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यासीन की गिरफ्तारी के मायने

Yasin Bhatkal, founder of Indian Mujahideen, arrested from Indo-Nepal border

Yasin Bhatkal, founder of Indian Mujahideen, arrested from Indo-Nepal border

यासीन ने पाकिस्तान के अलावा नेपाल और  कुछ अन्य मुल्कों को ठिकाना बना रखा था।  उससे पूछताछ के जरिये इंडियन मुजाहिदीन  की तह तक जाने की कोशिश होगी। पता किया जाएगा कि यह आतंकी गुट अन्य कौन से पृथकतावादी संगठनों की मदद कर रहा है।

कर्नाटक के उत्तरी कन्नड़ जिले के भटकल गांव में वर्ष २००५ में आतंकी प्रशिक्षण और वारदात को अंजाम देने की मुहिम में जुटा था भटकल मॉड्यूल। तब आमिर रजा खान की कमांडो फोर्स को मजबूती देने का काम करने वाली लश्कर-ए-तैयबा की स्थानीय स्लीपर सेल ने यासीन और रियाज भटकल की मदद से इंडियन मुजाहिदीन नामक आतंकवादी संगठन बनाया, लेकिन उसने अपना वजूद जाहिर नहीं किया और चुपचाप अपने नापाक कामों को अंजाम देता रहा।

२००६ के अहमदाबाद धमाके के बाद पहली बार इस संगठन ने धमाकों की जिम्मेदारी ली और तब से भारत विरोधी गतिविधियों में इंडियन मुजाहिदीन के शामिल होने के बार-बार सबूत मिले हैं। भटकल गांव में १९८३ में पैदा हुआ यासीन भटकल पहले इंडियन मुजाहिदीन का प्लांटर था और बाद में वह ऑपरेटर बन गया।
केंद्र सरकार ने इंडियन मुजाहिदीन की करतूतों और उसके खिलाफ कई कड़े कदम उठाएं।इसमें सबसे महत्वपूर्ण कदम था २००८ में नेशनल इंटलीजेंस एजेंसी (एनआईए) की स्थापना। गठन होते ही एजेंसी ने खासतौर पर लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और इंडियन मुजाहिदीन के मामलों पर ध्यान केंद्रित किया। फिर ऐसे सुराग मिले कि कई मामलों में इन तीनों गुटों की सांठगांठ थी। इसकी तह तक जाने के लिए ‘मैकÓ और ‘स्मैकÓ की स्थापना सरकार ने की और  इन एजेंसियों ने देश भर में  इन गुटों के खिलाफ जांच शुरू की।
इंटेलीजेंस ब्यूरो और दूसरी एजेंसियों को ह्यूमन इंटेलीजेंस पर जोर देन के निर्देश दिए गए। इसका फायदा यह हुआ कि सरकार को ‘रीयल टाइमÓ में कई अहम सुराग मिले। कई सुराग पड़ोसी मुल्कों की ओर से भी दिए गए। आतंकी गुटों की मुश्के कसने के लिए यूएबीए कानून को २००८ में संशोधित किया गया और चूंकि इन आतंकी संगठनों के जाली नोटों के कारोबार से भी जुडऩे के सुराग मिले थे इसलिए २०१२ मेें जाली नोटों के खिलाफ एक सख्त कानून बनाया गया।
इसी दिशा में 36 आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाया गया है।

कई गुट ऐसे हैं जिनको बाहर से मदद मिल रही है और इसके पर्याप्त सबूत हमारे पास हैं। इसमें इंडियन मुजाहिदीन और लश्कर जैसे संगठन तो शामिल हैं ही। जनवरी 3013 के बाद से ही यासीन भटकल पर नकेल कसने के लिए सुरक्षा एजेंसियों और गृह मंत्रालय ने कदम उठाने शुरू कर दिए थे। भटकल अपने मूल शहर दरभंगा में छिपता था। इसके अलावा भी कुछ ऐसी जगहों के जिनके सुराग एजेंसियों को मिले थे जहां उसके होने की संभावना थी। इन सब स्थानों पर कड़ी नजर रखी जाने लगी जो रंग लाई।
गौरतलब है कि यासीन भटकल मोस्ट वांटेड 10 आतंकियों की सूची में शामिल था। २००५ के अक्टूबर में दिल्ली ब्लास्ट,  २००८ के  मुंबई के झवेरी बाजार ब्लास्ट, २०१२ के हाईकोर्ट ब्लास्ट और २०१३ के हैदराबाद ब्लास्ट में सीधे तौर पर भटकल शामिल रहा है। अब इस गिरफ्तारी से इस जानकारी की पुष्टि होगी और कई नए तथ्यों का पता लगने के साथ इन वारदातों की जांच तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचेगी।

