावहारिक राजनीति करेंगे! भ्रष्‍टाचार और घोटालों पर उनके कार्यकाल में कार्रवाई होगा ही और यह गांधी परिवार को अंदर तक सिहरा रहा है!

यही कारण है कि राहुल गांधी आम जनता से भावनात्‍मक अपील कर रहे हैं ताकि जनता उनके दादी-पापा की हत्‍या की अतीत में बह कर एक बार फिर से अपने भविष्‍य को कांग्रेस के हाथ में सौंप दे। उन्‍हें डर है कि यदि सत्‍ता नरेंद्र मोदी के हाथ में चली गई तो फिर या तो भारत की जेल यात्रा या फिर इटली की यात्रा करनी पड़ सकती है, क्‍योंकि भ्रष्‍टाचार के प्रति ‘नो टॉलरेंस’ नीति पर चलने वाले नरेंद्र मोदी के शासन में यूपीए सरकार के भ्रष्‍टाचार की परतें खुलेंगी ही और इसकी आग गांधी परिवार को झुलसाएगी ही, जो बिना किसी जवाबदेही के पिछले 9 साल से सत्‍ता सुख भोग रहा है! तो तैयार रहिए आगे राहुल गांधी आप मतदाताओं के साथ और भी इमोशनल अत्‍याचार करेंगे और पूरी कांग्रेस पार्टी, पेड मीडिया व पत्रकार और जोर-जोर से नरेंद्र मोदी को सांप्रदायिक और समाज को बांटने वाला बताएंगे…!!

लेखक : संदीप देव

Posted by on Oct 26 2013. Filed under सच. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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