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राजस्थान में महिलाओं ने बढ़ाई भाजपा की सीटें

Women Candidate helps BJP in Rajasthan

Women Candidate helps BJP in Rajasthan

 

राजस्थान विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को करारी शिकस्त देने में महिलाओं की बड़ी भूमिका रही। भाजपा के 162 विजयी उम्मीदवारों में से 22 महिलाएं है। जबकि उसने केवल 26 महिलाओं को टिकट दिया था। जबकि कांग्रेस की केवल एक महिला जीत पाई। उसने 23 महिलाओं को टिकट दिया था। 

वहीं पहली बार चुनाव लड़ने वाली जमींदारा पार्टी की दोनों विधायक महिलाएं है। जमींदारा पार्टी की कामिनी जिंदल ने गंगानगर सीट से दिग्गज नेता राधेश्याम गंगानगर को पटखनी दी। वहीं सोना बावरी ने रायसिंहनगर से बाजी मारी। चुनावों से पहले जनता को तीसरा विकल्प देने का दावा करने वाले डॉ. किरोड़ी लाल की राजपा केवल चार सीटों पर सिमट गई।

इन चार में से भी दो सीटेें महिलाओं ने जिताई। किरोड़ी की पत्नी गोलमा देवी ने दो जगह महुवा और राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ से चुनाव लड़ा। उन्हें महुवा से हार मिली लेकिन राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ सीट फतेह कर ली। वहीं दौसा जिले की सिकराय सीट से गीता वर्मा ने कांग्रेस की दिग्गज महिला नेता ममता भूपेश को धूल चटाई।

जयपुर में एक महिला विधायक वो भी निर्दलीय
निर्दलीय के रूप में बस्सी सीट से मैदान में उतरी अंजू धानका एक बार मतदाताओं का विश्वास जीतने में सफल रही। अंजू पिछले विधानसभा चुनावों में विजयी रही थी। इसमें रोचक बात ये है कि जयपुर जिले से जीतने वाली वे एकमात्र विधायक है। कांग्रेस ने यहां से दो महिलाओं अर्चना शर्मा और रेखा कटारिया को टिकट दिया था, लेकिन वे हार गई। जयपुर जिले में भाजपा ने किसी महिला को टिकट नहीं दिया था।

भाजपा: पुरानों का जलवा, नयों का भी कमाल
रिकॉर्ड सीटें जीतने वाली भाजपा के लिए महिलाओं ने गजब का योगदान दिया। भाजपा के लिए पुरानी महिला नेताओं के साथ ही चुनावी समर में पहली बार उतरने वाली महिलाओं ने भी कमला दिखाया। इनमें झालरापाटन से प्रदेशाध्यक्ष वसुंधरा राजे, सूरसागर से सूर्यकांता व्यास, अजमेर दक्षिण से अनिता भदेल और राजसमंद से किरण माहेश्वरी ने जलवा बनाए रखा। वहीं पहली बार मैदान में उतरने वाली शिमला बावरी अनूपगढ़ से, सुशील कंवर पलाड़ा मसूदा से, अलका गुर्जर बांदीकुई से और रानी कोली बसेड़ी से भाजपा के टिकट पर विजयी रही।

पहली बार मैदान में उतरकर चौंकाने वाला परिणाम जयपुर के पूर्व राजघराने की राजकुमारी दिया कुमारी ने दिया। दिया कुमारी ने सवाई माधोपुर सीट से राजपा नेता डॉ.किरोड़ीलाल मीणा को शिकस्त दी। नेताओं की रिश्तेदार महिलाएं तो भाजपा में भी जीत दर्ज नहीं कर पाई। चूरू सांसद रामसिंह कस्वां की पत्नी कमला कस्वां सादुलपुर से, बाड़मेर से विधायक रह चुके गंगाराम चौधरी की पोती प्रियंका चौधरी चुनाव हार गई।

कांग्रेस की केवल एक महिला विधायक
विधानसभा चुनावों में भाजपा की लहर में 21 सीटों पर सिमटने वाली कांग्रेस की केवल एक महिला प्रत्याशी जीत दर्ज कर पाई। कांग्रेस की शकुंतला रावत ने बानसूर सीट से दो बार चुनाव जीत चुके भाजपा के रोहिताश्व शर्मा को हराया। कांग्रेस ने 23 महिलाओं को चुनावी समय में उतारा था। हारने वाली महिलाओं प्रत्याशियों में पर्यटन मंत्री बीना काक, शिक्षा राज्य मंत्री नसीम अख्तर इंसाफ, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा, ओलम्पियन और डिस्कस थ्रोअर कृष्णा पूनियां भी शामिल है।

कांग्रेस ने नेताओं के रिश्तेदार महिलाओं को टिकट दिए लेकिन वे भी नहीं जीत पाई। भंवरी मामले में जेल में बंद महिपाल मदेरणा की पत्नी लीला मदेरणा, मलखान सिंह की मां अमरी देवी भी अपनी परंपरागत सीटों क्रमश: ओसियां और लूणी से हार गई।

वहीं उदयपुर सांसद रघुवीर मीणा की पत्नी बसंती देवी सलूम्बर से, किशनंगज से पूर्व विधायक निर्मला सहरिया की मां चतरीबाई, सांसद लालचन्द कटारिया की भाभी डॉ.रेखा कटारिया भी जनता का विश्वास नहीं जीत पाई। इसके अलावा तीन बार जीत चुकी जकिया भी इस बार अपना गढ़ टोंक ढहने से नहीं बचा पाई। 2008 में कांग्रेस ने 23 महिलाओं को टिकट बांटा था, जिनमें से 14 विजयी रही थी।

News by patrika.com

Posted by on Dec 9 2013. Filed under आधी आबादी, खबर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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