चूंकि यासीन इंडियन मुजाहिदीन के संस्थापकों में से एक है, इसकी गिरफ्तारी से यह पता चलेगा कि इंडियन मुजाहिदीन की मदद कौन कर रहा है। इस गुट को कितने विदेशी और पड़ोसी संगठनों का समर्थन मिल रहा है। नांदेड़, दरभंगा और केरल जैसे मॉडयूल और स्लीपर सेल भारत में कहां और कैसे काम कर रहे हैं और किस तरह का नेटवर्क देश में आईएम ने स्थापित किया है। यह सब जानकारी मिलने की उम्मीद बंधी है।
जांच एजेंसियों के पास कई तरह के सुराग और सबूत हैं जिसको भटकल के बयान से मिलाया जाएगा और उससे इन सुरागों पर पूछताछ की जाएगी। हमें यह भी जानना है कि लश्कर समर्थक अब्दुल करीम टुंडा की गिरफ्तारी और उससे पूछताछ के बाद यासीन भटकल की गिरफ्तारी के रूप में बड़ी सफलता में लश्कर और इंडियन मुजाहिदीन  की कोई साजिश तो नहीं है।
इंडियन मुजाहिदीन देशभर में बम धमाके करने की साजिश में लगा था। इसके सुराग तो मिले थे, लेकिन अब उन ठिकानों का पता लगने के साथ इसके लिए आर्थिक मदद कैसे जुटाई गई यह भी उजागर होगा।
एक बात और है।  इंडियन मुजाहिदीन जाली नोटों के कारोबार में लिप्त रहा है। पहली बार जब वह कोलकाता में पकड़ा गया था तो उस पर जाली नोटों के कारोबार का आरोप भी था। सरकार इस बात पर भी ध्यान दे रही है, कि यासीन के बाद रियाज इंडियन मुजाहिदीन का एक और संस्थापक सरगना और यासीन के भाई रियाज भटकल पर नकेल कसी जाए। आईएम साइकल बम और टिफिन बम जैसे धमाकों को अंजाम देने में महारत हासिल कर चुका है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि इसका देश में कहां-कहां नेटवर्क है। साथ ही, पड़ोसी मुल्क में इसकी पैठ कितनी है। वाराणसी में हुए धमाके का मास्टरमाइंड भी भटकल ही है, जर्मन बेकरी में इसने ही बम प्लांट किया था और अमेरिकन सेंटर पर धमाके में भी इसका हाथ था।
दिल्ली में २००८ की बाटला हाउस मुठभेड़ के वक्त यासीन यहां मौजूद था और उसके बाद यहां से फरार हो गया। पाकिस्तान के अलावा नेपाल और कुछ और मुल्कों को इसने अपना ठिकाना बनाया था। पाकिस्तान में आईएम का सरगना रियाज और इकबाल भटकल कई भगोड़े आतंकियों के साथ जगह बदलकर रह रहा है और इसकी पुष्टि अब यासीन से पूछताछ में की जाएगी। इंडियन मुजाहिदीन कौन से पृथकतावादियों की मदद कर रहा है, इस बात की भी तह तक जाना है।
जांच एजेंसियों के पास इससे जुड़े कुछ तथ्य हैं जिनकी पुष्टि यासीन से पूछताछ के बाद होगी। पाकिस्तान में जो भी आतंकी हैं, खासतौर से अंडरवल्र्ड सरगना दाऊद इब्राहिम, उनके विषय में गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने इंटरपोल से बातचीत की है। हमारा प्रयास है कि आईएम की तह तक पहुंचा जाए और दाऊद, हाफिज समेत अन्य आतंकियों को भी गिरफ्त में जल्द लिया जाए। हमने इंडियन मुजाहिदीन के नेटवर्क में सेंध लगाने के लिए इसके सरगनाओं के घर हो रहे पत्राचार और दूरभाष पर कड़ी नजर रखी थी। जाहिर है ह्यूमन इंटेलीजेंस के जरिये ही जांच एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है।
(जैसा उन्होंने दैनिक भास्कर के अमित मिश्रा को बताया)
आरपीएन सिंह
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री

Short URL: http://jayhind.co.in/?p=2793

Posted by on Aug 31 2013. Filed under खबर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can skip to the end and leave a response. Pinging is currently not allowed.

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